कई बार अच्छे रिश्ते आते हैं
लेकिन बात बनते-बनते रुक जाती है।
ज्योतिष के अनुसार
इसके पीछे कुछ खास ग्रह कारण हो सकते हैं।
कुंडली में ग्रहों की स्थिति विवाह के समय को प्रभावित करती है।
कुछ योग विवाह में बाधा या देरी का कारण बन सकते हैं।
अगर कुंडली में मंगल
1st, 4th, 7th, 8th या 12th भाव में हो
तो विवाह में देरी
या रिश्तों में बाधा आ सकती है।
शनि की स्थिति अक्सर चीजों को धीमा कर देती है।
कुंडली में शनि का प्रभाव विवाह में देर का कारण बन सकता है।
राहु या केतु
विवाह भाव में हों
तो रिश्तों में भ्रम
और निर्णय में देरी हो सकती है।
शुक्र को प्रेम और विवाह का ग्रह माना जाता है।
अगर यह कमजोर हो तो शादी में रुकावट आ सकती है।
चंद्रमा भावनाओं और मानसिक संतुलन का प्रतीक है।
कमजोर चंद्रमा रिश्तों में अनिश्चितता ला सकता है।
कुंडली का सातवां भाव
विवाह और जीवनसाथी से जुड़ा होता है।
अगर यह भाव कमजोर हो तो विवाह में देरी संभव है।
कभी-कभी ग्रहों की दशा
सही समय नहीं होने देती।
ऐसे में सही समय का इंतजार
अधिक बेहतर माना जाता है।
ज्योतिष मानता है कि
हर व्यक्ति का विवाह समय अलग होता है।
सही मार्गदर्शन और उपाय
जीवन की राह आसान बना सकते हैं।