अस्पताल के लिए वास्तु

पिछले कुछ वर्षों से, स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों में काफी वृद्धि हुई है, जिससे अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या भी बढ़ने लगी है| अस्पतालों का वातावरण निराशाजनक हो सकता है और वहां पर नकारात्मक वातावरण और ऊर्जा को कम करने की आवश्यकता होती है। लोग अपनी बीमारियों को ठीक करने के लिए अस्पताल आते हैं और अपनी सभी नकारात्मकता को अस्पताल में पीछे छोड़ जाते हैं, जिससे यह एक दुखद जगह बन जाती है। 

वर्तमान समय में वास्तु शास्त्र/ Vastu Shastra की बढ़ती मान्यता और आवश्यकता के साथ, वास्तु शास्त्र का व्यापक रूप से अस्पतालों के निर्माण के लिए उपयोग किया जाता है। अस्पताल नकारात्मक स्थान है जहां लोग जाना पसंद नहीं करते हैं| इन नकारात्मक ऊर्जाओं को बाहर रखने के लिए वास्तु के हिसाब से अस्पतालों के निर्माण करने की आवश्यकता होती है, जिससे उपचार प्रक्रिया भी तेजी से काम करतीं हैं।

अस्पतालों के लिए वास्तु शास्त्र की आवश्यकता क्यों है?/ Why Need Vastu Shastra for Hospitals?

क्या आपने कभी सुना है कि अस्पताल के लिए गलत स्थान और बनावट चुनने से कोई मुश्किल आ सकती है या विनाश भी हो सकता है? क्या कोई ऐसा अस्पताल शुरू करने का जोखिम उठा सकता है जहां इलाज के बजाय बीमारियां बढ़ती हैं? अक्सर यह माना जाता है कि मरीजों के देर से स्वस्थ होने और उस विशेष स्वास्थ्य समस्या से उभरने वाली समस्याओं के पीछे गलत स्थान का चयन प्राथमिक कारण है। यही कारण है कि आजकल लोग अस्पतालों के निर्माण के लिए वास्तु शास्त्र/ Vastu Shastra का उपयोग करना पसंद करते हैं। 

अस्पतालों के लिए वास्तु शास्त्र की आवश्यकता क्यों है?/ Why Need Vastu Shastra for Hospitals?

क्या आपने कभी सुना है कि अस्पताल के लिए गलत स्थान और बनावट चुनने से कोई मुश्किल आ सकती है या विनाश भी हो सकता है? क्या कोई ऐसा अस्पताल शुरू करने का जोखिम उठा सकता है जहां इलाज के बजाय बीमारियां बढ़ती हैं? अक्सर यह माना जाता है कि मरीजों के देर से स्वस्थ होने और उस विशेष स्वास्थ्य समस्या से उभरने वाली समस्याओं के पीछे गलत स्थान का चयन प्राथमिक कारण है। यही कारण है कि आजकल लोग अस्पतालों के निर्माण के लिए वास्तु शास्त्र/ Vastu Shastra का उपयोग करना पसंद करते हैं। 

जब वास्तु शास्त्र/ Vastu Shastra को चिकित्सा विज्ञान के साथ मिलाया जाता है तो बिना किसी जोखिम या जटिलता के बीमारियों को उसके जड़ से ठीक किया जा सकता है|

यदि आप कोई अस्पताल बनवाने जा रहे हैं तब आपको, लोगों के कष्टों को बेहतर उपचार हेतु अस्पतालों के लिए निम्नलिखित वास्तु शास्त्र/ Vastu Shastra युक्तियाँ पर विशेष ध्यान देना चाहिए:

