अध्ययन कक्ष हेतु वास्तु

बच्चे के विकास के लिए अध्ययन कक्ष के लिए वास्तु टिप्स/ Study room vastu tips for child's development

बहुत सारे माता पिता के कुछ सामान्य समस्याएं होती है जैसे उनके बच्चे को पढ़ने में समस्या आ रही हो या फिर परीक्षा सदन में वह सब कुछ भूल जाते हैं। कुछ बच्चों का पढ़ाई में रूची खत्म हो गई है। कुछ लोगों का कहना है उनके बच्चे मेहनत तो पूरी करते हैं लेकिन फिर भी अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर पाते हैं। यह कुछ सवाल है जो बहुत लोगों के मन में आ सकते हैं। ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल हमेशा रहता है और वह इसका हल ढूंढने का निरंतर प्रयास करते रहते हैं। यहीं पर अध्ययन कक्ष के लिए वास्तु/ Study room Vastu की महत्वता को समझने की आवश्यकता पड़ती है।

यहां से देखें कि आपका अध्ययन कक्ष सही है या नहीं

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अध्ययन कक्ष के लिए वास्तु/Study room Vastu

बहुत सारे लोग फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया साइट को अपने बच्चे के खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं और कुछ लोगों का मानना है कि उनके बच्चे के साथी या उनके पढ़ाने वाले व्यक्ति की गलती हो सकती है। लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात का ज्ञात होता है कि उनके बच्चे के खराब प्रदर्शन के पीछे घर के उनके अध्ययन कक्ष का वातावरण या वास्तु हो सकता है।

अध्ययन कक्ष के लिए वास्तु/Study room Vastu

बहुत सारे लोग फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया साइट को अपने बच्चे के खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं और कुछ लोगों का मानना है कि उनके बच्चे के साथी या उनके पढ़ाने वाले व्यक्ति की गलती हो सकती है। लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात का ज्ञात होता है कि उनके बच्चे के खराब प्रदर्शन के पीछे घर के उनके अध्ययन कक्ष का वातावरण या वास्तु हो सकता है।

इस बात को समझा जा सकता है कि बहुत सारे लोग अपने बच्चे के अध्ययन कक्ष की बनावट को ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन उनको इसकी बनावट को समझना चाहिए।

मेरे विचार से ज्यादातर मामलों में बच्चों की खराब प्रदर्शन का कारण अध्ययन कक्ष का गलत वास्तु हो सकता है।

साथ ही, आगे बढ़ने के लिए दूसरों से चतुर बनाने की आवश्यकता ने छात्रों और अभिभावकों दोनों को पहले से कहीं अधिक चिंतित और परेशान कर दिया है।

यदि अध्ययन कक्ष का निर्माण वास्तु के अनुसार हो तो बच्चों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में सहायता करता है और उन्हें पढ़े हुए चीजों को याद करने में सहायता करता है।

अध्ययन कक्ष के वास्तु की महत्वता/ Importance of study room Vastu

अध्ययन कक्ष का वास्तु की आवश्यकता क्यों पड़ती है? इसका जवाब बेहद सरल है। अध्ययन कक्ष का सीधा संबंध आपके बच्चे की सफलता पर निर्भर करता है। अध्ययन कक्ष का वास्तु एक पवित्र विज्ञान है जो बच्चे की शिक्षा और उनके भविष्य को पवित्र और सफल करने में मदद करता है। यदि  आप वास्तु का प्रयोग करते हैं तो यह आपको अध्ययन कक्ष के लिए सर्वोत्तम स्थान और निर्देश के जरिए सहायता करता है।

अध्ययन कक्ष के वास्तु की महत्वता/ Importance of study room Vastu

अध्ययन कक्ष का वास्तु की आवश्यकता क्यों पड़ती है? इसका जवाब बेहद सरल है। अध्ययन कक्ष का सीधा संबंध आपके बच्चे की सफलता पर निर्भर करता है। अध्ययन कक्ष का वास्तु एक पवित्र विज्ञान है जो बच्चे की शिक्षा और उनके भविष्य को पवित्र और सफल करने में मदद करता है। यदि  आप वास्तु का प्रयोग करते हैं तो यह आपको अध्ययन कक्ष के लिए सर्वोत्तम स्थान और निर्देश के जरिए सहायता करता है।

