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Shani Jyanati

shani jayanti

शनि जयंती शनि जयंती ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाई जाती है | ज्येष्ठ माह की अमावस की काली रात में भगवान् शनि देव का जन्म हुआ था ग्रंथो के अनुसार , शनि सूर्य पुत्र हैं| इनका जन्म सूर्य की पत्नी छाया से होने के कारण ये कुरूप, काले एवं अपने पिता के समान बलवान एवं शक्तिशाली हैं | इनकी सवारी गरुण है | इनकी हानिकारक दृष्टि की वजह से सूर्य ने इन्हे तत्काल ही ब्रह्माण्ड से काफी दूर फेंक दिया था जिस वजह से ये अत्यंत शीतल और प्रकाशहीन ग्रह हैं | इसी कारण इनका अपने पिता से शत्रुवत व्यवहार है |

पिता द्वारा परित्याग के बाद शनि देव ने भगवान शिव की  कठोर तपस्या कर विभिन्न शक्तियां प्राप्त कीं  |भगवान शिव ने इन्हे सौरमंडल के नौ ग्रहों में सर्वोच्च स्थान दिया एवं इन्हें न्यायधीश की उपाधि भी दी |यह शिव  के परम प्रिये शिष्य हैं | इनके अच्छे व्यव्हार से प्रसन्न होकर भगवन शिव ने इन्हे 'कर्मफल दाता' का वरदान दिया | कहा जाता है कि  शनि के कष्टकारी होने पर शिव जी तथा हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए|

क्यों चढ़ाते हैं शनि देव को तेल -

एक बार शनि देव को अपनी शक्ति का घमंड हो गया और उन्होंने सोचा क्यों न वीर पराक्रमी हनुमान जी की शक्ति को देखा जाये, और तब वह हनुमान जी के निकट गए और बोले तैयार हो जाओ मैं तुम्हारी राशि पर आ रहा हूँ | तब हनुमान जी ने कहा यह मेरे संध्या करने का समय है मुझे अपने प्रभु की आराधना करने दो तुम बाद में आना ,लेकिन शनि देव नहीं माने और हनुमान जी के सर पर बैठ उनकी पूंछ खींचने लगे तब हनुमान जी ने अपनी पूछ में शनि देव को जकड कर नीचे गिरा दिया और फिर  अपनी पूछ में बांध इधर - उधर घूमने लगे जिससे शनि देव के शरीर पर जख्म बन गए और उन्होंने हनुमान जी से क्षमा मांगी, तब हनुमान जी ने उन्हें क्षमा कर मुक्त किया | तब शनि देव ने अपने जख्मों पर लगाने के लिए तेल माँगा , और तभी से शनि देव को जो भी तेल चढ़ाता है वह उससे प्रसन्न होते हैं और कभी उस पर अपनी दृष्टि नहीं डालते |

क्यों  है शनि देव की दृष्टि हानिकारक -

एक बार शनि देव भगवान शिव जी की आराधना में विलीन थे तब उनकी पत्नी उनके समक्ष आयीं और उन्होंने शनिदेव को मोहित करने का प्रयास किया लेकिन शनि देव पूरी तरह साधना में  विलीन थे और उन्होंने अपनी पत्नी की तरफ नजर उठा कर देखा तक नहीं , और तब क्रोधवश उनकी पत्नी ने उन्हें श्राप दे दिया कि जिसकी तरफ भी आप दृष्टि उठाकर देखोगे उसका विनाश हो जाएगा | उसी समय से शनि देव कि दृष्टि हमेशा नीचे रहती है |

शनि की शांति के लिए उपाय -

 * प्रत्येक शनिवार सायंकाल के समय शनि देव को सरसों का  तेल अर्पण करना चाहिए| तथा पीपल के नीचे मिटटी के दीपक में  तेल से दीप जलाना चाहिए | और ॐ शनिश्च्राये  नमः मंत्र का जाप करना चाहिए |

 * शनिवार के दिन गरीबों को उड़द दाल या उड़द दाल - चावल की खिचड़ी दान करनी चाहिए | परन्तु धन का दान नहीं देना चाहिए |

 * शनि की शांति के लिए जातक को हनुमान की भी पूजा करनी चाहिए, क्योंकि शनि देव हनुमान जी के भक्तों को कभी परेशान नहीं करते हैं |

क्या नहीं करना चाहिए शनि के दिन -

* शनिवार के दिन तेल नहीं खरीदना चाहिए |

* शनि के दिन घर कोई भी रसोई ईंधन नहीं लाना चाहिए |

* शनि के दिन कोई भी लोहे की वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए |

* इस दिन काली दाल भी नहीं खरीदनी चाहिए |