नक्षत्र के लिए आज का पंचांग पढ़ें - तिथि और अन्य दैनिक तथ्य

Friday, 21 January 2022

Friday 21, January 2022

अयाना - Uttarayana

Shishir

  • सूर्योदय

    7:12:54

    सूर्यास्त

    17:50:36

    चंद्रोदय

    20:59:35

    चंद्रास्त

    9:31:50

  • हिंदू सूर्योदय

    7:17:6

    हिंदू सूर्यास्त

    17:46:25

  • कुण्डली

    Capricorn

    राशि

    Leo

पंचांग तत्व

तिथि Krishna Tritiya तक 8:53:28 आगामी : Krishna Chaturthi
नक्षत्र Magha तक 9:43:44 आगामी : Purva Phalguni
योग Saubhgya तक 15:5:10 आगामी : Shobhan
करण Vishti upto 8:51:29 आगामी : Baalav

हिंदू महीना & वर्ष

  • विक्रम संवत

    2078-Anand

    शक संवत

    1943-Plav

  • पक्ष

    Krishna-Paksha

    अयाना

    Uttarayana

  • पूर्णिमांत

    Magha

    अमांता

    Pausha

  • Sun Sign

    Capricorn

    कुण्डली

    Leo


अशुभ समय

  • राहु कालम

    11:12:02 - 12:31:45

    यमघंट कालम

    08:32:37 - 09:52:20

    गुलिका कालम

    08:32:37 - 09:52:20

    दुर मुहूर्तम

    11:59:42-12:46:09

    वरजयम

    09:53:20-11:25:24

शुभ समय

  • अभिजीत मुहूर्त

    12:10 - 12:52

    अमृत कलाम

    08:32:37 - 09:52:20

अन्य योग

ध्वजा तक 25:14:16 आगामी: श्रीवत्स

शूल & निवास

  • दिशा शूल

    WEST

    नक्षत्र शूल

    none

  • चंद्रमा निवाश

    EAST


प्रामाणिक और विविध हिंदू ज्योतिष या भारतीय वैदिक ज्योतिष एक प्रकार का हिंदू पंचांग है। पंचांग का अर्थ है पांच अंग जो है – तिथि, नक्षत्र/ Nakshatra, योग, करण और वर (सप्ताह का दिन)। पंचांग एक ज्योतिषीय डायरी है जिसे ज्योतिषी बहुत सारी गणना और भविष्यवाणी करने के लिए प्रयोग करते हैं। इसलिए पंचांगम/ Panchangam उन लोगों के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जो ज्योतिष पर विश्वास करते हैं। इसे आज के पंचांग/ today's panchang और तिथि के रूप में जाना जाता है, जो विभिन्न अवसरों, कार्यों, समारोहों, या शिक्षा, विवाह और यात्रा जैसे कार्यक्रमों के लिए एक शुभ समय की खोज और चयन में सहायता करता है। यह धार्मिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक लोगों के बीच आज के लिए पंचांगम/ panchangam for today के रूप में भी प्रसिद्ध है।

यदि आप पंचांग के अनुसार ही किसी नए व्यापार की योजना पर धन और समय लगाएं तो यह आपके लिए शुभ साबित हो सकता है। आज के पंचांग/Panchang for today से आप अपने जीवन में घटने वाली सभी घटनाओं का संकेत मिल सकता है और उन्हें सही ढंग और सही तरीके से निभाने का अवसर भी मिलेगा।

पंचांग क्या है, और यह जरूरी क्यों है - What is Panchang, and why is it important?

