दुकान/शोरूम हेतु सही वास्तु

जब दुकान या शोरूम में व्यवसाय की बात करें तो वास्तु की बात करना कैसे भूल सकते हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने में सहायता करने के अतिरिक्त, यह आपको अपने व्यवसाय हेतु अधिक लाभ प्राप्त करने में मददगार साबित हो सकता है। भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर एक छोटी दुकान एक बड़े मॉल में एक भव्य शोरूम की तुलना में ग्राहकों को कहीं अधिक आकर्षित करती है। क्यों? इसमें दुकान के मालिक का भाग्य कारक होता है लेकिन फिर भी वास्तु इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  दुकान वास्तु/shop vastu ग्राहक हेतु सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश और निकास द्वार के साथ-साथ  कई अन्य कारकों जैसे बैनर लगाने का स्थान , गल्ले का स्थान,  दर्पण एवं और आस-पास के प्रतियोगियों पर भी विचार करता है।

वर्तमान समय में जहां शोरूम हेतु किराये की जमीन खरीदने पर उसमें सीमित संशोधन ही किये जा सकते हैं ,ऐसे में  शोरूम हेतु कुछ छोटे वास्तु टिप्स वास्तव में कुछ चमत्कारिक प्रभाव दिखा सकते हैं।

शोरूम या दुकान हेतु वास्तु/ showroom or shop vastu का पालन करना आपके व्यवसाय के परिदृश्य को बदलने में काफी हद तक सक्षम हैं। याद रखें कि सही वास्तु के अनुसार निर्मित दुकान, मालिक को एक प्रतिष्ठित ब्रांड बनाने में सहायता करती है और आपकी दुकान या शोरूम में ग्राहकों का एक प्रवाह बनाए रखती है। यह बात सामान्य घटना है। यह हम में से अधिकतर लोगों के साथ अक्सर होता है। हम खिड़की के माध्यम से एक दुकान में प्रवेश करते हैं। उसके पश्चात , हम किसी उत्पाद के प्रति इतने आकर्षित होते हैं कि हम उसे खरीदने से खुद को रोक नहीं पाते। क्या आप जानते हैं कि इसका कारण क्या है?

इसका समाधान उस शोरूम या दुकान की बनावट और उसके तरीके में निहित है। कुछ लोगों का कथन है कि यह महज एक संयोग है। लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि आपने जिस दुकान में प्रवेश किया और वहां से कुछ नया खरीदा।

वास्तु शास्त्र/ vastu shastra किसी भी स्थान को अपनी ऊर्जा देकर आकर्षक और जीवंत कर सकता है। दुकान वास्तु किसी भी स्थान को इतना शक्तिशाली बना देता है कि वह बहुत से ग्राहकों को आकर्षित करता है और उन्हें वहां मौजूद उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित करता है, भले ही वह उनमें कोई विशेष  रुचि नहीं रखते हैं।

दुकान हेतु वास्तु का महत्व/Importance of Vastu for a shop

हम सभी इस बात से अवगत हैं कि बाजार में स्थित सभी दुकानें एक जैसा व्यापार नहीं करती हैं। हालांकि वह सभी  एक ही उत्पाद का विक्रय कर रही हैं, लेकिन उनकी लाभ दरें अलग- अलग होती है। आकर्षक अंदरूनी बनावट वाला शोरूम या दुकान और कई प्रचार ऑफ़र ग्राहकों को लुभाने में विफल हो सकते हैं। इसके विपरीत, साधारण बनावट और अधिक कीमतों वाले छोटे शोरूम या दुकान में कई ग्राहको की आवाजाही और बिक्री बढ़ सकती है।

दुकान हेतु वास्तु का महत्व/Importance of Vastu for a shop

हम सभी इस बात से अवगत हैं कि बाजार में स्थित सभी दुकानें एक जैसा व्यापार नहीं करती हैं। हालांकि वह सभी  एक ही उत्पाद का विक्रय कर रही हैं, लेकिन उनकी लाभ दरें अलग- अलग होती है। आकर्षक अंदरूनी बनावट वाला शोरूम या दुकान और कई प्रचार ऑफ़र ग्राहकों को लुभाने में विफल हो सकते हैं। इसके विपरीत, साधारण बनावट और अधिक कीमतों वाले छोटे शोरूम या दुकान में कई ग्राहको की आवाजाही और बिक्री बढ़ सकती है।

कुछ दुकानों को दूसरी दुकानों की तुलना में अधिक लोकप्रियता हासिल होती है और उनमें ग्राहकों के अधिक आने की प्रवृत्ति होती है।इसके फलस्वरूप , उनके उत्पाद बहुत जल्दी बिकते हैं। इससे हमें लगता है कि यह दुकान मालिकों के मिलनसार स्वभाव के कारण होता है, जो उन्हें अन्य दुकानदारों की तुलना में अलग बनाता है।