आप सभी के बच्चे शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं यदि आप अपने अध्ययन कक्ष के वास्तु को ध्यान रख कर अपने घर का निर्माण करें। इस क्रिया के बाद आपके बच्चे हर तरह की परीक्षाओं में उत्तीर्ण हो सकते हैं।  

अध्ययन कक्ष – वास्तु के अनुसार सर्वोत्तम दिशा/ Study Room: Best Directions as per Vastu

पढाई में बहुत सारी एकग्रता और ध्यान की आवश्यकता होती है। इसलिए यह वही जगह होनी चाहिए जहां पर जातक खुले मस्तिष्क और अच्छे मन में पढाई कर सके। नीचे कुछ दिशा दिए गए हैं जो अध्ययन कक्ष के अच्छे वास्तु को दर्शाते हैं।

अध्ययन कक्ष – वास्तु के अनुसार सर्वोत्तम दिशा/ Study Room: Best Directions as per Vastu

पढाई में बहुत सारी एकग्रता और ध्यान की आवश्यकता होती है। इसलिए यह वही जगह होनी चाहिए जहां पर जातक खुले मस्तिष्क और अच्छे मन में पढाई कर सके। नीचे कुछ दिशा दिए गए हैं जो अध्ययन कक्ष के अच्छे वास्तु को दर्शाते हैं।

वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा में अध्ययन कक्ष/Study room in East as per Vastu

लगभग सभी गुरु पूर्व दिशा को अध्ययन के लिए सबसे उत्तम मानते हैं। इसके पीछे भी कारण है।

सूर्य पूर्व से उगता है और हम सबको पता है सूर्य सबसे उत्कृष्ट शिक्षक होता है। सूर्य सभी ग्रहों का मुखिया होता है और उसके पास अपार बौद्धिक कौशल और ज्ञान प्रदान करने की शक्ति होती है।

इसलिए बच्चों को पूर्व दिशा में बैठकर पढ़ना चाहिए क्योंकि यह आपके बच्चे के मानसिक क्षमता को बढ़ाता है। बच्चों का मन उसी तरह प्रकाशित हो सकता है जैसे सूर्य की किरणें पूरे ब्रह्मांड को रोशन करती हैं।

वास्तु के अनुसार दक्षिण पश्चिम के पश्चिम में अध्ययन कक्ष/ Study room in West of South West as per Vastu

WSW (दक्षिण-पश्चिम के पश्चिम) दिशा को ऊर्जा क्षेत्र के अध्ययन के लिए अत्यधिक अनुकूल माना जाता है। अधिकतर सभी प्राचीन वास्तु शास्त्र में इस स्थान पर अध्ययन कक्ष को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

वास्तु पुरुष मंडल के अनुसार, इस दिशा में दो शक्तिशाली ऊर्जा के क्षेत्र है जिसमें सुग्रीव और द्वारिक के नाम से जाना जाता है। यह दोनों जातक को अपार बुद्धिमत्ता प्रदान करते हैं।

द्वारिक को वैकल्पिक रूप से भगवान नंदी के रूप में संदर्भित किया जा सकता है जो भगवान शिव के वाहन है। इस बात को भी सभी जानते हैं कि नंदी 64 कलाओं के स्वामी थे। वह अगमास शास्त्र के स्वामी भी थे। इस ऊर्जा क्षेत्र के कारण उनके पास इस बात की क्षमता होती है कि जातक को क्या पढ़ना चाहिए और क्या नहीं। इसलिए इस ऊर्जा क्षेत्र में अध्ययन करने से जातक को कई सारी विषयों में सफलता प्राप्त हो सकती है।

सुग्रीव प्रतिधारण की शक्ति के लिए जाने जाते हैं। जो भी व्यक्ति इस ऊर्जा क्षेत्र में कुछ भी याद करता है तो जातक उस विषय को लंबे समय तक याद रख पाएगा।

वास्तु के अनुसार उत्तर-पूर्व में अध्ययन कक्ष/Study room in the North-East per Vastu

यह ईशान कोण के नाम से जाना जाता है। उत्तर पूर्व दिशा को घर का सबसे पवित्र कोना माना जाता है। यदि कोई इस दिशा में रह कर पढाई करता है तो यह आपके बच्चे के लिए आय के ऊर्जा के क्षेत्र को बढ़ावा देता है और यह उन्हें अध्ययन करने और अपने विषय को याद करने में सहायता करता है।

