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Vat Savitri Vrat

vat savitri vrat

वट सावित्री व्रत:-

क्या होता है वट सावित्री व्रत कैसे करें पूजन आइयें जानते है - इस दिन महिलाएँ अपने सुखद वैवाहिक जीवन की कामना से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर व्रत करती हैं। वट सावित्री व्रत में ‘वट और ‘सावित्री दोनों का विशेष महत्व माना गया है। इसी कारण से इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा है। इस व्रत के परिणामस्वरूप सुखद और संपन्न दांपत्य जीवन का वरदान प्राप्त होता है। साथ ही यह व्रत समस्त परिवार की सुख-संपन्नता के लिए भी किया जाता है।

वट सावित्री कथा -: 

प्राचीन काल में अश्वपति नाम के एक  राजा थे | राजा के पास सब प्रकार का सुख था परन्तु उन्हें कोई संतान नहीं थी | इसलिए उन्होंने १८ वर्षों तक भगवान की तपस्या की | तब भगवान ने प्रसन्न होकर  एक तेजस्विनी कन्या की प्राप्ति का  वर दिया |कुछ समय बाद राजा की बड़ी रानी ने एक सुन्दर कन्या को जन्म दिया, जब उसने युवावस्था में प्रवेश किया | उसके रूप को जो भी देखता उस पर मोहित हो जाता था |जब राजा के विशेष प्रयास करने पर भी सावित्री के लिए योग्य वर नहीं मिला तो उन्होंने एक दिन कहा  बेटी ! अब तुम विवाह के योग्य हो गई हो इसलिए  स्वयं अपने लिए योग्य वर की खोज करो |

 पिता की आज्ञा स्वीकार कर सावित्री योग्य मंत्रियों के साथ रथ में बैठकर यात्रा के लिए निकल पड़ी | कुछ दिनों तक ब्रह्मऋषिओं के तपोवन और तीर्थों में भ्रमण करने के बाद वह राजमहल लौट आई | उसने पिता के साथ देवर्षि; नारद को बैठे देख कर दोनों को प्रणाम किया |महाराज अश्वपति ने सावित्री से उसकी यात्रा का समाचार पूछा | सावित्री ने कहा ''पिताजी ! तपोवन में अपने माता पिता के साथ निवास कर रहे धूमसेन के पुत्र सत्यवान सर्वथा मेरे योग्य है | अतः मैंने मन से उन्ही को अपना पति चुना है |

ऐसा सुनकर नारद चिंतित हो गए और राजा को बताया  कि सावित्री ने जिसे अपना पति  चुना है वह अल्पायु है , मात्र एक  वर्ष ही उसकी आयु शेष है | यह जानकार राजा ने सावित्री से कहा कि बेटी तुम किसी और वर की तलाश करो | लेकिन सावित्री नहीं मानी उन्होंने कहा कि हे ! पिताजी मैं  अपने मन में सत्यवान का वरण कर चुकी हूँ  तो अब किसी और का वरण मेरे लिए संभव नहीं है |

इस तरह न चाहते हुए भी सावित्री के पिता ने उनका विवाह सत्यवान से कर दिया | सावित्री सत्यवान  के साथ ही जंगल में रहती और अपने पति एवं अंधे सास - श्वसुर की सेवा करतीं | इस प्रकार एक वर्ष बीत गया और सत्यवान के जीवन का अंतिम दिन भी आ गया , उस दिन सावित्री भी अपने पति के साथ जंगल लकड़ी काटने गयीं | जब सत्यवान लकड़ी काट रहा था तो अचानक उसके सर में दर्द होना प्रारम्भ हो गया , तब वह नीचे उतर कर वट के वृक्ष के नीचे बैठी सावित्री की गोद में सर रखकर लेट गया | कुछ समय बाद सावित्री ने देखा की एक काली छाया उसके पति के समक्ष आयी और उसके पति को अपने साथ ले जाने लगी तब सावित्री भी उनके पीछे - पीछे जाने लगीं | जब यमराज ने उन्हें अपने पीछे आते देखा तो वापस जाने को कहा परन्तु सावित्री  नहीं मानी और अपने पति के प्राण वापस देने को कहा | इस प्रकार सावित्री का अपने पति के प्रति प्रेम और सतीत्व देखकर यमराज ने कहा कि अपने पति के प्राणों के सिवाय कोई भी तीन वरदान मांग लो , तब सावित्री ने सबसे पहले अपने अंधे सास - श्वसुर के नेत्रों की रौशनी वापस मांगी और दूसरा वरदान उन्होंने अपने सास - श्वसुर का छिना हुआ राजपाट वापस माँगा और तीसरे वरदान में उन्होंने स्वयं के लिए सौ पुत्रो की माँ होने का वरदान माँगा | यमराज ने सावित्री को तीनों वरदान दे जाने लगे तब उन्होंने देखा की सावित्री अब भी पीछे आ रही है तब उन्होंने कहा कि मैंने अपना वचन पूरा किया  फिर भी तुम वापस  क्यों नहीं गयीं तब सावित्री ने कहा कि आप मेरे पति को अपने साथ ही लिए जा रहे हैं फिर तीसरा वरदान कैसे पूरा हुआ | ऐसा सुनकर यमराज धर्मसंकट में पड़ गए और अपने पति के प्रति प्रेम और उनकी बुद्धिमता केआगे विवश होकर उन्हें सत्यवान के प्राण वापस करने पड़े | इस प्रकार सावित्री यमराज से भी अपने सतीत्व और बुद्धिमता  के बल पर अपने पति के प्राण वापस ले आयीं  | कहा जाता है तब से सावित्री देवी का निवास वट के वृक्ष में माना जाने लगा और तभी से सुहागिन स्त्रियां अपने पति की लम्बी उम्र  के लिए वट के वृक्ष का पूजन व्रत करतीं हैं |

