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भरणी नक्षत्र - पुनरुद्धार और प्रजनन को दर्शाता है

वैदिक ज्योतिष / Vedic astrology में 27 नक्षत्रों में से भरणी नक्षत्र दूसरा नक्षत्र है। भरणी नक्षत्र पुनर्जीवन के  मुख्य विषय वाला एक उग्र नक्षत्र है। भरणी नक्षत्र /  Bharani Nakshatra में जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्वों, मुख्य पौराणिक कथाओं, लक्षणों आदि के बारे में नीचे स्पष्ट तरीके से बताने का प्रयास किया गया है। 

यमाय त्वाङ्गिरस्यते पितृमहे स्वाहा घर्माय स्वाहाः घर्मः पित्रे  

 

हे देवता यम, आप ऋषि अंगिरस से सम्बन्ध रखते हैं और सभी पितरों पर जिन्हें दो भागों अर्थात देव पितृ व मनुष्य पितृ में बांटा गया है, पर शासन करते हैं। हम सभी पितरों को शांत करने के लिए आपको तर्पण प्रदान करते हैं।

 

भरणी नक्षत्र क्या है? / What is Bharani Nakshatra?

भरणी का अर्थ है- बैरल(पीपा)। भरणी नक्षत्र महिलाओं के प्रजनन अंगों अर्थात योनि और गर्भ से भी संबंधित है। भरणी नक्षत्र का मूल सिद्धांत पुनर्जीवन है। जब भी किसी की मृत्यु होती है, तभी किसी और चीज का भी जन्म होता है। इससे आप यह भी समझ सकते हैं कि जो भी चीज इस धरती पर आती है, उसके बदले में किसी पुरानी वस्तु या व्यक्ति को जाना पड़ता है।

 

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भरणी नक्षत्र मां पार्वती के एक रूप के साथ साथ मां काली से भी संबंधित है जो इसे 'उग्र' नक्षत्र क्षमता प्रदान करती हैं और गर्भ का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। इसलिए, इस नक्षत्र / Nakshatra में जिन लोगों के ग्रह केंद्र में स्थित होते हैं, वह गर्भ जैसे आराम और गर्माहट का अनुभव कर सकते हैं। लेकिन इसके कुछ नकारात्मक प्रभाव भी है जो बेचैनी और कैद जैसे गंभीर स्थिति का भी अनुभव कराते हैं।

 

इसके अलावा, यह नक्षत्र निंदनीय गर्भधारण, अकेले माता या  पिता और पालने वाले पिता का भी प्रतीक होता है। पौराणिक कथाओं द्वारा इसे और अच्छी तरह समझा जा सकता है।

 

भरणी नक्षत्र से कौन से देव संबंध रखते हैं? / Who Associates with Bharani Nakshatra?

भरणी से संबंधित देवता यम को, धर्मराज या न्यायप्रिय देवता के रूप में भी जाना जाता है। धर्मराज यम की तस्वीर पर देखे जा सकता है कि उनके हाथ में एक लाठी है, जिसकी पकड़ यह दर्शाती है कि वह चाहते हैं कि सभी धर्म का पालन करें, अन्यथा उनके पास सबक सिखाने के अपने तरीके हैं।

 

मरण का निरीक्षण करने वाले धर्मराज दक्षिण दिशा पर शासन करते हैं। इसका मतलब है कि पुराना नए को रास्ता देगा। समझने वाली बात यह है कि धर्मराज यम स्वर्ग में पहुंचने वाले पहले नश्वर वंशज और पितरों से भी संबंधित है।

 

भरणी नक्षत्र की ऊर्जाओं का उचित प्रयोग कैसे करें? / How to correctly use Bharani Nakshatra's energy?

भरणी द्वारा शासित भावों द्वारा उचित परिणाम नहीं देने पर, यम के इन आदेशों का पालन करना सबसे अच्छा होता है :  

  1. पुरानी आदतों को भूलने की कोशिश करनी चाहिए।
  2. लगातार गलत हो रही चीजों के अवलोकन द्वारा धर्म का पालन करना चाहिए।
  3. भरणी द्वारा शासित भावों या ग्रहों के लिए शक्तिशाली 'पितृ दोष' जिम्मेदार हो सकता है। अतः, पितरों को उचित सम्मान देना चाहिए।

 

भरणी नक्षत्र के देवता ग्रह/ Bharani Nakshatra Lord

भरणी नक्षत्र पर शासन करने वाले देवता शुक्र ग्रह हैं।

 