आज के पंचांग का उपयोग प्रत्येक व्यक्ति के ज्योतिषीय कुंडली/Natal Chart में ग्रहों की वर्तमान स्थिति के साथ तालमेल बिठाने या मिलान करने के लिए किया जाता है। आप पंचांग से कुछ और बातों को जान सकते हैं जैसे – आज की तिथि/ tithi, आज का शुभ समय, आज का राहुकाल/Today’s Rahu kalam, आज का शुभ मुहूर्त/Today’s auspicious time और अच्छे समय। आपको इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि पंचांगम अपने कार्यों को समन्वयित और संतुलित करने का प्रामाणिक और प्राचीन तरीका जिससे आप किसी भी प्रकार की बाधाओं बचने और आपके विकास के लिए अवसर को बढ़ाने में बेहद मददगार साबित हो सकता है। यदि आप इसे सरलता से देखेंगे तो आप समझ जाएंगे कि यह उपकरण आपको अच्छे और बुरे दिन के बारे में बता सकता है। आज के पंचांग/ Panchang for today बहुत लोगों के लिए सहायक साबित हो सकता है, और कोई भी प्रामाणिक और प्राचीन भारतीय वैदिक ज्योतिष किसी भी दिन की प्रकृति, व्यवहार और गुणवत्ता को जान, समझ और पता लगाकर आम जनता की सहायता कर सकते हैं। अंततः यह समझा जाता है कि समय मूल रूप से महान और अद्वितीय गुणों वाली ऊर्जा है जो आपके व्यापक विकास और प्रगति में सहायक सिद्ध हो सकता है।

पंचांग के पीछे की मिथक - Mythology behind Panchang

पंचांग की उपयोगिता बढ़ाने का विचार सबसे नीचे है। प्राचीन मान्यता या प्रकृति के नियम के अनुसार, प्रत्येक क्रिया का विपरीत प्रतिक्रिया होती है। आपको सद्भाव से कार्य करना चाहिए, ताकि आपके आस पास का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो। यह आपको शांति प्रदान करता है। यह आपको जीवन में सद्भाव, शांति और स्थिरता विकसित करने में मदद करता है। इस बात को कोई नहीं नकार सकता कि समय बहुत मूल्यवान होता है और हर व्यक्ति को इसका आदर करना चाहिए। आज का पंचांग/ Today's Panchang आपको समय की गुणवत्ता को जानने और समझने में सहायता कर सकता है जो आपको रोजमर्रा के कार्यों में सफलता दिला सकती है।

आज के समय में, पंचांग/ Daily panchang हर व्यक्ति के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। खासकर उन लोगों के जीवन में जिनका मन धार्मिक कार्यों में लगा रहता है और जो भगवान में आस्था रखते हैं। ऐसे व्यक्ति हर तरह के कार्य को करने या उसकी योजना को बनाने से पहले पंचांगम/Panchangam को देखते हैं जैसे – विवाह, मुंडन, और किसी धार्मिक कार्यक्रम के लिए मुहूर्त। पंचांग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से उपलब्ध होता है। जो लोग इंटरनेट चलाना जानते हैं, वह ऑनलाइन पंचांग/Online Panchang का प्रयोग करते हैं। इस तरह के पंचांग बहुत सारे भाषा में उपलब्ध होते हैं। यदि हर व्यक्ति पंचांग का प्रयोग करे तो वह खुद को बहुत सारे खर्चों से बचा सकता है। इस उपकरण की सहायता से लोगों को कुछ अन्य महत्वपूर्ण तिथि के बारे में भी पता चल सकता है जैसे – अमावस, बुद्ध पूर्णिमा और बहुत सारे।

