जन्म कुंडली में रोग का समय

अन्य बीमारियों के विश्लेषण करने से पहले मैं आपके लिए एक सरल कोरोना वायरस कैलकुलेटर को प्रस्तुत करने जा रहा हूं। यह कैलकुलेटर आपको इस मुश्किल घड़ी में दिमागी तौर पर शांत करके इस खतरनाक रोग से बचा सकता है। इस लेख को आगे पढ़कर आप अपनी जन्म कुंडली से अपने शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और संक्रमित होने की संभावना/ immunity and the chances of infection from a birth chart को देख सकते हैं। लेकिन उससे पहले आप इस संक्रमण के लिए बनाए गए कैलकुलेटर का प्रयोग जरूर करें, जिससे आप इस मुश्किल घड़ी में बच सकते हैं।

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इस बात को हम बहुत पहले से बोलते आ रहे हैं कि एहतियात इलाज से बेहतर है। जब हम सेहत की बात करते हैं तो हमारे पास दो विकल्प होते हैं – पहला तो बीमार होते ही हम जल्द से जल्द किसी चिकित्सक के पास दवा करवाने चले जाए और बहुत सारा धन अपने उपचार पर लगा दें। आपके पास दूसरा विकल्प ज्योतिष के रूप में है। इस विकल्प में आप समय से पहले ही बीमार होने की संभावना की जांच करने के लिए पहले से तैयारी कर लें या कुछ एहतियातन कदम उठा लें। आपको एक बात बता दूं कि आपकी कुंडली/Natal Chart के आकलन से इस बात का पता आसानी से लगाया जा सकता है कि आप कब बीमार होने वाले हैं। चलिए इस लेख की सहायता से जानते हैं कि ज्योतिष बीमारी के समय का कैसे पता लगा सकता है।

जन्म कुंडली से बीमारी की भविष्यवाणी/Predictions for Diseases from the birth chart

जन्म कुंडली से उस जातक के जीवन की सभी ज़रूरी बातों का पता चल सकता है। इन सभी बातों को समय के अनुसार आपकी कुंडली में देखा जा सकता है, जो सिर्फ एक अनुभवी ज्योतिषी ही कर सकता है। यदि कुंडली का आकलन सटीक ढंग से किया जाए तो जातक के जीवन के अलग अलग पहलुओं को जाना और समझा जा सकता है। ज्योतिष में कुछ उपकरण मौजूद है जिनकी सहायता से बीमारी के समय की एकदम सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। वैदिक ज्योतिष/Vedic Astrology में जन्म कुंडली/Birth Chart से भविष्यवाणी करते समय इन कारकों का ध्यान रखा जाता है।

जन्म कुंडली से बीमारी की भविष्यवाणी/Predictions for Diseases from the birth chart

जन्म कुंडली से उस जातक के जीवन की सभी ज़रूरी बातों का पता चल सकता है। इन सभी बातों को समय के अनुसार आपकी कुंडली में देखा जा सकता है, जो सिर्फ एक अनुभवी ज्योतिषी ही कर सकता है। यदि कुंडली का आकलन सटीक ढंग से किया जाए तो जातक के जीवन के अलग अलग पहलुओं को जाना और समझा जा सकता है। ज्योतिष में कुछ उपकरण मौजूद है जिनकी सहायता से बीमारी के समय की एकदम सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। वैदिक ज्योतिष/Vedic Astrology में जन्म कुंडली/Birth Chart से भविष्यवाणी करते समय इन कारकों का ध्यान रखा जाता है।

  1. ग्रह दशा

  2. वार्षिक चार्ट

  3. गोचर

क्या हम अपनी जन्म कुंडली से रोग प्रतिरोधक क्षमता को देख सकते हैं?/ Can we see immunity from a birth chart?