भरणी नक्षत्र के जातकों के रहस्य / Secrets of Bharani Nakshatra Natives 

किसी कुंडली/ Kundali में भरणी नक्षत्र की प्रधानता होने या इस नक्षत्र में अधिक ग्रहों के स्थित होने पर, व्यक्ति ने निम्न गुण होते हैं:

  1. एकांतप्रिय
  2. गुप्त प्रेम 
  3. दार्शनिक
  4. नीतिपरक
  5. नैतिकतावादी 

समझने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि उपरोक्त लक्षण, व्यक्ति में भरणी नक्षत्र/Bharani Nakshatra के लाभकारी प्रभाव होने पर ही दिखते हैं। जबकि, इस नक्षत्र/Nakshatra के अशुभ प्रभावों के पड़ने पर, व्यक्ति के लक्षण ऊपर लिखे गए गुणों के विपरीत अर्थात धर्म-विरोधी होंगे। 

 

जिन लोगों के मुख्य केंद्रीय ग्रह भरणी नक्षत्र / Bharani Nakshatra में होते हैं, वे आमतौर पर, सामाजिक कल्याण और नेक कामों के लिए लड़ने वाले लोग होते हैं।

 

जिन लोगों के व्यक्तित्व को नियंत्रित करने वाला मुख्य ग्रह अगर भरणी नक्षत्र में स्थित हो तो ऐसे जातक प्रेमी स्वभाव वाले, जिद्दी, धैर्यवान, जीवनसाथी की परवाह व उसका आदर करने वाले व जीवनसाथी के प्रति अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले होते हैं. ऐसे जातक प्रेम विवाह करने के इच्छुक हो सकते हैं।

 

भरणी नक्षत्र से जुड़ी पौराणिक कथाएं / Mythology Associated with Bharani Nakshatra

यम इस बात से अनजान थे कि उनकी असली मां "छाया" नहीं बल्कि संजना थीं। संजना, सूर्य (यम के पिता) की चमक को सहन नहीं कर सकने पर, अपनी बहन छाया को बच्चे यम की देखभाल करने के लिए कहकर, सांत्वना पाने अपने पिता विश्वकर्मा के पास चली गई थी।

 

भरणी नक्षत्र का संबंध है / Bharani Nakshatra is Related to

  1. उपजनक
  2. वास्तविक जैविक मां द्वारा पालन न होकर, आयाओं द्वारा पालन होना। 
  3. कृत्रिम गर्भाधान
  4. सिंगल पेरेंटिंग।
  5. निंदनीय गर्भधारण।

चतुर्थ भाव या चतुर्थ भाव के स्वामी/Fourth house or fourth house lord का इस नक्षत्र से संबंध होने पर, व्यक्ति को अपनी जैविक मां से सौतेला व्यवहार प्राप्त होता है या असली मां नहीं होती है।

 

भरणी नक्षत्र ऊर्जा / The Bharani Nakshatra Energy

यम अथक प्रयासों, सहनशीलता, और कायापलट या  उचित आचार संहिताओं के पालन द्वारा आत्मा का परिवर्तन का संकेत देता है। भरणी नक्षत्र की शक्ति चीजों को दूर ले जाना है, अर्थात यह स्वयं से संबंधित भावों और भावों के स्वामियों का बहिष्कार कर सकता है।

 

इस नक्षत्र / Nakshatra का पुरुषार्थ या अंतिम लक्ष्य तब तक समृद्धि है, जब तक कोई समाज के निर्धारित सिद्धांतों या सही नैतिक आचरण द्वारा संचालित होता है।

 

भरणी नक्षत्र/Bharani Nakshatra की नकारात्मक ऊर्जाओं की अधिकता होने पर, 'बहिष्कृत वर्ण' संचालित करना शुरू कर देता है, और व्यक्ति मादक पदार्थों और शराब का आदी हो  जाता है।

 

भरणी नक्षत्र के विषय / Subjects of Bharani Nakshatra

इस नक्षत्र की ऊर्जाओं से जो विषय निकलते हैं, वे इस प्रकार हैं:

  1. न्याय या सामाजिक कारणों के लिए लड़ना।
  2. सौतेला मातृ व्यवहार या अन्याय।
  3. संयम, मृत्यु या मृत्यु जैसी स्थितियां।
  4. संघर्ष और पीड़ा की भावनाएं।

मुख्य प्रश्न यह होता है कि चार्ट में इन सिद्धांतों को कैसे लागू किया जाए?

