मुख्य पृष्ठ वीडियो डॉ. बजरंगी द्वारा बिजनेस गाइड

बिजनेस, करना क्या था कर क्या लिया ?

आज हम बात करेंगे बिजनेस की, जिसमें हमारा आज का विषय है- बिजनेस करना क्या था, कर क्या लिया? क्योंकि हर व्यक्ति को हर बिज़नेस नहीं सुहाता। किसी को कपडे का सुहाता है तो किसी को हीरे जवाहरात का। वहीं, कोई स्वर्ण के काम से धन कमाता है तो कोई लोहे के काम से मुनाफा, कैसे आइये समझते हैं।

जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आमदनी का एक अच्छा स्रोत होना अति आवश्यक होता है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति किसी अच्छे कारोबार या नौकरी की तलाश करता है, जिसमें कई बार बहुत प्रयासों के बाद भी, लोगों को करियर में सफलता प्राप्त नहीं होती। 

सामान्य धारणा है कि किसी लग्न विशेष में कुंडली के दसवें भाव में स्थित ग्रह या उससे सम्बंधित ग्रह, व्यक्ति को किसी विशेष प्रकार के व्यापार में ले जाते हैं लेकिन किसी व्यक्ति के व्यापार करने में सफलता के योग और किस तरह का व्यापार उसे लाभ दे सकता है ये सिर्फ, दसवें भाव या दसवें भाव में स्थित ग्रहों से कभी भी नियंत्रित तथा निर्धारित नहीं होता बल्कि, ये अत्यधिक गहन विश्लेषण का कार्य होता है। अतः, इसे हम ज्योतिषीय दृष्टिकोण से जानने की कोशिश करते हैं कि कुंडली के कौन से भाव और ग्रह मिलकर हमारे सम्पूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र तथा स्थिति को निर्धारित और नियंत्रित करते हैं।

बिजनेस शुरू किए जाने वाले सामान्य कारण

यदि कोई व्यक्ति बिजनेस करने का इच्छुक है तो उसके लिए कौन सा बिजनेस उपयुक्त रहेगा? उसे इसका पता कैसे चलेगा? ऐसी स्थिति में, कुछ लोग जहां नौकरी करते हैं वे वैसा ही बिजनेस करने की कोशिश करते हैं तो कुछ लोगों ने जिसकी पढ़ाई की हुई होती है वे वैसा ही बिजनेस करने की कोशिश करते हैं। वहीं, कुछ लोग पुश्तैनी बिजनेस के अनुसार कार्य करने की चेष्टा करते हैं। साथ ही, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दूसरों की देखा-देखी बिजनेस करने की कोशिश करते हैं अर्थात् उसने ऐसा किया जिसमें उसको लाभ हुआ तो अगर मैं भी ऐसा ही करूंगा तो मुझे भी लाभ ही होगा। 

साधारणतः दसवें भाव पर आधारित बिजनेस 

हालांकि, ये समस्त कारण बिजनेस तो शुरू कर सकते हैं लेकिन सफल बिजनेस की गारंटी नहीं दे सकते जबकि, कुंडली में निहित योगों के अनुसार किए जाने वाले बिजनेस सफल रहते हैं। लेकिन इसमें एक अपवाद भी है जिसकी जानकारी होना अति आवश्यक होता है क्योंकि हमारे द्वारा यह देखा गया है कि कई ज्योतिषी, कुंडली के दसवें भाव में स्थित राशि के अनुसार बिजनेस बता देते हैं। उदाहरणतः, यदि दसवें भाव में वृषभ राशि आती है तो साज-सज्जा, गहने, नग या रत्न, गाड़ी की खरीद-फरोख्त, चांदी का काम, महिलाओं के साजो-समान संबंधी वस्तुएं, विवाह से संबंधित वस्तुएं, युवा दिखने के उत्पाद आदि वृषभ राशि के अधिपति शुक्र से संबंधित कार्य बता दिए जाते हैं। ऐसे में, यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त कार्यों का ज्ञान नहीं हो तो वह क्या करेगा? अतः, यह कुंडली के अध्ययन का सबसे गलत तरीका सिद्ध होता है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कुंडली का गहन विश्लेषण

ज्योतिष का ज्ञान रखने वालों को, अवश्य ही यह जानकारी होनी चाहिए कि D1 चार्ट को देखने का एक नियम होता है तदोपरांत, जिन बातों की D9 या नवांश चार्ट संतुति नहीं करता वह उसमें से निकाल दी जाती हैं। अब, बाकी बची विधाओं या कार्यों की D10 या दशमांश चार्ट से करने पर, इसमें से कई  चीजें निकल जाती हैं परिणामस्वरूप, कार्यों की सूची थोड़ी सी छोटी हो जाती है। इसके पश्चात, इन सब चीजों की संतुति D60 या षष्टियांशा चार्ट से की जाती है। इसके बाद एक, दो या अधिक से अधिक तीन चीजों का पता चलता है जिनमें व्यापार करने से अधिक से अधिक लाभ की प्राप्ति होती है। कुंडली में बिजनेस को देखने का यह एक उचित तरीका है। जो लोग, D1 चार्ट से ही बिजनेस का पता लगा लेते हैं, वह सर्वथा गलत है।

सर्वप्रथम D1, फिर D9, फिर D10 तत्पश्चात् D60 द्वारा आकलन करने के उपरांत एक, दो या हद से हद तीन कार्य ही बचते हैं। इन्हीं कार्यों को हमें करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने पर व्यापार में नुकसान नहीं होता तथा कुंडली द्वारा सुझाए गए कार्य आपको उचित परिणाम भी प्रदान करेंगे। लेकिन हमारा सुझाव है कि इस सब को करने से पहले, यह जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए कि आपकी कुंडली में व्यापार करने का योग है भी या नहीं। 

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