हां, हर व्यक्ति अपनी कुंडली/Horoscope से रोग प्रतिरोधक क्षमता को देख सकते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए ज्योतिष/Astrology for immunity ज्योतिष एक सबसे उत्तम उपकरण है जिससे आपकी कुंडली से रोग प्रतिरोधक क्षमता को देखा जा सकता है। इस कार्य के लिए एक ज्ञानी ज्योतिष लग्न और लग्नेश का आकलन कर सकते हैं। कुंडली में एक उत्तम लग्न या लग्न का स्वामी अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता को दर्शाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में डी-1 चार्ट के साथ साथ डी-6, षष्टमसा चार्ट का भी आकलन करना बेहद अनिवार्य होता है। आपकी कुंडली में डी-6 चार्ट का लग्न और लग्नेश में मजबूती, ताकतवर रोग प्रतिरोधक क्षमता को दर्शाता है। इसलिए आपको एक ज्ञानी ज्योतिष से डी-1 और डी-6 चार्ट का आकलन करवाना चाहिए। लेकिन जन्म कुंडली के आधार पर रोग प्रतिरोधक क्षमता का आकलन प्राथमिक संकेतक है क्योंकि अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता आपके रोजाना के कार्यक्रम और आपके खाने पीने की आदत पर निर्भर करती है। यदि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी तो आप किसी भी संक्रमण से बच सकते हैं। यदि आपको इस विषय में और जानकारी चाहिए तो इस लेख को आगे पढें।

क्या हम अपनी जन्म कुंडली से रोग प्रतिरोधक क्षमता को देख सकते हैं?/ Can we see immunity from a birth chart?

हां, हर व्यक्ति अपनी कुंडली/Horoscope से रोग प्रतिरोधक क्षमता को देख सकते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए ज्योतिष/Astrology for immunity ज्योतिष एक सबसे उत्तम उपकरण है जिससे आपकी कुंडली से रोग प्रतिरोधक क्षमता को देखा जा सकता है। इस कार्य के लिए एक ज्ञानी ज्योतिष लग्न और लग्नेश का आकलन कर सकते हैं। कुंडली में एक उत्तम लग्न या लग्न का स्वामी अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता को दर्शाता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में डी-1 चार्ट के साथ साथ डी-6, षष्टमसा चार्ट का भी आकलन करना बेहद अनिवार्य होता है। आपकी कुंडली में डी-6 चार्ट का लग्न और लग्नेश में मजबूती, ताकतवर रोग प्रतिरोधक क्षमता को दर्शाता है। इसलिए आपको एक ज्ञानी ज्योतिष से डी-1 और डी-6 चार्ट का आकलन करवाना चाहिए। लेकिन जन्म कुंडली के आधार पर रोग प्रतिरोधक क्षमता का आकलन प्राथमिक संकेतक है क्योंकि अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता आपके रोजाना के कार्यक्रम और आपके खाने पीने की आदत पर निर्भर करती है। यदि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी तो आप किसी भी संक्रमण से बच सकते हैं। यदि आपको इस विषय में और जानकारी चाहिए तो इस लेख को आगे पढें।

क्या हम संक्रमण के खतरे को जन्म कुंडली से देख सकते हैं?/ Can we see infection from a birth chart

जन्म कुंडली में संक्रमण के खतरे/Infection from birth chart का पता लगाने के लिए कई कारकों के ऊपर निर्भर होना पड़ता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता के पता लगाने से बहुत अलग है जिसमें सिर्फ लग्न, लग्नेश, डी-1, और डी-6 चार्ट का आकलन होता है। संक्रमण के खतरे को देखने से पहले ज्योतिषी उस व्यक्ति की कुंडली/Natal Chart में रोग प्रतिरोधक क्षमता का आकलन करेंगे, फिर उसके बाद वह डी-1 चार्ट में शनि के गोचर को भी ध्यान में रखेंगे। तीसरा कारक है व्यक्ति की कुंडली में वर्तमान दशा, जिससे यह उस व्यक्ति के संक्रमित होने की संभावना का पता चलता है। इसके बाद ज्योतिष में संक्रमण के संकेत के लिए छठे भाव/Sixth House के गोचर की दशा का भी आकलन करना चाहिए। जब जातक की कुंडली में अच्छी रोग प्रतिरोधक क्षमता हो, साथ में शनि का अनुकूल गोचर, अनुकूल दशा और कुंडली में छठा भाव उत्तम स्थान पर हो तो यह संयोजन संक्रमण का संकेत दे सकता है। कुंडली में मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण केs कम खतरे की तरफ इशारा करते हैं। 

