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कृतिका नक्षत्र - अग्नि और बलिदान का नक्षत्र

वैदिक ज्योतिष / Vedic astrology में कृतिका 27 नक्षत्रों में से तीसरा नक्षत्र है। कृतिका नक्षत्र को अग्नि का तारा भी कहा जाता है। हमने नीचे दिए गए विवरणों में कृतिका नक्षत्र/Krittika Nakshatra के मुख्य लक्षणों, विशेषताओं, विषयों, ग्रहों, पौराणिक कथाओं और प्रसिद्ध व्यक्तित्वों के बारे में बताने का प्रयास किया है।

अग्निमूर्द्धादिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयं।

अपामरेतांसि जिन्वथ।।

"अग्नि, कृतिका के स्वामी, अपने दिव्य रूप में, दिन के समय आकाश में रहते हैं; आप पृथ्वी पर जीवन का एकमात्र स्रोत हो। आप ने ही अनाज व तापमान का संतुलन देकर, मनुष्यों का अस्तित्व  पृथ्वी पर बनाये रखा है।  आप ही वर्षा का मूल कारण भी हो।"
 

कृतिका नक्षत्र क्या है? / What is Krittika Nakshatra?

अग्नि से संबंध होने के कारण कृतिका को अग्नि का तारा भी कहा जाता है। अग्नि के हमेशा दो सिर और सात जीभ होती हैं।

 

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कृतिका नक्षत्र के देवता, अग्नि / Agni,The God of Krittika Nakshatra

अग्नि अनुष्ठान या होम के द्वारा बलिदानों के उपभोक्ता हैं, जिनके दो सिरों में से एक सिर नश्वर और दूसरा सिर आकाश से संबंधित होता है। यह यज्ञों का संकेत भी देता है। अग्नि के तीन पैर हैं, जो तीनों लोकों में अपनी उपस्थिति दर्शाते हैं।

 

कृतिका और कार्तिकेय / Krittika and Kartikeya

कृतिका नक्षत्र, शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय से भी संबंधित है। असुर तारकासुर को वरदान था कि केवल छह दिन का बालक ही उसका वध कर सकता है। जब कार्तिकेय सिर्फ छह दिन के थे, तब उन्होंने युद्ध करने की योग्यता होने के कारण तारकासुर का वध किया था। इस कारण, कृतिका नक्षत्र / Krittika Nakshatra से संबंधित "षष्ठी तिथि" का प्रमुख महत्व होता है। 

 

अग्नि की दिशा / The Direction of Agni

अग्नि, रसोई की दक्षिण-पूर्व, दक्षिण में अंतिम संस्कार और उत्तर दिशा में आरती की दिशा होती है। कृतिका को, मृदु होने के साथ ही कठोर नक्षत्र/ Nakshatra भी होने के कारण, मिश्र या मिश्रित नक्षत्र भी कहा जाता है। आग चीजों को जोड़ भी सकती है और चीजों को पिघला भी सकती है। रसोई घर में, यह खाना बनाने के साथ ही उसे जला भी सकती है।

 

कृतिका नक्षत्र की शक्तियां / Shakti of Krittika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र से संबंधित शक्ति 'दहन' करने की होती है। दहन, जलाकर शुद्धि करना है। यह भोजन को पचाने के लिए पेट में भी स्थित होती है।

 

कृतिका नक्षत्र सात सितारों से बना है, जिन्हें छह बहनों के रूप में जाना जाता है जो सप्त ऋषियों की छह पत्नियों (कृतिकया) से संबंधित है। कार्तिकेय का पालन करने में इन छह माताओं का विशेष महत्व है।

 

द्वितीयेश के कृतिका नक्षत्र / Krittika Nakshatra से संबंधित होने पर, सभी चीजें तीक्ष्ण हो सकती हैं, जैसे- वाणी, मुंहफट स्पष्टवादी और तीखी होगी तथा अग्नि संबंधित कार्य और नुकीली वस्तुओं (जैसे सर्जिकल आइटम) आदि से संबंधित बिजनेस में सफलता प्राप्त हो सकती है।

 

कृतिका नक्षत्र से संबंधित ग्रह / Planet of Krittika Nakshatra

कृतिका नक्षत्र से संबंधित ग्रह सूर्य द्वारा शासित होते हैं जो नेतृत्व और सामरिक गुण भी प्रदान करते हैं।   कृतिका नक्षत्र के व्यक्ति, जटिल समस्याओं को भी छोटे-छोटे टुकड़ों में हल कर देते हैं।

 

