वित्त में शयनकक्ष वास्तु की क्या भूमिका होती है?

एक घर में शयन कक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सभी बुराइयों से मुक्त रखने में वास्तु महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा यह आपके शयन कक्ष को सकारात्मक ऊर्जा देता है जिससे आप शारीरिक और मानसिक रूप से विश्राम कर सकें। सभी संबंधों और व्यवसाय के लिए शयन कक्ष एक समान नहीं हो सकता। इसका प्रभाव न सिर्फ आपके शारीरिक सुख पर होता है, बल्कि आपके जीवन के अन्य पहलुओं, यहां तक कि व्यावसायिक सफलता के पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ विशेष दिशा-निर्देशों का अनुसरण करके अपने शयन कक्ष की ऊर्जा को बढ़ाया जा सकता है।

शयन कक्ष अकेला ऐसा स्थान है जो शारीरिक और मानसिक रूप से थके व्यक्तियों को पूर्ण विश्राम देता है। पूरी रात नींद का आनंद लेने के बाद वे अगले दिन अपने रोजमर्रा के कार्यों को चालू रखने के लिए तरोताजा उठ सकते हैं। इसके अलावा, वास्तु के अनुसार शयन कक्ष लोगों के जीवन में अत्यधिक स्वास्थ्यप्रद ऊर्जा की भी पूर्ति करता है।

आपका शयन कक्ष वास्तु/Bedroom Vastu के अनुकूल है या नहीं? यह आप स्वयं जांच सकते हैं।

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शयनकक्ष का वास्तु परिवार के संबंधों पर निर्भर करता है।

उत्तर दिशा उन युवा छात्रों के लिए सबसे उपयुक्त होती है जो हाल ही में अपनी पढ़ाई पूरी करके किसी नौकरी या व्यवसाय  की तलाश कर रहे हैं। पूर्व सूरज या सूर्य की दिशा होने के कारण स्कूल के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त होती है। वास्तु के अनुसार बना शयनकक्ष उनकी बौद्धिक क्षमता को बढ़ा सकता है और वे अपनी पढ़ाई में श्रेष्ठ कर सकते हैं। 

शयनकक्ष का वास्तु परिवार के संबंधों पर निर्भर करता है।

उत्तर दिशा उन युवा छात्रों के लिए सबसे उपयुक्त होती है जो हाल ही में अपनी पढ़ाई पूरी करके किसी नौकरी या व्यवसाय  की तलाश कर रहे हैं। पूर्व सूरज या सूर्य की दिशा होने के कारण स्कूल के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त होती है। वास्तु के अनुसार बना शयनकक्ष उनकी बौद्धिक क्षमता को बढ़ा सकता है और वे अपनी पढ़ाई में श्रेष्ठ कर सकते हैं। 

दक्षिण-पूर्व दिशा उन युवाओं के लिए उपयुक्त है, जिन्होंने हाल ही में नौकरी या कोई व्यवसाय करना शुरू किया है। वहां मौजूद ऊर्जा से उन्हें आत्मविश्वास बनाए रखने की शक्ति और प्रेरणा मिल सकती है। 

दक्षिण दिशा उन व्यक्तियों के लिए उपयुक्त होती है जो अपने अति व्यस्त और अस्त-व्यस्त दिनचर्या के बाद सुख की नींद चाहते हैं। इसलिए सही दिशा से वह अपनी नींद का आनंद लेकर पूर्ण रूप से तरोताजा महसूस कर सकते हैं। परिवार के मुखिया के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा सही दिशा होती है। इस तरह के शयनकक्ष से वह वर्चस्व बनाए रखकर अधिक कुशलता से अपने घरेलू कर्तव्यों को पूरा कर सकते हैं।

पश्चिम दिशा उन छात्रों और व्यापारियों दोनों के लिए उत्तम होती है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में हिस्सा लेना चाहते हैं।

