होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का अवसर है।
अगर घर में किसी की सेहत बार-बार बिगड़ रही है, तो इस दिन विशेष उपाय लाभकारी माने जाते हैं।
होलिका दहन के बाद अग्नि की राख को पवित्र माना जाता है।
राख लाएं: होलिका दहन के बाद घर में थोड़ी सी पवित्र राख लाएं।
तिलक लगाएं: रोगी के माथे पर इस राख से हल्का तिलक करें।
मंत्र जप: 11 बार महामृत्युंजय मंत्र या "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें।
7 सरसों के दाने और 3 काली मिर्च लें।
रोगी के सिर से 7 बार उतारें (घड़ी की दिशा में)।
इन्हें होलिका दहन की अग्नि में अर्पित कर दें।
मान्यता है कि इससे बुरी नज़र और अदृश्य बाधाएँ दूर होती हैं।
होली के दिन प्रातः काल घर के मंदिर में:
गाय के घी का दीपक जलाएँ।
भगवान शिव या विष्णु जी को गुलाल अर्पित करें।
महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जप करें।
यह उपाय दीर्घकालीन रोग और मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होता है।
एक बाल्टी पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक और हल्दी मिलाएँ।
इस पानी से घर में पोंछा लगाएँ (विशेषकर मुख्य द्वार और शयन कक्ष में)।
यह प्रयोग घर की नकारात्मक तरंगों को कम करता है और स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक माना जाता है।
किसी बीमार व्यक्ति पर जबरदस्ती रंग न डालें।
क्रोध और विवाद से बचें।
तामसिक भोजन (अत्यधिक तला-भुना) से परहेज़ करें।
होली पर मन और घर दोनों को शांत व पवित्र रखना आवश्यक है।
होली केवल बाहरी रंगों का नहीं, बल्कि भीतर की ऊर्जा को बदलने का पर्व है।
अगर घर में किसी की सेहत लंबे समय से खराब है, तो इन सरल उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ अवश्य करें।
सही विधि और मंत्र से किया गया उपाय, जीवन में स्वास्थ्य और सकारात्मकता दोनों ला सकता है।