हालांकि, यह राक्षसी वर्ण का भौतिकवादी होता है, लेकिन अग्नि होने के कारण जाति से ब्राह्मण है। कृतिका नक्षत्र वाले व्यक्ति, एक पहाड़ी बकरी के समान उच्च जोखिम लेने वाले होते हैं, जिस कारण उन्हें अक्सर अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं, तथा इन लोगों में सम्मोहन को कुचलने और मंत्रमुग्ध करने वाले लोगों पर जल्दी काबू पाने की अनोखी क्षमता होती है। यह लोग विष को प्रकृति के समान ही अपने वश में करने की  क्षमता भी रखते हैं।

 

कृतिका नक्षत्र की पौराणिक कथा / The Mythology of Krittika Nakshatra

अग्नि और सप्तऋषि की छह पत्नियां

अग्नि, सप्त ऋषियों की छह पत्नियों के प्रति आकर्षित हो कर प्रत्येक के पास अपने मन की बात कहते हैं और विवाह के लिए प्रस्ताव देते। सभी ने उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उदास, निराश और लज्जित अग्नि घोर तप करने के लिए जंगल में निकल जाते हैं। जंगल में, ऋषि दक्ष की एक पुत्री स्वाहा अग्नि पर मोहित हो गईं, लेकिन उदास अग्नि ने स्वाहा के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। स्वाहा को जब अग्नि के प्रस्ताव को ठुकराने का असली कारण पता चला, तो उन्होंने ऋषियों की छह पत्नियों का अभिनय करने का विचार किया। हर बार जब भी वह ऋषि पत्नी का रूप धारण करती, तो अग्नि उसे स्वीकार कर लेते और फिर वह उनसे प्रेम करती। स्वाहा, ऐसे मिलन से निकलने वाले महत्वपूर्ण द्रव्य को सुरक्षित रख लेती थी। लेकिन सातवीं बार, स्वाहा ऋषि वशिष्ठ की पत्नी अरुंधति का अभिनय करने में विफल रही, क्योंकि उन्हें भगवान विष्णु से आशीर्वाद और वरदान मिला था। तब, अग्नि को इस धोखे के बारे में पता चल जाता है।

 

इस पौराणिक कथा से प्राप्त विषय / Theme Emerging out of this Mythology

  1. ऋषि वराहमीर ने कहा है कि व्यभिचारी और अवैध स्वभाव वाले इन लोगों में, अन्य की पत्नियों के साथ सोने की प्रवृत्ति होती है, जैसे- ऋषि की छह पत्नियों के प्रति अग्नि की वासना।
  2. इस नक्षत्र/Nakshatra का अस्वीकृति और निराशा के साथ बहुत गहरा संबंध है।
  3. यह नक्षत्र, स्वाहा द्वारा महत्वपूर्ण तरल पदार्थ के संग्रह करने के कारण आईवीएफ, शुक्राणु या अंडाणु दाता से भी संबंधित है।

 

कृतिका नक्षत्र से संबंधित दूसरी पौराणिक कथा / 2nd Mythology Associated with Krittika Nakshatra

कार्तिकेय या स्कंद का जन्म/ Birth of Kartikeya or Skanda

स्वाहा द्वारा संग्रहित छह द्रव पदार्थों को पोषण के लिए, पतियों द्वारा परित्यक्त उन छह पत्नियों को दिया जाना था, जिन पर तथाकथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था। इन माताओं के इन छह गर्भों का उपयोग कार्तिकेय के पोषण के लिए किया गया था। कृतिका, अग्नि, स्वाहा और सारा वन (जंगल) यह सभी उस गर्भ से संबंध रखता था। इस पौराणिक कथा से जो विषय निकलता है वह है:

  1. सरोगेसी
  2. बच्चों के लिए कानूनी लड़ाई
  3. नाजायज संतान

 

कृतिका से संबंधित तीसरी पौराणिक कथा / 3rd mythology associated with Krittika Nakshatra:

अग्नि द्वारा खंडवा वन को जलाना/ Burning of the Khandava Forest by Agni

अग्नि ने कुछ ही समय में विशाल खांडव वन को जला दिया था। इस विषय से कृतिका नक्षत्र की निम्नलिखित बातें सामने आती हैं:

  1. विकराल भूख
  2. अपच (अशुभ प्रभाव होने पर)
  3. अम्लता (कोई अशुभ प्रभाव होने पर)

 