देश में अन्य स्थान पर जाने या विदेश जाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा अधिक उपयुक्त साबित हो सकती है। अपने लिए उपयुक्त साथी की इच्छुक अविवाहित युवतियों के लिए भी यह दिशा सही होती है। 

पारिवारिक सदस्यों के शयन कक्ष की दिशाएं/ Bedroom directions for different family members

वास्तु के अनुसार,विभिन्न पारिवारिक सदस्यों के शयन कक्ष की दिशाएं उनके जीवन की विभिन्न विशेषताओं के अनुसार लागू होती है, इसलिए शयन कक्ष की दिशा व्यक्ति के विचारों या उद्देश्यों पर निर्भर होनी चाहिए। अतः बंगले या फ्लैट के लिए वास्तु द्वारा बनावट (डिजाइन) करते समय उचित स्थान के संबंध में निम्नलिखित बातों का उपयोग करना चाहिए: 

पारिवारिक सदस्यों के शयन कक्ष की दिशाएं/ Bedroom directions for different family members

वास्तु के अनुसार,विभिन्न पारिवारिक सदस्यों के शयन कक्ष की दिशाएं उनके जीवन की विभिन्न विशेषताओं के अनुसार लागू होती है, इसलिए शयन कक्ष की दिशा व्यक्ति के विचारों या उद्देश्यों पर निर्भर होनी चाहिए। अतः बंगले या फ्लैट के लिए वास्तु द्वारा बनावट (डिजाइन) करते समय उचित स्थान के संबंध में निम्नलिखित बातों का उपयोग करना चाहिए: 

उत्तर दिशा में शयन कक्ष का निर्माण सभी प्रकार के व्यक्तियों के लिए लाभकारी होता है। यह विशेषकर उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जो हाल ही में अपनी पढ़ाई पूरी करके नौकरी या व्यवसाय के अवसर तलाश रहे हैं। यह उनके लिए भी लाभकारी है जो अपने व्यवसाय को बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन उनके पास उसे बढ़ाने के अवसरों और संभावनाओं की कमी होती है। 

शयनकक्ष के वास्तु शास्त्र के अनुसार/ As per vastu shastra of bedroom, उत्तर-पूर्व का पूर्व उनके लिए उपयुक्त होता है जो अपने जीवन में सेवानिवृत्ति के बाद खुशियों को अनुभव करना चाहते हैं। इस तरह के शयनकक्ष से वह अपने अतीत की कठिनाइयों और चुनौतियों को भूलकर अपने मन और आत्मा को पुनर्जीवित कर सकते हैं।

पूर्व दिशा में बना शयनकक्ष स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों के लिए उत्तम होता है, इसलिए पूर्वमुखी घर की वास्तु योजना बनाते समय हम उन छात्रों के लिए पूर्व में शयनकक्ष निर्धारित कर सकते हैं। 

पूर्व दिशा को भगवान सूर्य द्वारा शासित माना जाता है। अत: वास्तु के अनुसार ऐसा बना शयनकक्ष उन्हें कुशाग्र बनाएगा, जिससे वह अपनी शिक्षा में नई ऊंचाइयां पा सकते हैं। 

दक्षिण-पूर्व में स्थित शयन कक्ष उन युवाओं के लिए उपयुक्त होता है जिन्होंने हाल ही में नौकरी या कोई व्यवसाय शुरू किया है। इस दिशा से मिलने वाली ऊर्जा उन्हें उत्साहित करके, व्यवसाय में धैर्यपूर्वक और विश्वासपूर्वक आगे बढ़ने की शक्ति देती है। 

दक्षिण दिशा में स्थित शयनकक्ष उनके लिए उत्तम होता है जो अपनी व्यस्त और अव्यवस्थित जीवन-शैली से आराम पाने के लिए सुख की नींद की चाह रखते हैं। दक्षिण दिशा का संबंध विश्राम से होता है, जिससे उनके शरीर और मन को पूर्ण रूप से तरोताजा होने में मदद मिलती है। अत: वास्तु के अनुसार शयन कक्ष/Bedroom as per vastu हमेशा दक्षिण दिशा में होना चाहिए। 

