आपकी जन्म कुंडली में पैतृक संपत्ति का योग

पैतृक संपत्ति का योग

इस बात कोई नकार नहीं सकता कि जो हम आज हैं वह सिर्फ हम अपने पूर्वजों और माता-पिता की वजह से हैं। फिर हमें हमारी पैतृक संपत्ति का मालिकाना हक क्यों नहीं मिलना चाहिए। जी हां, इस लेख में हम पैतृक संपत्ति के बारे में बात करने वाले हैं। हम सभी में से कुछ लोग होंगे जिनके पास पैतृक संपत्ति होगी और कुछ के पास नहीं होगी। ऐसा क्यों होता है कि कुछ लोगों को पैतृक संपत्ति नहीं मिलती! क्या मुझे पैतृक संपत्ति में भागीदारी मिल सकती है? क्या मेरी कुंडली में पैतृक संपत्ति है? यह सभी प्रश्न बहुत ही ज्यादा पूछे जाते हैं और यही प्रश्न किसी भी व्यक्ति को सबसे ज्यादा परेशान करते हैं। इस लेख के जरिए मैं आपको आपकी जन्म तिथि के आधार पर पैतृक संपत्ति/ancestral property as per your birth chart मिलने की संभावना के बारे में बताने वाला हूं और यदि आपको संपत्ति में भागिदारी नहीं मिलती है तो इसके कारण के बारे में भी बताउंगा।

पैतृक संपत्ति में भागिदारी का नहीं मिलना/Reasons for not getting Ancestral Property Share

संपत्ति में भागीदारी ना मिलने के अनेक कारण हो सकते हैं। इनमें से कुछ कारण तो खुद मानव द्वारा बनाए गए हैं, जिनके कारण आप अपने उत्तम भाग के मिलने से वंचित रह सकते हैं। चलिए सबसे पहले उन कारणों का पता करते हैं जो पैतृक संपत्ति के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके बाद हम आपको आपकी कुंडली में पैतृक संपत्ति के योग के बारे में बताएंगे।

पैतृक संपत्ति में भागिदारी का नहीं मिलना/Reasons for not getting Ancestral Property Share

संपत्ति में भागीदारी ना मिलने के अनेक कारण हो सकते हैं। इनमें से कुछ कारण तो खुद मानव द्वारा बनाए गए हैं, जिनके कारण आप अपने उत्तम भाग के मिलने से वंचित रह सकते हैं। चलिए सबसे पहले उन कारणों का पता करते हैं जो पैतृक संपत्ति के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके बाद हम आपको आपकी कुंडली में पैतृक संपत्ति के योग के बारे में बताएंगे।

  1. यदि व्यक्ति योग्य है, तो उसे पैतृक संपत्ति में उचित हिस्सा नहीं दिया जाता है।

  2. यदि कोई पैतृक संपत्ति वाली जगह से दूर रहता है तो वह अक्सर संपत्ति में भागीदारी को मना कर देता है।

  3. वसीयत बनने के समय यदि बिना पक्षपात के बंटवारा ना हो, तो भी आप अपने भाग से वंचित हो सकते हैं। ऐसा भी कई बार देखा गया है कि जो व्यक्ति वसीयत का निर्माण करता है, वही कुछ गलत कार्य को अंजाम दे देता है।

  4. यदि किसी जमीन या जायदाद के मालिक का लंबे समय तक कोई अता पता नहीं हो, तो उस स्थिति में उस जगह पर रहने वाला उस संपत्ति पर मालिकाना हक जता सकते हैं। इस स्थिति में भी व्यक्ति की पैतृक संपत्ति होने के बावजूद भी वह इससे वंचित रह जाता है।

  5. जो व्यक्ति वसीयत बनाने वाले के करीब होता है, उसे अक्सर ज्यादा हिस्सा मिलता है और बाकियों कम।

  6. एक हितधारक अपने स्वयं के शेयरों को त्याग या आत्मसमर्पण कर दे।

  7. ऐसा भी हो सकता है कि हितधारकों को अपना भाग त्यागने के लिए मजबूर किया जाए।

  8. पुत्री, पैतृक संपत्ति से अपने भाग की मांग करे।

  9. यदि किसी दंपत्ति का कोई पुत्र नहीं है, उस स्थिति में चचेरे भाई बेटियों को संपत्ति से दूर कर पैतृक संपत्ति में हक मांग सकते हैं।

