Conjunction

ग्रहों के संयोजन का प्रभाव

जब दो या दो से अधिक ग्रह एक ही भाव में आ जाते हैं तो ग्रहों का संयोजन/ planetary conjunction बनता है। परन्तु एक सवाल जो लोगों के मन में आता है, वह है कि जब ग्रह एक-दूसरे के भाव  में एक-दूसरे की के साथ युति करेंगे तो क्या होगा? वह आपके जीवन के विषय में एक संक्षिप्त विवरण देते हैं। ग्रहों के मध्य बनने वाला संयोजन ग्रहों की प्रकृति, एक-दूसरे के साथ उनके संबंध और जिस भाव /राशि में वह स्थित है, उसके आधार पर या तो अशुभ या शुभ हो सकते हैं । ग्रह की शक्ति को यह जानने के लिए भी देखा जाता है कि ग्रह वक्री, अस्त, अथवा मार्गी है ।

विभिन्न भावों में ग्रहों का संयोजन/ Conjunction of Planets in different houses

ग्रहों के संयोजन के संबंध में एक ही भाव में पांच या छह ग्रह स्थित हो सकते हैं। परन्तु ऐसी स्थिति  कम ही होती है। इस प्रकार के ग्रह संयोजन वाली कुंडली को समझना बहुत कठिन होता है। इसलिए, यह निर्धारित करने के लिए बहुत सावधानी बरतनी चाहिए कि ग्रह एक दूसरे को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। साथ ही इस संयोजन के कारण ग्रह युति अथवा योग बन सकता है। यदि एक ही भाव में पाप ग्रह हो तो इस योग से व्यक्ति को कोई लाभ नहीं होता है। इसके विपरीत, जब किसी भाव में अशुभ या कमजोर ग्रहों का संयोजन होता हैं, तो एक लाभकारी ग्रह की उपस्थिति  ऐसी स्थिति को संतुलित कर सकती है। हालांकि, किसी अन्य ग्रह के अशुभ प्रभाव के कारण इसकी प्रबलता कम होगी। इस प्रकार की कुंडली/Kundli औसत मानी जाती है।

व्यक्ति का जीवन ग्रह संयोजन द्वारा कैसे चित्रित किया जाता है?/ How is the Native’s Life Characterized by Conjunction?

किसी के जीवन का वैचारिक क्षेत्र एक भाव में कई ग्रहों के संयोजन/planetary conjunction की विशेषता है। इसका अर्थ है, जिस भाव में कई ग्रह स्थित हों। हालांकि, किसी एक भाव की प्रबलता के कारण व्यक्ति के व्यक्तित्व में असंतुलन आ सकता है। जिस भाव में ग्रहों का संयोजन होता है उस भाव के स्वामी पर भी नज़र रहती है। यदि इसकी किसी कुंडली में स्थिति बेहतर हो तो यह एक व्यक्ति पर लाभकारी प्रभाव डालता है। यह अन्य ग्रहों को भी प्रबल करता है।और , यदि यह अशुभ स्थिति  में है या कमज़ोर में है, तो यह केवल नकारात्मक परिणाम देता है, और स्थिति खराब हो सकती है।

आइए विभिन्न ग्रहों के संयोजन के प्रभाव पर चर्चा की जाए/ Let us discuss the impact of various planetary combinations

ग्रहों का संयोजन ग्यारहवें भाव/ Eleventh house (आय और विस्तार को नियंत्रित करने वाली) में होता है, इसलिए व्यक्ति अपनी आय बढ़ाने पर ध्यान देगा।

पंचम भाव (शिक्षा काभाव ) का स्वामी बुध विद्या और बुद्धि से आय में वृद्धि करेगा। क्योंकि यह अष्टम भाव का स्वामी भी है, यह व्यक्ति को अचानक लाभ दिला सकता है, परन्तु इसके साथ ही जीवन में बाधाएं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

यदि चंद्रमा, छठे भाव का स्वामी/ sixth house lord (कठिनाई का सूचक) धनु राशि में स्थित हो, तो व्यक्ति को अपने जीवन में कई संघर्ष करने पड़ेंगे, परन्तु  वह बहुत मेहनत करेगा और अपनी आय बढ़ाने के लिए जी तोड़ कोशिश करेगा ।

सूर्य, जो की सप्तम भाव का स्वामी/ seventh house lord होकर, मित्र राशि में हो तो, व्यक्ति को जीवनसाथी और साझेदारियों से लाभ देगा।

शुक्र, जो चौथे और नौवें भाव का स्वामी है, यदि किसी कुंडली के लिए योगकारक है, यह व्यक्ति को प्रचुर मात्रा में धन कमाने के पर्याप्त अवसर देगा। यदि यह सूर्य और चंद्रमा, अपने शत्रु ग्रहों के साथ स्थित हो, तो इसके  द्वारा मिलने वाले लाभ कम प्रभावी होंगे। परन्तु इस प्रकार की कुंडली/Kundli के लिए शुक्र बहुत ही शुभ होता है।
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