noscript

SHANI SHAMAN VIDHI

shani shaman vidhi

शनि शमन शनिवार पूजन विधि |

यह विधि बताये गए शनिवार के दिन प्रारम्भ की जाती है और इसे लगातार 27 शनिवार  किया जाता है | ध्यान दे की बीच में श्रृंखला में कोई अवरोध न आये और यदि किन्ही प्राकर्तिक कारणों से आता भी है तो उसे अंत में पूर्ण करना अत्यंत आवश्यक है |
आइये विधि के बारे में जानते हैं :-
यह विधि सत्ताई सप्तहा चलेगी , इसे निम्न विधि से पूर्ण विश्वास के साथ करें| 

पहला शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : पहला शनिवार    
पहले शनिवार को यन्त्र की स्थापना :- श्री शनि  यन्त्र
पहले  शनिवार को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
पहले सप्तहा पाठ : शनि  देव की  आरती, सुबह और शाम /
पहले शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | शाम को शनि की आरती का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |
कृपया ध्यान दें : यह यन्त्र व इंद्रनील घर के मंदिर में ही स्थापित करने हैं , इंद्रनीलों को एक पत्र में रखें |

दूसरा शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : दूसरा  शनिवार  
दूसरे  शनिवार को यन्त्र की स्थापना :- श्री पन्द्रहिया यन्त्र
दूसरे शनिवार  को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
दूसरे  सप्तहा का मंत्र  : ऊं ऐं ह्रीं श्रीशनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि   माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
दुसरे शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | शाम के मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

तीसरा  शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : तीसरा  शनिवार  
तीसरे शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री घंटार्गाल यन्त्र
तीसरे शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
तीसरे सप्तहा का मंत्र  : ऊँ क्लीं क्लीं शनये नम:
जपने की माला : शनि माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
तीसरे  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

चौथा शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : चौथा  शनिवार  
चौथे  शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री अष्टलक्ष्मि दर्शनासटट श्रीयन्त्र
चौथे शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
चौथे सप्तहा पाठ :  ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। 
जपने की माला : शनि माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
चौथे शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

पांचवां  शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : पांचवां शनिवार  
पांचवे  शनिवार  को यन्त्र की स्थापना :- श्री धन्वंतरि उपासना यन्त्र
पांचवे  शनिवार  को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
पांचवे  सप्तहा का मंत्र  : ऊँ शं शनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि  माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
पांचवें  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

छठा  शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : छठा शनिवार  
छठा शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- जैसा  कि आपकी विधि में लिखा हैं 

छठा शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील  
छठा सप्तहा का मंत्र  : ऊँ शं शनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि  माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
छठा शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

सातवां  शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : सातवां शनिवार  
सातवां शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री सर्व कार्य सीधी यन्त्र
सातवां शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
सातवां  सप्तहा का मंत्र  : ऊँ शं शनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि  माला 
जप की संख्या : तीन  मालायें , 324 बार 
सातवां शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

आठवां शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : आठवां शनिवार    
आठवां शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री त्रलोक्या विश्वकर्मा लक्ष्मि यन्त्र
आठवां शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील  
आठवां सप्तहा पाठ : शनि  देव की  आरती, सुबह और शाम |
आठवें  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | शाम को शनि की आरती का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

नौवां शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : नौवां शनिवार  
नौवां शनिवार को यन्त्र की स्थापना :- श्री दुर्गा नवार्ण यन्त्र
नौवां शनिवार को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
नौवां सप्तहा का मंत्र  : ऊं ऐं ह्रीं श्रीशनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
नौवें  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

दसवां  शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : दसवां  शनिवार  
दसवां शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री सिद्धि सूर्यम महायन्त्रं
दसवां शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील  
दसवां सप्तहा का मंत्र  : ऊँ क्लीं क्लीं शनये नम:
जपने की माला : शनि   माला 
जप की संख्या : दो मालायें , २१६ बार 
दसवें  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

ग्यारवां शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : ग्यारवां शनिवार  
ग्यारवां   शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री शनि यन्त्रं
ग्यारवां   शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
ग्यारवां   सप्तहा पाठ :  ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।  
ग्यारवां सप्तहा का मंत्र  : ऊँ क्लीं क्लीं शनये नम:
जपने की माला : शनि   माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
ग्यारवें   शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

बारवां  शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : बारवां  शनिवार  
बारवां   शनिवार को यन्त्र की स्थापना :- श्री शनि  यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
बारवां    शनिवार को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
बारवां   सप्तहा पाठ : शनि  देव की  आरती, सुबह और शाम |
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

तेहरवां  शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : तेहरवां शनिवार  
तेहरवां शनिवार को यन्त्र की स्थापना :- श्री पन्द्रहिया यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
तेहरवां शनिवार  को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
तेहरवां  सप्तहा का मंत्र  : ऊं ऐं ह्रीं श्रीशनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि   माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

चौदहवाँ शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : चौदहवाँ शनिवार  
चौदहवाँ शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री घंटार्गाल यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
चौदहवाँ शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
चौदहवाँ सप्तहा का मंत्र  : ऊँ क्लीं क्लीं शनये नम:
जपने की माला : शनि माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

पंद्रहवां शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : पंद्रहवां शनिवार  
पंद्रहवां  शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री अष्टलक्ष्मि दर्शनासटट श्रीयन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
पंद्रहवां शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
पंद्रहवां सप्तहा पाठ :  ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।  
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  शाम की आरती  का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