रोगों के समय के लिए ग्रहों का संयोजन/Planetary combinations for Diseases Timings

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ज्योतिष में कुछ ग्रहों के संयोजन और ज्योतिषीय पहलू हैं जो जन्म कुंडली/Kundali के आधार पर रोग के समय/Disease timings as per birth chart का पता लगा सकता हे। इन सभी पहलुओं का हर व्यक्ति के जीवन पर अलग अलग प्रभाव पड़ता है और यह सभी पहलू हर व्यक्ति के जीवन में रोग के समय का पता लगाने में सक्षम होते हैं। ज्योतिषियों को उस दशा पर विचार करना चाहिए जिसमें एक ग्रह किसी व्यक्ति के जीवन चक्र को नियंत्रित करता है। इसमें दोनों लाभकारी और पीड़ित ग्रह अलग अलग दशा में होते हैं। इसके बाद हम इन ग्रहों के प्रभाव को सेहत और रोग के लिए वार्षिक राशिफल में देखेंगे। यहां पर हमें अलग अलग ग्रहों के गोचर को ध्यान में रखना होगा कि वह किस दशा में जा रहे हैं। यहां पर एक और कारक हैं जिसका ज़िक्र करना बेहद अनिवार्य हो सकता है। वह कारक वह नक्षत्र है जिसमें जातक का जन्म हुआ हो। नक्षत्रों का रोगों के कारणों और प्रभावों का सामना करते समय उस व्यक्ति के लक्षणोंक्षमताओंकमजोरियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है। बहुत सारे लोग सेहत और रोग में जन्म नक्षत्र की भूमिका से अंजान रहते हैं। लेकिन उनको जान लेना चाहिए कि नक्षत्र की यहां बहुत एहमियत होती है। चलिए अब हम आपको उन सभी ज्योतिषीय पहलुओं को समझाते हैं जो जन्म कुंडली/kundali के आधार पर किसी रोग के समय/timings of diseases in a birth chart का स्पष्ट संकेत दे सकता है।  

रोगों के लिए ग्रहों की दशा - विमशोत्री दशा

वैदिक ज्योतिष प्रणाली/Vedic Astrology System के कुछ ग्रहों की दशा, सेहत से जुड़ी सटीक भविष्यवाणी करने के लिए एक दम उत्तम होते हैं। विमशोत्री दशा/Vimshottari Dasha वैदिक ज्योतिष प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसे 120 साल का चक्र भी कहा जाता है। यह आमतौर पर जन्म के क्षण में नक्षत्र/चंद्र ग्रह के भीतर चंद्रमा की डिग्री पर आधारित होता है। यह चक्र के भीतर शुरुआती बिंदु निर्धारित करता है।

रोगों के लिए ग्रहों की दशा - विमशोत्री दशा

वैदिक ज्योतिष प्रणाली/Vedic Astrology System के कुछ ग्रहों की दशा, सेहत से जुड़ी सटीक भविष्यवाणी करने के लिए एक दम उत्तम होते हैं। विमशोत्री दशा/Vimshottari Dasha वैदिक ज्योतिष प्रणाली का एक महत्वपूर्ण अंग है जिसे 120 साल का चक्र भी कहा जाता है। यह आमतौर पर जन्म के क्षण में नक्षत्र/चंद्र ग्रह के भीतर चंद्रमा की डिग्री पर आधारित होता है। यह चक्र के भीतर शुरुआती बिंदु निर्धारित करता है।

प्रत्येक ग्रह 120 वर्ष के चक्र का एक भाग शासन करता है जिसमें सूर्य का शासन छह वर्ष का होता हैदस वर्ष के लिए चंद्रमा शासन करता हैसात वर्ष के लिए मंगल18 वर्ष के लिए राहु16 वर्ष के लिए बृहस्पति19 वर्ष तक शनि17 वर्ष के लिए बुध7 वर्ष के लिए केतु और शुक्र 20 वर्ष तक के लिए शासन करते हैं।

यह कुछ दशा है, जो छोटे छोटे दशा में बदल जाते हैं, लेकिन उसी अनुपात में बदलते हैं जिसमें वह पहले होते हैं।

कुंडली के पीडित ग्रह जैसे राहु, मंगल, और केतु की ग्रहों की दशा ही किसी व्यक्ति के रोग का संकेत देता है। विशेष रूप सेछठे भाव/Sixth House, आठवें भाव/Eighth House और बारहवें भाव/Twelfth House जैसे मुश्किल घरों के स्वामी की दशा नकारात्मक संकेत दे सकते हैं।

रोग ज्योतिष/Disease Astrology के अनुसार यदि पहले भाव के स्वामी कमजोर हो, तो यह शरीर से संबंधित रोगों का संकेत देता है।

