noscript

SURYA GRAHAN

DR. VINAY BAJRANGI

इस वर्ष सूर्य ग्रहण 15 फरवरी  2018 गुरूवार को हैं |

सूर्य ग्रहण :- इस ग्रहण में जब चाँद, सूर्य, और पृथ्वी एक ही सीध में होते हैं, और चाँद, पृथ्वी और सूर्य के बीच होने की वजह से चाँद की छाया पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे सूर्य की रौशनी पृथ्वी तक नहीं पहुँचती हैं या फिर सूर्य की आंशिक रौशनी ही पृथ्वी तक पहुँचती हैं | पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती हैं और चाँद पृथ्वी की | कभी - कभी चाँद, सूरज और पृथ्वी के बीच जाता हैं | फिर वह सूर्य की कुछ या सारी रौशनी रोक लेता हैं | जिससे धरती पर छाया फैल जाता हैंइस अवस्था को सूर्य ग्रहण कहते हैंऐसा अमावस्या के दिन ही होता हैं |

ग्रहण के समय  क्या करें, क्या करें?

. ग्रहण के समय संयम रखकर जप - ध्यान करें | श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ' नमो नारायणाय' मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्धि होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाक् सिद्धि प्राप्त कर लेता है।

. ग्रहण काल में ईश्वर भी संकट में होते हैं, इस लिए ग्रहण के समय कोई भी शुभ नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

. सूर्यग्रहण में ग्रहण चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व  भोजन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक 'अरुन्तुद' नरक में वास करता है।

. ग्रहण - वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।

. गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।  गर्भवती महिला को ग्रहण के समय कुछ भी काटना, तोड़ना, या सिलना नहीं चाहिए | ऐसा करती हैं तो गर्भ में पलने वाले बच्चे या तो विकलांग होते हैं या उनके अंग जुड़े होते हैं |

. ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।

. ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।

. ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है। ग्रहण के दौरांन अधिक से अधिक दान पुण्य करने चाहियें

. ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए दंतधावन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन - ये सब कार्य वर्जित हैं।

१०सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्यग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगाजल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।