चित्रा नक्षत्र | Chitra Nakshatra | दबाव में अच्छा प्रदर्शन को दर्शाने वाला नक्षत्र

वैदिक ज्योतिष/ Vedic Astrology में चित्रा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में से 14वां नक्षत्र है। चित्रा नक्षत्र के मुख्य विषयों, लक्षणों, पौराणिक कथाओं और सक्रियता के बारे में हमारे द्वारा विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया है।

चित्रा नक्षत्र/Chitra Nakshatra पर आर्द्रा नक्षत्र और स्वाति नक्षत्र जैसे तारों का शासन होता है। चमकीला चमकता हुआ रत्न या मोती चित्रा नक्षत्र का प्रतीक है। सीप के तनाव या उत्तेजना में होने पर एक मोती का जन्म होता है, इसी तरह, चित्रा नक्षत्र के जातक दबाव या उथल-पुथल की स्थिति में सबसे अच्छा प्रदर्शन करते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति असभ्य और संस्कृति को ना मानने वाले होते हैं। हालांकि, उम्र और आध्यात्मिक झुकावों के कारण, चमकते हुए रत्न के के सामान हो जाते हैं।

चित्रा नक्षत्र की गूढ़ता/Deep secrets of Chitra Nakshatra

1. इस नक्षत्र को संयोग का तारा भी कहा जाता है। जिस प्रकार चमकीले मोती को प्राप्त करने के लिए समुद्र में गहराई तक गोता लगाया जाता है, उसी प्रकार इस नक्षत्र/Nakshatra के जातक, गहन अध्ययन द्वारा सर्वोत्तम ज्ञान प्राप्त करते हैं। 

2. चित्रा नक्षत्र/Chitra Nakshatra, फिल्मों से संबंधित चलचित्रों का सुंदर चित्रण करता है जो आभूषणों की तरह अपनी चमक बिखेरते हैं। 

3. चित्रा एक रहस्यमय नक्षत्र है जिसकी आध्यात्मिकता की गहन प्रवृत्ति है। इस नक्षत्र के जातक, प्राप्त सहज ज्ञान द्वारा जीवन में कुछ महत्वपूर्ण करने के लिए वास्तविकता को समझ सकते हैं। 

4. रहस्यपूर्ण और आकर्षक व्यक्तित्व, सम्मोहक और भावपूर्ण आँखें, सुडौल शरीर।

चित्रा नक्षत्र के देवता/ The deity of chitra nakshatra

चित्रा नक्षत्र के देवता 'तवस्तर' या दिव्य शिल्पकार और  वास्तुकार विश्वकर्मा हैं।

चित्रा नक्षत्र की पौराणिक कथा/Mythology of Chitra Nakshatra

विसवान और शरण्यु/Visaswan and Sharanyu:

विवस्वान या विवस्वत या सूर्य देव का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री शरण्यु या संजना से हुआ था। तब सूर्य की दमक को लेने में असमर्थ, शरण्यु स्वयं को छाया रूप को छोड़कर, अपने पिता के घर चली गई थी। कुछ समय पश्चात सूर्य के यह एहसास होने पर कि वह अपनी पत्नी शरण्यु के साथ न रहकर छाया के साथ रह रहे हैं, वह शरण्यु का अता-पता जानने के लिए विश्वकर्मा के पास गए।

विश्वकर्मा ने बताने पर कि शरण्यु घोर तप करने के लिए मादा घोड़े का रूप धारण करके वन में गई है, जैसे ही सूर्य अपनी पत्नी से मिलने के लिए विश्वकर्मा की ओर पीठ करते हैं, विश्वकर्मा सूर्य की किरणों या आभा को  काट देते हैं जिससे शरण्यु उनको सहन कर सके।

कटी हुई सूर्य की किरणों से, विश्वकर्मा ने शिवजी के पिनाक और त्रिशूल, विष्णु के सुदर्शन चक्र, चालीस सोम और कार्तिकेय के भाले का निर्माण किया।

समानता का व्यवहार/ Using this analogy

इसी प्रकार से विश्वकर्मा, देवताओं के अस्त्रों, दिव्य रथों और अंतरिक्ष यानों के शिल्पकार भी हैं। विश्वकर्मा माया और जादू में पारंगत एक महान मायावादी थे।

चित्रा नक्षत्र के व्यक्ति मुख्य रूप से इन बिजनेस या पेशे का चुनाव कर सकते हैं:

• जादूगर

• सम्मोहन कर्ता

• रत्नविज्ञानी

• आभूषण डिजाइनिंग

• नाटक

• संगीत

• कवि

• नृत्य

चित्रा नक्षत्र की दूसरी पौराणिक कथा/Second mythology of Chitra Nakshatra

विश्वकर्मा और त्रिशरा/ Vishwakarma and Trishara:

त्रिशरा राक्षसी मां से उत्पन्न, राक्षसी प्रवृत्ति वाला विश्वकर्मा का पुत्र था जो न तो देवताओं के साथ था और न ही राक्षसों के साथ।

इंद्र को आशंका थी कि विश्वकर्मा इंद्र और देवताओं के लिए बनाए जाने वाले अमृत का ज्ञान, त्रिशरा के माध्यम से राक्षसों को दे सकते हैं, इसलिए वह त्रिशरा का वध कर देते हैं, जिससे विश्वकर्मा अति क्रुद्ध हो गए थे। विश्वकर्मा अजेय इंद्र को हरा नहीं सकते थे। केवल एक चीज जो वह कर सकते थे, वह यह कि अपने द्वारा तैयार किया गया 'सोमरस' इंद्र को नहीं दिया। लेकिन, इंद्र उनके घर में जबरदस्ती घुसकर 'सोमरस' पी लेते हैं, जिसको विश्वकर्मा ने बदला लेने के लिए नशीला बना दिया था।

चित्रा नक्षत्र की पौराणिक कथाओं का प्रयोग कैसे करें?/How to use mythology of Chitra Nakshatra?

