मुख्य पृष्ठ विभिन्न भावों और राशियों में ग्रह विभिन्न भावों और राशियों में राहु

विभिन्न भावों और राशियों में राहु/ Rahu in Different Houses & Signs

राहु/Rahu, चंद्रमा के उत्तरी उभार का एक छाया ग्रह है, जिसका वैदिक ज्योतिष/Vedic astrology में अत्यधिक महत्वपूर्ण महत्व है। यह व्यक्तियों के पूर्व जीवन से संबंधित उन अधूरी मनोग्रस्त महत्वाकांक्षाओं को भी प्रकट करता है, जिन लक्ष्यों को इस जीवन में प्राप्त करने के लिए वह यहां आते हैं। इन जानकारियों के लिए यह समझना आवश्यक होता है कि राहु किस राशि, डिग्री और भाव में है।

विभिन्न भावों और राशियों में राहु का प्रभाव/ Effects of Rahu in Different Houses and Signs

राहु/Rahu चीजों के विस्तारण और मनोग्रस्तता को दर्शाता है और यह लोगों की नैतिक वर्जनाओं को तोड़ता है। राहु एक ऐसा ग्रह है जो हर कार्य को जल्द से जल्द  निपटाने का प्रयास करता है, चाहे वह तरीका नैतिक हो या अनैतिक। राहु लोगों को शॉटकर्ट लेने पर मजबूर करता है जैसे चोरी का मार्ग चुनना या मेहनत करना। राहु ग्रह हर जगह अपनी अलग छाप छोड़ता है।

छाया ग्रहों/Shadow planets के रूप में राहु और केतु, किसी भी तारे या भाव पर कोई भी दृष्टि डालना पसंद नहीं करते। हालांकि, आधुनिक समय में, कुछ अति-उत्सुक ज्योतिषियों ने राहु (और केतु) को भी दृष्टि डालने वाला आरोपी घोषित कर दिया है। भारतीय ज्योतिष में, राहु/ Rahu असुर का सिर और केतु/ Ketu दानव का धड़ (पूंछ) है। इसलिए तार्किक रूप से, असुर के शरीर के विभाजित दो हिस्सों  की कोई दृष्टि या नज़र नहीं हो सकती।

यदि आप नहीं जानते कि आपकी जन्म कुंडली में राहु/Rahu कहाँ है, तो अपनी फ्री कुंडली बना सकते हैं।

यह जानने के लिए पढ़ें कि आपका जीवन छल, कपट और अनैतिकता की दुनिया से कैसे प्रभावित होता है।

आप ज्योतिष में ग्रहों के गोचर और इसके प्रभावों12 भावों और 27 नक्षत्रों और इनकी विशेषताओं के बारे में हमारी वेबसाइट से पढ़ सकते हैं।

ज्योतिष रहस्य