आपकी कुंडली में निर्वासन और आप्रवासन का योग

सबसे पहले हमें यह समझना होगा की निर्वासन के मायने क्या हैं? निर्वासन का मतलब है की जब, वह दूसरा देश जहां आप रह रहे हैं, आपके वहां और रुकने पर प्रतिबन्ध लगा देता है। वहां रहने वाले व्यक्ति को अचानक ही दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। निर्वासन/ या उससे सम्बंधित समस्याओं  के कई कारण हो सकते हैं इनमें से कई का निवारण किया जा सकता है, क्योंकि आपके कर्म और कृत्य उसमें सम्मिलित हैं। लेकिन इसमें से कुछ आपके नियंत्रण से बाहर हैं

बार-बार बदलते कानून, जातक की स्थिति में परिवर्तन  और अवैध प्रवास मुख्य रूप से समय से पहले निर्वासन के मुख्य कारण  हैं। हालांकि, आपकी जन्म कुंडली/ Birth chart में  में इन निर्वासन समस्याओं  के संकेत होते हैं

कुछ तरीके हैं जो आपको बताते हैं कि उस व्यक्ति ने  ने अपना निवास खो दिया है। वह इस प्रकार हैं

1. यदि आप एक वर्ष या उससे अधिक समय तक देश में नहीं रहे हैं।

2. आपके वीज़ा की  अवधि समाप्त हो गयी है, और आपको नया वीज़ा नहीं मिला है।

3. आपके वीज़ा की  अवधि समाप्त होने वाली है, और आपको नया वीज़ा नहीं मिल सकता

4. यदि आपने कुछ धोखाधड़ी की है या आपको फंसाया गया है ।

5. यदि आपने कुछ विवाह सम्बंधित धोखाधड़ी की है।

6. अगर आप क़ानून के मुजरिम हैं

7. अगर आपके खिलाफ कोई आपराधिक सजा की मांग है।

8. यदि आपने एक नौकरी खो दी है और दूसरी मिलने की संभावना नहीं है।

9. उस देश में अपनी शिक्षा पूरी करने के पश्चात आपको नौकरी नहीं मिली।

10. आप उस देश में पहले  ही अवैध रूप से रह रहे हैं।

11. आपकी शरणार्थी स्थिति समाप्त या परिवर्तित हो गयी है।

12. आपके देश में आपके लिए कुछ बहुत ज़रूरी काम है।

उपरोक्त में से कोइ भी स्थिति आपको वह देश छोड़ने को मजबूर कर सकती हैं, जहां आपने पूरी ज़िंदगी रुकने का निर्णय लिया था।

निर्वासन और प्रवास के मुख्य कारण/ Main reasons deportation and immigration issues

निर्वासन और प्रवास के कारणों को दो मुख्य वर्गों में बांटा जा सकता है।

निर्वासन और प्रवास के मुख्य कारण/ Main reasons deportation and immigration issues

निर्वासन और प्रवास के कारणों को दो मुख्य वर्गों में बांटा जा सकता है।

पहला, उस देश के क़ानून में परिवर्तन। यहां व्यक्ति के पास कोई महत्वपूर्ण बात या पैंतरा नहीं होता और वह स्थिति उसके नियंत्रण से परे दिखताी है।

दूसरा वर्ग, वह है जहां व्यक्ति किसी और के  कृत्यों और गतिविधियों के कारण निर्वासन और प्रवास मुद्दों में शामिल हो जाता है।

हालांकि, इन दोनों परिस्थितियों में आपकी जन्म कुंडली/ Horoscope में निर्वासन और प्रवास के संकेत होते हैं। निर्वासन और प्रवास के इन संकेतों का कुंडली में पता लगाना चुनौती भरा हो सकता है, लेकिन एक विशेषज्ञ ज्योतिषी आपको निश्चित तौर पर बता सकता है कि आपकी जन्म कुंडली में  निर्वासन या प्रवास का योग है या नहीं

जन्म कुंडली में निर्वासन के संकेत/ Deportation indications in your birth chart

आपकी जन्म कुंडली से निर्वासन के योग स्पष्ट संकेत होंगे। जैसा कि समझाया गया है, यह निर्वासन समस्याएं उस देश के कानून में परिवर्तन के चलते हो सकती हैं, या आपके कृत्यों के फलस्वरूप निर्वासन या प्रवास का योग हो  सकता है।