उत्तर-पूर्व दिशा पर पानी के तत्व का राज होता है जो दिमाग को शांत रखने में बहुत सहायता करता है। पढ़ाई के लिए यह एक पूर्व-आवश्यक कारक है।

भगवान शिव को उत्तर-पूर्व दिशा के देवता माना जाता है। यदि आप अपने बच्चे के लिए अध्ययन कक्ष को यहां बनवाते हैं, तो आपके बच्चे शांत और ज्ञानी बन सकते हैं। उनके ऊपर भगवान शिव का आशीर्वाद रहेगा।

वास्तु के अनुसार दक्षिण पश्चिम में अध्ययन कक्ष/ Study room in South West as per Vastu

यह एक आम धारणा है कि यदि आपको किसी एक क्षेत्र में महानता हासिल करनी है तो आप उससे संबंधित उपकरण को दक्षिण पश्चिम दिशा में रख सकते हैं।

दक्षिण पश्चिम दिशा को कौशल और स्थिरता की दिशा भी कहा जाता है। इसलिए इस दिशा में अध्ययन कक्ष का होना बच्चों के लिए एक अच्छा चुनाव साबित हो सकता है। यदि आपको बच्चे किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या विशेष ज्ञान प्राप्ति करने के इच्छुक हैं तो इस दिशा में अध्ययन कक्ष उनके लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

दक्षिण पश्चिम को पितृ स्थान या पूर्वजों का कोना भी कहा जाता है। दक्षिण पश्चिम में पढने से आपको आपके पूर्वज से आशीर्वाद भी प्राप्त हो सकता है जो उन्हें जीवन में सफलता प्रदान कर सकता है।

वास्तु के अनुसार दक्षिण-पूर्व दिशा में अध्ययन कक्ष/ Study room in the East of South-East as per Vastu

पूर्व और दक्षिण-पूर्व दिशा अध्ययन कक्ष बनाने के लिए सबसे अच्छा स्थान माना जाता है। खासकर यह दोनों स्थान उन बच्चों के लिए लाभकारी साबित होता है जो विद्यालय जाते हैं।

इस क्षेत्र की ऊर्जाएं मन को एक अच्छा आकार देने के लिए जिम्मेदार होते हैं। जब बच्चों का मन स्थायी रहता है तो उनका मन पढ़ाई में ज्यादा लगता है और वह अच्छी बातें सोचते हैं।

इस प्रकार, यहाँ अध्ययन करने से बच्चे ज्ञान के प्रति उत्सुक हो सकते हैं और इसलिए, नए विषयों की खोज कर सकते हैं।

हमारे पेज पर मौजूद निःशुल्क कैलकुलेटर का प्रयोग करके भी आप बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अध्ययन टेबल के लिए वास्तु/ Vastu for study table

वास्तु में अध्ययन टेबल को सही दिशा में रखने का बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण स्थान होता है।

अध्ययन टेबल के लिए वास्तु/ Vastu for study table

वास्तु में अध्ययन टेबल को सही दिशा में रखने का बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण स्थान होता है।

पुस्तक तख्ता और अध्ययन टेबल की दिशा आपके चुने हुए विषय पर निर्भर करता है। नीचे कुछ दिशा दिए है जो वास्तु शास्त्र के अनुसार अध्ययन टेबल के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है।

पश्चिम मुखी: गणित, विज्ञान या आईटी का अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए यह दिशा उत्तम होती है।

पूर्वमुखी: धार्मिक या रचनात्मक अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए यह दिशा उत्तम होती है।

दक्षिण मुखी: रक्षा सेवाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए, कानून की पढ़ाई आदि के लिए वाद-विवाद कौशल, तार्किक क्षमता और तेज व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए इस दिशा में पढ़ाई करनी चाहिए। बिक्री और विपणन क्षेत्रों में छात्रों के लिए भी यह दिशा उपयुक्त होती है।

उत्तर मुखी: सीएस, सीए, बैंकिंग और वित्त की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह दिशा उचित है।

उत्तर-पूर्व मुखी: यह दिशा उन छात्रों के लिए उत्तम होती है जो शोध करते हैं, पीएचडी. छात्रों के लिए, या ऐसे विषय को चुनते हैं जिसमें सटीकता और एकाग्रता की आवश्यकता होती है।

वास्तु के अनुसार गलत तरीके से बनाए गए अध्ययन कक्ष का प्रभाव/ Effects of wrongly placed study room as per Vastu

