रोहिणी व्रत 2026 कब है?

24 फरवरी 2026 को रोहिणी व्रत रखा जाएगा। यह व्रत रोहिणी नक्षत्र में किया जाता है और विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण व चंद्रदेव से जुड़ा माना जाता है।

रोहिणी नक्षत्र का महत्व

रोहिणी 27 नक्षत्रों में चौथा नक्षत्र है। यह चंद्रमा का प्रिय नक्षत्र माना जाता है और समृद्धि, सौंदर्य व वृद्धि का प्रतीक है।

पौराणिक कथा – चंद्रदेव और रोहिणी

पुराणों के अनुसार, चंद्रदेव की 27 पत्नियाँ थीं, जो दक्ष प्रजापति की पुत्रियाँ थीं। इनमें रोहिणी उनकी सबसे प्रिय थीं, जिससे यह नक्षत्र विशेष पूजनीय बना।

श्रीकृष्ण से संबंध

मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इसलिए इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

रोहिणी व्रत क्यों रखा जाता है?

यह व्रत वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति, मानसिक शांति और पारिवारिक समृद्धि के लिए किया जाता है। विशेष रूप से महिलाएँ यह व्रत श्रद्धा से रखती हैं।

आध्यात्मिक महत्व

चंद्रमा मन का कारक ग्रह है। रोहिणी व्रत मन की शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।

व्रत के लाभ

मानसिक स्थिरता

दांपत्य जीवन में मधुरता

आर्थिक उन्नति

चंद्र दोष में राहत

आध्यात्मिक प्रगति

व्रत विधि संक्षेप में

प्रातः स्नान कर संकल्प लें

श्रीकृष्ण या चंद्रदेव की पूजा करें

रोहिणी नक्षत्र में उपवास रखें

रात्रि में कथा व आरती करें

24 फरवरी 2026 का विशेष प्रभाव

इस वर्ष ग्रहों की स्थिति के कारण यह व्रत मानसिक स्पष्टता और पारिवारिक सामंजस्य बढ़ाने वाला हो सकता है।

व्रत का पावन संदेश

रोहिणी व्रत 2026 केवल एक उपवास नहीं, बल्कि आस्था, पौराणिक कथा और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में सुख-शांति ला सकता है।


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