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रोहिणी नक्षत्र - अनकहे रहस्यों के सितारे

वैदिक ज्योतिष के 27 नक्षत्रों में से रोहिणी नक्षत्र / Rohini Nakshatra चौथा नक्षत्र है। रोहिणी नक्षत्र का अर्थ लाल है, जो एक युवती से संबंधित होने के कारण अत्यधिक उर्वरता को दर्शाता है। रोहन शक्ति इससे संबंधित ऊर्जा है।

  1. रोहिणी नक्षत्र / Rohini Nakshatra, परिवहन से संबंधित एक निजी सुपर लग्जरी वाहन भी है।
  2. रोहिणी नक्षत्र हमेशा समृद्धि और प्रचुरता से संबंधित होता है।
  3. यह नक्षत्र हमेशा सुंदरता से भी संबंधित होता है।

 

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रोहिणी कौन है? / Who is Rohini?

रोहिणी चंद्रमा की प्रिय पत्नी थीं, जिन्हें पता था कि चंद्रमा को कैसे लुभाना है। नृत्य, गायन, संगीत, नाटक अभिनय का रोहिणी नक्षत्र से गहरा संबंध है, क्योंकि रोहिणी इन सभी चीजों में श्रेष्ठ थीं, और इन्हीं विशेषताओं के कारण वह अन्य छब्बीस पत्नियों की तुलना में चंद्रमा को सबसे अधिक आकर्षित कर सकती थीं। इस कारण, चन्द्रमा की अन्य छब्बीस पत्नियाँ रोहिणी से ईर्ष्या करने लगी थीं।

 

इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि सशक्त रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों से लोग बहुत ईर्ष्या करेंगे। दूसरी ओर, प्रबल रोहिणी नक्षत्र वाले लोग स्वयं को अत्यधिक प्रेम करने वाले आत्मासक्त होते हैं। 

 

रोहिणी नक्षत्र एक 'ध्रुव नक्षत्र' या 'स्थिर नक्षत्र' है। रोहिणी नक्षत्र में विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा, औषधि प्रशासन, बड़े सौदे पर हस्ताक्षर आदि काम करने सबसे अच्छे होते हैं।

 

रोहिणी नक्षत्र के देवता / भगवान / The Deity / Lord of Rohini Nakshatra

रोहिणी नक्षत्र / Rohini Nakshatra के देवता सृष्टि के निर्माता प्रजापति हैं। रोहिणी नक्षत्र लोगों को सम्मोहित करने या आकर्षित करने की क्षमता रखता है। काजल लगाना या कॉन्टैक्ट लेंस धारण करना भी रोहिणी नक्षत्र के लोगों की प्रमुख आदत होती है क्योंकि यह लोग चाहते हैं कि लोग उनकी आंखों को बहुत पसंद करें।

 

रोहिणी नक्षत्र से जुड़ी पौराणिक कथा / Mythology Associated with Rohini Nakshatra

 

1 पौराणिक कथा - दक्ष का श्राप / The curse of Daksha:

चन्द्र की सत्ताईस पत्नियाँ दक्ष की पुत्रियाँ थीं। लेकिन चंद्र अन्य छब्बीस बहनों से अधिक समय रोहिणी के साथ बिताते थे। इस पर, बहनों ने अपने पिता दक्ष से शिकायत की कि चंद्रमा रोहिणी में मग्न होने के कारण, उनमें से किसी के साथ पर्याप्त समय नहीं बिताते हैं। तब दक्ष ने चंद्रमा को तपेदिक के समान एक बीमारी का श्राप दिया, जिसके कारण चंद्रमा का वजन कम होने से शरीर पतला (घटने) होने लगा। जैसा कि विदित है कि चंद्रमा एक पोषक तत्व हैं; चन्द्रमा के इस घटने से सांसारिक प्राणी (जानवर और पौधे) मरने लगे। इस पर, सभी उस श्राप को बदलने के लिए भगवान शिव के पास गए। भगवान शिव ने श्राप को बदलने में असमर्थता व्यक्त की लेकिन उन्होंने चंद्रमा को एक वरदान दिया। वरदान यह था कि जिस रात वह घटकर खत्म हो जाएंगे या उनका तेज खत्म हो जाएगा, अगली रात वह फिर से अपना तेज और शरीर प्राप्त कर लेंगे।

 

इस पौराणिक कथा का उपयोग कैसे करें / How to use this Mythology

इस नक्षत्र के साथ हमेशा एक श्राप जुड़ा होता है। यह नक्षत्र/ Nakshatra जिन भावों या उनके शासकों पर शासन करता है, उनके अभिशपित होने के कारण लोग वैकल्पिक तरीकों से शिखर पर पहुंच पाते हैं। 

 

2 पौराणिक कथा - बृहस्पति, चंद्रमा और तारा की पौराणिक कथा / The Mythology of Brihaspati, Moon, and Tara