एक उपयुक्त अध्ययन कक्ष छात्रों के प्रदर्शन को सुधार सकती है और गलत तरीके से बना हुआ अध्ययन कक्ष उनकी पढ़ाई में बाधा डाल सकती है।

वास्तु के अनुसार गलत तरीके से बनाए गए अध्ययन कक्ष का प्रभाव/ Effects of wrongly placed study room as per Vastu

एक उपयुक्त अध्ययन कक्ष छात्रों के प्रदर्शन को सुधार सकती है और गलत तरीके से बना हुआ अध्ययन कक्ष उनकी पढ़ाई में बाधा डाल सकती है।

अध्ययन कक्ष के लिए सबसे खराब स्थान दक्षिण दक्षिण-पश्चिम दिशा होती है। दक्षिण और दक्षिण पश्चिम के बीच की दिशा अध्ययन कक्ष के होने से आपकी पढ़ाई में असफलता का कारण बन सकती है।

यदि आपको लगता है कि आपका बच्चा हर तरह के प्रयास डाल रहा है लेकिन फिर भी वह अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर पा रहा है तो हो सकता है कि आपके घर में अध्ययन कक्ष का वास्तु सही दिशा में ना हो।

यदि आपका बच्चा उदास और परेशान रहता है, तो हो सकता है कि वह उत्तर-पश्चिम दिशा के पश्चिम में पढ़ रहा हो। इस क्षेत्र की शक्ति आपके बच्चे को निष्क्रिय और आलसी बनाता है। इस दिशा में बैठने या पढ़ने से आपके सेहत पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।

इसलिए आपको अध्ययन कक्ष की दिशा का खास ख्याल रखना चाहिए क्योंकि यह आपके सफलता या विफलता में से किसी एक का कारक बन सकता है

वास्तु के अनुसार अध्ययन कक्ष का रंग/ Colors for Study room as per Vastu

अध्ययन कक्ष का रंग बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आपके बच्चे की पढने, याद करने और एकाग्रता की क्षमता उस रंग पर निर्भर करती है जो उसके आस पास होती है। आपको अध्ययन कक्ष का रंग और टेबल की स्थिति के आधार पर करनी चाहिए।

वास्तु के अनुसार अध्ययन कक्ष का रंग/ Colors for Study room as per Vastu

अध्ययन कक्ष का रंग बेहद ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आपके बच्चे की पढने, याद करने और एकाग्रता की क्षमता उस रंग पर निर्भर करती है जो उसके आस पास होती है। आपको अध्ययन कक्ष का रंग और टेबल की स्थिति के आधार पर करनी चाहिए।

आपको हमेशा याद रखना चाहिए कि आपको दीवार पर हल्का रंग का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि गाढ़ा रंग दिमाग को सुस्त कर सकता है और बच्चों को एक जगह ध्यान केंद्रित करने में सहायता भी प्राप्त हो सकती है।

पूर्व: हरा और भूरा

दक्षिण: लाल, गुलाबी, नारंगी

पश्चिम: सफेद, ग्रे, चांदी

उत्तर: हल्का नीला, गहरा नीला

वास्तु के अनुसार अध्ययन कक्ष में तस्वीरें/ Study room pictures according to Vastu

अध्ययन कक्ष में तस्वीरें भी इस उद्देश्य में एक अहम किरदार निभाते हैं। इसलिए जब भी आप अपने घर के अध्ययन कक्ष में कोई भी तस्वीर लगाने का सोचते हैं तो आपको वास्तु का भी ध्यान रखना चाहिए।

वास्तु के अनुसार अध्ययन कक्ष में तस्वीरें/ Study room pictures according to Vastu

अध्ययन कक्ष में तस्वीरें भी इस उद्देश्य में एक अहम किरदार निभाते हैं। इसलिए जब भी आप अपने घर के अध्ययन कक्ष में कोई भी तस्वीर लगाने का सोचते हैं तो आपको वास्तु का भी ध्यान रखना चाहिए।

अध्ययन कक्ष में रखने के लिए सबसे अच्छी तस्वीरें या मूर्तियाँ/ Best pictures or idols to keep in the study table and room:

सरस्वती माता – सरस्वती माता को ज्ञान, कला, और बुद्धिमत्ता की देवी कहा जाता है। आप अपने घर में अध्ययन कक्ष को बनाते समय सरस्वती माता की तस्वीर या उनकी मूर्ति को उस कक्ष में रखना चाहिए। यह आपके बच्चे के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।

