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SHAILPUTRI PROPELS YOUR FATE

shelputri devi

शैलपुत्री : 
पर्वतराज हिमालय की कन्या प्रथम दुर्गा कहलाती है | यह पूर्वजन्म  में प्रजापति दक्ष की बेटी तथा भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं  |  
नवरात्रि
के प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है इनका मूल मंत्र है –

'ॐ शं शैल पुत्रैय फट'
माँ  शैलपुत्री  का ज्योतिषय सम्बन्ध: 
माँ शैलपुत्री के मस्तिष्क पर अर्धचन्द्रमा विराजित है | उनके दाएं हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल का पुष्प सुशोभित है | माँ शैलपुत्री का निवास मूलाधार चक्र होता है | जो कि दैवीकीये  जागरूकता के लिय प्रथम बिंदु माना जाता है |  इस आधार पर हमें यह ज्ञात होता है कि कुंडली के जिस भाव में चन्द्रमा स्थित होगा वह भाव माँ दुर्गा के इस स्वरूप की आराधना करने से बली होगा |
माँ शैलपुत्री के हाथ में सुशोभित त्रिशूल जातक कि कुंडली के छठे भाव जो कि शत्रुओं का भाव है उसे निर्बल करता है , उनके बाएं हाथ सुशोभित कमल का पुष्प कुंडली के द्वादश भाव को दर्शाता है जो कि माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना से बलिष्ठ होता है | 

माँ शैलपुत्री की सवारी नन्दी (बैल ) है | नन्दी जो की वृषभ राशि का भी प्रतीक है | अत: वृषभ राशि के जातक भी माँ शैलपुत्री के पूजन से उनकी असीम कृपा  प्राप्त करते हैं |   

माँ शैलपुत्री पर्वत राज हिमालय की पुत्री हैं  | पर्वत जो की स्थिर और अडिग होता  है अत: कुंडली में स्थिर राशि जो कि 2 , 5 , 8 , और 11 है , को मजबूत करने के लिए भी माँ शैलपुत्री की पूजा -अर्चना आदि की जाती है  |
माँ शैलपुत्री कि पूजा से मूलाधार चक्र जाग्रित होता है | अर्थात मन को वश 
में करने के लिए माँ शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए | 

आइये जानते हैं राशि अनुशार किस प्रकार करें माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना -

मेष राशि :-

मेष राशि वाले जातक अपने घर में अखंड ज्योत जलाये और माँ शैलपुत्री को  लाल चुनरी अर्पित करके माँ का आशीर्वाद प्राप्त करे |

वृषभ राशि:-

वृषभ राशि वाले जातक माँ शैलपुत्री को नारियल  भेट  करें और माँ दुर्गा चालीसा का पाठ करें,माँ की विशेष कृपा प्राप्त होगी|

मिथुन राशि :-

मिथुन राशि के लोग को पूरी शृद्धा के साथ पूजा अर्चना करे और माँ शैलपुत्री को श्रृंगार का सामान भेट करने से पति की लम्बी आयु और कुवारी कन्याओ को इच्छुक वर प्राप्त होता हैं |

कर्क राशि :

कर्क राशि के जातक माँ शैलपुत्री को इत्र अर्पित करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें | ऐसा करने से माँ शैलपुत्री आपके मनोकामना अवश्य पूरी करेंगी |

सिंह राशि :-

सिंह राशि के लोग तिल के तेल से अखंड ज्योत जलाएं और दुर्गा चालीसा का पाठ करें | माँ शैलपुत्री की विशेष कृपा होगी |

कन्या राशि :

इस राशि के लोगो को लाल वस्त्र धारण करके माँ शैलपुत्री की सच्चे मन से और शांत भाव से पूजा अर्चना करने चाहिए और इस मंत्र का जाप करें -

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रार्द्वकृत शेखराम।

वृषारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम॥

और भोजन स्वरूप खीर का भोग लगाने से माँ आपके सारे कष्ट हर लेंगी |

तुला राशि :

तुला राशि के जातक माँ शैलपुत्री को सुगन्धित फूल अर्पित करें और उनके चरण अभिषेक करके उस जल को अपने पूरे घर में छिडकें, ऐसा करने से माँ शैलपुत्री आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेंगी |

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और किसी  भी कार्य पर जाने से पहले घर के बड़ों का आर्शीवाद अवश्य ले | आपको सफलता अवश्य मिलेगी |

धनु राशि :-

धनु राशि के लोग लाल या पीले वस्त्र धारण कर माँ शैलपुत्री के आगे ज्योत जलाएं और आरती का उच्चारण करें तथा जरूरतमंद लोगो को भोजन खिलाएं | ऐसा करने से आपको माता का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होगा |

मकर राशि :-

मकर राशि के लोग अपने घर के मंदिर में कपूर की धुप दें और दुर्गा चालीसा का पाठ करें | ऐसा करने से माँ के आशीर्वाद से जीवन में संदेह के सभी बादल छंट जाते हैं |

कुंभ राशि :-

इस राशि के लोग दुर्गा चालीसा का पाठ करें और -

पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥

पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥

मंत्र का जाप करें और माँ शैलपुत्री को केले और शहद से भोग लगाएं | माँ शैलपुत्री का आशीर्वाद सदा आप पर बना रहेगा |

मीन राशि :

मीन राशि के जातक माँ शैलपुत्री को लाल चुनरी, सफेद फूल अर्पित करें तथा रोली का तिलक लगाएं और दुर्गा चालीसा का पाठ करें | माँ के आशीर्वाद से आपको सफलता और जीत अवश्य प्राप्त होगी |

पूजा विधि -  
सर्वप्रथम शुद्ध होकर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ दुर्गा के  शैलपुत्री स्वरूप की प्रतिमा स्थापित करें | तत्पश्चात भगवती दुर्गा दुर्गतिनाशिनी की पूजा लाल पुष्प , अक्षत , रोली , चन्दन आदि से करें | उसके बाद वंदना मंत्र का एक माला तक जाप करें | ततपशचात माँ दुर्गा स्तुति करें | पूजन के उपरान्त माता को सफ़ेद चीज़ो का भोग लगाएं | अधिक जानकारी के लिए आप मेरा
ब्लॉग पढें |

मां शैलपुत्री - पहले नवरात्र की व्रत कथा

एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। सभी देवी देवताओं को निमंत्रण दिया किन्तु भगवान् शिव के औघड़ रूप होने के कारण उन्होंने उन्हें आमंत्रित नहीं किया । देवी सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।

उन्होंने अपनी यह इच्छा भगवान शिव को बताई तब उन्होंने देवी सती को समझाया कि प्रजापति दक्ष हमसे किसी कारणवश रुष्ट हैं  इसलिए उन्होंने हमें निमंत्रण नहीं दिया है | ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहां जाना श्रेयस्कर नहीं होगा | 
भगवान शिव के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ  उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी।

वहां जाने के उपरांत उन्होंने देखा कि उनका कोई भी परिजन उनसे प्रेम - पूर्वक वार्तालाप आदि नहीं कर रहा है जिससे उनके सम्मान को ठेस पहुंची तब उन्हें प्रतीत हुआ कि उन्होंने भगवान शिव की बात न मानकर बहुत बड़ी गल्ती की है और अपने घर में अपने पति को अपमान को सहन नहीं कर पायीं  | तब उन्होंने उसी योगाग्नि में स्वयं को जलाकर भस्म कर दिया | 

इसके बाद देवी सती ने पर्वत राज हिमालय की पुत्री के रूप में पुन: जन्म लिया और देवी शैलपुत्री के नाम से विख्यात हुईं