 

भरणी नक्षत्र में जन्मी स्त्रियों के स्वभाविक लक्षण

  1. भरणी नक्षत्र की महिला जातक सुंदर, आदर प्राप्त करने वाली, कुलीन, आज्ञाकारी (लेकिन कभी-कभी ज़िद्दी) दांतों में कुछ विकृति के साथ होती है। भरणी नक्षत्र में जन्मीं स्त्रियां मनभावन सौंदर्य प्राप्त करती हैं।  उनकी आँखें बड़ी-बड़ी व दयामयी होती हैं। 

  2. वे स्वतंत्रता में विश्वास रखती है और अपनी आजीविका स्वयं अर्जित करना चाहती हैं।  

  3. भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाली महिलाओं को मासिक धर्म, गर्भाशय में समस्या, एनीमिया और तपेदिक आदि का सामना करना पड़ सकता है।

  4. वे ज्यादातर समय बेचैन रहती है और चंचल दिमाग की स्वामिनी होती हैं। वे चालाक, जिद्दी, चिड़चिड़ी, यौन गतिविधियों में अत्यधिक रुचि रखने वाली हो सकती हैं।  उनका आलोचनात्मक व्यवहार सबको पसंद नहीं आता है।

 

भरणी नक्षत्र - स्त्री वैवाहिक जीवन

  1. भरणी नक्षत्र में जन्मी महिला का वैवाहिक जीवन लगभग 23 वर्ष की आयु में शुरू हो सकता है।
  2. वह घरेलू मामलों पर पूर्ण नियंत्रण रखती हैं और अपने पति और ससुराल वालों से सम्मान और विश्वास प्राप्त करती हैं। भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है और चन्द्रमा व शुक्र का मिलाजुला प्रभाव उनके लिए भाग्यशाली सिद्ध होता है।  
  3. वह जीवन में मूल्यों और महानता को महत्व देती हैं। यदि इनके पति इनसे प्रतिभा या संसाधनों में कम हैं तो ये लगभग सभी क्षेत्रों में अपने जीवन साथी पर हावी हो जाती हैं।
  4. ये स्त्रियां अधिकतर बेचैन और कभी-कभी आक्रामक भी हो जाती हैं इसलिए इनके प्रति धैर्य और सावधानी रखने की जरूरत होती है।

 

भरणी नक्षत्र में जन्में पुरुषों की विशेषताएं

  1. भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह है और यह पुरुष जातकों को विलासितापूर्ण जीवन शैली की ओर आकर्षित करता है।
  2. भरनी नक्षत्र में जन्में पुरुष अपने शिष्ट व्यवहार और उत्तम आचरण के लिए जाने जाते हैं। वे अपनी पत्नियों से प्यार करते हैं और उनका सम्मान करते हैं।  पर साथ ही साथ विपरीत लिंगियों के प्रति आकर्षण भी महसूस करते हैं।  
  3. पुरुष उज्ज्वल, ऊर्जावान और सक्रिय होते हैं और एक ही समय में कई काम करने में उनकी कई रुचि होती है। उन्हें संगीत, नृत्य और ललित कला जैसी गतिविधियाँ पसंद हैं। भरणी नक्षत्र के जातक अपने लिए करियर क्षेत्र के रूप में भी इन गतिविधियों को अपना सकते हैं।
  4. ये अपनी ज़िम्मेदारियाँ पूर्ण निष्ठां से निभाते हैं और लड़ाई झगड़ों से दूर रहते हैं। वे परिस्थितियों के अनुसार कठोर भी दिख सकते हैं लेकिन ज्यादातर ये नरम दिल के ही होते हैं। वे बुद्धिमान प्राणी हैं और विषम परिस्थितियों में पूर्ण सजगता से काम लेते हैं।  ये अच्छे कूटनीतिज्ञ साबित होते हैं।  

 

