क्या ग्रह योग पहले से दे रहे थे अस्थिरता के संकेत?: बांग्लादेश में छात्र नेता की हत्या के बाद हालात तेजी से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। ढाका सहित कई प्रमुख शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं और राजनीतिक बयानबाज़ी ने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं, जबकि सरकार स्थिति को नियंत्रण में रखने के प्रयास कर रही है।इस घटनाक्रम को अब केवल एक आपराधिक मामला मानकर नहीं देखा जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों के साथ-साथ ज्योतिष विशेषज्ञ भी इसे बड़े राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता चक्र का संकेत मान रहे हैं, जो आने वाले समय में और गहराने की आशंका पैदा करता है। क्या पर्दे के पीछे चीन–पाकिस्तान की रणनीतिक चाल?: बांग्लादेश में जब भी आंतरिक अस्थिरता बढ़ती है, तब क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन और पाकिस्तान जैसे देश ऐसे संवेदनशील दौर में अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। यह हस्तक्षेप प्रत्यक्ष न होकर कूटनीतिक दबाव, वैचारिक समर्थन और आंतरिक असंतोष को हवा देने जैसे तरीकों से सामने आ सकता है।मौजूदा हालात में यह सवाल इसलिए भी अहम हो जाता है कि क्या छात्र नेता की हत्या के बाद उत्पन्न सियासी तनाव किसी बड़े भू-राजनीतिक खेल की भूमिका तो नहीं बना रहा। इतिहास बताता है कि अस्थिरता के दौर में बाहरी शक्तियां हालात का लाभ उठाने से पीछे नहीं हटतीं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण: बाहरी प्रभाव की संभावना?: ज्योतिष विशेषज्ञ विनय बजरंगी के अनुसार, जब किसी देश की राष्ट्रीय कुंडली में राहु, शनि और मंगल जैसे ग्रह सक्रिय होते हैं, तब राजनीतिक भ्रम, अविश्वास और गुप्त एजेंडों की संभावना बढ़ जाती है।उनका मानना है कि ऐसे ग्रह योग केवल आंतरिक संघर्ष ही नहीं, बल्कि बाहरी दबाव और रणनीतिक हस्तक्षेप के संकेत भी देते हैं। यह आवश्यक नहीं कि हर घटना किसी साजिश का परिणाम हो, लेकिन ग्रहों की चाल यह दर्शाती है कि बांग्लादेश इस समय ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहां राजनीतिक संतुलन बेहद नाज़ुक बना हुआ है। ज़मीनी हालात: विरोध, तनाव और सियासी टकराव: छात्र नेता की हत्या के बाद विश्वविद्यालय परिसरों में गुस्सा खुलकर सामने आया है। कई स्थानों पर प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं। विपक्ष सरकार पर आवाज़ दबाने और सख्ती के आरोप लगा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला बताकर स्थिति संभालने की बात कर रहा है।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब बांग्लादेश पहले से ही चुनावी दबाव और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा था। क्या अंतरराष्ट्रीय एंगल भी सक्रिय है?: इस पूरे घटनाक्रम के बीच चीन और पाकिस्तान से जुड़े सवाल लगातार उठ रहे हैं। हालांकि किसी भी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता के समय क्षेत्रीय शक्तियां अपने हितों के अनुसार परिस्थितियों को प्रभावित करने का प्रयास करती हैं।ज्योतिषीय दृष्टि से भी, विनय बजरंगी संकेत करते हैं कि जब किसी देश की कुंडली में राहु–शनि जैसे प्रभाव सक्रिय होते हैं, तब भू-राजनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की आशंका स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है?: बांग्लादेश में बढ़ती अस्थिरता का प्रभाव भारत पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके संभावित परिणाम इस प्रकार हो सकते हैं: सीमा क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकताभारत-विरोधी बयानबाज़ी और नैरेटिव के बढ़ने की आशंकापूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर प्रभावक्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलावविनय बजरंगी के अनुसार, भारत की कुंडली में फिलहाल सुरक्षा और कूटनीतिक सतर्कता के संकेत मजबूत बने हुए हैं, जिससे किसी बड़े नकारात्मक प्रभाव से बचाव संभव है, बशर्ते रणनीतिक संयम और संतुलन बनाए रखा जाए। आगे क्या?: राजनीतिक स्तर पर जहां जांच, बयानबाज़ी और विरोध प्रदर्शन जारी हैं, वहीं ज्योतिषीय संकेत यह बताते हैं कि यह घटनाक्रम किसी एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लंबी अस्थिरता प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।विनय बजरंगी के अनुसार आने वाले समय में:राजनीतिक संवाद की कमी बढ़ सकती हैविरोध प्रदर्शन और दबाव की राजनीति तेज हो सकती हैअंतरराष्ट्रीय निगाहें बांग्लादेश पर लगातार बनी रह सकती हैं निष्कर्ष: छात्र नेता की हत्या ने बांग्लादेश की राजनीति को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हालात तेजी से बदल सकते हैं। ज़मीनी राजनीति, क्षेत्रीय भू-राजनीति और ज्योतिषीय संकेत—तीनों ही आने वाले समय को संवेदनशील और निर्णायक बता रहे हैं।अब सवाल यह नहीं कि संकट है या नहीं, बल्कि यह है कि सरकार और क्षेत्रीय शक्तियां इस अस्थिरता को किस दिशा में मोड़ती हैं।