कृतिका नक्षत्र के विषय / Themes of Krittika Nakshatra

विभिन्न पौराणिक कथाओं के मुख्य विषयों के सारांश द्वारा इस नक्षत्र/Nakshatra से उत्पन्न होने वाले मुख्य बातों को नीचे दिया गया है। इस नक्षत्र के व्यक्तियों में निम्नलिखित विषयों और आदतों की प्रवृत्ति होती हैं :

  1. अवैध संबंध
  2. सेक्स स्कैंडल या किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध
  3. उपजनक,
  4. गैस्ट्रिक समस्याएं,
  5. विवाहेतर संबंध,
  6. सरोगेसी,
  7. ज्यादा खाने की आदतें,
  8. अनुचित यौन संबंध।

एक चार्ट में इन व्याख्याओं के आधार पर ही कृतिका नक्षत्र को लागू किया जाता है।

 

कृतिका नक्षत्र में जन्मीं स्त्रियों के लक्षण

कृतिका नक्षत्र की महिलाएं निम्नलिखित लक्षणों के लिए जानी जाती हैं-

  1. कृतिका नक्षत्र की महिलाएं बहुत बुद्धिमान, सकारात्मक, स्पष्ट और मजाकिया होती हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी वे हिम्मत नहीं हारती बल्कि बहादुरी से उसका सामना करती हैं। इनका रचनात्मक झुकाव होता है और करियर के मामले में ये आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहना पसंद करती हैं। वे शिक्षा और कलात्मक क्षेत्र में कार्य कर सकती हैं।

  2. उनमें धैर्य की कमी होती है और वे दूसरों से बहुत अधिक स्पष्ट व्यवहार वाली होती हैं। ये दबना पसंद नहीं करती और लोगों से ज़्यादा आत्मीयता नहीं दिखती। ये सामाजिक तौर-तरीके से अनभिज्ञ होती हैं।

  3. वे अपने काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच एक सही संतुलन बनाये रखने में सक्षम हैं। वे अपने पारिवारिक संबंधों को अत्यधिक महत्व देतीं हैं और पूरे समर्पण के साथ सभी कर्तव्यों का पालन करतीं हैं।

  4. इन्हें चापलूस व्यक्ति पसंद नहीं होते हैं।

  5. उन्हें यात्रा करने और दुनिया के बारे में जानने का शौक है। ये उत्कृष्ट खाना पकाती हैं और उनमें से कई को शेफ और रेस्तरां मालिकों के रूप में काम करते देखा जा सकता है। चूंकि इसके देवता भगवान अग्नि हैं, इसलिए इनमें आग, बॉयलर, रसायन और शुद्धिकरण या शोधन कार्यों से जुड़े कार्यों के लिए आंतरिक झुकाव पाया जाता है। 

  6. वे अपने जीवन-साथी के साथ प्रेम व सौहार्द से रहती हैं हालांकि कभी-कभी ये अपने जीवन साथी से अलग रहने का भी फैसला ले लेती हैं।  

  7. वे मानसिक तनाव, नींद की कमी, रक्तचाप, गठिया और अपच जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर सकती हैं।

 

कृतिका नक्षत्र में जन्में पुरुषों के लक्षण

  1. कृतिका नक्षत्र मेष और वृष राशि में आता है। कृतिका नक्षत्र राशि के आधार पर, पुरुष आमतौर पर ऊर्जावान और आकर्षक दिखते हैं। वे आत्मविश्वास से लबालब रहते हैं। लेकिन कभी-कभी ये घमंडी व दिखावटी भी हो सकते हैं। 

  2. कृतिका पुरुष अपने शब्दों और कार्यों में स्पष्ट होते हैं। कृत्तिका नक्षत्र को 'आयुष्मत' के रूप में वर्णित किया गया है, जो दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा को दर्शाता है।

  3. भगवान कार्तिकेय भी इस नक्षत्र से संबंधित हैं और इसलिए पुरुषों में एक सैनिक के लक्षण पाए जाते हैं जो उनकी जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति पर निर्भर होती है।  

  4. वे हमेशा व्यस्त रहते हैं।  

  5. ये विभिन्न विषयों के अच्छे जानकार, मनोरंजक और उत्साही होते हैं। इनका झुकाव आध्यात्मिकता, आत्मा की शुद्धि और परिवर्तन की ओर भी रहता है।

  6. वे बाहर से मजबूत लेकिन अंदर से नरम होते हैं और अपने प्रियजनों के लिए अत्यंत चिंतित रहते हैं।

  7. उन्हें परिवार विशेषकर पिता का पूरा सहयोग प्राप्त होता है क्योंकि सूर्य इस नक्षत्र का स्वामी है।