  1. शल्य क्रिया कक्ष का स्थान/ Location of the Operation Theatre: शल्य क्रिया कक्ष का उपयोग अक्सर शल्य क्रिया और घातक उपचार के लिए किया जाता है और इसे अस्पताल में एक महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। अस्पताल के कई अलग-अलग कमरे रोग और चिकित्सा के अनुसार विभाजित किया जाता है। शल्य क्रिया कक्ष के लिए सही और उपयुक्त जगह अस्पताल का पश्चिमी भाग है। शल्य क्रिया कक्ष में प्रवेश करते समय उपकरण और मशीनों को दक्षिण-पूर्व की ओर रखा जाना चाहिए, जबकि रोगी का सिर दक्षिण की ओर होना चाहिए।
  2. परामर्श कक्ष के लिए स्थान/ Location for the Consultation Room: परामर्श कक्ष वह कमरा है जहां चिकित्सक रोगी से मिलते हैं, समस्या पर चर्चा करते हैं और समाधान के साथ एक नुस्खा लिखते हैं। वास्तु के अनुसार चिकित्सक को दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही बैठना चाहिए। जबकि मरीज को उसके ठीक सामने होना चाहिए। यह स्थिति चिकित्सक और रोगी के बीच उचित बातचीत सुनिश्चित करती है और चिकित्सक को समझदारी से काम करने की अनुमति देती है। परामर्श कक्ष 'एल' (L) आकार का होना चाहिए। चिकित्सक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 'एल' आकार केवल उत्तर-पूर्व दिशा में उठा हुआ होना चाहिए, क्योंकि इससे संस्था के मुखिया या संबंधित चिकित्सक को समृद्धि मिलती है।
  3. हवा का उचित आवागमन/ Proper Ventilation अस्पताल को उचित रूप से हवादार बनाए रखा जाना चाहिए ताकि लोगों को असुविधा महसूस न हो। रोगी के कमरे को उपयुक्त रूप से हवादार और उत्तर पूर्व में खुला होना चाहिए ताकि सूर्य की किरणें कमरे में प्रवेश कर सकें और जल्द से जल्द रोगी ठीक हो सके।
  4. भण्डार कक्ष का स्थान/ Placement of the Storeroom: प्रयोग में नहीं आने वाले चिकित्सा उपकरण रखने के लिए हमेशा एक भंडार कक्ष होता है। जो उपकरण प्रयोग में आते हैं उनके लिए यह स्थान होता है| भंडार कक्ष बनाने का सही स्थान पश्चिम, दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही है। सुनिश्चित करें कि भण्डार कक्ष हमेशा मुख्य अस्पताल के फर्श से ऊंचे स्थान पर हो।
  5.  आपातकालीन कमरे/ Emergency Rooms: रोगियों के लिए हमेशा दो या दो से अधिक आपातकालीन कक्ष होने चाहिए। यह खासकर उनके लिए होना चाहिए जिन्हें तत्काल उपचार और चिकित्सा के अध्ययन की आवश्यकता पड़ती है। आपातकालीन कक्ष के लिए दक्षिण-पश्चिम सबसे अच्छी दिशा है क्योंकि यह तेजी से ठीक होने में मदद करता है।

अस्पतालों का निर्माण करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाना चाहिए:

ठंडे पेयजल लगाने के लिए उत्तर-पूर्व सबसे अच्छी दिशा है। ठंडे पेयजल को साफ और किसी भी बैक्टीरिया या फंगस से मुक्त रखा जाना चाहिए। आगंतुकों और रोगियों के इलाज करते समय तुरंत फेंकने वाले चश्मों का प्रयोग करें।

अस्पतालों का निर्माण करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन किया जाना चाहिए:

ठंडे पेयजल लगाने के लिए उत्तर-पूर्व सबसे अच्छी दिशा है। ठंडे पेयजल को साफ और किसी भी बैक्टीरिया या फंगस से मुक्त रखा जाना चाहिए। आगंतुकों और रोगियों के इलाज करते समय तुरंत फेंकने वाले चश्मों का प्रयोग करें।

स्नानघर के लिए सबसे अच्छी जगह पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। सुनिश्चित करें कि शौचालय की सफाई घंटे के आधार पर की जानी चाहिए, क्योंकि गंदे शौचालय कई समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

चिकित्सा पुस्तकों और शोध को अलमारियों में रखा जाना चाहिए। अलमारियों को पश्चिम या दक्षिण दिशा में रखना चाहिए।

एक्स-रे और एमआरआई स्कैन जैसे उद्देश्यों के लिए दक्षिण पूर्व दिशा उत्कृष्ट है।

कपड़े बदलने और शौचालय के लिए सबसे अच्छी जगह पश्चिम या दक्षिण है।

अस्पताल में कार्य करने वाले चिकित्सक आदि लोगों के लिए घर और विश्राम कक्ष उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व दिशा में बनाए जाने चाहिए।

स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल का प्रवेश द्वार उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। आप दरवाजे के पास कुछ पेड़ और पौधे लगा सकते हैं क्योंकि वह क्षेत्र को ताजा और सांस लेने योग्य बनाते हैं।

अस्पताल के पास एक बगीचा होना चाहिए क्योंकि यह रोगियों को ताजी हवा खाने के लिए बाहर जाने के लिए प्रेरित करता है।

अस्पताल ऐसी जगह है जहाँ कोई जाना नहीं चाहता लेकिन आवश्यकता पड़ने पर इसकी महत्वता को कम नहीं आंका जा सकता। अगर कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो आपको अस्पताल जाना ही होगा। अस्पतालों के लिए वास्तु शास्त्र/ Vastu Shastra का उपयोग करें और मरीजों को आसानी और तेजी से स्वस्थ होने दें।

वास्तु पर किसी विशेष मार्गदर्शन के लिए, आप ले सकते हैं:

अस्पताल वास्तु के लिए ऑनलाइन रिपोर्ट अथवा ज्योतिषीय सत्र/ Astrology Session के लिए मुझसे परामर्श करें।

आप यह भी पढ़ सकते हैं कि कैसे ज्योतिषी/ Astrologer दुकान/शोरूम के लिए वास्तु, कार्यालय के लिए वास्तु और भूखंडों के लिए वास्तु पर आपकी मदद करता है।