दूसरे/Second House Lord और सातवें भाव के स्वामी/Seventh House Lord (मरका या मृत्यु वाले भाव) की दशा जातक के रोग का कारण बन सकती हैं। इस स्थिति में जातक को रोग आने वाले समय में हो सकते है। यदि आपकी कुंडली कमजोर है तो आपको सेहत से जुड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन जब आपकी कुंडली मजबूत होती है तो जातक को सेहत संबंधित परेशानी होने की संभावना कम होती है।

कुछ और ग्रहों की दशा होती है जैसे – योगिनी दशा, जामिनि चक्र दशा या अष्टोतरी दशा (108 वर्ष का चक्र) जिसका आकलन करना बहुत ज्यादा अनिवार्य होता है। बहुत सारे वैदिक ज्योतिष हैं जो अलग अलग दशा का आकलन करके ही कोई भविष्यवाणी करते हैं।

स्वास्थ्य वर्षफल - रोगों का समय/Health annual horoscope – Timings of Diseases

वार्षिक राशिफल या वर्षफल एक सटीक उपकरण है जिससे आपके सेहत और खुशी के संदर्भ में वार्षिक भविष्यवाणी के बारे में पता चलता है। यह जन्मदिन के समय से कुछ घंटों से अलग होता है क्योंकि यह जन्म के समय आकाश में उसी स्थिति में सूर्य की वास्तविक वापसी पर आधारित होता हैजो कैलेंडर के समय से अलग होता है।

स्वास्थ्य वर्षफल - रोगों का समय/Health annual horoscope – Timings of Diseases

वार्षिक राशिफल या वर्षफल एक सटीक उपकरण है जिससे आपके सेहत और खुशी के संदर्भ में वार्षिक भविष्यवाणी के बारे में पता चलता है। यह जन्मदिन के समय से कुछ घंटों से अलग होता है क्योंकि यह जन्म के समय आकाश में उसी स्थिति में सूर्य की वास्तविक वापसी पर आधारित होता हैजो कैलेंडर के समय से अलग होता है।

यह वार्षिक राशिफल वर्षफल के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है – वर्ष का परिणाम। एक अच्छा ज्योतिषी हमेशा इस पहलू का आकलन अच्छे से करता है।

रोग के लिए ग्रहों का गोचर/Planetary Transits for Diseases – Timings of Diseases as per Gochar

रोग के लिए ग्रहों का गोचर/Planetary Transits for Diseases – Timings of Diseases as per Gochar

गोचर ग्रहों की वर्तमान स्थिति होती है। जन्म कुंडली ग्रहों का गोचर जीवन में होने वाले बहुत सारे घटनाओं के लिए जिम्मेदार हो सकता है। जन्म कुंडली/Horoscope में कुछ संवेदनशील बिंदु जैसे लग्नचंद्रमा या सूर्य पर शनिमंगलया राहु और केतु जैसे पीड़ित ग्रहों का संक्रमणशारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित रोग का संकेत देता है।

ऊपर दिए गए बिंदु वैद्य हैं यदि कुछ ग्रहों की दशा आपके सेहत के विपरीत चल रही हो या फिर आपका वर्षफल अच्छा ना हो।

नाड़ी ज्योतिष में रोग का कारक/Disease Factor in Nadi Astrology पश्चिमी ज्योतिष से अलग होता है। नाड़ी ज्योतिष सबसे पहले गोचर की तरफ देखते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों के गोचर को मूल स्तर पर देखा जाता है, फिर ग्रहों की दशा का आकलन होता है और फिर वार्षिक राशिफल को भी पढ़ा जाता है, जिसे वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण गोचर भी कहा जाता है। यह वर्ष के लिए केंद्रीय विकास को चिह्नित करता है। फिर भी इसकी महत्वता और प्रभाव को कम नहीं आंका जा सकता।

सामान्य क्षमता, दशा प्रणाली को प्रस्तुत करती है; गोचर वास्तविकता को दर्शाता है। गोचर या फिर दशा के स्वामी (वह ग्रह जो ग्रहों की वर्तमान दशा पर शासन करते हैं) पर्याप्त होते हैं।

रोग में नक्षत्र की महत्वता

नक्षत्र का अर्थ चंद्रमा की वर्तमान स्थिति होती है, जिसमें एक नक्षत्र एक दिन का होता है। फिर भी इसका प्रयोग दूसरे ग्रहों की स्थिति के लिए भी किया जाता है। हमें नक्षत्र को पहचानने के लिए तीन परिप्रेक्ष्यों का आकलन करना होता है।

