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सकट चौथ व्रत कथा

Bajrangi Dhaam Sakat Chauth

सकट चौथ व्रत का महत्व 

इस वर्ष सकट चौथ व्रत 5 January  2018 को मनाया जाएगा |

एक गरीब बुढ़िया गांव में अपने इकलौते बेटे के साथ रहती थी | एक बार बेटे लोगो के बहकावे में आ कर माँ से बोला कि मैं शहर जाऊंगा | बुढ़िया का एक ही सहारा था | बुढ़िया ने बेटे को बहुत समझाया लेकिन वह नहीं माना | जब बेटा जा रहा था तो बुढ़िया ने उसे कुछ तिल दिए और कहा कि मैं हमेशा चौथ के दिन तेरे लिए व्रत करती थी, और तिल से पूजा करती थी | अगर तुम पर कभी भी कोई संकट आए तो इन तिलो को अपने आस पास डाल देना | चौथ माता तेरी रक्षा करेगी | लड़का चला गया | चलते - चलते दूसरे देश पहुंचा | वहाँ एक बुढ़िया पुडे तल रही थी और रोती जा रही थी | लड़के ने पूछा कि आप रो क्यों रही हैं ? बुढ़िया बोली कुछ नहीं तू आगे जा | लड़का फिर बोला मुझे पुडे खिला दो और अपने रोने का कारण बताओ , शायद मैं आपकी मदद कर सकूँ |

बुढ़िया बोली इस देश का राजा हर छठे महीने 1 बच्चे की बलि लेते है | इस बार मेरे बेटे की बारी है | लड़का बोला माँ तू मुझे पुडे खिला दे | जब राजा के सेवक आऐगा तो तेरे बेटे की जगह मैं उसके साथ चला जाऊंगा |

राजा के सेवक आए और लड़के को ले गए | एक गद्दा खोदा और उसे उसमे बिठा दिया | लड़का जब उसमे बैठ रहा था तो उसने अपने चारो तरफ अपनी माँ के दिए तिल डाल लिया, सोचा देखूं माँ के तिलो में कितना सत्  है ? जो आंवा 6 महीने में पकता था वो तीन दिन में पक गया | लोगो ने ये बात राजा तक पहुंचाई | राजा ने तुरंत सैनिक भेजे | जब सैनिक उसे खोदने लगे तो अंदर से आवाज आई धीरे - धीरे | जब गद्दा खोदा तो उसमे से लड़का जिन्दा निकला | उसे राजा के पास लेकर गए | राजा ने पूछा ये चमत्कार कैसे हुआ | तब लड़के ने अपनी माँ और तिलो की कहानी बताई | राजा बहुत प्रभावित हुआ | तब से हर साल ये चौथ सकट चौथ के रूप में मनाई जाती है |