  8. वे चाकू, कुल्हाड़ी या ब्लेड जैसी तेज वस्तुओं को कुशलता से संभाल सकते हैं। इस प्रकार, इन नुकीली वस्तुओं जैसे सर्जरी, कटिंग आदि के कार्य कर सकते हैं।  

 

कृतिका नक्षत्र विवाह अनुकूलता

कृतिका नक्षत्र के साथ विवाह अनुकूलता के लिए सर्वश्रेष्ठ नक्षत्र - ज्येष्ठा नक्षत्र

कृतिका नक्षत्र के साथ विवाह अनुकूलता के लिए सबसे खराब नक्षत्र - रोहिणी, उत्तर भाद्रपद, स्वाति और श्रवण

 

कृतिका नक्षत्र वैवाहिक जीवन- महिला 

  1. नक्षत्र का स्वामी सूर्य है जो अहंकार की प्रवृत्ति देता है। इस कारण से, कृतिका नक्षत्र में जन्मी महिलाएं अधिकतर वैवाहिक जीवन का पूर्ण आनंद नहीं ले पाती हैं।  
  2. ये अपने परिवार के लिए अत्यंत सावधान व देखभाल करने वाली होती हैं लेकिन कभी-कभी अपने ज़िद्दी आचरण के कारण जीवन साथी से अलग रहना पसंद करती हैं।
  3. ये अत्यंत स्वतंत्रता प्रिय होती हैं। जो कभी-कभी परिवार के दायित्वों में रुकावट बन जाता है।    

  4. कृतिका नक्षत्र की जातिकाओं में संतान संबंधी समस्याएं आमतौर पर देखी जाती हैं.
  5. अगर शादी जीवन में सही समय पर न हो, तो 37 साल की उम्र में हो सकती है।
  6. ये स्वभाव से आलोचनात्मक होती है जिसके कारण लंबे समय तक सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
  7. वे अधीनता नहीं सहन करती और एकांत जीवन जीना पसंद कर सकती हैं।

 

कृतिका नक्षत्र वैवाहिक जीवन- पुरुष 

  1. पुरुष भाग्यशाली होते हैं। इन्हें अच्छा जीवनसाथी मिलता है और ये अपने वैवाहिक जीवन में बहुत खुश रहते हैं।
  2. वे बहुत आत्मविश्वासी होते हैं और जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए उनके साथी पूरी तरह से उन पर निर्भर होते हैं। वे अपने वैवाहिक संबंधों में पत्नी पर हावी होते हैं।
  3. उन्हें एक नेक, जिम्मेदार, समर्पित और भरोसेमंद जीवन साथी मिलता है।
  4. हालांकि उनका दबंग स्वभाव कभी-कभी परेशानी पैदा करता है और उनका साथी दूर जाना पसंद कर सकता है।
  5. स्वास्थ्य से जुडी समस्याएं उनके विवाहित संबंधों में दूरियां पैदा कर सकती हैं।
  6. उन्हें अपने अति उत्साह के लिए करियर में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिसका सीधा असर उनके वैवाहिक जीवन पर पड़ सकता है।
  7. वे अरेंज मैरिज के बजाय प्रेम विवाह को प्राथमिकता दे सकते हैं।

 

कृतिका नक्षत्र पद

प्रत्येक नक्षत्र में 4 पद या चतुर्थांश होते हैं। कृतिका नक्षत्र के 4 पद हैं-

कृतिका नक्षत्र पद 1: 26°40′ – 30°00′ मेष राशि में, धनु नवमांश

इस पद में जन्में लोग लंबे, अंडाकार चेहरा, छोटे कान, उच्च नैतिकता, प्रतिष्ठित होने की कामना, कुलीन, कुलीन जीवनसाथी, उदार, साहसी, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक, आत्मविश्वास, क्रोधी

 

कृतिका नक्षत्र पद 2: 30°00′ - 33°20′ वृष राशि में, मकर नवांश

इस पद में जन्में लोग निम्न वर्ण, मध्यम शरीर निर्मित, भौतिक लगाव , तिरछी आँखें, आध्यात्मिकता में रूचि नहीं, झगड़ालू जीवनसाथी, उदार, सुंदर, दान स्वीकार नहीं करना चाहिए।

 

कृतिका नक्षत्र पद 3: 33°20′ – 36°40′ वृष राशि में, कुंभ नवमांश

इस पद में जन्में लोग सुस्ती, सिर झुकाकर चलना, बातूनी, मासूम, छोटी नाक, युवावस्था के दौरान धन की कमी, सीधा जीवनसाथी, दूसरी शादी की संभावना, शत्रु संतान