दक्षिण-पश्चिम में स्थित शयनकक्ष परिवार के मुखिया के लिए उपयुक्त होता है। इस तरह के शयनकक्ष से उनको अपने परिवार पर पूर्ण नियंत्रण के साथ सभी कर्तव्यों की जिम्मेदारियों को निभाने में मदद मिलती है। पश्चिम दिशा में स्थित शयनकक्ष उन कारोबारियों और छात्रों के लिए उत्तम होता है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेना चाहते हैं। 

उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित शयनकक्ष उन लोगों के लिए उत्तम होता है, जो अपना स्थान परिवर्तन करना या विदेश में बसना चाहते हैं। साथ ही, विवाह की इच्छुक अविवाहित युवतियों के लिए भी यह स्थान सही रहता है। उत्तर-पश्चिम मेहमानों के शयनकक्ष के लिए भी उचित होता है, जिससे मेहमान आप के आवास पर स्थाई रूप से नहीं ठहरते।

व्यवसाय और पेशे के अनुसार शयन कक्ष का वास्तु शास्त्र/ Vastu Shastra for Bedroom as per business and profession 

वास्तु शास्त्र के अनुसारव्यक्तियों के व्यवसाय के अनुसार बना शयन कक्ष उत्तम होता है। ऐसा करने से उनको नौकरी और व्यवसाय में उन्नति करने में मदद मिल सकती है। उत्तर दिशा का शयन कक्ष विभिन्न अकाउंट प्रोफेशनल्सजैसे- लेखाकारवित्त प्रोफेशनलबैंकर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए उत्तम हो सकता है।

व्यवसाय और पेशे के अनुसार शयन कक्ष का वास्तु शास्त्र/ Vastu Shastra for Bedroom as per business and profession 

वास्तु शास्त्र के अनुसारव्यक्तियों के व्यवसाय के अनुसार बना शयन कक्ष उत्तम होता है। ऐसा करने से उनको नौकरी और व्यवसाय में उन्नति करने में मदद मिल सकती है। उत्तर दिशा का शयन कक्ष विभिन्न अकाउंट प्रोफेशनल्सजैसे- लेखाकारवित्त प्रोफेशनलबैंकर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए उत्तम हो सकता है।

उत्तर दिशा धन और संपत्ति के स्वामी भगवान कुबेर की मानी जाती है। उनके द्वाराइन व्यवसायों  से जुड़े व्यक्तियों की मदद करने सेइन पेशेवर लोगों के अपने संबंधित क्षेत्रों में श्रेष्ठता हासिल करने से अधिक ग्राहक (क्लाइंट) मिल सकते हैं।

बहुत से लोग वास्तु के दिशा-निर्देशों के अनुसार उत्तर मुखी मकान खरीदने के इच्छुक रहते हैं।

पूर्व दिशा में स्थित शयन कक्ष मनोरंजन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और राजनीतिज्ञों के लिए अत्यधिक उपयुक्त हो सकता है। वास्तु के अनुसारइस तरह के घर से उन्हें अपने सामाजिक दायरे को बढ़ाने और प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क रखने में मदद मिल सकती है। पूर्व का शयनकक्ष आईएएस/IAS, पीसीएस/PCS और आईआरएस/IRS जैसे नौकरशाहों के लिए आदर्श होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पूर्व दिशा इंद्रदेव द्वारा शासित होती है जो वास्तु पुरुष मंडल के पैंतालीस/४५ ऊर्जा क्षेत्रों में से एक होती है तथा इंद्र को एक कुशल प्रशासक माना जाता है।

