सप्ताह के प्रत्येक दिन होता है व्रत | कब और कैसे करें पूजन

भारत में व्रत/Fast का विशेष महत्व है। व्रत का धार्मिक के साथ साथ वैज्ञानिक महत्व भी है। हिंदू धर्म में, सप्ताह के प्रत्येक दिन एक विशेष देवता को समर्पित होता है। हर दिन उपवास नहीं रखा जा सकता। इसलिए कुछ लोग सप्ताह के वशिष्ट दिनों पर ही उपवास रखते हैं। सप्ताह में प्रत्येक दिन की एक विशेषता होती है और सप्ताह के उन दिनों में रखे जाने वाले उपवास से जुड़े कई लोक कथाएं हैं जिनके बारे में आप पढ़ने वाले हैं।

सप्ताह के प्रत्येक दिन मनाया जाने वाला व्रत/ Fast to be observed on each day of the week

सप्ताह के प्रत्येक दिन एक विशेष भगवान की पूजा होती है और उन्ही से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत भी रखे जाते हैं। चलिए उन व्रत के बारे में जानते हैं –

रविवार व्रत/Sunday Vrat

अक्सर रविवार को लोगों की छुट्टी होती है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत रखता है, वह दिन में एक बार ही भोजन करता है। इस दिन तेल और नमक का सेवन वर्जित होता है और लाल रंग के फूल सूर्य देव को अर्पित किए जाते हैं।

जैसा कि पहले आपको बताया है कि व्रत रखने वाला व्यक्ति दिन में एक बार ही भोजन करता है सूर्यास्त के बाद ही खाता है। इस दिन नमक, तेल और तले हुए पदार्थों का भी सेवन नहीं करना होता और इसके साथ साथ प्रार्थना शुरू करने से पहले लाल चंदन का तिलक लगाया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि रविवार का व्रत/Sunday fast रखने से आपकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती है। जिन लोगों को भी त्वचा से संबंधित समस्याएं होती हैं, उनके लिए यह व्रत लाभकारी होता  है।

सोमवार व्रत/Monday Vrat

सोमवार महादेव को अर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान शंकर को मनाना बहुत आसान है। यही कारण है कि इस दिन बहुत सारे लोग व्रत रखते हैं। जो भी इस दिन व्रत रखता है, वह दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करता है। इस दिन व्रत करने वाले लोग भगवान शिव के मंदिर जाकर पूजा करते हैं। खास तौर पर इस दिन अर्धनारीश्वर की पूजा की जाती है।

पूजा के दौरान भक्त 'ओम नमः शिवाय' का जाप करते रहते हैं। इसके साथ साथ कई भक्त शिव पुराण/Shiv Puran का भी पाठ करते हैं। खास तौर पर इस व्रत को अविवाहित महिलाएं अच्छे पति के लिए रखती हैं। और बाकी सभी भक्त सुखी और समृद्ध पारिवारिक जीवन की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखते हैं। संध्या के समय, माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना के बाद ही भोजन किया जाता है। लेकिन कभी भी किसी भी देव की पूजा करने से पहले भगवान गणेश की स्तुति अवश्य करनी चाहिए। श्रावण के मास में सोमवार का व्रत और भी ज्यादा लाभकारी साबित हो सकता है।

मंगलवार व्रत/Tuesday Vrat

मंगलवार व्रत/Tuesday Vrat का दिन हनुमान जी, और मां दुर्गा को समर्पित होता है। इस दिन बहुत सारे भक्त देवी मां और हनुमान जी के मंदिर भी जाते हैं। इस दिन व्रत रखने का पहला नियम है कि आप नमक का सेवन न करें ।

मंगलवार का नाम मंगल से बना है और बहुत लोगों का मानना है कि मंगल का संबंध समस्या से है। इस दिन व्रत रखने से हर प्रकार के दुष्प्रभाव से छुटकारा पाया जा सकता है। इस दिन लाल रंग का विशेष महत्व होता है।

लगभग संपूर्ण भारत में मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा की जाती है, लेकिन यहां आपको एक बात समझनी होगी कि भारत के अलग अलग क्षेत्र में इस दिन अलग अलग देवों की पूजा होती है। जैसे दक्षिण भारत में स्कंद जी या मुरुगन या कार्तिक की पूजा होती है। लेकिन आम तौर पर इस दिन हनुमान जी का ही पूजन होता है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।

बुधवार व्रत/ Wednesday Vrat

किसी भी व्रत को विधि अनुसार श्रद्धा पूर्वक करने से उसके फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिष में बुध ग्रह को शांत मन और स्वभाव प्रदान करने वाला माना जाता है। बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए बुधवार व्रत/budhvar vrat रखा जाता है। इस व्रत को करने से शिक्षा, रोग, बुद्धि और बिजनेस, इन सभी क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होता है।

