छठे भाव में मंगल का प्रभाव | Moon in sixth house

छठे भाव में मंगल

छठे भाव में मंगल का प्रभाव/impact of Moon in sixth house मंगल का छठे भाव में होना काफी सकारात्मक माना जाता है। यह स्थान मंगल के लिए एक अनुकूल घर भी माना जाता है। मंगल एक उग्र और अग्नि तत्व युक्त ग्रह है और छठा भाव एक दु:स्थान है ऐसे में मंगल की ऊर्जा इस स्थान पर काफी चीजों में बदलाव को लाने में सहायक होती है। मंगल के षष्ठस्थ होने पर व्यक्ति के भीतर की वो क्षमताएं और प्रतिभाएं जागृत होती है जिनके बारे में वह स्वयं भी अनभिज्ञ हो सकता है। मंगल छठे में रह कर कई चीजों में सफलता दिला सकता है। इन बातों को समझने के लिए जरूरी है इस बात को समझना की छठा भाव आखिर क्या है

कुंडली का छठा भाव रोग, शत्रु, कर्ज, खर्चों, प्रतियोगिताओं, प्रतिस्पर्धा, ननिहाल पक्ष, पहला काम (नौकरी) का भाव भी होता है। इस भाव को काफी परेशानी और कष्ट का स्थान माना जाता है। जीवन में शत्रुओं का सामना अधिक करना पड़ सकता है। जीवन में रोग की स्थिति इसी भाव के कारण देखने को मिलती है। जीवन में कई तरह के संघर्ष इसी भाव से देखने को मिलते हैं। हमारी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का भाव भी इसी से देखा जाता है। 

अब मंगल को यदि देखा जाए तो ज्योतिष शास्त्र में मंगल को पाप ग्रह क्रूर और कठोर माना गया है। मंगल का कार्य सेनानायक का होता है, नेतृत्व का होता है। किसी भी परिस्थिति से निपटने में मंगल जो साहस देता है वैसा किसी ओर से प्राप्त नहीं होता है। मंगल व्यक्ति को उग्र बनाता क्रियाशील बनाता है, साहस और पराक्रम का भाव मंगल से ही मिलता है। व्यक्ति हर चीज में आगे रहकर काम करने का उत्सुक होता है। 

अब मंगल का इस स्वरुप के साथ छठे भाव में होना स्वाभाविक रुप से उन सभी खराब चीजों से निपटने का साहस अवश्य देगा, परेशानियों से निपटने का साहस मंगल के कारण व्यक्ति को प्राप्त होगा। अत: इन कुछ बातों को यदि देखा जाए तो कहा जा सकता है की मंगल छठे भाव में व्यक्ति के साहस का बेहतर उपयोग कराता है ओर उसे विरोधियों परेशानियों से लड़ने तथा उसमें सफल होने का विशेष गुण भी प्रदान करता है। 

छठे भाव का चंद्रमा देता है कार्यों में सफलता/ Moon in sixth house gives success

मंगल का छठे भाव/Moon in sixth house में व्यक्ति को प्रतिस्पर्धाओं में आगे बढ़ने का अच्छा प्रभाव देता है। कुंडली के छठे घर में बैठा हुआ मंगल व्यक्ति को आगे बढ़ते रहने का अदम्य साहस देता है। व्यक्ति आसानी से भय नहीं खाता है। व्यक्ति यदि कोई परीक्षा या फिर किसी प्रतिस्पर्धा में व्यक्ति को विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह स्थिति कर्मों का प्रभाव भी दिखाती है जो व्यक्ति को मजबूत होने की प्रेरणा देता है। मंगल का प्रभाव शत्रुओं का मर्दन कर देने वाला होता है। विरोधियों द्वारा कितनी भी परेशानी देने की कोशिश की जाए लेकिन वह मंगल के कारण व्यक्ति का कुछ नहीं बिगाड़ पाते हैं। 

मंगल का छठे घर में होना व्यक्ति को कानूनी मसलों में विजय प्रदान करता है। व्यक्ति उच्च पद प्राप्ति कर सकता है, खेल कूद, सेना, सुरक्षा अग्नि से संबंधित कार्यों इत्यादि में सफलता और प्रसिद्धि दिलाने वाला होता है।

मंगल की चतुर्थ दृष्टि नवम भाव में होने पर यह स्थिति पिता से संबंधित सुख को प्रभावित कर सकती है। पिता के साथ कठोरता का अभाव शो सकता है। व्यक्ति आध्यात्मिक दृष्टिकोण में अलग ही सोच को दिखा सकता है। दूसरों के समक्ष अपनी बात को रखने की इसकी क्षमता है। 

मंगल की सप्तम दृष्टि द्वादश भाव पर होगी। यहां व्यक्ति के प्रयास अधिक हो सकते हैं। बार बार कोशिश करने की उसकी क्षमता काफी प्रभावित करती है। खर्चों की अधिकता बनी रहती है।

मंगल की अष्टम दृष्टि लग्न पर होगी। मंगल की इस दृष्टि का प्रभाव व्यक्ति को मजबूत बना देगा। व्यक्ति में साहस की अधिकता होती है, अभिमान और गर्व की भावना भी अधिक होती है। कई बार व्यक्ति लड़ाकू स्वभाव का भी हो सकता है। 

मंगल का सकारात्मक और नकारात्मक फल/Negative and positive results of Mars in this house

मंगल छठे घर में मिले जुले फल दिखाई देते हैं। मंगल के सकारात्मक प्रभाव को हम विजय की प्राप्ति, सफलता, प्रसिद्धि और परिश्रम के बेहतर परिणाम के रुप में दिखाई देती है। वहीं अगर नकारात्मक पक्ष की बात की जाए तो मंगल यहां चिंता अधिक दे सकता है। परेशानियां अधिक झेलनी पड़ सकती हैं। शत्रुओं का भय हो या फिर आर्थिक स्थिति का उतार-चढ़ाव परेशानी देता है। खर्चों की अधिकता बनी रहती है। जातक को अपने मामा पक्ष से सुख की कमी किसी न किसी रुप से देखने को मिल सकती है। मंगल का प्रभाव दुर्घटना, सर्जरी, बुखार, रोग की अधिकता दे सकता है। इस प्रकार से मंगल छठे घर में बैठ कर अच्छे और बुरे परिणाम देता है किंतु कुछ मामलों में सकारात्मकता एवं साहस भी अवश्य प्रदान करता है।

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