दक्षिण-पूर्व में स्थित शयनकक्ष ज्वेलर्सब्यूटीशियनटेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंगकपड़ों के डीलर और सर्जन  के लिए बहुत लाभकारी होता है। उत्तर-पश्चिम शुक्र की दिशा हैजो पेशेवर लोगों की अत्यधिक मदद करती है। दक्षिण दिशा में स्थित शयनकक्ष सशस्त्र बलों से जुड़े व्यक्तियों के लिए उपयुक्त होती हैजैसे- अर्ध सैनिक बल,वायु सेनानौसेनासेनापुलिस आदि। दक्षिण का स्वामी मंगल,इन व्यवसायों की सभी तरह की कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने के लिए इन व्यक्तियों को साहसविश्वास और अत्यधिक शक्ति प्रदान करता है। 

वास्तु के अनुसारदक्षिण मुखी मकान इस तरह के लोगों के लिए श्रेष्ठ चुनाव हो सकता है। 

वास्तु के अनुसारपश्चिम मुखी शयनकक्ष शेयर बाजार के लोगोंव्यापारियों और अचल संपत्ति के कारोबार से जुड़े व्यक्तियों के लिए आदर्श होता है। इस तरह के शयनकक्ष से उन्हें अपने व्यवसाय को विस्तार करने और  सौदों के द्वारा अत्यधिक लाभ अर्जित करने में मदद मिल सकती है।

बिस्तर की दिशा का वास्तु/ Bed direction Vastu

शयन कक्ष की बनावट करते समय बिस्तर की दिशा के वास्तु को ध्यान में रखना अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। वास्तु के अनुसारहम सबको बिस्तर की दिशा चुनते समय पृथ्वी की विद्युत चुंबकीय धाराओ के प्रवाह का अवश्य ध्यान रखना चाहिए क्योंकि पृथ्वी के अपनी धुरी पर थोड़ा झुके होने के कारण इसकी चुंबकीय ऊर्जा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है। 

इसलिए वास्तु के अनुसार पलंग की उचित दिशा जानना आपके लिए आवश्यक होता है। 

वास्तु के अनुसारबिस्तर की दिशा तय करते समय अपना सिर उत्तर दिशा में कभी भी नहीं रखना चाहिए। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे खून में आयरन (लाभकारी तत्व) होता है। चूँकिपृथ्वी एक चुंबक की तरह काम करती है इसलिए उत्तर दिशा में सिर करके सोने से रक्त में मौजूद आयरन पर चुंबकीय खिंचाव पड़ता है। बिस्तर की ऐसी स्थिति से सिर दर्दचक्कर आना और कई अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा नहीं होती हैं।

वहीं दूसरी ओरवास्तु शास्त्र में बिस्तर की दिशा के अनुसारआपको पहले सिर में प्रवेश करने वाली विद्युत चुंबकीय धाराओं से बचने के लिए अपना सिर दक्षिण दिशा में करके सोना चाहिए। दक्षिण दिशा में सिर रखने से आपको आरामदायक और शांतिपूर्ण नींद आएगी। वास्तु के अनुसारदक्षिण दिशा सोने के लिए उत्तम दिशा होती है।

वास्तु के अनुसारबिस्तर के लिए पूर्व भी अच्छी दिशा होती है। युवा छात्रोंविशेषकर स्कूल जाने वाले बच्चों का सिर सोते समय पूर्व दिशा में रखना चाहिए। परिणामस्वरूपउनकी स्मरण शक्ति और याददाश्त में सुधार हो सकता है। सिर के लिए पश्चिम अनुकूल दिशा नहीं होती है। 

पश्चिम दिशा में सिर होना नींद में बाधाबुरे सपने और थकान का कारण बन सकता है। यदि आप सिर के लिए पूर्व या दक्षिण दिशा नहीं रख सकते हैं तो पश्चिम दिशा को चुना जा सकता है। यह ध्यान रखना चाहिए कि बिस्तर की दिशा के वास्तु के अनुसार/ As per Vastu, यदि आप नींद का आनंद लेना चाहते हैं तो अपना सिर उत्तर दिशा में कर सकते हैं। 

यदि आप इससे संबंधित अधिक जानकारी पाना चाहते हैंतो नीचे दिए गए लिंक पर हमारे मुफ्त कैलकुलेटर का उपयोग कर सकते हैं। 