जन्म कुंडली में निर्वासन के संकेत/ Deportation indications in your birth chart

आपकी जन्म कुंडली से निर्वासन के योग स्पष्ट संकेत होंगे। जैसा कि समझाया गया है, यह निर्वासन समस्याएं उस देश के कानून में परिवर्तन के चलते हो सकती हैं, या आपके कृत्यों के फलस्वरूप निर्वासन या प्रवास का योग हो  सकता है।

अब हमें यह समझना चाहिए की ज्योतिष आपकी कुंडली में निर्वासन के योग को कैसे देखता है। इन निर्वासन समस्याओं के लिए कुछ विशेष गृह ज़िम्मेदार होते हैं। हो सकता है की यह समस्याएं उस वक्त ना हों जब आप किसी दूसरे देश में जाते हैं, बल्कि इसके पश्चात भी ये उभर  सकती  हैं ।यह पता लगाने के लिए के लिए कि क्या उपरोक्त शर्तों में से कोई भी उभर सकती है या नहीं, यह एक सही मार्गदर्शक है।

एक अनुभवी ज्योतिषी को ढूंढने के लिए जो एक बेहतर मार्ग दिखाएं, एक व्यक्ति को बुद्धिमान होना चाहिए। आइए एक कुंडली में निर्वासन  की गणना करने की कुछ ज्योतिषीय पद्धतियों का आकलन करें

जन्म कुंडली में विदेश में समस्याओं का संकेत/ Indication of problems in a foreign land in the birth chart

मैं ज्योतिष के सभी पहलुओं पर गौर कर रहा हूं जो विदेश में समस्याओं का संकेत देते हैं। यह  समस्याएं निर्वासन, सामुदायिक झड़प, प्रवास समस्याएं या कभी-कभी स्वास्थ्य-संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे सवालों के स्पष्ट संकेत हैं जो जन्म कुंडली में किसी विदेश में समस्या का सामना  कर सकते हैं।

जन्म कुंडली में विदेश में समस्याओं का संकेत/ Indication of problems in a foreign land in the birth chart

मैं ज्योतिष के सभी पहलुओं पर गौर कर रहा हूं जो विदेश में समस्याओं का संकेत देते हैं। यह  समस्याएं निर्वासन, सामुदायिक झड़प, प्रवास समस्याएं या कभी-कभी स्वास्थ्य-संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे सवालों के स्पष्ट संकेत हैं जो जन्म कुंडली में किसी विदेश में समस्या का सामना  कर सकते हैं।

विदेश में समस्याओं के लिए जिम्मेदार ग्रहों और भावों  के अलावा, क्या आप जानते हैं कि कुछ  राशियां इन समस्याओं से अधिक ग्रस्त हैं? हां, आपने सही पढ़ा, राशियों और निर्वासन जोखिम का परस्पर सम्बन्ध है

ज्योतिष में किसी विदेश से निर्वासन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राशि है।

गतिविधि के अनुसार राशि तीन प्रकार की होती हैं- चर राशि या चल राशि, स्थिर राशि या निश्चित राशि और दोहरी या सामान्य राशि

1. चर राशि या चल राशि मेष, कर्क, तुला और मकर हैं।

2. स्थिर राशि या निश्चित राशि वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ हैं।

3. दोहरी राशियाँ मिथुन, कन्या, धनु और मीन हैं।

निर्वासन के सन्दर्भ में, ज्योतिष में, चर राशि या चल राशि बेहद महत्वपूर्ण है। जंगम राशि का अर्थ है- इनमें परिवर्तन की प्रवृत्ति अधिक होती है। इसलिए इन सभी राशियों में ग्रहों  के एक बार स्थापित होने के पश्चात वह जातक को मूल परिवर्तन जैसे निवास स्थान में परिवर्तन, नौकरी बदलना या देश बदलने की प्रवृत्ति  देते हैं इस पर बुरा प्रभाव निर्वासन और आप्रवासन की समस्या दे सकता है  जो निर्वासन योग/ Deportation Yogas बनाता है

