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EFFECT ON EACH SIGN WHEN MARS ENTERS IN ARIES SIGN

MARS ENTER IN ARIES

मंगल ग्रह पृथ्वी का पुत्र तथा अग्नि तत्व है | मंगल ग्रह को भौम और कुज नाम से भी जाना जाता है मंगल अपनी स्वराशि मेष में प्रवेश कर रहा है | मंगल तृतीय भाव का कारक है तृतीय भाव सहजता और विवेक को दर्शाता है | मंगल भूमि , पराक्रम , विजय , कीर्ति और साहस का कारक ग्रह है |

आइये जानते हैं कि सहजता का कारक मंगल का सभी राशियों पर क्या प्रभाव होगा-

मेष राशि -

गोचर का मंगल जब प्रथम स्थान में भ्रमणशील होगा तब जातक के अंदर शक्ति के प्रदर्शन एवं स्पर्धा की भावना बढ़ जाएगी | आत्मविश्वास में वृद्धि होगी | जातक को सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होगी | शुभ मंगल की दृष्टि से सभी प्रकार के भौतिक सुखों में वृद्धि होगी | इस समय जातक यदि कार्यरत हैं तो उन्हें उच्च पद की प्राप्ति होगी | मंगल के प्रथम भाव में होने पर जातक का स्वास्थ्य भी उत्तम रहेगा | इस समय जातक को भूमि लाभ की भी सम्भावना है | उपाय हेतु जातक किसी भी मांमले में झूठ न बोले अन्यथा आत्मविश्वास में कमी होगी और हानि का सामना भी करना पड़ सकता है |

वृषभ राशि -

वृषभ राशि के जातकों के लिए , मंगल द्वादश भाव में प्रवेश करेगा | गोचर का मंगल जन्मकुंडली के बारहवें स्थान में भ्रमण करता है तो जातक उत्साहहीन एवं उदासीन रहता है | ऐसे समय जातक को परोपकार एवं मानवसेवाओं में अत्यधिक रूचि रखनी चाहिए | जिससे जातक के मनोबल में वृद्धि होती है | इस समय जातक को गुप्त शत्रुओं से सावधान रहना चाहिए | इस समय गुप्त रूप से बनाई गयी योजनाओं में सफलता प्राप्त होगी | जातक को व्यापर में लाभ होगा | उपाय हेतु - जातक मंगल का व्रत करें |

मिथुन राशि -

मिथुन राशि के लिए मंगल एकादश स्थान में होगा | गोचर का मंगल जब जन्म कुंडली से एकादश स्थान में भ्रमण शील होता है तो जातक अपने जीवन में संघर्ष करता है और अपने संघर्षों में सफलता प्राप्त करता है | मंगल का यह गोचरकाल शत्रुओं के नाश हेतु एवं धन वैभव की प्राप्ति हेतु यह समय अत्यंत लाभदायक है | इस समय जातक के व्यापर में वृद्धि होगी | परिजनों और मित्रों की सहायता प्राप्त होगी | उपाय हेतु जातक मंगल की उपासना एवं हनुमान जी का व्रत करें |  

कर्क राशि -

कर्क राशि के जातकों के लिए मंगल दसवें स्थान में होगा | गोचर के मंगल के दसवें स्थान में होने पर जातक कुछ घमंडी एवं हठीला हो जाता है | व्यापार में स्पर्धा बढ़ जाती है | लेकिन जातक टकराहट के साथ सफलता प्राप्त करता है | गोचर का यह मंगल जातक के भौतिक सुखों में वृद्धि करता है |  इस समय जातक को नए ज्ञान की प्राप्ति होती है | उपाय हेतु जातक भौम के वैदिक मंत्र की साधना करें इससे जातक को मानसिक शांति मिलेगी |

सिंह राशि -

सिंह राशि में के जातकों के लिए मंगल नवम भाव में स्थित होगा | यह समय सिंह राशि के जातकों के लिए शुभ नहीं है | जातक क़ानूनी - उलझनों व कोर्ट - केस आदि के चक्कर में फंस सकता है | जातक के पिता से मतभेद हो सकते हैं | इस समय जातक कोई भी ऐसा कार्य न करें जिससे उनके आदर में कमी आये | मंगल के इस गोचरकाल में जातक को विदेश की यात्रायें भी करनी पड़ सकती हैं | उपाय हेतु जातक मंगल वार की कथा एवं उपवास रखें और बड़ों का आदर सत्कार करें |