रोग में नक्षत्र की महत्वता

नक्षत्र का अर्थ चंद्रमा की वर्तमान स्थिति होती है, जिसमें एक नक्षत्र एक दिन का होता है। फिर भी इसका प्रयोग दूसरे ग्रहों की स्थिति के लिए भी किया जाता है। हमें नक्षत्र को पहचानने के लिए तीन परिप्रेक्ष्यों का आकलन करना होता है।

पहला परिप्रेक्ष्य – यह अनुभाग में राशियों की प्रकृति के संबंध में है। इस स्थिति में नक्षत्र आधे से भी कम राशियों में होता है। यह उस चेतावनी को दर्शाता हैं जो नक्षत्र गठित करता हैफिर उस छोटे क्षेत्र की विशिष्टता को जोड़ता है लेकिन यह राशि चक्र और सत्तारूढ़ ग्रह के मूल अर्थ के विपरीत नहीं हो सकता। उदाहरण के तौर पर, पहला नक्षत्र अश्विनी राशि चक्र मेष राशि के प्रथम भाग की उस ऊर्जा को दर्शाता है जिसमें यह स्थित होता हैयह राशि के विशिष्ट भाग में मेष के गुणों को भी परिभाषित करता है। विश्लेषणात्मक उद्देश्य के लिए इस परिप्रेक्ष्य की बहुत महत्वता होती है।

दूसरा परिप्रेक्ष्य – यह उन ग्रहों के संबंध में है जो नक्षत्रों पर शासन करते हैं। यह परिप्रेक्ष्य भविष्यवाणी के मामले में बहुत ज्यादा महत्व रखता है। नक्षत्र के पास कुछ उनके शासन करने वाले ग्रह होते है, जो उन ग्रहों से अलग होते हैं और उन राशियों को नियंत्रित करते हैं। और कभी कभी वह उन पर विपरीत प्रभाव भी डाल सकते हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो नक्षत्र पर शुक्र शासन करें और वह उग्र राशि चक्र में मौजूद है जिसके शासक मंगल, सूर्य और बृहस्पति होते हैं। यह सभी शुक्र ग्रह के सामान्य शत्रु हैं। इसका कारण है नक्षत्र स्वामी, जिसमें राशि के स्वामी के विपरीत समय की गति के माध्यम से ग्रहों की ऊर्जाओं के प्रसार को दर्शाता है। नक्षत्र के शासक का अस्थायी प्रभाव मुख्य रूप से जन्म कुंडली में नक्षत्र में तैनात ग्रहों की दशा के दौरान सामने आता है।

नक्षत्र वैदिक ज्योतिष के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण दशा या ग्रहों की दशा प्रणाली की अंतर्निहित संरचना का निर्माण करते हैंजैसे कि सबसे अधिक प्रयोग किए जाने वाला 120 साल का विमशोत्री दशा चक्र है। अनाकर्षक घटनाओं की योजना के विश्लेषण के लिएनक्षत्र और नक्षत्र के स्वामी (ग्रह दशा पर शासन करने वाले ग्रह) आम तौर पर महत्वपूर्ण होते हैं। उदाहरण के लिएयदि कोई शुक्र दशा चल रही होशुक्र के साथ सिंह राशि में दो अंश/Degree पर स्थित होतो माघ मेंया केतु द्वारा शासित नक्षत्र मेंदशा के विस्तार की संभावना तलाशने के लिए केतु की स्थिति के साथ-साथ सूर्य (सिंह राशि के भगवान) का भी सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए।

तीसरा परिप्रेक्ष्य – तीसरा परिप्रेक्ष्य उस नक्षत्र से संबंधित होता है जो उसकी व्यक्तिगत गुणों के बारे में खुद ही बता दे और यह विश्लेषण के लिए एक महत्वपूर्ण कारक भी है। इसके संबंध में सामान्य और विशिष्ट दोनों ही तरीकों से वैदिक ज्योतिष में नक्षत्र के बारे में चित्रित करता है।

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नक्षत्र सात भागों में बांटा है –