स्थिर राशियों के अंतर्गत आने वाले ग्रह, एक स्थान पर ही रहते हैं। वह जातक जिनकी स्थिर राशि  में अधिक ग्रह हैं, वह अक्सर अपना निवास या नौकरी नहीं बदल पाते वापसी का अर्थ है देश या निवास का परिवर्तन। नियत घरों वाले ग्रह, लौटने की संभावना बढ़ाते हैं और बुरे प्रभाव निर्वासन योग बना सकते हैं

दोहरी  राशियाँ आपके लघु- अवधीय निर्वासन का संकेत देती हैं । जैसे अगर, आपकी दोहरी राशि में कई ग्रह हैं तो आप बहुत थोड़े समय के लिए वापस स्वदेश लौट सकते हैं, शायद एक महीने के लिए। लेकिन अगर आपकी कुंडली/Natal Chart में दुष्प्रभाव है, तो यह निर्वासन योग बना सकता है, और आपका वीजा अटक सकता है। 

जो  राशियां गुणवत्ता या तत्व के आधार पर विभाजित होती हैं, वह हैं अग्नि, धरती, वायु, और जल

मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व प्रधान राशियां हैं

वृषभ, कन्या और मकर, धरती तत्व प्रधान राशियां हैं

वायु तत्व प्रधान राशियां मिथुन, तुला और कुंभ हैं

जल तत्व प्रधान राशियां कर्क, वृश्चिक और मीन हैं

यात्रा के लिए कर्क, वृश्चिक और मीन सरीखी जल तत्व प्रधान राशियां महत्वपूर्ण हैं। विदेश जाने के लिए, हमें समुद्र के पार करना पड़ सकता है। इसलिए, सभी जल तत्व प्रधान राशि??

मुझे निर्वासित क्यों किया जा रहा है / क्या ज्योतिषी इसमें मेरी सहायता कर सकता है?/ Why am I getting deported/ Can an astrologer help me?

अगर मैं निर्वासन या प्रवास समस्याओं का सामना कर रहा हूं तो क्या ज्योतिष मेरी मदद कर सकता है। यदि कोई निर्वासन  का सामना कर रहा है तो हाँ, ज्योतिष आपकी मदद कर सकता है। पुराने दिनों में, अपने देश को छोड़ विदेश जाने को एक अभिशाप की तरह देखा जाता था। लेकिन, समय के साथ, यह अभिशाप एक आशीर्वाद में बदल गया है। वापस जाने के लिए मुख्य भाव  बारहवाँ, नौवां/ Ninth House  और लग्न /Lagna है।

मुझे निर्वासित क्यों किया जा रहा है / क्या ज्योतिषी इसमें मेरी सहायता कर सकता है?/ Why am I getting deported/ Can an astrologer help me?

अगर मैं निर्वासन या प्रवास समस्याओं का सामना कर रहा हूं तो क्या ज्योतिष मेरी मदद कर सकता है। यदि कोई निर्वासन  का सामना कर रहा है तो हाँ, ज्योतिष आपकी मदद कर सकता है। पुराने दिनों में, अपने देश को छोड़ विदेश जाने को एक अभिशाप की तरह देखा जाता था। लेकिन, समय के साथ, यह अभिशाप एक आशीर्वाद में बदल गया है। वापस जाने के लिए मुख्य भाव  बारहवाँ, नौवां/ Ninth House  और लग्न /Lagna है।

बारहवां भाव/ Twelfth House विदेश का भाव है, इसलिए ज्योतिष में निर्वासन के लिए यह महत्वपूर्ण है। यदि चंद्रमा शुक्र के साथ बारहवें भाव में है, तो यह निर्वासन दर्शाता है। यदि राहु भी इसमें शामिल है, तो यह देश वापस जाने का प्रबल संकेत बन सकता है। यदि बारहवें भाव में शनि जैसा ग्रह है, तो व्यक्ति का किसी विदेशी देश के प्रति प्रबल झुकाव होगा।

नौवां भाव भाग्य, यात्रा आदि को दर्शाता है, इसलिए, यह ज्योतिष में निर्वासन हेतु महत्वपूर्ण है। जब नौवें भाव का स्वामी/ Lord of the ninth house बारहवें भाव में हो, या बारहवें भाव का स्वामी नौवें  भाव में हो तो यह दर्शाता है कि आपका भाग्योदय विदेश में है । ग्रहों का एक समूह जैसे की चौथे और पांचवे ग्रहों के स्वामी अगर बारहवें या नौवें भाव में  है तो, ज्योतिष के अनुसार ये निर्वासन का एक प्रबल संकेत है।

