शद्वर्ग का विश्लेषण  330

शद्वर्ग का विश्लेषण

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वैदिक ज्योतिष में सम्पूर्ण भचक्र को 12 बराबर भागों में बांटा गया है जिन्हें राशि कहा जाता है। जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में और भी गहरी जानकारी प्राप्त करने के लिए इन राशियों को आगे कई छोटे भागों या वर्गों में विभाजित किया जाता है जिन्हें वर्ग कुंडली कहा जाता है। ये वर्ग कुंडली किसी व्यक्ति के जीवन का सबसे सूक्ष्म विवरण देते हैं। आमतौर पर, ज्योतिषी ज्ञान की कमी या इनके उपयोग के लिए आवश्यक अत्यधिक मेहनत के कारण इनका उपयोग नहीं करते हैं। इन वर्ग कुंडलियों के अध्ययन व इन पर पकड़ बनाने के लिए उच्च कोटि के ज्ञान और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। 

 

बृहत पाराशर होरा शास्त्र बताता है कि वर्ग कुंडली के उपयोग के बिना की गई कोई भी भविष्यवाणी ऊपरी है और सर्वथा गलत हो सकती है। इस प्रकार किसी भी जीवन घटना को सही ढंग से समझने के लिए, वर्ग कुंडली को उचित महत्व देना आवश्यक है। षडवर्ग रीडिंग में कुल मिलाकर 6 कुंडलियों का विश्लेषण निहित है। इस तरह, एक विशिष्ट ग्रह को केवल लग्न कुंडली में ना पढ़कर कम से कम 6 बार उसका गहन निरीक्षण किया जाता है। यह किसी भी साधारण ज्योतिषी द्वारा केवल लग्न कुंडली देख कर ग्रह का आकलन कर देने से कहीं गहरी या यूं कहें कि 6 गुना गहरी प्रक्रिया है। यह कुंडली विश्लेषण किसी व्यक्ति के जीवन में उसके ग्रह के वास्तविक स्वरूप और उसकी असल भूमिका समझने में मदद करता है। यह एक उच्च कोटि का कुंडली विश्लेषण है जिसमे सटीकता 100 % सुनिश्चित है।  

 

यह देखा जाता है कि कोई ग्रह 6 अलग-अलग कुंडलियों में अपनी, मूलत्रिकोण, उच्च या मित्र राशि में स्थित है या नहीं। यदि ऐसा हो तो वह ग्रह उस विशिष्ट कुंडली के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है।  इनमें से किसी भी राशि में ग्रह की स्थिति जीवन से जुड़े उस विशेष भाग के लिए ग्रह को बहुत मजबूती प्रदान करती है।  प्रत्येक वर्ग कुंडली में ग्रह के इन उल्लिखित श्रेणियों में से होने पर, उसे एक गिनती दी जाती है। ग्रह के लिए विभिन्न वर्ग कुंडलियों में स्थिति की इस तरह की गणना के आधार पर, यह एक विशेष अंश में कहा जाता है (अंश जितने अधिक होंगें, परिणाम उतना ही मजबूत होगा)।

षडवर्ग का शाब्दिक अर्थ है छह वर्ग और उनमें शामिल हैं-

  1. जन्म कुंडली - शरीर और संपूर्ण व्यक्तित्व 

  2. होरा कुंडली - जातक का धन और भौतिकवादी संचय

  3. द्रेष्काण कुंडली - भाई बहन और उनका जीवन, उनके साथ आपके संबंध

  4. सप्तमांश कुंडली - संतान और उनसे प्राप्त सुख

  5. नवमांश कुंडली - वैवाहिक जीवन और जीवनसाथी। यह जन्म कुंडली के बाद सबसे प्रमुख कुंडली है

  6. द्वादशांश कुंडली - माता-पिता, उनका स्वास्थ्य और आपके जीवन में उनका सहयोग

  7. विशांश चार्ट- अवचेतन मन व आपकी आध्यात्मिक प्रगति और कार्य

जातक के जीवन में कोई विशेष ग्रह क्या भूमिका निभा रहा है, यह समझने के लिए इन 6 वर्ग कुण्डलों को सामूहिक रूप से जांचा जाता है। डॉ विनय बजरंगी जी इन 6 अलग-अलग कुंडलियों में प्रत्येक ग्रह की स्थिति का गहराई से विश्लेषण करते हैं। यह जातक के जीवन में क्या घटित हो रहा है, इसके बारे में स्पष्ट दृष्टिकोण प्राप्त करने में मदद करता है। मूल कारण तक पहुंचना आसान हो जाता है जिसे प्रभावी ढंग से ठीक किया जा सकता है। किसी भी राशि में अपनी स्थिति के आधार पर किसी ग्रह को एक विशेष अवस्था में होना कहा गया है।

 

जिसे षड्वर्ग में जांचा जाता है। एक विशेष स्थिति में होने से ग्रह फल देने के लिए अत्यधिक बलवान हो जाता है। इसके वास्तविक परिणामों को समझने के लिए इसका और विश्लेषण किया जाता है। षड्वर्ग विश्लेषण जातक को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में भूत, वर्तमान और भविष्य की घटनाओं को समझने में मदद करता है। एक षड्वर्गीय विश्लेषण के बाद एक जातक जान सकता है -

  1. जीवन में कष्टों और दुखों का कारण

  2. जीवन के विभिन्न मजबूत और कमजोर क्षेत्र

  3. संतान, संबंध, करियर और धन से प्राप्त सुख या दुख

  4. जीवन में अच्छे और बुरे समय का सही अनुमान

  5. जन्म समय सुधार यदि आवश्यक हो

  6. आध्यात्मिक चेतना

  7. पिछले जीवन के कर्म व उनका वर्तमान जीवन से जुड़ाव 

  8. कर्म सुधार

  9. पता की गई समस्याओं को दूर करने के लिए सबसे प्रभावी ज्योतिषीय उपाय

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