राशि अनुसार पूजन विधि –

मेष – वृश्चिक राशि

इस राशि की महिलाओं को सर्वप्रथम प्रातःकाल स्नान आदि करके, निर्जल रहकर लाल रंग के वस्त्र धारण करके 16 श्रृंगार कर वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए और उसके बाद वट वृक्ष पर जल चढ़ायें, लाल कलावा लेकर 7 बार वट वृक्ष की परिक्रमा करें और लाल रोली से वृक्ष को तिलक लगा कर, कुछ फल अर्पित करें तथा घी का दीपक जलाकर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनें और अपने पति की लम्बी आयु की प्रार्थना करें | ऐसा करने से आपको सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद प्राप्त होता है |

वृषभ - तुला राशि

इस राशि की महिलायें पीले वस्त्र धारण कर वट वृक्ष की पूजा करें तथा मीठा जल चढ़ायें और कम से  कम 11 बार वट वृक्ष की परिक्रमा करें और लाल रोली से वृक्ष को तिलक लगाकर लड्डू का भोग लगाएं और घी का दीपक जलाकर सावित्री और सत्यवान की कथा सुने | और अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करें| पूजा समाप्त होने पर घर के बड़ों का आशीर्वाद लें |

मिथुन - कन्या राशि

इस राशि की महिलाएं सुबह उठकर स्नान कर नए वस्त्र पहनें और सोलह श्रृंगार करें | अब वट वृक्ष में कच्चे सूत को लपटते हुए 21 बार परिक्रमा करें और हर परिक्रमा पर प्रसाद रूपी थोड़ा सा मीठा चढ़ाते जाएं परिक्रमा पूरी होने के बाद अपने हाथ मे गुलाब के पुष्प एवं अक्षत रखें और सत्यवान व सावित्री की कथा सुनें साथ ही मन में अपने पति की दीर्घ आयु की प्रार्थना करें |

कर्क - सिंह राशि

इस राशि की महिलाओं को हरे रंग के वस्त्र धारण कर वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए और वट वृक्ष को हल्दी, रोली और अक्षत लगाएं और फल और मिठाई अर्पित करें, उसके बाद घी का दीपक जलाकर वट वृक्ष में कच्चे सूत को लपटते हुए 7 बार परिक्रमा करें | परिक्रमा पूरी होने के बाद सत्यवान व सावित्री की कथा सुनें| पूजा खत्म होने के बाद घर आकर बड़ों का आशीर्वाद लें |

मकर – कुंभ राशि

इस राशि की महिलाओं को सुबह स्नान करके नए वस्त्र और सोलह श्रंगार करके तैयार हो जाना चाहिए और उसके बाद पूजन की सामग्री जैसे कुछ पुष्प, अक्षत, धुप-दीप, थोड़ा सा मीठा प्रसाद आदि रखें और वट वृक्ष के नीचे जाएं और वृक्ष की जड़ों में जल चढ़ाएं इसके बाद थोड़ा मीठा प्रसाद चढ़ाकर धूप-दीपक जलाएं और मां सवित्री से आशिर्वाद लें और तत्पश्चात अपने पति के लिए लंबी उम्र की कामना करते हुए वट वृक्ष के चारों ओर कच्चे धागे को 7 बार बांधे और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें|

धनु - मीन राशि

इस राशि की महिलाएं सुबह उठकर नित्यकर्म से निवृत होने के बाद स्नान आदि कर शुद्ध हो जाएं। फिर नए वस्त्र धारण कर, सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद पूजन की सारी सामग्री को प्लेट में रख लें। उसके बाद  वट वृक्ष के नीचे सत्यवान और सावित्री की मूर्ति को स्थापित करें। फिर अन्य सामग्री जैसे धूप, दीप, रोली, सिंदूर आदि से पूजन करें। इसके बाद थोड़े से फल अर्पित करें। और कम से कम 51 बार वट वृक्ष की परिक्रमा करें। अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनते हुए अपने मन में अपने पति के स्वास्थ्य और दीर्घ आयु की प्रार्थना करें |