पुष्य नक्षत्र | Pushya Nakshatra | एक पावन नक्षत्र

वैदिक ज्योतिष/Vedic astrology के 27 नक्षत्रों में से पुष्य नक्षत्र 8वां नक्षत्र है जो अत्यधिक शुभ नक्षत्रों में से एक है। पुष्य नक्षत्र/Pushya Nakshatra में विवाह को छोड़कर प्रत्येक कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी देवताओं के सभी अनुष्ठानों का संचालन करने वाले देव गुरु बृहस्पति हैं। जिसके परिणामस्वरूप, बृहस्पति के अपने परिवार की उपेक्षा करने के कारण ही इस नक्षत्र में परिवार (संतति) शुरू करना शुभ नहीं माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र को पोषण का तारा भी कहा जाता है। यह नक्षत्र विशुद्ध ज्ञान के प्रतीक कमल से भी संबंधित है। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति, बिना कोई औपचारिक शिक्षा ग्रहण किए भी  करियर में उन्नति कर सकते हैं। यह नक्षत्र पोषण का तारा है, जिसे प्रतीकात्मक रूप से पोषण और देखभाल करने वाली गाय के थन द्वारा दर्शाया गया है। 

पुष्य नक्षत्र से संबंधित पौराणिक कथाएं/Mythology with Pushya Nakshatra

उपरोक्त अनुसार, पुष्य नक्षत्र से संबंधित गुरु या ग्रह बृहस्पति, ब्रह्मा के मानस-पुत्र होने के साथ ही , अंगिरस (काले रंग) के वंशज हैं। बृहस्पति के मृत जन्म लेने पर, उनके पिता कश्यप मुनि, निरंतर तप द्वारा बृहस्पति के प्राण वापस ला सके।

बृहस्पति देवताओं के सलाहकार हैं, जो राजनीति विज्ञान और 'अर्थशास्त्र' का संचालन करते हैं। इसके अतिरिक्त:

1. यह नक्षत्र कानून बनाने के साथ‌ ही कानून लागू भी करता है।

2. बृहस्पति धार्मिक प्रार्थनाओं के स्वामी हैं।

इस पौराणिक कथा का प्रयोग कैसे करें/How to use this mythology

• स्वास्थ्य संबंधी कुछ समस्याएं,

• माता-पिता के साथ कुछ मुद्दे।

• ये लोग स्पीच थेरेपिस्ट हो सकते हैं।

• बच्चे समझदार होने से पहले ही बोलने लगते हैं।

• लेकिन हानिकारक प्रभावों के कारण, हकलाने या देर से बोलने की समस्या हो सकती है।

• यह नक्षत्र अनुवाद करने वाले लोगों से भी संबंधित है।

• पुष्य नक्षत्र/Pushya Nakshatra शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण नक्षत्र होता है।      

• इस नक्षत्र के जातक, बदलाव लाने वाले आध्यात्मिक  योद्धा होते हैं। 

पुष्य नक्षत्र की अन्य पौराणिक कथा/Another Mythology of Pushya Nakshatra

यह नक्षत्र/Nakshatra शुक्र ग्रह और शुक्राचार्य से भी संबंधित है। गुरु शुक्राचार्य ब्रह्मा जी के एक और मानस-पुत्र थे जो  मृत लोगों को जीवित कर सकते थे। 

इस पौराणिक कथा का प्रयोग कैसे करें?/How to use this mythology?

१. प्रधान पुष्य नक्षत्र वाले व्यक्ति, बीमार लोगों को ऊर्जाओं के  स्थानांतरण द्वारा स्वस्थ करके, जीवन में वापस ला सकते हैं। 

२. पुष्य नक्षत्र के प्रबल प्रभावों वाले लोगों के साथ संबंधित लंबे समय से बीमार लोगों की बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

पुष्य नक्षत्र की पौराणिक कथा- गुरु का अनादर/ Mythology of Pushya Nakshatra Disrespecting the guru- Mythology

इस नक्षत्र की पहली पौराणिक कथा गुरु के अनादर से संबंधित यह है कि एक बार देवताओं के राजनीतिक सलाहकार और गुरु बृहस्पति भगवान इंद्र के दर्शन करने इंद्रलोक गए। ध्यानमग्न इंद्रदेव गुरु की उपस्थिति को नहीं पहचान पाए जिससे क्रोधित होकर गुरु बृहस्पति ने देवों और इंद्रलोक को छोड़ दिया।

असुरों के गुरु शुक्राचार्य को जैसे ही पता चला कि गुरु ने देवताओं को छोड़ दिया है, उन्होंने राक्षसों को देवताओं के खिलाफ युद्ध छेड़ने की सलाह दी। युद्ध में असुरों के जीतने पर, पराजित देवताओं ने अपनी गलती का एहसास करते हुए गुरु बृहस्पति को वापस पाने के लिए तपस्या की। गुरु बृहस्पति ने आखिरकार उनकी मांग मान ली और फिर से कार्यभार संभाला जिसके परिणामस्वरूप, देवताओं ने वापस युद्ध करके अपना राज्य जीता। 

