सकट चौथ पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय : 17 जनवरी 2025 को शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी सकट चौथ. सकट चौथ के दिन इस बार बनेंगे कुछ खास योग जिसमें से पंचांग अनुसार चंद्रमा करेगा सिंह राशि में गोचर, मघा नक्षत्र 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा उसके पश्चात पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र की प्राप्ति होगी. सौभाग्य नामक योग बनेगा जो देगा पूजन का विशेष लाभ सकट चौथ के दिन चंद्रमा के उदय का समय रात्रि 09 बजकर 08 मिनट के करीब रहेगा. सकट चौथ के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं जो इसके महत्व के बारे में विस्तार से बताती है. जहां इस दिन का संबंध संतान सुख की प्राप्ति के लिए उत्तम माना गया है, वहीं इसे सौभाग्य और सुख की प्राप्ति के लिए भी विशेष माना जाता है. आध्यात्मिक एवं सांसारिक सुखों को पूरा करने वाला यह पर्व जीवन के विविध पक्षों को प्रभावित करता है. आइये जान लेते हैं सकट चौथ से संबंधित कुछ बातें जो इस दिन की विशेषताओं को दर्शाती हैं. सकट माता देती है संतान सुख का आशीर्वाद सकट चौथ के दिन भगवान श्री गणेश जी के साथ साथ सकट माता का पूजन भी किया जाता है. माताएं इस दिन सकट देवी का पूजन करती हैं, कुछ मान्यताओं के अनुसार देवी दुर्गा को सकट माता के रूप में पूजा जाता है, और अपनी संतान के सुख सौभाग्य का आशीर्वाद पाती हैं. माघ संकष्टी चतुर्थी का पौराणिक महत्व: माघ संकष्टी चतुर्थी के बारे में पौराणिक कथाओं में कई कथाओं का समिश्रण दिखाई देता है. एक कथा अनुसार देवी पार्वती द्वारा जब गणेश जी को बनाया गया है तो भगवान शिव द्वारा उन्हें हाथी का सिर प्रदान करके गणेश के रूप में स्थापित किया और देवों के अधिपति के रूप में विघ्न विनाशक बने इसी कारण से इस तिथि को भगवान श्री गणेश जी के जन्म की तिथि के रूप में भी पूजा जाता है. एक अन्य कथा अनुसार भगवान गणेश जी ने माता पार्वती और शिव जी की परिक्रमा करते हुए संपूर्ण सृष्टि की परिक्रमा को पूर्ण किया था. एक अन्य कथा बताती है कि माता पार्वती ने अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने और भगवान शंकर को प्रसन्न करने हेतु सकट चौथ का व्रत किया था. इस तरह से ये व्रत जहां जीवन के समस्त सुखों को प्रदान करने वाला होता है वहीं व्यक्ति की सभी मनोकामनाओं को भी पूर्ण करता है. सकट चौथ के दिन से जुड़ी परंपराएं सकट चौथ को उन कुछ खास चतुर्थी के रूप में जाना जाता है जिसका बहुत ही विशेष प्रभाव रहा है. भाद्रपद माह में आने वाली चतुर्थी की ही भांति सकट चौथ भी एक बड़ी चौथ के रूप में पूजनीय रही है. कुछ स्थानों पर इस दिन परिवार और संतान को संकट से बचाने हेतु सकट चौथ के दिन तिल और गुड़ का उपयोग करके बकरे का आकार देते हैं और उसकी बलि देते हुए भगवान को प्रसन्न किया जाता है और संकट से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. सकट चतुर्थी का ज्योतिषीय महत्व: सकट चतुर्थी का संबंध जहां पौराणिक कथाओं से रहा है वहीं इसका गहरा संबंध ज्योतिष में भी दिखाई देता है. इस संदर्भ में के विशेष बात चंद्र ग्रह से संबंधित रही है क्योंकि हर माह आने वाली चतुर्थी तिथि के दिन चंद्रमा का पूजन भी विशेष तौर पर होता है और इस दिन बड़ी चौथ पर भी चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ही सकट चौथ का व्रत संपन्न माना जाता है. चंद्रमा को ज्योतिष में माता, मन, भावनाओं का कारक ग्रह माना गया है और सकट चौथ के दिन चंद्रमा का पूजन करने से कुंडली में मौजूद चंद्रमा को बल प्राप्त होता है. सकट चौथ का पूजन जन्म कुंडली के पंचम भाव और चतुर्थ भाव को बनाता है मजबूत. कुंडली का पंचम भाव संतान सुख और संतान उत्पत्ति का स्थान होता है और चतुर्थ भाव को सुख स्थान माता का स्थान एवं संपत्ति इत्यादि के लिए विशेष माना जाता है.अगर किसी की जन्म कुंडली में संतान न होने का योग बना हुआ है, या संतान में विलंब का योग है तो ऐसे जातक के लिए सकट चौथ की पूजा विशेष फल देने वाली होती है. संपत्ति से संबंधित कोई विवाद हो, प्रॉपर्टी योग में बाधा बनी हुई हो, मानसिक तनाव या चिंता अपना असर डाल रहे हों या फिर स्वास्थ्य से जुड़े मामले परेशानी दे रहे हैं तो इन सभी से छुटकारा पाने के लिए सकट चौथ का दिन बहुत ही विशेष होता है और तुरंत फल प्राप्त होते हैं.