हालांकि यह कभी-कभी सत्य भी हो सकता है,  परन्तु ऐसा अक्सर नहीं होता है। आखिरकार, यह वास्तु ही है जो सभी दुकानों हेतु मायने रखता है। इसके अतिरिक्त , यह शोरूम या दुकान के स्थान, उसके भीतरी हिस्से , आकार, अभिविन्यास आदि पर भी निर्भर करता है। अधिक ग्राहक लाने, अधिक बिक्री और कई पक्के ग्राहकों की चाह में आप अपनी दुकान में अनेक परिवर्तन कर सकते हैं।

वास्तु के अनुसार दुकान का मुख्य प्रवेश द्वार/ Main Entrance of Shop as per Vastu

यकीनन , यह सबसे प्रासंगिक बिंदुओं में से एक है जिसे आपको किसी भी शोरूम, दुकान, या किसी अन्य संपत्ति को प्रारम्भ करने से पूर्व ध्यान में रखना चाहिए। मुख्य द्वार आपकी दुकान के मुख को दर्शाता को है। यह द्वार दुकान के अंदर और बाहर उपस्थित ऊर्जाओं के मध्य संपर्क स्थापित करने का केंद्र बिंदु है।

वास्तु के अनुसार दुकान का मुख्य प्रवेश द्वार/ Main Entrance of Shop as per Vastu

यकीनन , यह सबसे प्रासंगिक बिंदुओं में से एक है जिसे आपको किसी भी शोरूम, दुकान, या किसी अन्य संपत्ति को प्रारम्भ करने से पूर्व ध्यान में रखना चाहिए। मुख्य द्वार आपकी दुकान के मुख को दर्शाता को है। यह द्वार दुकान के अंदर और बाहर उपस्थित ऊर्जाओं के मध्य संपर्क स्थापित करने का केंद्र बिंदु है।

किसी भी शोरूम अथवा दुकान की विफलता या सफलता उसके मुख्य द्वार पर निर्भर करती है।

वास्तु सिद्धांत के अनुसार दक्षिण दिशा में प्रवेश द्वार वाले शोरूम या दुकान अक्सर विफल हो जाते हैं, इसलिए आपको इससे बचने का प्रयास करना  चाहिए। उत्तर दिशा में स्थित सभी दुकानों और शोरूम का मुख दक्षिण दिशा की ओर होगा।

तो इसका क्या अर्थ है? क्या वह सभी लोग नुकसान उठाते हैं? इस प्रश्न का उत्तर नकारात्मक है। किसी भी शोरूम अथवा दुकान की सफलता उसके द्वार की दिशा पर नहीं बल्कि उस विशेष दिशा में उसके स्थान या प्रवेश द्वार पर निर्भर करती है। दक्षिण द्वार या प्रवेश द्वार वाले सभी शोरूम या दुकान व्यापार में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे।

इसलिए, आपको अपनी दुकान के प्रवेश द्वार हेतु उचित स्थान का चयन करते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।

साइनबोर्ड या बैनर का वास्तु/ Vastu of Signboards or Banners

बैनर या निर्देश पट (Signboard) के निर्माण हेतु आपके द्वारा चुने गए रंगों और लगाए गए निर्देशों के अनुरूप होने चाहिए। उदाहरण हेतु : यदि आपका मुख्य या प्रवेश द्वार उत्तर-पश्चिम दिशा में है, तो आपको अपने निर्देश पट (Signboard) हेतु धूसर या श्वेत रंग चुनना चाहिए। इसके विपरीत, यदि आपका प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में है, तो आपको बैनर या निर्देश पट (Signboard) के निर्माण हेतु हरे, काले या नीले रंग के रंगों का उपयोग करना चाहिए।

यदि आपके बैनर के रंग दिशा तत्वों के अनुकूल नहीं हैं, तो यह आपके व्यवसाय में बाधाएँ उत्पन्न कर सकता है। उदाहरण हेतु , पूर्व दिशा की दुकान में पीले रंग के निर्देश पट (Signboard) का उपयोग करने से ग्राहक आपकी दुकान को संरक्षण देने से रोक सकते हैं।

इसलिए, आपके शोरूम या दुकान की सफलता या विफलता सुनिश्चित करने में बैनर और निर्देश पट (Signboard) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दुकान में नकद या बिलिंग काउंटर की स्थापना/ Placement of the Cash or Billing Counter in Shop 

आपकी दुकान में गलत दिशा में स्थापित बिलिंग काउंटर आपकी नकदी के प्रवाह में सेंध लगा सकता है।