अगला महत्त्वपूर्ण भाव लग्न है। लगन स्वयं को दर्शाता है। लग्न की स्वीकृति के बिना कुंडली/ Kundali में कुछ भी नहीं हो सकता । अतः, यदि लग्न का स्वामी बारहवें भाव  या लग्न स्वामी/ lord of the twelvewth house के साथ संबंध बनाता है, तो यह ज्योतिष के अनुसार निर्वासन का एक प्रबल संकेत है। यदि यह संबंध कर्क, मीन, आदि जैसे किसी भी जल-तत्व राशि में, या तुला या मकर जैसे चल राशि में होता है, तो इसकी संभावना बहुत सुदृढ़ हो जाती है ।

संक्षेप में, हमें लग्न स्वामी, नौवें भाव और बारहवें भाव के स्वामी के मध्य सम्बन्ध, पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए । यदि इन संबंधों में या जलीय राशि और मुक्त राशि शामिल है, तो यह एक प्रभावी संकेतक हैं ।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, निर्वासन की संभावनाएं उपरोक्त कथनों के संबंध की दृढ़ता पर आश्रित हैं।

पर यहां एक और ऐसा भाव है जिसपर हमें विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है , क्योंकि इसके संकेतों  के बिना विदेश जाना और वापस आना असंभव हैं। चौथा भाव जन्मभूमि या बसावट वाले देश का संकेतक है । तो, चौथे भाव या उसके स्वामी के ग्रह से कोई भी विपरीत प्रभाव के निर्वासन की संभावना को बढ़ा सकता है।यदि चौथे भाव का स्वामी/ lord of the fourth house छठे/ sixth house आठवें/ eighth house और बारहवें भाव में है और कुपित है और साथ ही साथ नौवें भाव और बारहवें भाव या उनके स्वामी के बीच संबंध है, तो ज्योतिष के अनुसार निर्वासन की प्रबल संभावना है । यदि राहु / केतु, सूर्य या शनि जैसे ग्रह चतुर्थ भाव में हों, तो घर वापसी की संभावना बढ़ जाती है।

जब चौथा भाव या स्वामी कुपित या कमजोर नहीं होते हैं, तो व्यक्ति निवासी देश नहीं छोड़ता है। यदि नौवें भाव और बारहवें भाव के बीच कोई संबंध है, लेकिन चौथा घर मजबूत है, तो जातक के लौटने की संभावना है, किन्तु जातक कुछ कारणों से वापस नहीं जा पायेगा।पांचवें  /fifth house और दसवें भाव/ 10th house के संबंध में एक मजबूत चौथा भाव, निवासी देश में भी बेहतरीन अवसर प्रदान करता है और जातक को बाहर जाने की ज़रूरत महसूस नहीं होगी।

दो भाव जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है, वह है सातवां भाव /7th House और तीसरा भाव/Third House)। निर्वासन से संबंधित है। जब सातवां भाव बारहवें भाव या राहु / केतु जैसे ग्रह के साथ शामिल होता है, तो व्यावसायिक उद्देश्य या व्यापार- सम्बन्धी यात्रा के कारण वापस जाने की संभावना होती है।

तीसरा भाव छोटी यात्राओं का संकेत देता है। यह सदा निर्वासन से सीधे जुड़ा नहीं होता , लेकिन यह छोटी यात्राओं पर जाने की की प्रवृत्ति या झुकाव दे सकता है। यदि चंद्रमा या केतु जैसे ग्रह तृतीय भाव में स्थित हैं, तो जातक की यात्रा करने की इच्छा होगी ।

तीसरे, सातवें,पहले और नौवें भाव के मध्य एक जल और परिवर्तन राशि में निर्वासन संबंध पर्याप्त हैं, लेकिन ज्योतिष में स्थायी निर्वासन बारहवें भाव या उसके स्वामी के शामिल हुए बिना नहीं हो सकता।

हमें यह याद रखना चाहिए कि बृहस्पति का संयोजन  नहीं बनना चाहिए।

जन्म कुंडली में निर्वासन के ज्योतिषीय संकेत।

निर्वासन और विदेशी बसावट हेतु ग्रह संयोजन/ Planetary combinations for the deportation and foreign settlement

