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BRAHMACHARINI BLESSES YOU THE CORE

BRAHMACHARINI PROPELS YOUR FATE

ब्रह्मचारिणी

 द्वितीय नव रात्रि को ब्रह्मचारिणी माता की  पूजा की जाती हैं |

वंदना मंत्र

 “दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू.

 देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा”

माँ दुर्गा का दूसरा स्वरूप उनके भक्तों को अनंत फल देने वाला हैं |नव दुर्गा पूजन में दूसरे दिन साधक का मन 'स्वाधिष्ठान 'चक्र में स्थित होता है| इस चक्र में अवस्थित मन वाला योगी इनकी कृपा और भक्ति प्राप्त करता है |

उपर्युक्त मंत्र का जप शुद्ध उच्चारणपूर्वक क्रिस्टल की एक  माला से 108  बार करें | फिर दुर्गा जी की आरती कर के , तांबे का ब्रह्मचारिणी माता चित्र बीसा यन्त्र, सहित देवी भक्तो में बाँटे, तो और भी अधिक लाभ प्राप्त होता है  |

ब्रह्मचारिणी माँ का ज्योतिषीय सम्बन्ध 

दुर्गा माँ का अविवाहित रूप माँ ब्रम्चारणीय है |  दक्ष प्रजापति के घर पैदा हुईं,  उनका रूप  बहुत दीप्तिमान और साथ - साथ उनके मुख पर हमेशा  तेज रहता  है और वह  अधिकांश समय ध्यान में लीन रहतीं  है | उनको देवी तपस्वनी या देवीयोगी के नाम से भी जाना जाता है |  हम सबके मन में एक आवेग रहता है जिसके कारण हम कुछ न कुछ गलतियाँ कर बैठते है , और यह  आपसे जाने अनजाने में जल्दी बाजी के कारण होतीं हैं |

 यदि आपके ऊपर माँ भ्र्मचारिणी  का आशीर्वाद है तो फिर आपको  इस  प्रकार की परेशानी से दो चार नहीं होना पड़ेगा | दूसरी बात  यह है की माँ ब्रम्चारिणी की पूजा करने से आपके स्वस्थ में वृद्धि होती है क्योंकि उनका जो खाना है वो सिर्फ फल और कंदमूल होते  है जब आप उनकी पूजा करते है तो आप फल और कंदमूल खाने की तरफ अग्रषित  हो सकते है | ओर आपने स्वस्थ के साथ  न्याय करना आरम्भ कर  सकते है | एक बात और है यदि आपको कुछ ऐसे लोग जो बहुत अधिक बुद्धिमान है , वो सता रहे है आपके शत्रु बन रहे है तो  माँ  ब्रम्चारणीय की पूजा करके  उनका हनन या विनाश  हो जाता है यानि की आपका छठा भाव जागृत होकर लाभ देने लगता है  है |