शादी में हो रही है लगातार देरी? कारण आपकी कुंडली में छुपा हो सकता है!

कई बार अच्छे रिश्ते आते हैं

लेकिन बात बनते-बनते रुक जाती है।

ज्योतिष के अनुसार

इसके पीछे कुछ खास ग्रह कारण हो सकते हैं।

हर देरी किस्मत नहीं… ग्रहों का संकेत भी हो सकता है!

कुंडली में ग्रहों की स्थिति विवाह के समय को प्रभावित करती है।

कुछ योग विवाह में बाधा या देरी का कारण बन सकते हैं।

मंगल दोष (मांगलिक दोष)

अगर कुंडली में मंगल

1st, 4th, 7th, 8th या 12th भाव में हो

तो विवाह में देरी

या रिश्तों में बाधा आ सकती है।

शनि का भारी प्रभाव

शनि की स्थिति अक्सर चीजों को धीमा कर देती है।

कुंडली में शनि का प्रभाव विवाह में देर का कारण बन सकता है।

राहु या केतु का सातवें भाव में होना

राहु या केतु

विवाह भाव में हों

तो रिश्तों में भ्रम

और निर्णय में देरी हो सकती है।

शुक्र ग्रह का कमजोर होना

शुक्र को प्रेम और विवाह का ग्रह माना जाता है।

अगर यह कमजोर हो तो शादी में रुकावट आ सकती है।

चंद्रमा की कमजोर स्थिति

चंद्रमा भावनाओं और मानसिक संतुलन का प्रतीक है।

कमजोर चंद्रमा रिश्तों में अनिश्चितता ला सकता है।

सातवें भाव का कमजोर होना

कुंडली का सातवां भाव

विवाह और जीवनसाथी से जुड़ा होता है।

अगर यह भाव कमजोर हो तो विवाह में देरी संभव है।

गलत समय पर निर्णय

कभी-कभी ग्रहों की दशा

सही समय नहीं होने देती।

ऐसे में सही समय का इंतजार

अधिक बेहतर माना जाता है।

देरी का मतलब रुकना नहीं… सही समय का इंतजार!

ज्योतिष मानता है कि

हर व्यक्ति का विवाह समय अलग होता है।

सही मार्गदर्शन और उपाय

जीवन की राह आसान बना सकते हैं।


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