चित्र और मूर्तियां/ Paintings and Sculptures

काफी लंबे समय से ही यह दोनों हमारी संस्कृति और सभ्यता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हम आज जो कुछ भी जानते हैं वह प्राचीन काल की चित्रकला और मूर्तिकला के कारण ही हैइसलिए हमें उनका चुनाव सोच-समझ कर करना चाहिए। वास्तु के अनुसारयह याद रखने की बात है कि जिस तरह की मूर्तियां या चित्र हम अपने शयनकक्ष में रखते हैंउनका हमारे मन और विचारों पर प्रभाव पड़ता है। 

इसलिए हम विवाहित व्यक्तियों के शयन कक्ष में क्रिस्टल का बना सारस/crane का जोड़ा रखने की

वास्तु शास्त्र में शयन कक्ष के दर्पण का स्थान/ Placement of Mirrors in the Bedroom as per Vastu

वास्तु के अनुसारशयन कक्ष में दर्पण के संबंध में कई बहस और चर्चाएं हो चुकी हैं। प्राचीन समय से यह मिथक चला रहा है कि बिस्तर के विपरीत यानी सामने शीशा रखने से हमेशा मतभेद और वाद-विवाद होते हैं। इसमें कोई सच्चाई नहीं हैवास्तविकता यह है कि आईना जल तत्व को दर्शाता है इसलिए उसके स्थान पर ही अपना प्रभाव डालता है। अतः इसका मुख बिस्तर की तरफ होना या होना कोई मायने नहीं रखता। वास्तु के अनुसारशयन कक्ष में दर्पण को पूर्वपश्चिम और उत्तर दिशा में रख सकते हैं। फिर भीदक्षिण-पश्चिमदक्षिण और दक्षिण-पूर्व वाले शयन कक्षों में दर्पण लगाना आपके लिए अच्छा हो सकता है। फिर भीअगर इन कमरों में दर्पण लगाना जरूरी होतो इस स्थिति में आप कपड़े या अलमारी से छुपा सकते हैं। साथ ही वास्तु के अनुसारशयन कक्ष में दर्पण का आकार 2ftx2ft के आकार से अधिक होना चाहिए। 

वास्तु में शयन कक्ष के रंग / Vastu colours for Bedroom

शयनकक्ष में वास्तु के अनुसाररंगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है इसलिए रंगों का चुनाव अत्यधिक सावधानीपूर्वक करने की आवश्यकता होती है। 

वास्तु में शयन कक्ष के रंग / Vastu colours for Bedroom

शयनकक्ष में वास्तु के अनुसाररंगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है इसलिए रंगों का चुनाव अत्यधिक सावधानीपूर्वक करने की आवश्यकता होती है। 

शयनकक्ष के वास्तु के अनुसाररंगों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यहां तक किउनके महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह आपके रिश्तों को बना या बिगाड़ भी सकता है। उनका आपकी आर्थिक स्थिति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान होता है। 

घर की दीवारों और परदों के लिए हल्के रंगों का प्रयोग किया जा सकता है। गहरे रंग किसी भी व्यक्ति की मानसिक रूप से परेशानी का कारण हो सकता है। यदि शयनकक्ष पूर्व दिशा में स्थित है तो हरेनीलेसफेद और ग्रे रंगों का प्रयोग किया जा सकता है। पूर्व दिशा में स्थित शयनकक्ष के लिए हरेपीले और भूरे रंग आदर्श माने जाते हैं। 

यदि शयन कक्ष दक्षिणदक्षिण-पूर्व दिशा में है तो भूरामरूनलालनारंगी और हल्का गुलाबी उपयुक्त हो सकते हैं। पश्चिम दिशा में स्थित शयन कक्ष के लिए सुनहरासिल्वर और ग्रे रंग उपयुक्त होते हैं।