चन्द्र, बृहस्पति की पत्नी तारा के साथ भाग गए थे। जब बृहस्पति को इस बात का पता चला तो वह चंद्रमा के पास गए और अपनी पत्नी को वापस मांगा। चंद्रमा ने मना करते हुए कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि तारा स्वयं आई है, और उसने उसे मजबूर नहीं किया था। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए, ब्रह्मदेव को हस्तक्षेप करना पड़ा, और उन्होंने तारा को बृहस्पति के पास वापस जाने के लिए कहा, लेकिन उस समय तारा  चंद्रमा के बच्चे की गर्भवती थी। अंत में, तारा से बुध  का जन्म हुआ। हालांकि, चंद्रमा बुध के पिता हैं और बुध को मित्र मानते हैं, लेकिन बुध नाजायज संतान होने के कारण चंद्रमा को अपना शत्रु मानता है। इस बीच, बृहस्पति, बुध की बुद्धि से प्रभावित होकर औपचारिक रूप से उसे अपना लेते हैं।

 

इस पौराणिक कथा का प्रयोग कैसे करें / How to use this Mythology

दोनों ग्रहों की एक दूसरे के प्रति प्रवृत्तियों का वर्णन करते समय इसके उचित प्रयोग द्वारा नाजायज संतान, सरोगेसी और गोद लेने की बात का पता लगाया जाता है।

 

रोहिणी नक्षत्र के विषय संबंधी लक्षण / Themes, Traits of Rohini Nakshatra

यह याद रखना चाहिए कि वृषभ राशि में चंद्रमा का उच्च होना, चंद्रमा के लिए मूल त्रिकोण होता है (चंद्रमा इस राशि में बहुत सहज होता है)। जिन लोगों का चंद्रमा या दशम भाव का स्वामी रोहिणी में होता है, वह फैशन डिजाइनिंग, उद्यान, रेस्टो-बार, वास्तुकार बन सकते हैं।

 

भगवान कृष्ण का लग्न और चंद्रमा दोनों रोहिणी में होने पर, मूल प्रेमी रूप में कई महिलाओं से प्रभावित होकर, उनके साहचर्य का आनंद लिया। रोहिणी को सुंदरता, विपरीत लिंग और मानसिक और शारीरिक आनन्द का अनुभव कराने का जिम्मेदार माना जा सकता है।

  1. नृत्य, संगीत, गायन, नाटक और अभिनय।
  2. स्वयं के कामुक स्वार्थ और कई प्रेम संबंध।
  3. गोद लेना और सरोगेसी

 

 रोहिणी के प्रबल प्रभावों वाले जातकों में निम्नलिखित प्रवृत्तियाँ हो सकती हैं:

  1. उन्हें लंबी पुरानी बीमारियां हो सकती हैं।
  2. इनके कई प्रेम संबंध हो सकते हैं।
  3. डांस, ड्रामा, सिंगिंग, म्यूजिक और एक्टिंग के प्रेमी हो  सकते हैं।
  4. अपने अधिकारों (विशेषकर गर्लफ्रेंड) के बारे में अत्यधिक अधिकारात्‍मक।
  5. विलासितापूर्ण जीवन की ओर ले जाना।
  6. गोद लेना और सरोगेसी।
  7. अवैध संबंध।
  8. अच्छी प्रजनन क्षमता।

 

इन जानकारियों के बाद, निष्कर्ष पर जाने से पहले उपरोक्त लक्षणों का उपयोग करते हुए बहुत सतर्कता रखनी चाहिए

 

इस तथ्य के प्रति चौकस रहना चाहिए कि रोहिणी नक्षत्र/Rohini Nakshatra (स्वामी, ग्रह और घर) का क्या निरीक्षण करता है और जिसके चार्ट का अध्ययन किया जाता है। हमें ऐसे व्यक्ति के लक्षणों का वर्णन करते समय काफी सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। 

 

रोहिणी नक्षत्र में जन्मे कुछ प्रसिद्ध हस्तियां / Some Famous Personalities Born in Rohini Nakshatra

इस नक्षत्र / Nakshatra में जन्मे बहुत से लोग अपने जीवन में अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। उनमें से कुछ नाम इस प्रकार हैं: 

भगवान कृष्ण, रानी विक्टोरिया, विनोबा भावे, रोजर मूर, चार्ली चैपलिन, जैकी चेन आदि।

 

नाड़ियों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र की सक्रियता / Activation of Rohini Nakshatra as per Nadis

रोहिणी नक्षत्र द्वारा शासित भावों और भावों के स्वामियों के सक्रिय होने पर, आने वाले वर्षों में होने वाली चीजों का अनुभव किया जा सकता है-

  1. 11वां वर्ष- जानवर या पानी से संबंधित घटना।
  2. 36वां वर्ष- रोहिणी नक्षत्र में ग्रह छठे भाव को सक्रिय करता है।
  3. 83वां वर्ष- रोहिणी नक्षत्र जहां भी स्थित होता है, अपने आप सक्रिय हो जाता है।

हमारा मानना है कि यह सभी कथन वैदिक ज्योतिष/ Vedic astrology के सामान्य दिशानिर्देशों के अनुसार हैं। हालांकि, किसी विशेष कुंडली / Kundali के आधार पर, विशिष्ट प्रभावों के लिए किसी अच्छे ज्योतिषी से परामर्श करना हमेशा बेहतर होता है।

 

रोहिणी नक्षत्र एक स्थिर प्रकृति का नक्षत्र है। इस नक्षत्र में संपत्ति खरीदना, भवन निर्माण प्रारंभ करना और नई नौकरी कार्यारंभ होना, पूजा और धार्मिक कार्य करना और पितृ दोष निवारण हेतु पूर्वजों को श्रद्धांजलि देना बहुत शुभ माना जाता है।

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