भरणी नक्षत्र पुरुष - वैवाहिक जीवन

  1. भरनी नक्षत्र में जन्में पुरुष अपने परिवार को हर प्रकार का वैभव देने में विश्वास करते हैं।  इनका मुख्य उद्देश्य अपने परिवार के लिए विलासिता का सामान जुटाना होता है। वे बहुत आज्ञाकारी पति साबित हैं लेकिन पत्नी का हुकुम सहन नहीं करते।
  2. ये दयालु, वफादार और मिलनसार होते हैं और अपनी पत्नियों की बहुत अच्छी देखभाल करते हैं। ये विलासिता की वस्तुओं की खरीदारी में सबसे आगे हैं और अपने परिवार के लिए उच्च जीवन शैली बनाए रखने की कोशिश करते हैं।
  3. ये तर्क-वितर्क में नहीं पड़ते और संवेदनशील स्वभाव के होते हैं। हालाँकि, ये किसी की सलाह नहीं सुनते हैं और आदेश का पालन पसंद नहीं करते हैं। भरणी नक्षत्र के पुरुष का वैवाहिक जीवन आदेश देने और इसे मानने के बीच एक आदर्श संतुलन दर्शाता है।
  4. ये अपने आस-पास सफाई रखना पसंद करते हैं जो कई बार जीवन साथी के साथ बहस का मुख्य विषय बन जाता है। कुल मिलाकर वे आदर्श पति हैं।

 

भरणी नक्षत्र विवाह अनुकूलता

  1. भरणी नक्षत्र के लिए अनुकूल नक्षत्र हैं- रेवती, स्वाति, हस्त, श्रवण और पूर्वाषाढ़ नक्षत्र
  2. भरणी नक्षत्र के लिए प्रतिकूल नक्षत्र हैं- धनिष्ठा, चित्रा, पूर्वभाद्रपद और विशाखा नक्षत्र।

 

भरणी नक्षत्र पद

भरणी नक्षत्र पहला पद (सिंह नवांश 13 डिग्री 20 मिनट- 16 डिग्री 40 मिनट) - प्रभावशाली आंखें, चौड़ी नाक, औसत शरीर, घनी भौहें, अच्छी तरह से निर्मित छाती, संतान से सुख प्राप्ति नहीं, व्यावसायिक योग्यता, धर्म-विरोधी, अनैतिक

भरणी नक्षत्र दूसरा पद (कन्या नवांश 16 अंश 40 मिनट - 20 डिग्री) - आकर्षक आंखें, भारी शरीर, शराब और महिलाओं के प्रति लगाव, कुलीन जीवनसाथी, मेहमानों के प्रति असभ्य, त्वचा की समस्या, बातूनी, स्त्री के समान हाथ।

भरणी नक्षत्र तीसरा पद (तुला नवांश 20 डिग्री - 23 डिग्री 20 मिनट) - ऊर्जावान, अधीर, कठोर हृदय, परिवार से असंतुष्ट, अनाज और चीनी की वस्तुओं से संबंध, स्वार्थी, जानवरों के प्रति क्रूर, संतान सुख में समस्या, खराब स्वास्थ्य

भरणी नक्षत्र चौथा पद (कर्क नवांश 23 अंश 20 मिनट 26 अंश 40 मिनट) अच्छा वक्ता, छोटा चेहरा, पीला रंग, आक्रामक, बुरा और दयनीय बचपन, धर्म-विरोधी कर्म, गैरजिम्मेदार जीवनसाथी, रोग, संतान की हानि

 

भरणी नक्षत्र का प्रतीक

भरणी नक्षत्र का प्रतीक एक योनि यानी मादा प्रजनन अंग है। यह सृजन की ऊर्जा, शक्ति, सूक्ष्मता, दृढ़ता, लचीलापन और नव शक्ति को दर्शाता है। नक्षत्र के देवता भगवान यम हैं, जो आत्मा के कर्मों के अनुसार उसे स्वर्ग, नरक या पृथ्वी पर पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। इस प्रकार, भरनी नक्षत्र सही निर्णय और विश्लेषण के लिए जाना जाता है। भरणी नक्षत्र के तहत पैदा हुए लोगों में अत्यधिक तार्किक और विश्लेषणात्मक क्षमता होती है। वे इसका उपयोग अपने साथ जुड़े लोगों के जीवन में न्याय करने के लिए करते हैं। यदि आपका चंद्रमा भरणी नक्षत्र के प्रभाव में है, तो आपको विश्लेषणात्मक कौशल प्राप्त होता है।  

 

भरणी नक्षत्र

 

भरणी नक्षत्र की विशेषताएं 

  1. ये जातक चतुर होते हैं और दूसरों की तुलना में कार्यों को तेजी से पूरा करते हैं।

  2. ये जीवन में नए क्षितिज तलाशना चाहते हैं और बहुत यात्रा करना चाहते हैं।

  3. ये सहज, वफादार, देखभाल करने वाले और कर्तव्यपरायण होते हैं और अपने परिवार और दोस्तों को सम्मान देते हैं।

  4. ये साहसी, प्रतिभाशाली और अच्छे कूटनीतिज्ञ हैं और अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेते हैं।