इस पौराणिक कथा का प्रयोग कैसे करें/How to use this Mythology

प्रबल पुष्य नक्षत्र वाले जातक अपने गुरुओं का अनादर करते हैं।

बृहस्पति, सोम और तारा की पौराणिक कथा/The mythology of Brihaspati, soma, and tara:

एक कहानी के अनुसार, सोम या चंद्रमा बृहस्पति की पत्नी तारा को आकर्षित करते हैं, जिससे उनके एक नाजायज पुत्र बुध हुए।

इस पौराणिक कथा का प्रयोग कैसे करें/How to use this Mythology

प्रबल पुष्य नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों की पत्नियों को किसी तीसरे पक्ष द्वारा आकर्षित किया जा सकता है।

पुष्य नक्षत्र के प्रमुख विषय और लक्षण/Major themes, traits of Pushya Nakshatra

इस नक्षत्र के जातकों में सामान्यत: विस्तार करने का गुण होता है। वे करियर से संबंधित चीजों में वृद्धि करने की कोशिश करते हैं। इस नक्षत्र के जातकों से उत्पन्न होने वाले कुछ मूल विषय, लक्षण निम्नलिखित हैं-

• पालन, पोषण और देखभाल।

• होटल, शेफ, और रेस्तरां व्यवसाय।

• फिटनेस गुरु

• व्यापार गुरु

• दार्शनिक, सलाहकार और परामर्शदाता।

• विवाह संबंधी कटु अनुभव। 

• तीसरे पक्ष द्वारा जीवनसाथी को बहकाना।

पुष्य नक्षत्र संबंधी गूढ़ बातें/Some secrets of Pushya Nakshatra

१. तिष्य, सिद्ध या पुष्यमणि के प्राचीन नामों वाला पुष्य नक्षत्र, पोषण करने वाला नक्षत्र है:

२. ये लोग ज्ञान की तलाश में दुनिया के कोने-कोने की यात्रा करते हैं।

३. ये लोग ज्ञान पिपासु होते हैं।

४. पुष्य नक्षत्र से संबंधित जानवर समुद्री कौआ मछली के बाद मछली का शिकार करता है, जिसका मतलब ज्ञान की भूख है।

५. इस नक्षत्र/ Nakshatras के पीपल वृक्ष का, बृहस्पति स्वरूप में लोगों द्वारा पूजन किया जाता है।

६. पुष्य नक्षत्र/Pushya Nakshatra से संबंधित ऊर्जाएं 'भरमावर्च्य शक्ति' या रचनात्मक आध्यात्मिक ऊर्जाओं को नियंत्रित करने वाली शक्तियां होती हैं। इन रचनात्मक आध्यात्मिक ऊर्जाओं का नियंत्रण धर्माचार्यों से संबंधित होने के कारण ये जातक अपनी ऊर्जाओं को अन्य लोगों में स्थानांतरित करने में सक्षम होते हैं।

७. यह नक्षत्र मनोकामनाएं पूरी करने वाली कामधेनु गाय से भी संबंधित है, जो एक पोषण करने वाला जानवर है।

८. जिन लोगों के दशम भाव पर पुष्य नक्षत्र का प्रबल प्रभाव होता है, वे दूध आधारित उत्पादों या मिठाई के व्यवसाय कर सकते हैं।

पुष्य नक्षत्र में जन्मे कुछ प्रसिद्ध हस्तियां/Some famous personalities born in Pushya Nakshatra

इस नक्षत्र की विशेषताओं के आधार पर, इस नक्षत्र में जन्मे कई लोग अपने क्षेत्रों में विश्व प्रसिद्ध हुए हैं :

माधुरी दीक्षित (भारतीय बॉलीवुड व्यक्तित्व), नैन्सी रीगन, लता मंगेशकर, राज कपूर, विवियन रिचर्ड्स आदि।

पुष्य नक्षत्र की नाड़ियों के अनुसार सक्रियता/ Activation of Pushya Nakshatra as per nadis

नाड़ियों के अनुसार, जातकों की एक विशेष उम्र में यह नक्षत्र सक्रिय हो जाता है। इसके द्वारा भावों की सक्रियता निम्नलिखित है:

१. 24 वें वर्ष में यह नक्षत्र कुंडली के दूसरे, छठे और दसवें भाव को सक्रिय करता है।

२. 33वें वर्ष के दौरान, यह नक्षत्र/Nakshatras समृद्धि का प्रतिनिधित्व करने वाले भावों को सक्रिय करता है। 

३. 65वें वर्ष में, यह स्वयं को सक्रिय और कार्यान्वित करता है।

अंत में, उपरोक्त नियमों को बहुत विवेकपूर्ण तरीके से   प्रयोग करने का सुझाव दिया जाता है। वैदिक ज्योतिष/ Vedic Astrology के समग्र दिशानिर्देशों के अनुसार, ये इस नक्षत्र के सामान्य दिशा निर्देश हैं।

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