आपकी जन्म कुंडली में बहुत सारे ग्रहों के संयोजन हैं जो जातक के लिए फायदेमंद और नुकसानदायक दोनों साबित हो सकते हैं। ज्यादातर यह इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रहों का कुंडली/Natal chart में बर्ताव कैसा है। इन सभी योग के बारे में कुंडली के सटीक आकलन से पता लगाया जा सकता है। यदि किसी की कुंडली/Birth Chart में कमजोर संयोजन बन रहे हैं तो उस स्थिति को भी वैदिक ज्योतिषीय समाधान/Vedic Jyotish Solution से सुधारा जा सकता है।

कुंडली में आठवां भाव और पैतृक संपत्ति/Eight House and Ancestral Property in your birth chart

हर व्यक्ति की कुंडली/Kundali में कुछ बिंदु होते हैं जो परिभाषित करते हैं कि जातक को बिना मेहनत के धन की प्राप्ति हो सकती है। कुंडली/Kundli में आठवां भाव/Eighth House विशेष रूप से पैतृक संपत्ति के विषय में बताता है।

कुंडली में आठवां भाव और पैतृक संपत्ति/Eight House and Ancestral Property in your birth chart

हर व्यक्ति की कुंडली/Kundali में कुछ बिंदु होते हैं जो परिभाषित करते हैं कि जातक को बिना मेहनत के धन की प्राप्ति हो सकती है। कुंडली/Kundli में आठवां भाव/Eighth House विशेष रूप से पैतृक संपत्ति के विषय में बताता है।

चलिए जानते हैं कि कैसे अष्टम भाव, और अन्य भाव पैतृक संपत्ति के संबंध में कैसे निर्णायक साबित हो सकते हैं।

आठवां घर/Eighth House न केवल भयंकर ’त्रिक भाव’ में से एक है, बल्कि मोक्ष त्रिकोण भाव में से भी है। यह भाव जीवन-काल, मृत्यु, पराजय, सुस्ती, चोरी का धन, पशु वध और मृत्यु का भय जैसे खतरनाक कारक का संकेतक है। यह पैतृक धन, जीवन बीमा, अनुसंधान कार्य और सुख को भी दर्शाता है। इसके कारण पैतृक संपत्ति में भाग का योग को इस भाव के आकलन से पहचाना जा सकता है। जितना ज्यादा शक्तिशाली यह भाव होगा, उतना पैतृक संपत्ति में भागीदारी का निर्णय आपके पक्ष में आएगा।

पैतृक संपत्ति के योग के लिए कैलकुलेटर/Calculator for ancestral property

चलिए नीचे दिए गए कैलकुलेटर की सहायता से आपके लिए पैतृक संपत्ति में भागीदारी की संभावना को ढूंढते हैं।

पैतृक संपत्ति के योग के लिए कैलकुलेटर/Calculator for ancestral property

चलिए नीचे दिए गए कैलकुलेटर की सहायता से आपके लिए पैतृक संपत्ति में भागीदारी की संभावना को ढूंढते हैं।

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नोट – यह उपकरण जल्द ही हम आपके लिए लाने वाले हैं।

उपरोक्त परिणाम के पीछे ज्योतिषीय व्याख्या

आपकी कुंडली के आकलन के अनुसार, बहुत सारे भाव होते हैं जो उपरोक्त परिणाम में शामिल होते हैं। जो भी परिणाम ऊपर आए हैं, वह इन नियमों का पालन करके आ रहे हैं –

नौवां भाव (Ninth House) – नौवां भाव/Ninth House, आठवें/Eighth House से दूसरा भाव होता है, जिसके आकलन से पैतृक संपत्ति के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकती है। यदि नौवां भाव/Ninth House मजबूत स्थिति में है, तो यह आठवें भाव के साथ कार्य करता है। इस स्थिति में जातक को पैतृक संपत्ति में अपना पूर्ण भाग मिलता है।

दसवां भाव (Tenth house) – दसवां भाव/Tenth House, आठवें भाव/Eighth House से तीसरा होता है। यह भाव जातक की लड़ने की क्षमता को दिखाता है। यह दिखाता है कि जातक को अपने हक की पैतृक संपत्ति प्राप्त करने के लिए, कितनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है। यदि दसवां भाव/Tenth house कमजोर हो या किसी पीडित ग्रह से प्रभावित हो, जातक को पैतृक संपत्ति मिलने में परेशानी हो सकती है, जो उसे आठवें भाव में दर्शाया गया है। इन मामलों में जातक को कुछ उपाय करने के लिए प्रेरणा दी जाती है ताकि वह दसवें भाव को मजबूत कर सके, जिसके कारण उसे उसकी पैतृक संपत्ति में अपना भाग मिल जाए।