  5. इनकी जीवन अवधि लम्बी होती है और वे ज्यादातर जीवन में संतुष्ट रहते हैं।

  6. ये जन्म से नेतृत्व के गुण लिए होते हैं और लोग उन्हें उनके सकारात्मक गुणों के लिए जाना जाता है।  

  7. ये जीवन में भौतिक सुख और विलासिता की चाह रखते हैं और सार्वजनिक, रचनात्मक, संगीत और कलात्मक क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर सकते    हैं।

 

भरणी नक्षत्र की कमजोरियां

  1. ये कुछ ज़्यादा ही ऊर्जावान होते हैं और हर वक़्त बैचैन रहते है। ये टिक कर नहीं बैठ सकते।

  2. ये एक साथ अनेक कार्य करते हैं जिससे ये बहुत व्यस्त रहते हैं। इनके पास अपनी खुशियों के लिए समय नहीं हैं।  

  3. ये अपने अत्यधिक सहायक स्वभाव के कारण जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे रहते हैं।

  4. ये विश्लेषणात्मक और निर्णयात्मक होते हैं जिससे लोग इनके विरूद्ध हो जाते हैं।

  5. ये आदेशों व दी गयी सलाह का पालन नहीं करना चाहते जिसके कारण ये अनेकों बार विवादों में फँसतें हैं। ये कभी-कभी बहुत अहंकार की भावना से भी भर जाते हैं।

  6. ये धूर्त, अनैतिक, कठोर, अति साहसी और कठिन हो सकते हैं।

  7. ये बहुत अधिक अनुशासित पर निराश होते हैं और अत्यधिक रूप से वासना में लिप्त हो सकते हैं।

इसके लिए भरणी नक्षत्र / Bharani Nakshatra के भारी प्रभाव वाले भावों और ग्रहों के अर्थ, ग्रहों का स्वामित्व और ग्रहों के प्राकृतिक दिशा निर्देश देखने चाहिए। इसके साथ ही, यह भी देखना चाहिए कि नक्षत्र जिस ऊर्जा से काम कर रहा है, वह सकारात्मक है या नकारात्मक। उसके बाद, उपरोक्त अनुसार प्रभावों का निर्णय करना चाहिए।

 

भरणी नक्षत्र में जन्मे कुछ प्रसिद्ध हस्तियां / Some Famous Personalities born in Bharani Nakshatra

अपनी एक झलक देने वाली इस नक्षत्र / Nakshatra में जन्मे कुछ प्रसिद्ध हस्तियों के नाम इस प्रकार हैं: 

बिल क्लिंटन, नोरा जोन्स, आशा भोंसले, एम. एस. सुब्बालक्ष्मी, रोनाल्ड रीगन और यह सिलसिला चलता रहता है।

 

नाड़ियों के अनुसार भरणी नक्षत्र की सक्रियता / Activation of Bharani Nakshatra According to Nadis

  1. 28 वें वर्ष में पहली बार सक्रिय होकर, यह नक्षत्र जिस भाव में स्थित होता है उस भाव में अपनी सभी ऊर्जाओं को संचालित करता है‌। 
  2. 33 वें महत्वपूर्ण वर्ष में, यह नक्षत्र जीवन में कुछ सुधार या उलटफेर करता है।
  3. 51 वें वर्ष में भरणी नक्षत्र का दूसरा भाव और ग्यारहवां भाव संचालित और सक्रिय होता है।

 

भरणी नक्षत्र विशेष विवरण

  1. राशि चक्र- मेष, 13-20′ – 26-40′
  2. स्वामी - शुक्र
  3. सामान्य लक्षण - सफल, विश्वसनीय, सत्यवादी और दुःख और रोगों से मुक्ति
  4. प्रतीक: योनि, मादा प्रजनन अंग
  5. अक्षर : ली, लू, ले, लो (ली, लू, ले, लो)
  6. देवता: यम - मृत्यु के देवता।
  7. पशु प्रतीक: हाथी।
  8. प्रकार: मनुष्य। 

 

भरणी नक्षत्र के लोगों का भविष्य बहुत उज्ज्वल होता है और उनका करियर ज्योतिष बहुत मजबूत होता है, इसलिए भरणी नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग कलात्मक होते हैं। ऐसे जातक कला, अभिनय, गीत-संगीत, इंटीरियर डिजाइनिंग, ऑटोमोबाइल, ललित कला आदि के क्षेत्र में विशेष रूप से सफल हो सकते हैं।

ज्योतिष रहस्य