कृतिका नक्षत्र पद 4: 36°40′ – 40°00′ वृष राशि में, मीन नवांश

इस पद में जन्में लोग भारी शरीर, संवेदनशील, खर्चीला पुत्र, अच्छा जीवनसाथी, ऋण चुकाने में असमर्थता।

 

कृतिका नक्षत्र प्रतीक

कृतिका नक्षत्र का प्रतीक कटर या चाकू और अग्नि है। इसमें जन्में जातकों का सर्जरी, दवाओं, उपचार आदि गतिविधियों की तरफ झुकाव होता है।  अन्य गतिविधियां जैसे काटना, छीलना आदि भी इसी के अंतर्गत आती हैं। यह आग को भी इंगित करता है तो खाना पकाना, शुद्धिकरण या शोधन कार्य, मिट्टी के बर्तन बनाना, कांच से बनी चीज़ें , एसिड आदि जैसे व्यवसाय भी इसके अंतर्गत आते हैं। 

 

Krittika Nakshatra

 

कृतिका नक्षत्र की विशेषताएं

  1. अत्यंत आकर्षक
  2. उनमें नेतृत्व के गुण होते हैं और वे अत्यधिक आत्मविश्वासी होते हैं।
  3. स्व-निर्मित सफलता, प्रसिद्धि, मान्यता और ज्ञान उन्हें आसानी से मिल जाता है।
  4. ये जीवन के प्रति बहुत सकरात्मक होते हैं और वे जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी निराश नहीं होते हैं।
  5. उनमें दृढ़ निश्चय, अनुशासन और ईमानदारी जैसे गुण होते हैं।
  6. नक्षत्र को "सेनानी" भी कहा जाता है जो ऊर्जा, पोषण, और मातृत्व जैसे गुणों को भी दर्शाता है।
  7. आध्यात्मिक रूप से सक्रिय।

 

कृतिका नक्षत्र की कमज़ोरियाँ 

  1. क्षमाशील न होना  
  2. वे केवल मित्रों के प्रति मित्रवत स्वभाव दिखाते हैं और अधिकांश समय दूसरों से दूर रहते हैं।
  3. ये काफी आलोचनात्मक व्यक्ति होते हैं।
  4. ये स्पष्ट स्वभाव के होते हैं और कभी-कभी दूसरों की भावनाओं को आहत कर देते हैं।  
  5. वे दूसरों की नहीं सुनते या उनकी सलाह का पालन नहीं कर सकते।
  6. ये घमंडी, अहंकारी और कठोर हो सकते हैं।
  7. इनमें टीम भावना की कमी पायी जाती है।
  8. ये साझेदारी के लिए अनुपयुक्त होते हैं।

 

कृतिका नक्षत्र में जन्मे कुछ प्रसिद्ध हस्तियां / Some Famous Personalities Born in Krittika Nakshatra

इस नक्षत्र की समग्र विशेषताओं और विषयों के आधार पर, कई लोग धनी और अधिक महत्वपूर्ण रूप से प्रसिद्ध हुए हैं। उनमें से कुछ के नाम इस प्रकार हैं: 

बराक ओबामा, व्लादिमीर पुतिन, सुष्मिता सेन (मिस वर्ल्ड के ताज से सुशोभित भारतीय सुंदरता)), श्रीदेवी (दिवंगत लोकप्रिय भारतीय बॉलीवुड व्यक्तित्व), प्रिंस हैरी, आदि।

 

कृतिका नक्षत्र निर्दिष्टीकरण

कृतिका नक्षत्र स्वामी - सूर्य 

गण - राक्षस

राशि चक्र- मेष (पहले दो चरण ) और वृष (अंतिम दो चरण )

देवता- अग्नि 

तत्व- पृथ्वी

दिशा- पूर्व

प्रतीक- चाकू, अग्नि  

नाम आद्याक्षर: ए (ए), आई (ई), यू (यू), और ई (ए)

 

कृतिका नक्षत्र निर्माण, ऋण, सट्टेबाजी और जुआ में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कृतिका नक्षत्र के जातकों के लिए रसोई के उपकरण, बिजली के सामान खरीदना, घर में भूमिगत तहखाना बनाना और शेयर बाजार और सट्टा लॉटरी और जुए से जुड़े क्षेत्रों में हाथ आजमाना शुभ होता है।

ज्योतिष रहस्य