पंचांग के उपयोगिता और व्यापकता ने लोगों के मन में खूब लोकप्रियता बटोरी है और लोग पंचांग पर भी भरोसा करने लगे हैं। अब चाहे वह किसी भी कार्य को करने के लिए कोई शुभ दिन की तलाश कर रहे हैं या फिर अपने कार्यशाला के उद्घाटन के लिए किसी खास दिन का चुनाव करना हो, अब हर चीज पंचांगम/ Panchangam की सहायता से हो सकती है। पंचांग को समझना कोई मुश्किल कार्य नहीं है लेकिन जो लोग इसे नहीं पढ़ पाते हैं, वह किसी ज्ञानी ज्योतिषी से इस विषय में संपर्क करते हैं। एक ज्ञानी ज्योतिषी के पास हर समस्या का हल मिल जाएगा। वह पंचांग औप आपकी कुंडली को देखकर आपको किसी भी समस्या से निकाल सकते हैं। इस उपकरण को आप ज्योतिष एक सबसे बेहतरीन उपकरण भी कह सकते हैं जो आपको आपके जीवन में घटने वाली बुरी घटनाओं से आपको बचा सकता है।

पंचांग के मूल तत्व - Basic elements of Panchang

पंचांग पांच मूल तत्वों से बना होता है। उन सभी तत्वों को नीचे बताया गया है।

दिन – इसे वार (सप्ताह का एक दिन) के नाम से भी जाना जाता है। हर दिन किसी ना किसी ग्रह को दर्शाता है।

रविवार (सूर्य)

सोमवार (चंद्रमा)

मंगलवार (मंगल)

बुधवार (बुध)

गुरुवार (बृहस्पति)

शुक्रवार (शुक्र)

शनिवार (शनि)

तिथि – हिन्दू कैलेंडर/Hindu Calendar के अनुसार तिथि (पक्ष के साथ) दिन ही होता है। प्राचीन और प्रतिष्ठित हिंदू कैलेंडर/ Hindu calendar में मूल रूप से एक अंधेरा और उज्ज्वल पखवाड़ा होता है जिसे लोकप्रिय रूप से पक्ष/Paksha के नाम से जाना जाता है। जब चंद्रमा सूर्य से 12 डिग्री की तरफ घूमता है, तो इस स्थिति को हिंदू कैलेंडर/ Hindu calendar के अनुसार तिथि या हिंदू चंद्र दिवस माना जाता है। चंद्र माह में कुल 30 तिथि होती है। आम तौर पर आज की तिथि शुक्ल पक्ष से संबंध रखती है जब चंद्रमा ढल रहा है या कृष्ण पक्ष जब चंद्रमा कम हो रहा है। ऐसे बहुत सारे अनुष्ठान और त्यौहार हैं जो पंचांग तिथि/Panchang Tithi से संबंध रखते हैं।  बहुत सारे त्यौहार नए चंद्रमा दिवस पर आते हैं, जो अमावस या पूर्ण चंद्रमा/पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि आज की तिथि की शुरुआत और अंत मूल रूप से सूर्य से चंद्रमा की विशिष्ट और सुसंगत डिग्री पर निर्भर करती है। इसलिए हिंदु कैलेंडर/ Hindu calendar के अनुसार तिथि किसी भी समय या दिन में खत्म या शुरू हो सकती है।

आम तौर पर, हिंदू तिथि पांच भागों में बंटा हुआ है।

नंद तिथि – इसकी अपनी ही महत्वता है क्योंकि यह अपार सुख, समृद्धि और आनंद प्रदान करता है।

भद्रा तिथि – यह समय व्यापार की नई योजना पर अपना समय धन, और प्रयास को निवेश करने का सबसे सटीक समय है।

जया तिथि – यह समय शत्रु से जीतने में अहम भूमिका निभाता है।

रिक्ता तिथि – किसी भी कार्य को शुरू करने का यह सही समय नहीं होता और आपको इस समय नए काम को करने से बचना चाहिए।

पूर्ण तिथि – एक समय के दौरान जो भी कार्य अधूरे रह गए आप उन्हें पूरा कर सकते हैं।

शुक्ल पक्ष – जब चंद्रमा एक बार अमावस्या से पूर्णिमा का चक्र पूरा करता है तो 15 तिथियां पूरी हो जाती है और तभी शुक्ल पक्ष उत्पन्न होता है।