वास्तु शास्त्र/vastu shastra स्पष्ट रूप से आपकी दुकान पर भारी नकदी लाने हेतु कुछ दिशाओं की भूमिका की व्याख्या करता है। आपके व्यवसाय में नकदी लाने में एक बेहतर तरीके से स्थापित नकदी काउंटर दुकान हेतु बेहतर होता है।

दक्षिण पूर्व दिशा आपके दैनिक नकदी प्रवाह हेतु एक अनुकूल दिशा है। इसके अतिरिक्त , यह भगवान अग्नि द्वारा शासित दिशा भी है। ग्रंथों के अनुसार आग या अग्नि नकदी का प्रतीक है।

इसलिए, आपकी दुकान की दक्षिण-पूर्व दिशा में नकद या बिलिंग काउंटर लगाने से आपके लिये भारी नकदी प्रवाह सुनिश्चित होगा।

उत्पादों को प्रदर्शित करना/Display of Products

धूप का चश्मा, जूते, आभूषण, बस्ता , वस्त्र आदि से संबंधित कई दुकानें अपने उत्पादों को पुतलों पर प्रदर्शित करती हैं। यह ग्राहकों को उन उत्पादों से अवगत कराने का एक तरीका है कि जब वे इन वस्तुओं को अपने शरीर पर धारण करेंगे तो वह कैसे दिखेंगी। आपको ऐसे पुतलों को अपनी दुकान में सही दिशा में रखने की आवश्यकता है ताकि आपकी दुकान में ग्राहकों की लंबी कतार हो।

उत्पादों हेतु पुतलों की नियुक्ति हेतु उत्तर पश्चिम और उत्तर-पश्चिम का उत्तर सर्वाधिक उत्तम दिशा है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि इन क्षेत्रों की ऊर्जा ग्राहकों को आपकी दुकान की तरफ आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाती है।

इन क्षेत्रों में विज्ञापित कोई भी उत्पाद ग्राहकों को आकर्षित करके तीव्रता से बिकते हैं ।

इन सभी मामलों में, हमने अपने ग्राहकों को सूचित करना है कि वह अपने बचे हुए सामान को इन क्षेत्रों में रखें। और वह यह देखकर हैरान थे कि जो सामान तीन से पांच साल से नहीं बिका था, वह कुछ ही दिनों में तेज़ी से बिक रहा था। तो, यह इन क्षेत्रों की छिपी हुई शक्तियां हैं।

इसलिए, ग्राहकों को अपनी दुकान की ओर आकर्षित करने के लिए छिपी ऊर्जा का उपयोग करने हेतु, आपको सलाह दी जाती है कि आप अपने बचे हुई सामान या पुतलों को इन क्षेत्रों में स्थापित करें।

दुकान में दर्पण की स्थापना/ Placement of Mirrors in Shop

किसी भी दुकान अथवा शोरूम के वास्तु में दर्पण भी एक अनिवार्य भूमिका निभाता है। अधिकांश दुकानें ग्राहकों को इसे देखने में सक्षम करने हेतु बड़े दर्पणों का उपयोग करती हैं कि यह उत्पाद उन पर कैसे प्रतीत होंगे ।

घड़ियां,सामान, गहने और वस्त्र आदि की बिक्री से जुड़ी दुकानों में इस दिशा में बड़े दर्पण लगवाए जाते हैं। एक दर्पण क्षेत्र को बड़ा दिखाता है, जहां भी यह  रखा जाता है। अपनी दुकान को बनाते और उसमें शीशे लगाते समय इस बात का स्मरण रखें। यदि आपकी दुकान के कुछ कोने या क्षेत्र विस्तृत हैं, और वहां एक दर्पण रखा हो, तो यह क्षेत्र के विस्तार का कारण बनेगा, जिससे ऊर्जा का  असंतुलन उत्पन्न हो सकता है।

इसके अतिरिक्त , दर्पण अपने प्रतिबिंब की प्रवृत्ति के कारण जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता हैं। अतः दर्पणों को उन क्षेत्रों में रखना आवश्यक है, जो जल तत्व से संबंध रखते हैं। अर्थात उत्तर पूर्व, उत्तर या पश्चिम दिशा। इसके विपरीत, आपको कभी भी अग्नि क्षेत्र जैसे कि आपकी दुकान का दक्षिण पूर्व और दक्षिण भाग में दर्पण की स्थापना नहीं करना चाहिए।

वास्तु पर किसी विशेष मार्गदर्शन हेतु, आप:

दुकानों/शोरूम वास्तु/shops/ showrooms vastu हेतु ऑनलाइन रिपोर्ट या

ज्योतिषीय सत्र हेतु मुझसे परामर्श करें।

आप यह भी पढ़ सकते हैं कि कैसे ज्योतिष कारखाने , कार्यालय और भूखंडों हेतु वास्तु को जानने में आपकी सहायता करता है।

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