दिवाली की रात: ग्रहों और नक्षत्रों का विशेष संयोजन: दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि शनि, शुक्र और चंद्रमा के विशेष संयोग का समय होता है।शुक्र ग्रह — धन, विलासिता और सुख का कारक है।चंद्रमा — मन की स्थिरता और शुद्धता का प्रतीक है।शनि — कर्म और स्थायित्व देता है।जब ये तीनों ग्रह शुभ भावों में सक्रिय हों, तो लक्ष्मी कृपा स्वतः आकर्षित होती है।इस वर्ष की दिवाली में शुक्र और चंद्रमा का शुभ योग लक्ष्मी साधना के लिए अत्यंत फलदायी रहेगा। घर की दिशा और वास्तु: कहाँ करें लक्ष्मी पूजन: ज्योतिष और वास्तु शास्त्र दोनों मानते हैं कि लक्ष्मी पूजन पूर्व या उत्तर दिशा में करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।अगर आपके घर का मुख्य द्वार ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) दिशा में है, तो दीप जलाने से पहले हल्दी या केसर मिले जल से द्वार शुद्ध करें।लक्ष्मी जी की मूर्ति को चांदी की थाली या कमल के फूल पर स्थापित करें, और सामने दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाएं — जिससे नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाए। ज्योतिषीय उपाय लक्ष्मी स्थायित्व के लिए: डॉ. विनय बजरंगी के अनुसार, सिर्फ पूजन नहीं, बल्कि ग्रहों की दशा-संतुलन भी जरूरी है।यदि आपकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, राहु की दशा, या कुबेर योग की कमी है, तो लक्ष्मी स्थिर नहीं रहतीं।उपाय:शुक्रवार को श्री सूक्त का पाठ करें।लक्ष्मी पूजन के दिन 11 गोमती चक्र हल्दी मिले जल में प्रवाहित करें।घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक, ॐ, और श्री का अंकन करें। दिवाली 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त: विवरण समय / तिथित्योहार दिवाली (लक्ष्मी पूजन)दिनांक सोमवार, 20 अक्टूबर 2025अमावस्या तिथि प्रारंभ 20 अक्टूबर को दोपहर 3:44 बजेअमावस्या तिथि समाप्ति 21 अक्टूबर को शाम 5:54 बजेप्रदोष काल 5:46 बजे से 8:18 बजे तकवृषभ काल (लक्ष्मी पूजन हेतु श्रेष्ठ समय) 7:08 बजे से 9:03 बजे तकशुभ मुहूर्त 7:08 बजे शाम से 8:18 बजे शाम तकइस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करने से धन वृद्धि, सौभाग्य और स्थायी समृद्धि के योग कई गुना बढ़ जाते हैं। कुंडली आधारित लक्ष्मी साधना: हर व्यक्ति की कुंडली में एक ‘धन भाव’ (दूसरा और ग्यारहवां भाव) होता है।अगर इन भावों के स्वामी शुभ ग्रह जैसे शुक्र, बृहस्पति या बुध हैं, तो व्यक्ति के जीवन में लक्ष्मी सहजता से आती है।लेकिन यदि राहु या केतु इन भावों को प्रभावित कर रहे हों, तो पूजन के साथ राशि अनुसार उपाय करना चाहिए —राशि उपायमेष लाल फूलों से पूजन करें।वृषभ चांदी की थाली में दीप जलाएं।मिथुन तुलसी पत्र चढ़ाएं।कर्क दूध या खीर का भोग लगाएं।सिंह केसर और गुलाब से आराधना करें।कन्या घी के दीपक से पूजन करें।तुला कमल पुष्प और इत्र का प्रयोग करें।वृश्चिक शहद और लाल वस्त्र का उपयोग करें।धनु पीले पुष्प और हल्दी से पूजा करें।मकर तिल और तेल का दीपक पूजन में रखें।कुंभ क्रिस्टल या सफेद पुष्प से आराधना करें।मीन शंख और मोती से पूजन करें। निष्कर्ष: दिवाली सिर्फ दीप जलाने का पर्व नहीं, बल्कि आपकी कुंडली के ग्रहों को प्रकाशित करने का अवसर है।अगर आप चाहते हैं कि लक्ष्मीजी आपके घर में स्थायी रूप से निवास करें, तो इस बार केवल पूजा नहीं — ज्योतिषीय रूप से संतुलित लक्ष्मी साधना करें।डॉ. विनय बजरंगी की सलाह में जानें कि आपकी जन्मकुंडली में कौन सा योग लक्ष्मी को आकर्षित करता है और कौन सा ग्रह उनके आने में बाधा डालता है।क्योंकि सही ग्रहों को जागृत करके ही आप इस दिवाली वास्तविक धन, सुख और स्थायी समृद्धि का द्वार खोल सकते हैं।