तिथि और मुहूर्त: पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर की शाम 6:48 बजे से प्रारंभ होकर 5 नवंबर की रात 8:04 बजे तक रहेगी।इस दौरान स्नान, दान, दीपदान और मंत्रजप के कार्य अत्यंत शुभ माने गए हैं।पंचांग के अनुसार, यह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि होगी, जब चंद्रमा अपनी सर्वाधिक प्रभावशाली स्थिति में होता है। पौराणिक कथाओं में कार्तिक पूर्णिमा का महत्व: हिंदू ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि तीन महादेविक घटनाओं का संगम है त्रिपुरारी पूर्णिमा:इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध कर तीनों लोकों को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। इसीलिए इस दिन को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।मात्स्य अवतार का दिवस:श्रीविष्णु ने इसी दिन मछली अवतार धारण कर वेदों की रक्षा की थी। यह घटना “ज्ञान की रक्षा” का प्रतीक मानी जाती है।देव दीपावली का प्रारंभ:पुराणों में उल्लेख है कि त्रिपुरासुर वध के उपलक्ष्य में देवताओं ने गंगा तट पर दीप जलाए थे।तब से ही इसे “देव दीपावली” कहा जाता है – वह दीपावली जो स्वयं देवताओं के लिए होती है। कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक और कर्मिक महत्व: शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था और देवताओं ने असुरों पर विजय प्राप्त की थी।इसीलिए इसे “देव दीपावली” कहा जाता है — जब स्वयं देवता पृथ्वी पर आकर दीप जलाते हैं।ज्योतिष की दृष्टि से यह दिन कर्मिक शुद्धि और पाप क्षालन का अवसर है।जो व्यक्ति इस दिन प्रातःकाल स्नान, दीपदान और दान करता है, उसके ग्रह दोष और नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है।यह दिन उन लोगों के लिए विशेष रूप से फलदायी है जिनकी कुंडली में चंद्र, शुक्र, राहु या केतु से संबंधित पीड़ाएँ हों। क्या करें इस दिन: ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और सूर्य को अर्घ्य दें।भगवान विष्णु, शिव और माता लक्ष्मी की पूजा करें।तुलसी, गंगा या किसी पवित्र स्थल पर दीपदान करें।गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या दीप दें।शाम के समय अपने घर के द्वार पर 11 दीप अवश्य जलाएँ।क्या न करें:किसी का अपमान, झूठ या क्रोध से बचें।इस दिन तामसिक भोजन या नकारात्मक विचारों से दूरी रखें।किसी भी शुभ कार्य को बिना स्नान या शुद्धता के न करें। ग्रहों के लिए विशेष उपाय: चंद्र दोष से मुक्ति: सफेद चावल या चांदी का दान करें।शुक्र दोष शांति: स्त्रियों या कन्याओं को सुगंधित वस्त्र या श्रृंगार सामग्री दें।गुरु कृपा हेतु: पीले वस्त्र पहनें और तुलसी में दीप जलाएँ।राहु-केतु शांति: रात्रि में बहते जल में दीप प्रवाहित करें। कार्तिक पूर्णिमा और जीवन परिवर्तन: डॉ. विनय बजरंगी के अनुसार, “यह दिन केवल पूजा का नहीं, जीवन की दिशा बदलने का अवसर है। इस दिन की गई प्रार्थना सीधे ब्रह्मांड तक जाती है।जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से साधना करता है, उसे आने वाले वर्ष में मानसिक शांति, भौतिक सुख और आत्मिक विकास — तीनों प्राप्त होते हैं।”कार्तिक पूर्णिमा 2025 की खगोलीय स्थिति यह संकेत दे रही है कि यह दिन धन, वैवाहिक जीवन, और आध्यात्मिक उत्थान के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। निष्कर्ष: कार्तिक पूर्णिमा 2025 एक ऐसा दिन है जब धर्म, ज्योतिष और अध्यात्म एक सूत्र में बंधते हैं।यह वह रात है जब आकाश में चंद्रमा केवल प्रकाश नहीं, बल्कि ईश्वरीय ऊर्जा का वाहक बन जाता है।इसलिए इस दिन किया गया छोटा-सा दान, दीप या जप भी व्यक्ति के जीवन में चमत्कारी बदलाव ला सकता है।डॉ. विनय बजरंगी कहते हैं —“जब देवता धरती पर उतरते हैं, तब मनुष्य को बस एक काम करना चाहिए — अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर प्रकाश को अपनाना।”क्या आप जानना चाहते हैं कि इस कार्तिक पूर्णिमा का आपकी कुंडली पर क्या असर होगा?