5 फरवरी: संकटों का अंत!
आज की रात है ‘द्विजप्रिय’ गणेश की।
क्या आप जानते हैं—
आज का एक उपाय आपकी तकदीर बदल सकता है?
गणेश जी का 32वां स्वरूप!
‘द्विजप्रिय’—चार सिर वाले देव,
जो ज्ञान और सुबुद्धि के राजा हैं।
इनकी पूजा से
जन्मों के पाप मिटते हैं।
एक बार देवताओं पर भारी विपत्ति आई।
राहु के प्रभाव से
उनकी बुद्धि क्षीण हो गई
और वे मार्ग भटक गए।
तब उन्होंने ब्रह्मा जी की शरण ली।
ब्रह्मा जी ने कहा—
“जब ज्ञान कम पड़ जाए,
तो द्विजप्रिय गणेश को याद करो।”
देवताओं ने संकष्टी के दिन
गणेश जी के विद्वान स्वरूप की पूजा की।
व्रत पूर्ण होते ही
गणेश जी प्रकट हुए।
उनके चार सिरों से निकले
ज्ञान के प्रकाश ने
राहु के अंधकार को मिटा दिया।
देवताओं को खोया राजपाठ मिल गया!
कहानी सिखाती है—
जब राहु या बुरा वक्त
आपकी बुद्धि को भ्रमित करे,
तो आज का व्रत
बंद किस्मत के ताले खोल सकता है।
अगर आपके काम
बार-बार रुक रहे हैं,
तो आज का व्रत
राहु-केतु की बाधाओं को
जड़ से खत्म करता है।
आज गणेश जी को
21 दूर्वा चढ़ाएं
और जाप करें—
“ॐ द्विजप्रियाय नमः”
यह मंत्र असंभव को
संभव बना देता है!
दुखों को कहें बाय-बाय!
5 फरवरी को
चंद्र दर्शन कर व्रत खोलें
और सुख-शांति पाएं।
बोलिए— गणपति बप्पा मोरया!