1. ध्रुव/Fixed Nakshatra - यदि कोई प्रक्रिया इस समय की जा रही होगी, तो यह जातक को सकारात्मक परिणाम देता है। जन्म कुंडली/Natal Chart के अनुसार, यह जातक के चरित्र को सक्षक्त करता है और शारीरिक कल्याण और समृद्धि के लिए उपयोगी होता है। आमतौर पर इन नक्षत्रों को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ध्रुव नक्षत्र में तीन उत्तर (उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, और उत्तरा भद्रा) और एक रोहिणी होती है, जिन्हें बाहरी कार्यों के लिए सबसे अनुकूल नक्षत्र माना जाता है। यदि चंद्रमा आपकी कुंडली में सटीक जगह उपस्थित होगा, तो यह जातक की सेहत के संदर्भ में अच्छे संकेत देता है।
2. तीक्ष्ण नक्षत्र/Harsh – यह नक्षत्र आक्रामक, मुखर और विनाशकारी कार्य के लिए उपयुक्त होते है, लेकिन यह रचनात्मक मामलों के लिए प्रतिकूल होते है। जो जातक इस नक्षत्र में जन्म लेता है, वह बहुत बीमार रहता है। तीक्ष्ण नक्षत्र अश्लेषा, मूला और ज्येष्ठा नक्षत्र भी इसमें शामिल रहते हैं। अधिकांश भाग के लिए तीन सबसे अशुभ नक्षत्र और आर्द्रा नक्षत्र को सबसे जरूरी माना जाता है। आर्द्रा नक्षत्र को भी बुरा नक्षत्र माना जाता है। यदि चंद्रमा सही स्थान पर उपस्थित ना हो तो यह जातक के जीवन को कष्ट से भर सकता है और उसके जवानी में बहुत परेशानी भी खड़ी कर सकता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब जातक का जन्म, मूला की पहली तिमाही (तीन डिग्री बीस मिनट) और आखिरी तिमाही आश्लेषा या ज्येष्ठ के चंद्रमा के साथ हो।
3. उग्र नक्षत्र/Fierce –उग्र नक्षत्र बलशाली और स्व-आश्वासन वाली गतिविधियों के लिए अतिरिक्त रूप से उपयोगी है, लेकिन वह तीव्र नक्षत्र के समान नहीं होता है। यह नक्षत्र जातक के अच्छे चरित्र को दर्शाता है लेकिन साथ साथ यह जातक के बीमार होने की संभावना को भी बताता है। फिर भी जातक कुछ गतिविधियों के कारण पुरस्कार भी जीत सकता है। उग्र नक्षत्र में भरनी और मघा के समान तीन पूर्वा होते हैं(पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, और पूर्वा भद्रा)। यदि चंद्रमा अपने उत्तम स्थान पर नहीं होगा तो यह नक्षत्र की परेशानियों को बढ़ा सकता है। लेकिन चंद्रमा के स्थिति से जातक को एकजुटता और दृढ़ता की सभ्य व्यवस्था मिलती है। माघ के पहले तिमाही या तीन डिग्री बीस मिनट में चंद्रमा का समझौता इनमें से सबसे अधिक समस्या खड़ी कर सकता है।
4. क्षिप्रा नक्षत्र – जो भी गतिविधियां इस नक्षत्र में होती हैं, उसमें सकारात्मक परिणाम आता है। लेकिन अभी तक यह नतीजे इतने प्रभावित नहीं होते जितने ध्रुव नक्षत्रों के तहत बढ़ते हैं। इसलिए, जब तक वह असाधारण रूप से भविष्यद्वक्ता हैं, तब उनके परिणामों को प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसके बाद भी यह तेजता, चतुराई, और शरीर और मन की अनुकूलन क्षमता और कल्याण और विकास के लिए उपयोगी है। क्षिप्रा नक्षत्र के साथ अश्विनी, हस्त और पुष्य (विवाह की योजनाओं को छोड़ कर बाकि सभी योजनाओं के लिए यह नक्षत्र सबसे अच्छा माने जाते हैं और इसे पूरी दुनिया में भी प्रयोग किया जाता है) नक्षत्र भी शामिल होते हैं। चंद्रमा का उत्तम स्थान में मौजूदगी जातक को उपस्थिति जीवन शक्ति, आविष्कारशीलता और अनिवार्यता दिलावाती है।
5.  मृदु नक्षत्र/Tender – यह रिश्ते, पत्राचार, और रचनात्मक प्रयास के लिए सबसे अच्छा नक्षत्र होता है। यह शरीर और मन की नाजुक गुणवत्ता, सुखदता, विनम्रता, या प्रभावकारिता देते हैं और आमतौर पर जीवन काल के लिए सहायक होते हैं। मृदु नक्षत्र मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा और रेवती से मिलकर बना है। यह सभी नक्षत्र आमतौर पर कल्याण के लिए उपयोगी होते हैं; हालांकि, वह एक पीडित चंद्रमा की निकटता के कारण, शक्तिहीनता को दर्शाता है।
6.  मिश्रित या तीक्ष्ण और मृदु-तीक्ष्‍ण दोनों नक्षत्र दो सभाओं की विशेषताओं में शामिल होते हैं। इनमें कृतिका और विशाखा शामिल हैं।
7.  चर नक्षत्र – यह नक्षत्र तेजी से सकारात्मक परिणाम देता है, लेकिन यह परिणाम कुछ समय के लिए ही होते हैं। यह जातक को शरीर और मन दोनों में लचीलापन और तेजी को पुरस्कार के रूप में देते हैं क्योंकि यह उनके सेहत के लिए भयानक नहीं हैं। लेकिन जब भी यह आपके पक्ष में नहीं होगा तो यह आपके लिए मानसिक अनिश्चितता का कारण बन सकता है। यह नक्षत्र ऊपर लिखे सभी नक्षत्रों की तरह अच्छे नहीं हैं लेकिन इसका प्रयोग सभी करते हैं। चर नक्षत्र में पुणरवासु, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठ और शतभिषा शामिल हैं।