कन्या राशि -

कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल अष्टम स्थान में प्रवेश करेगा | कन्या राशि के जातकों के लिए यह समय मिले - जुले परिणाम लेकर आएगा | यदि कोई कार्य लम्बे समय से रुका हुआ है तो इस समय अचानक उसके पूर्ण होने की सम्भावना है कोशिशें जारी रखें | इस समय जातक को मानसिक अशांति रहेगी परिवार में भी वैमनस्य की स्थिति बन सकती है | जातक को इस समय लम्बी यात्रायें टालनी चाहिए अन्यथा दुर्घटना की सम्भावना है | उपाय हेतु जातक मंगल ग्रह की शांति का विधान करें |

तुला राशि -

तुला राशि के जातकों के लिए मंगल सातवें स्थान में प्रवेश करेगा | जब मंगल का गोचर जन्म कुंडली से सातवें स्थान पर होता है तो जातक का आपसी मतभेद के कारण सगाई या विवाह छूट सकता है | जातक परिजनों एवं सहयोगियों से रूखा व्यवहार करेगा | जातक को आंतरिक  चोट भी पहुँचने की सम्भावना है | उपाय हेतु जातक भौम मंगल स्त्रोत का पाठ करें | घर में शांति रहेगी एवं शुभता आएगी | 

वृश्चिक राशि -

वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल छठवें स्थान पर होगा | गोचरकाल के समय समय जब मंगल जन्मकुंडली में छठवें स्थान पर होता है तो जातक को व्यर्थ की यात्रायें करनी पड़ सकती हैं | इस समय वृश्चिक राशि के जातक अपने अहंकार को नियंत्रण में रखें अन्यथा अधीनस्थ कर्मचारियों से मतभेद हो सकता है | इस समय जातक को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना अति आवश्यक है | यदि कोई शत्रु है तो इस समय उससे बेहद सावधान रहें | विवाह सम्बन्धी बाधा निवारण हेतु घट - विवाह का पाठ करें |

धनु राशि -

धनु राशि के जातकों के लिए मंगल पंचम स्थान  में प्रवेश करेगा | गोचर का मंगल जब जन्मकुंडली के पांचवें भाव में आता है तो जातक की संतान सम्बन्धी समस्याओं का निवारण होता है | विद्या अध्ययन में युक्त जातकों के लिए यह समय सफलता लेकर आता है | धनु राशि के जातकों में साहस की वृद्धि होती है | इस समय ध्यान रखना चाहिए की व्यर्थ का अहंकार हानिकारक हो सकता है | इसलिए अहंकार और कटु वचन का त्याग करें | इस समय जातक किसी शुभ कार्य हेतु धन का व्यय भी कर सकता है | उपाय हेतु जातक नीम का वृक्ष रोपण करें , लाभ होगा |

मकर राशि -

मकर राशि के जातकों के लिए मंगल चतुर्थ स्थान पर होगा | जब मंगल चतुर्थ स्थान पर भ्रमण करता है तो जातक का मानसिक संतुलन बिगड़ने की सम्भावना रहती है | परिवार में कलह पूर्ण वातावरण रहेगा | जातक को कोई भी निर्णय लेने से पूर्व सभी परिजनों की भावनाओं का ध्यान रखें | बिना सोचे समझे कोई भी निर्णय न लें | मंगल के चतुर्थ स्थान पर होने पर भौतिक सुखों में कमी आएगी | उपाय हेतु - मिट्टी के किसी पात्र में शहद भरकर किसी सूनसान जगह पर दबाएं , मानसिक शांति मिलेगी |

कुम्भ राशि -

कुम्भ राशि के जातकों के लिए मंगल तृतीय भाव में प्रवेश करेगा | जन्म राशि से तृतीय स्थान में मंगल के गोचरकल में जातक को अत्यंत सावधानी बरतनें की आवश्यकता होती है | जातक  अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें | किसी से दुर्व्यवहार न करें | कुम्भ राशि के जातकों को इस समय वाहन दुर्घटना का भय रहेगा | इस समय जातक के संचालित कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न  होने की सम्भावना है | उपाय हेतु - भौम मंगल स्त्रोत का पाठ करें |

मीन राशि  -

मीन राशि के जातकों के लिए मंगल द्वितीय राशि में प्रवेश करेगा | गोचर का मंगल जब जन्म कुंडली से द्वितीय स्थान में भ्रमणशील होता है तब जातक की चोरी - लूट या जायदाद सम्बन्धी चिंताएं बढ़ जाएँगी | जमीन को लेकर वाद-विवाद भी हो सकता है | जातक की भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु महत्वकांक्षाएँ बढ़ जाएँगी | अपनी भौतिक इच्छाओं की पूर्ती हेतु जातक  व्यर्थ में धन व्यय कर सकता है | इसलिए जातक को व्यर्थ के खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा | उपाय हेतु जातक मंगल चंडिका स्त्रोत का नियमित पाठ करें | लाभ होगा |

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