चित्रा नक्षत्र में जन्मे लोगों को विश्वकर्मा के समान ही शक्तिशाली विरोधियों से मुकाबला करने की प्रवृत्ति होती है। महत्वपूर्ण बिंदु:- चित्रा नक्षत्र/Chitra Nakshatra एक मृदु नक्षत्र है, इसलिए यह लोग पिछले जन्म और पूर्व जन्मों के अच्छे कर्मों के परिणामस्वरूप नेक कर्मों के लिए प्रयासरत रहते हैं।

चित्रा नक्षत्र की तीसरी पौराणिक कथा/Third mythology of Chitra Nakshatra

विश्वकर्मा और उनकी पुत्री चित्रांगना/ Vishwakarma and her daughter Chitrangana:

विश्वकर्मा की पुत्री अपने सखियों के साथ स्नान करने  जंगल में गई। जंगल में, चित्रांगना को एक आकर्षक राजकुमार मिला‌ और दोनों ने विवाह करने का फैसला कर लिया, किंतु पिता विश्वकर्मा के असंतुष्ट होकर विवाह के लिए मना करने पर भी उसने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध राजकुमार से विवाह कर लिया। तब विश्वकर्मा उसे श्राप देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वह डूब जाती है।

समानता का व्यवहार/How to use this analogy:

इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों को हमेशा अपने बच्चों और विशेषकर विपरीत लिंग के साथ समस्याएं होती हैं। पिता को बेटी से,  जबकि मां को बेटे के साथ समस्याएं होंगी।

विश्वकर्मा और चमसा/Vishwakarma and the Chamasa

विश्वकर्मा का एक महत्वपूर्ण पहलू 'चमसा' या कटोरा बनाना था, जिसमें देवता सोमरस पीते थे। सोमरस को 'चमसा' से लेने पर ही शक्तियां प्राप्त होती हैं।

इसलिए, वह पात्र (बर्तनों) के भी निर्माता हैं।

चित्रा नक्षत्र जातकों की अन्य गुप्त बातें/Other secrets of Chitra Nakshatra natives

चित्रा नक्षत्र के जातक सुंदरता के प्रति विस्तार-उन्मुख होते हैं।

१. सुंदरता की तीव्र भावनाओं और अवलोकन द्वारा त्रुटिहीन गृह सज्जा की योग्यता रखते हैं।

२. चित्रा नक्षत्र में एक उत्तम गृहिणी के गुण होते है।

३. इस नक्षत्र/Nakshatra के जातकों में एक क्रियाशील आकर्षण होता है।

४. विपरीत लिंग के प्रति विशेष समानता होने के कारण किसी से भी बातचीत कर सकते हैं।

५. चटकीले कपड़ों को पसंद करने के कारण, ये बहुत रंगीन कपड़े और गहने पहनते हैं और पहनावे की वजह से भीड़ से अलग नजर आते हैं।

६. इस नक्षत्र के जातक सुंदर संतान के इच्छुक होते हैं।

चित्रा नक्षत्र के प्रमुख विषय/ Key themes of Chitra Nakshatra

• अत्यधिक अहंकारी और आत्मकेंद्रित।

• शिल्प कौशल द्वारा अस्र-शस्रों का निर्माण।

• जीवन के कुछ फैसलों में विलंबता।

• आखिरी मिनटों में कुछ चीजें करते हैं और सब कुछ गड़बड़ कर देते हैं।

• कारों को डिजाइन करना इनकी खूबी होती है।

• गहने और आभूषण डिजाइनर और मूर्तिकार बन सकते हैं।

• पहले बिना सोचे समझे बोलना और गलत कहने के बाद पछतावा करना। 

• शक्तिशाली विरोधियों के खिलाफ लड़ना।

• संतति और संतान के प्रति प्रेम।

चित्रा नक्षत्र में जन्मे कुछ प्रसिद्ध हस्तियां/ Some famous personalities born in Chitra Nakshatra

इस नक्षत्र/Nakshatra में जन्म लेने वाली कुछ विश्व प्रसिद्ध हस्तियां इस प्रकार हैं:

बेनजीर भुट्टो, डॉ. के. एन. राव (प्रसिद्ध भारतीय ज्योतिषी), जॉर्ज बुश जूनियर, शशि कपूर (भारतीय फिल्म अभिनेता), चंद्रशेखर (एक छोटे कार्यकाल के लिए भारतीय प्रधान मंत्री) जो बिहार बलिया के एक छोटे किसान से भारत के दूसरे सबसे ऊंचे पद तक पहुंचे आदि।

नाड़ी नियमों के अनुसार चित्रा नक्षत्र की सक्रियता/ Activation of Chitra Nakshatra as per Nadi rule:

नाड़ी नियमों के अनुसार, कुंडली में इस नक्षत्र की सक्रियता 3 वर्षों में होती है जो इस प्रकार हैं:

1. पहली सक्रियता 5वें वर्ष में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या जानवरों से संबंधित कुछ मुद्दों को लेकर होती है।

2. दूसरी बार, 32 वें वर्ष में सक्रिय होने पर, जिस भाव में होता है उसे सक्रिय करता है और साथ ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या जानवरों से संबंधित कुछ अन्य मुद्दे हो सकते हैं।

3. 69वें वर्ष की आयु में तीसरी सक्रियता होने पर, यह उस भाव को सक्रिय करता है जिसमें स्थित होता है।

वैदिक ज्योतिष/ Vedic astrology के अनुसार, किसी बिजनेस के नामकरण और बच्चे के नामकरण में नक्षत्र बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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