गणेश को सभी देवों और देवियों में सर्वोपरी माना जाता है, और उनकी पूजा सभी देवों से पहले होती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि गणेश जी की पूजा प्रतिदिन होती है। फिर भी यदि कोई व्यक्ति इस दिन गणेश जी का व्रत/Ganesha Vrat विधि पूर्वक करता है, तो उस व्यक्ति के जीवन के सभी कष्ट समाप्त हो जाते हैं। कई जगहों पर ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस व्रत को शुरू करता है, उसे अगले 7 बुधवार तक व्रत रखता है। इस दिन व्रत करने वालों को सूर्योदय से पहले उठना चाहिए और उसके बाद स्नान कर साफ कपड़े पहनने चाहिए। गणेश जी की पूजा करने से पहले फूल, धूप, दीप, कपूर और चंदन साथ रखें और ॐ गं गणपतये नमः का 108 बार जाप करें।

बृहस्पतिवार व्रत/ Thursday Vrat

गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन हरि और उनके सभी अवतारों की पूजा होती है। इस दिन दूध, घी और पीले रंग की वस्तुओं का खास प्रयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि बृहस्पतिवार व्रत/ Thursday Vrat पर पीले वस्त्र पहनने से और भगवान विष्णू पूजा करने से अच्छे परेणाम प्राप्त हो सकते हैं। हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार विष्णु व्रत/Vishnu vrat को सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन पीले वस्त्र पहन कर केले के पत्ते की पूजा और भगवान विष्णू को केला या पीले मिष्ठान चढ़ाया जाता है।

इस दिन व्रत रखने वाले दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करते हैं, जिसमें चन्ना दाल और घी का होना अनिवार्य होता है।

शुक्रवार व्रत/Friday vrat

शुक्रवार को देवी मां का दिन माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी, संतोषी मां, अन्नपूर्णेश्वरी और दुर्गा मां को मिष्ठान चढ़ाने का भी रिवाज है। जो भी व्यक्ति इस दिन देवी मां का व्रत रखता है, वह सिर्फ रात में ही भोजन करता है। जैसा कि हम पहले ही आपको बता चुके हैं कि सप्ताह का हर दिन किसी ना किसी भगवान को समर्पित होता है, तो शुक्रवार का दिन शक्ति को समर्पित होता है। इस दिन शुक्र ग्रह की भी पूजा होती है।

अधिकतर लोग इस दिन संतोषी माता की पूजा करते हैं जिन्हें शक्ति का आशीर्वाद भी कहा जाता है। बहुत सारे भक्त इस सोलह शुक्रवार/Solah Shukravar vrat का व्रत रखते हैं। इस दिन विशेष तौर पर सफेद वस्त्र को महत्व दिया जाता है।

इनके साथ साथ इस दिन शुक्र ग्रह का भी पूजन होता है, जो खुशियों का ग्रह माना जाता है। ज्योतिष में ग्रहों/Planets in Astrology का विशेष महत्व होता है। इस दिन दुर्गा, काली और शक्ति के अन्य रूपों की पूजा होती है और यह अत्याधिक शुभ माना जाता है। शुक्रवार का व्रत सूर्योदय के साथ शुरू होता है और अस्त पर समाप्त होता है। इस दिन खीर या दूध भी मां शक्ति को अर्पित किया जाता है। जो भी इस दिन व्रत रखता है, वह दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करते हैं।

शनिवार व्रत/ Saturday Vrat

शनिवार व्रत/Saturday Vrat बहुत लोग रखते हैं, खास तौर पर वह लोग इस व्रत को रखते हैं, जिनके ऊपर शनि देव जी का नकारात्मक प्रभाव होता है। इसके साथ साथ शनिवार को मां काली की भी पूजा की जाती है। इस दिन लोग काले वस्त्र पहनते हैं और सुबह और शाम शनि या नवग्रह मंदिर जाते हैं। कई मंदिरों में शनि देव की मूर्ति के साथ साथ मां काली की भी मूर्ति होती है और इस दिन लोग दोनों ही देवों का पूजन करते हैं।

शनिवार व्रत/Saturday Vrat में एक बात का खास ख्याल रखा जाता है कि व्रत रखने वाले दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करते हैं। इस दिन लोग शनि देव के साथ साथ हनुमान जी की पूजा की जाती है। इसके बारे में भी हिंदू पुराणों में भी बताया गया है। 

ऐसा माना जाता है कि जब शनिदेव क्रोधित होते हैं तो भगवान हनुमान अपने भक्तों को शनि देव की क्रोध की ज्वाला से बचाते हैं। यही कारण है कि शनिवार के दिन हनुमान जी की भी पूजा होती है।

जो लोग ज्योतिष/Astrology के बारे में ज़रा सा भी जानते हैं, वह इस शनि के बारे में अवश्य जानते होंगे। कई मंदिरों में नवग्रहों की भी स्थापना होती है, जिसमें से शनि ग्रह एक है। इस दिन भक्त शनि मंदिर जाकर तिल और तिल का तेल चढ़ाते हैं। शनि देव को काला रंग प्रिय है, इसलिए उनकी मूर्ति भी काले रंग की होती है और जो इस दिन व्रत करता है, वह भी काले रंग के वस्त्र पहनता है।

यह थे सप्ताह के अलग अलग दिनों पर रखे जाने वाले व्रत। इसके अतिरिक्त और भी व्रत और अनुष्ठान होते हैं, जिनके बारे में आप हमारी वेबसाइट पर पढ़ सकते हैं।

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