शयन कक्ष के फर्नीचर का वास्तु/ Vastu for Bedroom Furniture

इसी तरहशयन कक्ष के फर्नीचर के लिए भी वास्तु शास्त्र को महत्व देना चाहिए। 

शयन कक्ष के फर्नीचर का वास्तु/ Vastu for Bedroom Furniture

इसी तरहशयन कक्ष के फर्नीचर के लिए भी वास्तु शास्त्र को महत्व देना चाहिए। 

जैसे हम बैठक/लिविंग रूम के फर्नीचर के स्थान के लिए दिशानिर्देशों का पालन करते हैंवैसे ही हमें शयन कक्ष के फर्नीचर के स्थान के लिए भी वास्तु के नियमों का पालन करना चाहिए। इससे ऊर्जा के उचित प्रवाह के साथ ही आपके शयन कक्ष की सुंदरता भी बढ़ेगी। 

यहां शयनकक्ष के वास्तु के अनुसार,अलमारी का स्थान भी महत्वपूर्ण होने के कारणध्यान में रखना सही हो सकता है। शयनकक्ष का वास्तु बताता है कि भारी वॉडरोब और अलमारियों को शयन कक्ष के दक्षिण-पश्चिम के दक्षिण में रखना उचित हो सकता है क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसारइस दिशा को भारी बनाए रखना आवश्यक होता है। 

शयन कक्ष में टेलीविजन नहीं रखने की सलाह दी जाती है। फिर भीयदि आप टेलीविजन रखना ही चाहते हैंतो दक्षिण-पूर्व या पूर्वी दीवार पर लगा सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसारशयन कक्ष में लाइटों और बिजली के उपकरणों के स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए। अत: शयन कक्ष के दक्षिणी भाग में लैंपशेड और हीटर रखना उचित होता है। 

जैसा ऊपर बताया गया है कि बिस्तर का स्थान महत्वपूर्ण होने के कारणइसके स्थान का निर्णय करते समय वास्तु के शयन कक्ष संबंधी सिद्धांतों का अवश्य ही पालन करना चाहिए। साथ हीपलंग का सिरहाना ढीला होने के कारण यदि किसी तरह की आवाज करता होतो इस समस्या को तुरंत ही ठीक करा लेना चाहिए। वास्तु के अनुसारयह ध्यान रखना जरूरी है कि बिस्तर को शौचालय के दरवाजे के ठीक सामने नहीं रखना चाहिए। 

शयन कक्ष लिनन और चादर के लिए वास्तु/ Vastu for Bedroom Linen and Bedsheet

साफ और नई चादर और लिनन से शयनकक्ष में लंबे समय तक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। अत: जितना संभव होउतनी ही साफ और स्वच्छ चादर का उपयोग करना अच्छा होता है। साथ हीअपने शयनकक्ष की चादर के लिए हल्के रंगों का चुनाव करना लाभकारी होता है। याद रखेंकि गहरे रंग बिस्तर के चारों तरफ की ऊर्जा की गर्मी को बढ़ाकर अनावश्यक विवादों और बहस का कारण बन सकते हैं।आपको बिस्तर पर से अतिरिक्त तकिए को हटाने की सलाह भी दी जाती है। बहुत सारे तकिए रखने का मतलब यह होता है कि आप अन्य व्यक्तियों को अपने कमरे में आना पसंद नहीं करतेचाहे उनकी कितनी भी इच्छा क्यों हो। यह एक सामान्य सी बात है जिसे लोग नजरअंदाज कर देते हैंलेकिन शयनकक्ष के वास्तु के अनुसार इस का अत्यधिक महत्व होता है। 