सोलवां शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : सोलवां शनिवार  
सोलवां  शनिवार  को यन्त्र की स्थापना :- श्री धन्वंतरि उपासना यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
सोलवां शनिवार  को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
सोलवां सप्तहा का मंत्र  : ऊँ शं शनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि  माला 
जप की संख्या : दो मालायें , २१६ बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

सत्रहवाँ  शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : सत्रहवाँ शनिवार  
छठा शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :-
जैसा  कि आपकी विधि में लिखा हैं
  (आपने पहले ही स्थापित किया है)
छठा शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील  
छठा सप्तहा का मंत्र  : ऊँ शं शनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि  माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

अटठारवां शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : अटठारवां  शनिवार  
अटठारवां   शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री सर्व कार्य सीधी यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
अटठारवां   शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
अटठारवां   सप्तहा का मंत्र  : ऊँ शं शनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि  माला 
जप की संख्या : तीन  मालायें , 324 बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

उन्नीसवां  शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : उन्नीसवां शनिवार  
उन्नीसवां  शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री त्रलोक्या विश्वकर्मा लक्ष्मि यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
उन्नीसवां  शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील  
उन्नीसवां  सप्तहा पाठ : शनि  देव की  आरती, सुबह और शाम /
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा | 

बीसवां शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : बीसवां  शनिवार  
बीसवां  शनिवार को यन्त्र की स्थापना :- श्री दुर्गा नवार्ण यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
बीसवां  शनिवार को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
बीसवां  सप्तहा का मंत्र  : ऊं ऐं ह्रीं श्रीशनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

इकइसवाँ  शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : इकइसवाँ शनिवार  
इकइसवाँ शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री सिद्धि सूर्यम महायन्त्रं (आपने पहले ही स्थापित किया है)
इकइसवाँ शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील  
इकइसवाँ सप्तहा का मंत्र  : ऊँ क्लीं क्लीं शनये नम:
जपने की माला : शनि   माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार  इस शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

बाईसवाँ शनिवार:
विधि आरंभ करने का दिवस : बाईसवाँ शनिवार  
बाईसवाँ शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री शनि यन्त्रं (आपने पहले ही स्थापित किया है)
बाईसवाँ  शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
बाईसवाँ सप्तहा पाठ :  ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।  
बाईसवाँ सप्तहा का मंत्र  : ऊँ क्लीं क्लीं शनये नम:
जपने की माला : शनि   माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | शाम को शनि की आरती का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

तेइसवां शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : तेइसवां शनिवार  
तेइसवां  शनिवार को यन्त्र की स्थापना :- श्री शनि  यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
तेइसवां  शनिवार को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
तेइसवां  सप्तहा पाठ : शनि  देव की  आरती, सुबह और शाम /
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

चौबीसवाँ शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : चौबीसवाँ  शनिवार  
चौबीसवाँ   शनिवार को यन्त्र की स्थापना :- श्री पन्द्रहिया यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
चौबीसवाँ   शनिवार  को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
चौबीसवाँ   सप्तहा का मंत्र  : ऊं ऐं ह्रीं श्रीशनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि   माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

पचीसवाँ शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : पचीसवाँ शनिवार  
पचीसवाँ  शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री घंटार्गाल यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
पचीसवाँ  शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
पचीसवाँ  सप्तहा का मंत्र  : ऊँ क्लीं क्लीं शनये नम:
जपने की माला : शनि माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

छब्बीसवाँ शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : छब्बीसवाँ शनिवार  
छब्बीसवाँ शनिवार   को यन्त्र की स्थापना :- श्री अष्टलक्ष्मि दर्शनासटट श्रीयन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
छब्बीसवाँ शनिवार   को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
छब्बीसवाँ सप्तहा पाठ :  ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। 
जपने की माला : शनि माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |

सत्ताईसवाँ शनिवार :
विधि आरंभ करने का दिवस : सत्ताईसवाँ शनिवार  
सत्ताईसवाँ शनिवार  को यन्त्र की स्थापना :- श्री धन्वंतरि उपासना यन्त्र (आपने पहले ही स्थापित किया है)
सत्ताईसवाँ शनिवार  को रत्न स्थापना  :- दो इंद्रनील
सत्ताईसवाँ सप्तहा का मंत्र  : ऊँ शं शनैश्चराय नम:
जपने की माला : शनि  माला 
जप की संख्या : दो मालायें , 216 बार 
इस  शनिवार को करनी वाली विधि : एक लोहे की कटोरी में कुछ सरसों का तेल डाल कर उसे पास के शनि देव के मंदिर में अर्पण कर के आएं | संभव हो तो  मन्त्रों का गान शनि के मंदिर में ही करें बहुत अच्छा रहेगा |
सत्ताई सप्तहा के बाद, सभी यंत्रों को अपने मंदिर में ही रहने दें व , जितने भी इंद्रनील हैं उन्हें बहते हुए पानी में प्रवाहित करें |  

आपकी यह विधि सम्पूर्ण हुई , परंतु आप शनि के मंदिर जाने का क्रम न तोडें , यह आपको बताई गए तिथि तक करना है | किन्ही विशेष परिस्तिथियों में यदि न जा पाएं तो शनि महाराज को याद कर लिया करें |

इस उपाय में उपयोग होने वाली सामग्री |
1. यन्त्र  -11   (1 प्रत्येक सप्ताह )
2. इंद्रनील  -54  (2 प्रत्येक सप्ताह )
3. प्रसाद (जो बताया गया)
4. रोली-मोली 
5. कच्चा चावल 
6. फूल 
7. धुप-अगरबत्ती
8. सरसो का तेल