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Nag Panchami

Nag panchami

नाग पंचमी का महत्व

एक बार ब्रह्मा जी ने सर्पों की रक्षा हेतु सर्प यज्ञ का वरदान पंचमी के दिन दिया था और आस्तिक मुनि ने भी पंचमी को ही नागों की रक्षा की थी | तभी नागपंचमी की तिथि नागों को अत्यंत प्रिये हैं इसलिए नागों को प्रसन्न कर शिवकृपा प्राप्त करने के लिए नाग पंचमी मनाई जाती है  | प्रत्येक वर्ष  श्रावण माह की शुक्ल पंचमी  को उपवास कर नागों की पूजा करनी चाहिए | बारह महीनें तक चतुर्थी तिथि के दिन एक बार भोजन करके पंचमी का व्रत करें | पृथ्वी पर नागों के चित्र अंकित करके काष्ठ या मिट्टी के नाग बनाकर पंचमी के दिन करवीर , कमल , चमेली आदि पुष्प , गंध , धुप , नैवेद्य आदि से उसकी पूजा करके घी , खीर , लडडू ब्राह्मणों को खिलाएं |

अनंत , बासुकी , शंख, पदम् , कम्बल ,कर्कोटक ,अश्वतर , घृतराष्ट्र , शंखपाल , कालिया तक्षक और पिंगल  इन बारह नागों की बारह महीनों में क्रमश: पूजा करने का विधान है | यही यज्ञ विधान जनजमेजय ने अपने पिता परीक्षित के लिए किया था | यदि जातक इस दिन उपवास रख पाये तो अत्यंत लाभकारी होता है तथा यही नागपंचमी के दिन की विशेषता व महिमा है |

नाग पंचमी का ज्योतिषीय सम्बन्ध

यदि जातक की कुंडली में कालसर्प दोष व्याप्त है तो उसको निष्फल करने का विधान नाग पंचमी के दिन होता है | यदि  सम्पूर्ण विधि - विधान के अनुसार नागपंचमी के दिन सच्चे मन से पूर्ण उपवास रखकर भगवान शिव की पूजा कर शिवकृपा प्राप्त करते हैं तो कालसर्प दोष ने जो उत्पात कुंडली में मचाया होगा वह निष्क्रिय हो जाता है | इस दिन नागों को दूध का स्नान -पान कराने से सभी बड़े -बड़े नाग अभयदान देते हैं | परिवार में सर्पभय नहीं रहता | वर्तमान में कालसर्प योग का प्रभाव क्षीण हो जाता है |

पूजा विधि

नागपंचमी के दिन नागों से शिवजी का वरदान पाना नितांत सरल है | इस दिन घर में किसी पात्र में जातक पंचामृत का निर्माण करे तथा एक चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा इस पंचामृत में डालें और फिर निकट के शिवालय जाकर उस चांदी के नाग-नागिन युत पंचामृत को शिवलिंग पर अर्पित करें तथा 108 बार “ॐ नम: शिवाय” : मंत्र दोहराएं |