अब, उन ग्रहों के संयोजन की बात करते हैं जो ज्योतिष के अनुसार निर्वासन का वादा करते हैं। नीचे, कुंडली में दोष निवारण हेतु योग देखने का एक प्रभावी तरीका बताया गया है:

निर्वासन और विदेशी बसावट हेतु ग्रह संयोजन/ Planetary combinations for the deportation and foreign settlement

अब, उन ग्रहों के संयोजन की बात करते हैं जो ज्योतिष के अनुसार निर्वासन का वादा करते हैं। नीचे, कुंडली में दोष निवारण हेतु योग देखने का एक प्रभावी तरीका बताया गया है:

  1. यदि चतुर्थ भाव या का स्वामी लग्न से कुपित है ।

  2. राहु और केतु को चौथे भाव या उसके स्वामी के साथ  जुड़ाव नक्षत्र विनिमय के माध्यम से है। जब भी चतुर्थ भाव कुपित होता है, और उसका स्वामी छठे/ 6th house, आठवें/ Eighth House या बारहवें भाव/ Twelfth House की तरह दुस्थान में होता है मे, तो जातक अपने देश को विदेशों में बसने हेतु छोड़ देता है।

  1. हमें लग्न कारकों के साथ-साथ चंद्रमा को नवमांश और चतुर्थेश या डी 4 में भी देखना चाहिए ।

  2. यदि किसी कुंडली/Kundli का नौवां या बारहवां भाव चल या जल राशियों में आता है या नौवें या बारहवें भाव का स्वामी/Lord of the Twelfth house को जल या चल राशियों में होता है, तो यह निर्वासन की ओर जाता है।

  3. दशमेश में पांचवें, नौवें और बारहवें भाव के स्वामी/Lords of the fifth, ninth and twelfth houses का संबंध कुछ पेशेवर कारणों से यात्रा करने का संकेत देता है। ये लोग आमतौर पर कुशल पेशेवर जैसे (वैज्ञानिक, प्रोफेसर आदि) होते हैं।

  4. यह ध्यान रखना चाहिए कि यदि राहु नौवें भाव के स्वामी (Lord of the Ninth house) के साथ बारहवें भाव में स्थित है और एक जलराशि में है, तो यह संयोजन दशा-अंतर्दशा में निर्वासन देगा। बारहवें भाव में राहु या शनि जैसे ग्रह निर्वासन का कारण बन सकते हैं।

  5. जब पहले या सातवें भाव का स्वामी आठवें, नौवें या बारहवें भाव या उसके स्वामी के साथ हो, तो यह विवाह के पश्चात निर्वासन का संकेतक है।

यदि लग्न/ First house और लग्न का स्वामी/ Lord of the first house दोनों चल- या द्विस्वभाव राशियों में हैं, तो यह निर्वासन दर्शाता है। पहला भाव स्वयं को इंगित करता है। तो, जब राशि, एक व्यक्ति और राशि के स्वामी को चलित या द्विस्वभाव राशियों का संकेत करती हैं (इसका मतलब है चलना), तो यह किसी व्यक्ति के लिए निर्वासन का योग बना सकता है।

पुनर्वास की भविष्यवाणियाँ/ Relocation prediction

यदि आपकी कुंडली में वापसी की संभावनाएं हैं, तो जातक कभी भी पुनर्वास हेतु जा सकता है, जिसका उल्लेख निम्नानुसार है।

  1. नौवें भाव के स्वामी /Lord of the ninth House या बारहवें भाव के स्वामी /Lord of the twelfth house की दशा-अंतर्दशा, या ग्रह जो बारहवें भाव के स्वामी या बारहवें भाव से जुड़े हैं।
  2. शुक्र के दशा, राहु / केतु, चंद्रमा, और शनि अगर ये ग्रह बारहवें भाव से जुड़े हैं।
  3. गोचर के दौरान, जब राहु या शनि जैसे ग्रह अष्टम भाव या चंद्रमा नक्षत्र में आते हैं, तो यह यात्रा के लिए भी अनुकूल समय होता है।
  4. राहु की दशा ज्योतिष के अनुसार पुनर्वास हेतु आवश्यक  है, क्योंकि राहु का विदेश से जुड़ाव हेतु विशेष महत्तव है। शनि की दशा  भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
  5. जो लोग एक वर्ष में एक बार छुट्टी मनाने विदेश जाते हैं, आमतौर पर उनकी कुंडली में निर्वासन का कोई महत्वपूर्ण संयोजन नहीं होता है, लेकिन शायद गोचर या चौथा भाव किसी कारण कुपित हो सकता है ।