गायत्री मंत्र – गायत्री मंत्र की एक तस्वीर आपके बच्चे के ज्ञान और बुद्धिमत्ता को बढ़ाने में असरदार साबित हो सकती है। गायत्री माता को सभी वेदों की माता भी कहा जाता है और वह अपार ज्ञान और जागरूकता की दाता हैं।

भगवान गणेश – गणेश जी शिक्षा के पथ पर आ रही सभी समस्याओं का निवारण कर सकते हैं और वह पत्र और शिक्षा के सर्वोच्च संरक्षक भी है। भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर लगाने से आपके बच्चे के जीवन में सकारात्मकता आएगी और वह अपने सीखने की प्रक्रिया में कभी भी पीछे नहीं होगा।

गरुड़ – गरुड़ भगवान विष्णु के वाहन होते हैं। उनके पास एक तेज दृष्टि और जबरदस्त बुद्धि होती है। यदि गरुड़ जी की मूर्ति को अध्ययन कक्ष में स्थापित किया जाता है तो यह बच्चे के कौशल को बढ़ाएगा और उसे उत्तीर्ण भी बनाएगा।

नंदी बैल – नंदी जी भगवान शिव के वाहन है। वह अगम शास्त्र के भी ज्ञाता है। शायद ही कोई और होगा जिनके पास नंदी जी के जितना ज्ञान होगा।

अध्ययन कक्ष के लिए कुछ टिप्स – क्या करें और क्या ना करें/ Do's and Don'ts: Study room Vastu Tips

कभी भी अपने बच्चे के अध्ययन के लिए टेबल रोशनी के नीचे ना लगाएं क्योंकि यह उसे पढ़ने में परेशान कर सकता है।

अध्ययन कक्ष के लिए कुछ टिप्स – क्या करें और क्या ना करें/ Do's and Don'ts: Study room Vastu Tips

कभी भी अपने बच्चे के अध्ययन के लिए टेबल रोशनी के नीचे ना लगाएं क्योंकि यह उसे पढ़ने में परेशान कर सकता है।

अध्ययन कक्ष कभी भी सीढ़ी के नीचे नहीं होना चाहिए।

प्लास्टिक या धातु के फर्नीचर से बचें और लकडी की टेबल का प्रयोग करें। लकड़ी उच्च कंपन आवृत्तियों के साथ एक प्राकृतिक सामग्री है जो बच्चों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।

हमेशा ध्यान दें की टेबल के आस पास रोशनी उचित मात्रा में हो। कम रोशनी से पढ़ने से ध्यान एकग्रित करने में समस्या हो सकती है। ऐसा करना आपके बच्चे के आंखों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है।

आप अपने अध्ययन कक्ष में अलग अलग रंग का प्रयोग करते हैं, तो यह आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

अध्ययन कक्ष में शीशा ना लगाएं क्योंकि यह आपके मन को भंग कर सकता है।

अध्ययन कक्ष में विचलित करने वाली और तस्वीरों को नहीं लगाना चाहिए।

कक्ष में अच्छे और प्रेरक विचारों वाली तस्वीर लगाएं। ऐसा करने के पश्चात आपके बच्चे के आस पास सकारात्मक वातावरण बन जाएगा।

स्टडी टेबल को सीधे शौचालय या बाथरूम की ओर न रखें।

निष्कर्ष – यदि आप अपने बच्चे को एक अच्छे स्थान पर देखना चाहते हैं तो आपको उनके लिए अध्ययन कक्ष को सोच समझ कर तैयार करना चाहिए जिससे वह सहज और उत्पादक महसूस करे।

अध्ययन कक्ष के वास्तु पर हमेशा अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहिए क्योंकि लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धी दुनिया में अपने जीवन के सफलता से जीने के लिए सिर्फ उचित शिक्षा ही एकमात्र जरिया है।

यदि अध्ययन कक्ष का वास्तु एक दम ठीक है तो यह आपके बच्चे एकाग्रता के स्तर को लगातार बढ़ता जाएगा और भविष्य में वह अपने चुने हुए विषय में आगे भी बढ़ पाएगा।

किसी विशेष मार्गदर्शन के लिए आप नीचे दिए गए किसी भी तरीके से हमसे संपर्क कर सकते हैं।

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