ग्यारहवां भाव (Eleventh House) – ग्यारहवां भाव/Eleventh House चौथा, यानी केंद्र से आठवां भाव होता है और यह जातक को पैतृक संपत्ति के मिलने के योग के बारे में दर्शाता है। जब भी जातक की कुंडली का पैतृक संपत्ति के विषय में आकलन किया जाता है तभी इस भाव का भी आकलन करना अनिवार्य हो जाता है।

बारहवां भाव/Twelfth House – बारहवां भाव/Twelfth House, आठवें भाव/Eighth House से पांचवां होता है। इसे केंद्र का भाव भी कहा जाता है, जो आठवें भाव/Eighth House की ताकत को दर्शाता है। बारहवां भाव/Twelfth House यह बताता है कि जातक को पैतृक संपत्ति प्रेम से मिलेगी या फिर सारा प्रेम इस संपत्ति को लेने में खत्म हो जाएगा।

आप हमारे पेज पर मौजूद निःशुल्क कैलकुलेटर का प्रयोग करके भी इस समस्या का समाधान खोज सकते हैं। इस कैलकुलेटर का लिंक नीचे दिया गया है।

पहला भाव/Ascendant – लग्न आठवें भाव/Eighth House से छठा हो, तो यह जातक के लड़ने की क्षमता को दर्शाता है। यदि जातक का पहला भाव/First House मजबूत नहीं होगा, तब वह पैतृक संपत्ति में अपने हिस्से के लिए लड़ने में असमर्थ होगा। इस स्थिति में जातक के आठवें भाव/Eighth House में संपत्ति के योग होने के बावजूद भी उसे पैतृक संपत्ति नहीं मिलेगी।

दूसरा भाव/Second House – दूसरा भाव/Second House आठवें भाव/Eighth House को पूर्ण करता है क्योंकि इसकी स्थान सातवां है। यह उन सभी कमियों को पूरा करने की कोशिश करता है जो आठवें भाव/Eighth House में दिखता है। यदि कुंडली में दूसरा भाव/Second House ताकतवर होता है, तो यह जातक को फायदा पहुंचाता है और उसे पैतृक संपत्ति में हिस्सा मिलने में सहायता देता है।

तीसरा भाव/Third House – तीसरा भाव/Third House आठवें भाव/Eighth House से आठवें स्थान पर होता है, इसलिए इसे कुंडली में पैतृक संपत्ति के विषय में मृत्यु का भाव/House of death भी कहा जाता है। यदि तीसरा भाव/Third House शक्तिशाली होता है, तो यह जातक को फायदा पहुंचाने की वजह से उसे उसकी पैतृक संपत्ति से दूर ले जाता है। पैतृक संपत्ति के अच्छे योग के लिए आठवें भाव/Eighth House को तीसरे भाव/Third House से शक्तिशाली होना अनिवार्य होता है।

चौथा भाव/Fourth House – चौथा भाव/Fourth House आठवें भाव/Eighth House से नौवें स्थान पर होता है, जिसे त्रिकोण भाव/Trikon Bhava भी कहा जाता है। त्रिकोण भाव हमेशा एक दूसरे को पूर्ण करते हैं। इसी कारण वश, चौथे भाव/Fourth House का मजबूत होना, जातक के पैतृक संपत्ति मिलने की तरफ इशारा करता है।

पांचवा भाव/Fifth house – पांचवा भाव/Fifth House, आठवें भाव/Eighth House से दसवें स्थान पर होता है, जिसे केंद्र का भाव भी कहा जाता है। केंद्र का भाव, विष्णु भाव होता है। यदि केंद्र भाव जातक के पक्ष में हो तो यह भाव जातक को आठवें भाव के अनुसार पैतृक संपत्ति दिलाता है। एक और कारक है जिसे बताना बहुत जरूरी है। यदि पांचवा भाव/Fifth House मजबूत हो, तो जातक अपने पैतृक संपत्ति की सहायता से व्यापार कर सकता है।

छठा भाव/Sixth House – छठा भाव/Sixth House)आठवें भाव से ग्यारहवां होता है, जिसे त्रिक भाव भी कहते हैं। यदि ग्यारहवें भाव के स्वामी/Eleventh House lord एक दम सटीक तरीके से मौजूद हो, तो बिना शक के यह भाव पैतृक संपत्ति के विषय में एक शुभ योग की तरफ इशारा करता है। इससे ज्यादा, यह भाव जातक के किस्मत में मौजूद पैतृक संपत्ति को मिलने में बहुत ज्यादा सहायक साबित हो सकता है। जिसे ज्योतिष का थोड़ा बहुत भी ज्ञान है, वह यह जानता होगा कि इस भाव को मुनाफे का भाव/House of profits भी कहते हैं। यदि यह भाव जातक के पक्ष में आ जाए तो यह जातक को बहुत अच्छी मात्रा में पैतृक संपत्ति मिल सकती है।