निर्वासन के ज्योतिषीय कारण/ Astrological reasons of deportation

अब, इस उत्तर को समझें कि किसी व्यक्ति की वापसी और पुनर्वास क्यों होगा।

निर्वासन के ज्योतिषीय कारण/ Astrological reasons of deportation

अब, इस उत्तर को समझें कि किसी व्यक्ति की वापसी और पुनर्वास क्यों होगा।

यदि पांचवें ,दसवें, नौवें, सातवें, बारहवें भावों और उनके स्वामी के मध्य एक मजबूत संबंध है, तो व्यक्ति वापस जा सकता है, और उसका वीजा शिक्षा के उपरान्त समाप्त हो जाता है।

पांचवां भाव/fifth House बुद्धि का भाव है और नौवां भाव/ Ninth House लंबी दूरी की यात्रा के साथ-साथ उच्च शिक्षा का भाव है। संबंधित ग्रहों में से कुछ चल राशि या जल राशि में होने चाहिए।

एक व्यक्ति को सही दशा में भी चलना चाहिए। चौथे, पांचवें , सातवें, आठवें,नौवें,दसवें, बारहवें भाव के बीच संबंध को शिक्षा पूर्ण होने के उपरान्त पुनर्वास के सत्यापन और एक उचित कार्यस्थल नहीं मिलने हेतु राहु, शनि और चंद्रमा के साथ जांचने की आवश्यकता है ।

हमें ऐसे व्यक्ति के ग्रह संयोजन को समझने की आवश्यकता है जो कुछ आपराधिक आरोपों के चलते वापस लौटता है। इसके लिए, हमें पहले पांचवें/ Fifth House, सातवें/ Seventh House and its lords, आठवें/ Eight House and its lords, नौवें/ Ninth House and its lords,दसवें/Tenth House and its lords, बारहवें भाव/Twelfth House and its lords और उनके स्वामियों के साथ  के साथ राहु, चंद्रमा और सूर्य के मध्य का सम्बन्ध जांचना होगा। कुंडली /Horoscope में विभिन्न राजयोग और धन योग मौजूद होने चाहिए। दशा और संबंधित ग्रह जातक से कुछ अपराध कर सकते हैं और उसे निर्वासित कर सकते हैं।

जब सातवां भाव और उसका स्वामी नौवें और बारहवें भाव और साथ ही साथ उनके स्वामी के साथ जुड़े होते हैं तो, असफल विवाह और विवाह की समस्याओं का सामना करने के कारण लौटने की संभावना होती है। चतुर्थ भाव /fourth house कुपित होना चाहिए। विवाह के उपरान्त ज्योतिष में निर्वासन के मामले में राहु और विवाह  के कारक शुक्र की भी अहम भूमिका होती है ।

निवास स्थान के परिवर्तन में चतुर्थ भाव के स्वामी को राहु / केतु या शनि जैसे दो या अधिक दुष्प्रभावी ग्रहों या सूर्य द्वारा कुपित होना चाहिए। हमें चातुर्मास या डी 4 चार्ट की भी जांच करनी चाहिए, यह भी चतुर्थ भाव और बारहवें भाव और उनके स्वामी की स्थिति को देखना चाहिए। आम तौर पर, राहु ज्योतिष के अनुसार निर्वासन देता है क्योंकि राहु विदेशी ग्रहों का म्लेच्छ कराक है।

जब भी हम बारहवें/twelfth house, आठवें/eighth house, नौवें /Ninth house और छठे/sixth House भावों या उनके स्वामियों के मध्य एक चल या जल राशि को पाते हैं, तो हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि ज्योतिष के अनुसार निर्वासन की प्रबल संभावना है।

निर्वासन को अपने उस स्वप्न को तोड़ने ना दें जो आपने लंबे समय से देखा है। बस एक छोटी जांच कराएं या डॉ विनय बजरंगी से परामर्श ले।

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