शयन कक्ष लिनन और चादर के लिए वास्तु/ Vastu for Bedroom Linen and Bedsheet

साफ और नई चादर और लिनन से शयनकक्ष में लंबे समय तक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। अत: जितना संभव होउतनी ही साफ और स्वच्छ चादर का उपयोग करना अच्छा होता है। साथ हीअपने शयनकक्ष की चादर के लिए हल्के रंगों का चुनाव करना लाभकारी होता है। याद रखेंकि गहरे रंग बिस्तर के चारों तरफ की ऊर्जा की गर्मी को बढ़ाकर अनावश्यक विवादों और बहस का कारण बन सकते हैं।आपको बिस्तर पर से अतिरिक्त तकिए को हटाने की सलाह भी दी जाती है। बहुत सारे तकिए रखने का मतलब यह होता है कि आप अन्य व्यक्तियों को अपने कमरे में आना पसंद नहीं करतेचाहे उनकी कितनी भी इच्छा क्यों हो। यह एक सामान्य सी बात है जिसे लोग नजरअंदाज कर देते हैंलेकिन शयनकक्ष के वास्तु के अनुसार इस का अत्यधिक महत्व होता है। 

शयन कक्ष में फूल-पौधे/ Flowers and Plants in the Bedroom

हम सभी पौधों और फूलों से मिलने वाली प्राकृतिक ऊर्जा के महत्व को समझते हैं। अतः जितना हो सके अपने शयनकक्ष में इनका प्रयोग अच्छा होता है। कृत्रिम फूलों का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि वह ऊर्जा के स्वभाव को दबा सकते हैं।

वास्तु के अनुसारकिसी भी गृहस्वामी के लिए मनी प्लांट अच्छी पसंद हो सकते हैं। जिस फूलदान को आप शयनकक्ष में रखना चाहते हैंउनके रंगों का चुनाव करते समय भी सावधानी लेनी चाहिए। दंपत्तियों को रिश्ते में गर्मजोशी बनाए रखने के लिए लाल रंग के फूलदान का प्रयोग करने की सलाह देते हैं। 

पीला रंग ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक होने के कारण छात्रों को पीले रंग के फूल और पौधे दानों का प्रयोग करना चाहिए। 

शयन कक्ष के महत्वपूर्ण नियम/ Important Tips for Bedroom

) अंडाकार या गोलाकार बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए।

शयन कक्ष के महत्वपूर्ण नियम/ Important Tips for Bedroom

) अंडाकार या गोलाकार बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए।

) पलंग में सिरहाना लगा होना चाहिए तथा सोते समय सिर के पीछे की खिड़की खुली नहीं रखनी चाहिए। 

) अपने बिस्तर को गोलाकार सीलिंग के नीचे नहीं रखना चाहिए। 

) ओवरहेड बीम के नीचे सोने से बचना चाहिए। 

) दीवारों पर मृत पूर्वजों की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए।

) शयन कक्ष में मंदिर नहीं रखना चाहिए। 

) टूटे या चिपकाए गए सामानों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

) शौचालय का प्रयोग करते समय उसका दरवाजा बंद रखना चाहिए। 

) सप्ताह में कम से कम एक बार पानी और समुद्री नमक से बने गोल से फर्श को साफ करना चाहिए। यह गोल घर से हानिकारक प्रभावों को खत्म करता है। 

निष्कर्ष/ Conclusion

शयन कक्ष के लिए वास्तु शास्त्र के सिद्धांतों को ध्यान में रखने से स्वास्थ्यसंबंध और धन में वृद्धि होती है। 

फिर भीयदि आप अपनी सेहत के लिए वास्तु के सिद्धांतों को लेकर गंभीर हैं तो आप एक व्यावसायिक ज्योतिषी/astrologer की मदद ले सकते हैं। ऊपर बताए गए महत्वपूर्ण नियम और तरीकों से आप रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना करने के साथ ही अपने संबंधों को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं। 

वास्तु से संबंधित कोई भी विशेष मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं :

शयनकक्ष के वास्तु का ऑनलाइन विवरण

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इसके अतिरिक्त आप यह भी जान सकते हैं कि ज्योतिष/ astrology किस तरह वास्तु द्वारा गृहपूजा घरअध्ययन कक्षशौचालयबैठकरसोई घरमुख्य प्रवेश द्वार के संबंध में मदद करता है।