कृष्ण पक्ष – पूर्णिमा से अमावस तक 15 तिथियां होती है तो कृष्ण पक्ष बनता है।

नक्षत्र – नक्षत्र का मतलब होता है जो कभी नष्ट नहीं होता है। नक्षत्र/Nakshatra अंततः तारकीय नक्षत्र या चंद्र भवन हैं। प्राचीन और पारंपरिक और प्रतिष्ठित वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुल सत्ताईस नक्षत्र होते हैं। लगभग हर नक्षत्र राशि के तेरह डिग्री और बीस मिनट पर होते हैं। जन्म के समय चंद्रमा के अनुसार डिग्री और एक विशिष्ट राशि की मदद से आपके जीवन के कुछ बातों का पता लगाने में नक्षत्र मददगार साबित हो सकता है। अंततः स्थिति के अनुसार राशि की गुणवत्ता का पता लगाने में नक्षत्र अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। 27 नक्षत्रों की स्थिति मेष राशि में अश्विनी नक्षत्रों/ Ashwini Nakshatras से शुरू होती है। हर नक्षत्र में एक ताकतवर स्वामी होता है जो विमशोत्तरी दशा और के.पी. की गणना करने में सहायक साबित हो सकता है। प्रत्येक राशि के लिए नियत वर्ष विमशोत्तरी दशा की शक्तिशाली 'महादशा अवधि' हैं।

नक्षत्र/ Nakshatras

वर्ष स्वामी

योनी – 14 योनियां होती हैं जो वैदिक ज्योतिष/Vedic Astrology में पशु प्रतीकों को इंगित करती हैं जिन्हें नक्षत्र को सौंपा गया है।

गण – तीन गण होते हैं।

देव – जिन्हें दिव्य माना जाता है।

मनुज – जो मानव को दर्शाता है।

राक्षस – जिन्हें देत्व के नाम से भी जाना जाता है।

नाड़ी – ३ नाड़ियाँ हैं

अदि – वता

मध्य – पित्त

अंत्य: कफ या श्लेष्मा

योग – चंद्रमा और सूर्य की शक्ति और कुछ निरयण देशांतर से योग/yoga उत्पन्न होता है। उसके बाद, मूल राशि को 13°20' अनुपात को 27 भागों में विभाजित किया जाता है। पहला योग, जिसे विकुंभ के नाम से भी जाना जाता है, वह 13°20' पर समाप्त होता है और दूसरा योग/Yoga (प्रीति) 26°40' पर समाप्त होता है और इस तरह से यह आगे बढ़ता है। इसी प्रकार, 27 योग होते हैं और ज्योतिष में हर योग की उतनी ही महत्व होती है।

करण – मूल रूप से, पंचांग तिथि/panchang tithi के आधे हिस्से को 'कर्ण' के रूप से जाना जाता है, और यह तब होता है जब चंद्रमा का नारायण देशांतर होता है, जो सूर्य के हर 6° पर बढ़ता है। प्रत्येक तिथि में, लगभग दो करण होते हैं जो तिथि के दो हिस्सों को कवर करते हैं। कुल मिलाकर 11 करण होते हैं; हालांकि उनमें से चार महीने में सिर्फ एक बार ही उत्पन्न होते हैं और उन्हें ही स्थिर कर्ण कहते हैं जो – किंतुघ्न, चतुर्भुज, शकुनि और नाग हैं।

इसके साथ साथ सात और करण होते हैं जो चल करण होते हैं। यह सभी करण एक दूसरे के पीछे ही रहते हैं जैसे – भाव, बालव, कौलव, तैतिल, गार, वनिज और विष्टी।

