ज्योतिर्लिंग की कथा - ब्रह्मा जी का असत्य

ब्रह्मांड का सबसे बड़ा रहस्य: जब ब्रह्मा और विष्णु भी हार गए!

अनंत यात्रा

कई वर्षों तक यात्रा करने के बाद भी, भगवान विष्णु स्तंभ के आधार (जड़) और ब्रह्मा जी उसके शिखर तक नहीं पहुँच सके।

पराजय और वापसी

अपनी पराजय स्वीकार करते हुए, दोनों देवों ने वापस उसी स्थान पर लौटने का निर्णय लिया जहाँ से यात्रा शुरू हुई थी।

मार्ग में भेंट

ऊपर से नीचे आते समय ब्रह्मा जी (हंस रूप) की दृष्टि एक सुंदर केतकी के फूल पर पड़ी।

ब्रह्मा जी की चतुराई

ब्रह्मा जी ने अपनी चोंच से उस फूल को थाम लिया और उसे साक्ष्य के रूप में अपने साथ नीचे ले आए।

विष्णु जी की जिज्ञासा

विष्णु जी ने कहा— "हे ब्रह्मा! मैं मीलों नीचे गया पर अंत न पा सका। क्या आपको शिखर का पता चला?"

अहंकार और असत्य

स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने के मोह में ब्रह्मा जी ने झूठ कह दिया— "हाँ, मैंने शिखर देख लिया है!"

झूठा प्रमाण

ब्रह्मा जी बोले— "यह केतकी का फूल देखिए, यह मुझे इस स्तंभ के सबसे ऊपरी छोर पर मिला था।"

प्रकृति का प्रकोप

जैसे ही ब्रह्मा जी ने असत्य कहा, आकाश में भयंकर गर्जना हुई। सत्य के देवता क्रोधित हो उठे!

कहीं अहंकार का कोई ग्रह आपको न ले डूबे।

अपनी कुंडली में इस ग्रह की स्थिति जानने के लिए Dr. Bajrangi से

संपर्क करें

👉 अब कहानी लेगी नया मोड़


PART 2