शनि प्रदोष व्रत 2026 – संपूर्ण जानकारी

शनि प्रदोष व्रत पर जानिए तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल और आज क्या करें–क्या न करें।

शनि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

शनि प्रदोष व्रत भगवान शिव और शनिदेव को समर्पित है।

यह व्रत शनि दोष, साढ़ेसाती और जीवन की परेशानियों से राहत दिलाने वाला माना जाता है।

14 फरवरी 2026 की तिथि और पंचांग

विक्रम संवत: 2082 (कालयुक्त)

पक्ष: कृष्ण पक्ष

तिथि: कृष्ण दशमी

आज का नक्षत्र और राशि प्रभाव

नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा

सूर्य राशि: कुंभ

चंद्र राशि: धनु

आज का दिन अनुशासन, कर्म और आत्मसंयम से जुड़ा माना जाता है

वरीयान योग – आज क्यों माना जाता है शुभ

योग: वरीयान

यह एक शुभ योग है।

आज पूजा, व्रत, दान और शनि शांति उपायों के लिए दिन अनुकूल माना जाता है।

राहुकाल और यमघंट काल

राहुकाल: 09:07 – 10:38

यमघंट काल: 13:39 – 15:10

इन समयों में शुभ कार्यों से बचना चाहिए।

सूर्य और चंद्रमा का उदय–अस्त समय

सूर्योदय: 06:05

सूर्यास्त: 18:12

चंद्रोदय: 02:16

चंद्रास्त: 14:41

शनि प्रदोष व्रत पर क्या करें

भगवान शिव का अभिषेक करें

शनिदेव की पूजा करें

काले तिल, तेल या वस्त्र का दान करें

आज संयम और श्रद्धा से विशेष लाभ माना जाता है।

शनि प्रदोष व्रत पर क्या न करें

क्रोध और जल्दबाज़ी से बचें

झूठ, छल और अनैतिक कार्य न करें

किसी का अपमान न करें

आज कर्म सुधार का दिन है।

शनि प्रदोष व्रत का विशेष संदेश

शनि प्रदोष व्रत धैर्य, अनुशासन और सही कर्म का महत्व सिखाता है।

श्रद्धा और संयम से किया गया व्रत जीवन में स्थिरता और शांति लाता है।


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