12 फरवरी: एक सन्यासी, जिसने हिला दी थी दुनिया!

आज उस महापुरुष की जयंती है जिसने अंधकार से लड़ना सिखाया। क्या आप जानते हैं महर्षि दयानन्द सरस्वती के जीवन का वो 'चमत्कार'?

एक बालक, जो बन गया 'दयानन्द'!

गुजरात की धरती पर जन्मे मूलशंकर ने जब सत्य की खोज शुरू की, तो वह भारत के आधुनिक ऋषि और 'आर्य समाज' के संस्थापक बने।

जब मूर्ति पर चूहा चढ़ा...

एक शिवरात्रि की रात, बालक मूलशंकर ने देखा कि भगवान के भोग को चूहा खा रहा है। इसी घटना ने उन्हें 'सच्चे शिव' की खोज की राह पर डाल दिया।

"पाखंड खंडिनी" पताका का फहराना!

महर्षि ने कुरीतियों, अंधविश्वास और पाखंड के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। उन्होंने समाज को आईना दिखाया और तर्क की शक्ति दी।

वेदों की ओर लौटो!

दयानन्द सरस्वती ने दुनिया को बताया कि विज्ञान और अध्यात्म का असली खजाना वेदों में है। उनका यह नारा आज भी गूँज रहा है!

जब हत्यारे को भी माफ कर दिया!

विरोधियों ने उन्हें कई बार जहर दिया, लेकिन एक बार जब रसोइए ने दूध में जहर मिलाया, तो उन्होंने उसे पैसे देकर भाग जाने को कहा ताकि भीड़ उसे मार न दे। ऐसी थी उनकी करुणा!

आज़ादी के पहले अग्रदूत!

क्या आप जानते हैं? "स्वराज" शब्द का सबसे पहले प्रयोग महर्षि दयानन्द ने ही किया था, जिसने बाद में आज़ादी की लड़ाई को धार दी।

बेटियों के हाथ में दी 'कलम'!

महर्षि ने उस दौर में स्त्री शिक्षा और विधवा विवाह का समर्थन किया जब समाज इसके सख्त खिलाफ था। वे सही मायने में आधुनिक भारत के निर्माता थे।

आज का दिन: ज्ञान और तर्क का योग!

12 फरवरी की ग्रह स्थिति बताती है कि आज के दिन किया गया बौद्धिक कार्य और पढ़ाई लंबे समय तक लाभ देती है। अपनी 'बुद्धि' को धार देने का दिन है! नक्षत्र

सत्य से समझौता नहीं!

महर्षि सिखाते हैं कि समाज चाहे कितना भी विरोध करे, सत्य का साथ कभी मत छोड़ो। निर्भय बनो और तर्क के साथ जिओ।

घर में करें 'यज्ञ' का आयोजन!

आज के दिन गायत्री मंत्र का जाप और हवन करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वातावरण शुद्ध होता है।

सत्य के मार्ग पर कदम बढ़ाएं!

12 फरवरी 2026 को महर्षि दयानन्द के विचारों को अपने जीवन में उतारें। कमेंट में लिखें— "ओम् कृण्वन्तो विश्वमार्यम्" (संपूर्ण विश्व को श्रेष्ठ बनाओ!)