सातवां भाव (Seventh House) – सातवां भाव/Seventh House आठवें भाव/Eighth House से बारहवां होता है और इसी कारणवश इसे खर्च का भाव भी कहा जाता है। यदि, यह भाव आठवें भाव से ज्यादा शक्तिशाली हो, या फिर सातवें भाव का स्वामी/Seventh House lord आठवें भाव के विपरीत खड़ा हो जाए, तो जातक को पैतृक संपत्ति मिलने में परेशानी हो सकती है और शायद ना ही मिले। इसके अलावा, जातक को कुछ अतिरिक्त खर्च उठाना भी पड़ सकता है।

अब आप समझ गए होंगे कि कैसे हर भाव आपकी कुंडली में पैतृक संपत्ति के मिलने की संभावना को दर्शाता है। ऊपर लिखे लेख को ध्यान से पढ़ने से आप इस निष्कर्ष पर आसानी से जा सकते हैं कि आठवां भाव/Eighth House पैतृक संपत्ति के लिए विशेष रूप से जिम्मेदार होता है, और यदि यह किसी भी तरीके से कमजोर हो जाए तो कुछ उपायों के जरिए इसे ठीक भी किया जा सकता है।

इसके साथ साथ, डी-4 और डी-12 चार्ट का भी आकलन किया जाता है। यदि किसी ग्रह का नकारात्मक प्रभाव पड़े, तो एक ज्ञानी ज्योतिष आपके लिए कुछ अच्छे उपायों को बता सकता है।

जन्म चार्ट में संपत्ति की संभावनाएं

हर व्यक्ति के मन में कभी ना कभी उसके मन में यह सवाल उठता होगा कि क्या मेरी कुंडली में संपत्ति का योग है? संपत्ति मिलने के मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं। पहला तो आप खुद अपनी मेहनत से अपने लिए संपत्ति खरीदें और दूसरा पैतृक संपत्ति या जो संपत्ति आपको विरासत के रूप में आपको मिली हो। हर व्यक्ति की कुंडली में इन दोनों ही तरीकों के लिए अलग अलग भाव और ग्रह के संयोजन हैं, जिनको एक ज्ञानी ज्योतिष ही पढ़ कर समाधान दे सकता है। इस लेख के जरिए आप उन सभी योग और संभावना के बारे में जान गए होंगे। यदि आप संपत्ति की संभावनाओं के बारे में और भी अधिक जानताकी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप 'क्या मेरे भाग्य में कोई संपत्ति है?' नाम से लेख पढ़ सकते हैं, जो इस वेबसाइट पर उपलब्ध है। संपत्ति के मामले में संपत्ति विवाद एक अहम भूमिका निभाता है। हमारी वेबसाइट पर इस विषय में भी लेख उपलब्ध है। आप अचल संपत्ति और संपत्ति के मामलों के लिए ज्योतिष पर कुछ लेख हैं जो आप हमारी वेबसाइट से पढ़ सकते हैं।

जन्म चार्ट में संपत्ति की संभावनाएं

हर व्यक्ति के मन में कभी ना कभी उसके मन में यह सवाल उठता होगा कि क्या मेरी कुंडली में संपत्ति का योग है? संपत्ति मिलने के मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं। पहला तो आप खुद अपनी मेहनत से अपने लिए संपत्ति खरीदें और दूसरा पैतृक संपत्ति या जो संपत्ति आपको विरासत के रूप में आपको मिली हो। हर व्यक्ति की कुंडली में इन दोनों ही तरीकों के लिए अलग अलग भाव और ग्रह के संयोजन हैं, जिनको एक ज्ञानी ज्योतिष ही पढ़ कर समाधान दे सकता है। इस लेख के जरिए आप उन सभी योग और संभावना के बारे में जान गए होंगे। यदि आप संपत्ति की संभावनाओं के बारे में और भी अधिक जानताकी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप 'क्या मेरे भाग्य में कोई संपत्ति है?' नाम से लेख पढ़ सकते हैं, जो इस वेबसाइट पर उपलब्ध है। संपत्ति के मामले में संपत्ति विवाद एक अहम भूमिका निभाता है। हमारी वेबसाइट पर इस विषय में भी लेख उपलब्ध है। आप अचल संपत्ति और संपत्ति के मामलों के लिए ज्योतिष पर कुछ लेख हैं जो आप हमारी वेबसाइट से पढ़ सकते हैं।

यदि आप पैतृक संपत्ति के विषय में कोई जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो

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