राहुकालम/Rahukalam – प्राचीन वैदिक ज्योतिष में, राहुकालम/Rahukalam को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह कुछ भी नया, शुभ या कोई महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने के लिए पूरे दिन के भीतर विभिन्न अशुभ अवधियों की समय अवधि और तिथियों को निर्धारित करने में सहायता करता है। हालांकि राहुकलाम की गणना मूल रूप से सूर्योदय और सूर्यास्त की मदद से की जाती है और इसके साथ ही, यह स्पष्ट है कि यह जगह के अनुसार अलग अलग होते है। यह सप्ताह के प्रत्येक दिन में डेढ़ घंटे का समय है जो सप्ताह के दिनों में बेतरतीब ढंग (Randomly) से वितरित किया जाता है क्योंकि राहुकलाम/Rahukalam अंततः आपके विशेष स्थान पर निर्भर के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर है।

यमगंदम – राहु कालम की तरह, कुछ अवधि होते हैं जो यमगंदम कहलाते हैं। इस समय को किसी भी महत्वपूर्ण पुराने कार्य को करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान आपको अपना कोई महत्वपूर्ण काम शुरू नहीं करना चाहिए।

मुहूर्त क्या है और पंचांग में इसका क्या महत्व है - What is Muhurat and what is its significance in Panchang?

पंचांग के अनुसार व्यक्ति के जीवन के विभिन्न चरणों में मुहूर्त/ Muhurat सबसे शुभ और उपयुक्त समय होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जो भी कार्यक्रम इस अवधि में की जाती है, वह फलित होते हैं। उदाहरण के तौर पर – मुहूर्त के अनुसार विवाह करने से वर और वधू दोनों का जीवन खुशियों से भर जाता है। कुछ लोग मुहूर्त/ Muhurat को नहीं मानते हैं, लेकिन उन्हें इसकी महत्वता को समझना होगा। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, मुहूर्त/ Muhurat मानव जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाता है। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए वह किसी ज्ञानी ज्योतिषी से परामर्श ले सकते हैं।

पंचांग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण पहलू - Some important facets associated with Panchang

जैसा कि हम बता चुके हैं कि पंचांग एक हिन्दू कैलेंडर है जो वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुभ और अशुभ मानी जाने वाली तिथियों के बारे में लोगों को अवगत कराता है। जो प्रमुख तत्व हैं उनमें निम्नलिखित शामिल हैं –

सूर्योदय का समय/ Sunrise time – इस बात को सभी मानते हैं कि सूर्य पृथ्वी पर सभी जीवित प्राणियों के लिए जीवन और ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। वैदिक ज्योतिष में सूर्योदय के समय/ Sunrise time को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह जीवन में नई शुरुआत को दर्शाता है। यह लोगों को आशा की किरण भी देता है। लोग बेसब्री से सूर्योदय के समय का इंतजार इसलिए करते हैं कि वह जान सकें कि आने वाला कल उनके लिए कैसा होगा।

सूर्यास्त का समय/ Sunset time – पंचांग में बहुत सारे धार्मिक आयोजन के लिए सूर्यास्त भी शुभ माना जाता है। सूर्यास्त के समय, पूजा अर्चना होती है जिससे ईश्वर मानव से प्रसन्न हो सकते हैं और उन्हें सुखी जीवन जीने का आशीर्वाद देते हैं। चंद्रोदय का समय सूर्यास्त के साथ शुरू होता है। ज्योतिष और धार्मिक व्यक्ति चंद्रोदय के समय/ moon rise time today को बेसब्री से देखते हैं। कुछ ज्योतिषी चंद्रोदय के समय को भविष्यवाणी करने के लिए प्रयोग करते हैं।

आज का राहु काल/Rahu Kaal Today – वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु काल को अशुभ माना जाता है। राहु काल की गणना दिन के घंटों को आठ खंडों में विभाजित करके की जाती है, जहां प्रत्येक दिन में 1.5 घंटे की अवधि होती है, जिसे छाया ग्रह 'राहु' को आवंटित किया जाता है। राहु काल के तहत, लोगों को कोई भी शुभ कार्य को करने की सलाह नहीं दी जाती है, अन्यथा यह उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

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