इस लक्षण के बावजूद, कुछ नक्षत्र विशेष रूप से स्वास्थ्य लाभ के लिए उपयोगी हैं। इनमें अश्विनी नक्षत्र को भी शामिल किया गया हैजो नवीकरण, अभ्यास, और पुनरुद्धार के लिए सहायक है। शतभिषा नक्षत्र हैजो शुद्धिकरण के लिए प्रत्यक्ष रूप से मदद करता हैमृगशिरा नक्षत्र हैजो बनाए रखने और पुनर्स्थापन के लिए उपयोगी है। रोहिणी नक्षत्रजो घावों और ऊतक विकास/Tissue Development को पुन: उत्पन्न करने में मदद करती हैपुष्य नक्षत्र उपचार और निर्माण करने में मदद करता हैऔर श्रवण नक्षत्र सलाह देने और मानसिक सुधार के लिए उपयोगी है।

निष्कर्ष –वर्तमान समय में लोगों की जीवनशैली बहुत बदल गई है। लोग अब ज्यादा बाहर का खाना खाने लगे हैं, व्यायाम नहीं करते, अपने कार्य में ज्यादा व्यस्त रहते हैं और साथ में अपने आप के लिए समय नहीं निकालते हैं। इसकी वजह से लोगों की सेहत खराब रहने लगी है और अब वह सारा धन महंगी दवाओं और उपचार में लगा रहे हैं। लेकिन ज़रा सोचिए कि आपको अपने जीवन में आने वाली समस्याओं के बारे में पहले से ही पता चल जाए तो कैसा होगा। आपको यह भी पता चल जाएगा कि आपको कब कौन सी बीमारी परेशान करेगी। आपके मन में प्रश्न जरूर उठ रहा होगा कि यह कैसे होगा? क्या ज्योतिष से सेहत की भविष्यवाणी की जा सकती हैCan astrology predict health problems? कुंडली में कौन से ग्रह रोग के बारे में बताते हैंDoes any planet in the horoscope show health problems? सेहत से जुड़ी भविष्यवाणी कैसे की जा सकती है? Who can predict health problems? क्या ज्योतिष आपकी सेहत को सुधार सकता है? Can astrology support your health?

इसका जवाब बेहद ही सरल है। इस बात का पता आपकी कुंडली के आकलन से लगाया जा सकता है। एक ज्ञानी ज्योतिषी आपकी कुंडली में नक्षत्रों की दशा और ग्रहों के संयोजन को देखकर आपके सेहत के बारे में बता सकता है। वह आपकी कुंडली के आकलन से आपके रोग के सटीक/Timings of disease in birth chart समय की भविष्यवाणी कर सकता है।

स्वास्थ्य पर किसी विशेष मार्गदर्शन के लिएआप निम्नलिखित तरीकों से सहायता ले सकते हैं –

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आप चिकित्सा ज्योतिष और गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों पर ज्योतिष आपकी मदद कैसे करता हैजन्म कुंडली में नशीली दवाओं और शराब की लतजन्म कुंडली में विशिष्ट रोग संकेत, यौन स्वास्थ्य का बारे में हमारे पेज से पढ़ सकते हैं।