जल्द विवाह करने के लिए क्या करें - Late marriage solutions

विवाह में देरी
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जल्दी विवाह करने के लिए आपको क्या करना चाहिए?/ What Should You Do To Get Married Soon?

यदि आपको लगता है कि आपके विवाह में देरी हो रही है, तो इसका समाधान आपको ज्योतिष में मिल सकता है क्योंकि ज्योतिष में इसका अलग से अध्याय दिया गया है जिसे ज्योतिष में विवाह में देरी/Delay in marriage का नाम दिया गया है। इसके जरिए विवाह में देरी के कारण और उसके समाधान को बताया जा सकता है।

जल्दी विवाह करने के लिए आपको क्या करना चाहिए?/ What Should You Do To Get Married Soon?

यदि आपको लगता है कि आपके विवाह में देरी हो रही है, तो इसका समाधान आपको ज्योतिष में मिल सकता है क्योंकि ज्योतिष में इसका अलग से अध्याय दिया गया है जिसे ज्योतिष में विवाह में देरी/Delay in marriage का नाम दिया गया है। इसके जरिए विवाह में देरी के कारण और उसके समाधान को बताया जा सकता है।

यदि आपने विवाह में देरी के कारणों को ज्योतिष के नजरिए से देखा होगा, तो आपको अपने विवाह में देरी/Delay in marriage का उत्तम समाधान भी मिल जाएगा।

अभी तक आपने विवाह में देरी के लिए कैलकुलेटर का प्रयोग भी कर लिया होगा। उसके प्रयोग से आपको जो भी परिणाम मिले होंगे वह आपको काफी हद तक सहायता कर सकते हैं।

यदि आपकी कुंडली में विवाह का कोई योग नहीं दिखता है तो आपको मायूस होने की जरूरत नहीं है। आपकी कुंडली से विवाह में देरी/ Late marriage age in astrology का योग आपको आपकी कुंडली से समय से बहुत पहले पता चल सकता है। इसके लिए आप तुरंत कुछ उपाय करके इस संभावित समस्या से बच सकते हैं। ज्योतिष में विवाह में देरी/ Delay marriage in astrology से कुछ समस्याएं हो सकती हैं। आइए जानते हैं देर से विवाह करने के क्या परिणाम हो सकते हैं।

देर से विवाह के दुष्परिणाम/ Repercussions of Late Marriage

आम तौर पर, विवाह में देरी से पारिवारिक अशांति, सामाजिक दबाव, सामाजिक कटुता, अक्षमता की भावना, हीन भावना और कभी-कभी शारीरिक असंतुलन, और निराशा जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। विवाह में देरी के कारण कई अन्य विशिष्ट अपरिवर्तनीय शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव होते हैं जैसे:

देर से विवाह के दुष्परिणाम/ Repercussions of Late Marriage

आम तौर पर, विवाह में देरी से पारिवारिक अशांति, सामाजिक दबाव, सामाजिक कटुता, अक्षमता की भावना, हीन भावना और कभी-कभी शारीरिक असंतुलन, और निराशा जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है। विवाह में देरी के कारण कई अन्य विशिष्ट अपरिवर्तनीय शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव होते हैं जैसे:

1. विवाह में देरी के कारण अवसाद (Depression)।

2. उम्र के साथ बच्चे के जन्म से संबंधित समस्या।

3. वित्तीय असंगति उम्र के साथ बढ़ती जाए।

4. उम्र के साथ अनुकूल साथी मिलने की संभावना कम हो जाती है।

5. उम्र के साथ शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं जो अच्छे विवाह के सुचारू रूप से चलने में बाधा बन सकती हैं।

6. उम्र के साथ, लोग नई जिम्मेदारियां विकसित करते हैं जिन्हें छोड़ना मुश्किल होता है और विवाह के सुचारू रूप से चलने में भी बाधा उत्पन्न कर सकता है।

7. देर से विवाह करने वालों में खुशहाल परिवार कम ही नजर आते हैं।

8. उम्र के साथ, ऐसे कई रिश्ते आते हैं जो जातक को बता सकते हैं और विवाह में बाधा डाल सकते हैं।

9. उम्र के साथ, एडजस्ट करने की शक्ति कम हो जाती है, जिसके कारण विवाह में समस्या आनी लाजमी होती है। इससे विवाह को सही ढंग से निभाने में समस्या उत्पन्न हो सकती है। ज्योतिष में कुछ संयोजन होते हैं जो कुंडली में विवाह ना होने के योग/ no marriage in a horoscope को दर्शाते हैं। इसलिए आपको देर से विवाह के सभी ज्योतिषीय उपाय को जान लेना चाहिए।

विवाह में देरी के लिए वैदिक ज्योतिष के कुछ भाव और ग्रह/ Delay In Marriage Vedic Astrology Houses and Planets

ज्योतिष में विवाह में देरी का संकेत मिल सकता है। नीचे कुछ भाव, ग्रह, दशा और ग्रहों के गोचर दिए गए हैं जिनकी सहायता से विवाह में देरी के उपायों का पता चल सकता है।

विवाह में देरी के लिए वैदिक ज्योतिष के कुछ भाव और ग्रह/ Delay In Marriage Vedic Astrology Houses and Planets

ज्योतिष में विवाह में देरी का संकेत मिल सकता है। नीचे कुछ भाव, ग्रह, दशा और ग्रहों के गोचर दिए गए हैं जिनकी सहायता से विवाह में देरी के उपायों का पता चल सकता है।

1. विवाह के लिए भाव – वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सातवें भाव/Seventh House को मुख्य भाव के तौर पर देखा जाता है। इसके साथ ही दूसरे/Second House और ग्यारहवें भाव/Eleventh House को भी देखा जाता है। दूसरा भाव/Second House परिवार और परिवार में एक सदस्य को जुड़ने का संकेत भी देता है। ग्यारहवां भाव/Eleventh House दोस्ती का भाव होता है और यह जीवन साथी के रूप में एक सच्चे दोस्त और जीवन साथी को दर्शाता है। इसके साथ ही, ग्यारहवां भाव जातक के इच्छाओं, आशा, और कामना को पूर्ण करता है। यदि यह प्रेम विवाह होगा, तो पांचवें भाव/Fifth House का भी आकलन करना अनिवार्य हो जाएगा।

2. विवाह के लिए ग्रह – शुक्र और बृहस्पति विवाह के दो मुख्य कारक है। पुरुष की कुंडली में शुक्र उसके जीवनसाथी के बारे में बताता है और वहीं महिला की कुंडली में बृहस्पति उसके होने वाले जीवनसाथी के बारे में संकेत देता है। इसके साथ साथ, इनसे पड़ने वाले प्रभाव को भी देखा जाता है।

  1. दूसरे, सातवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी
  2. जिस भाव का स्वामी सप्तम भाव में हो उस भाव का स्वामी
  3. सातवें स्वामी की नवमांश राशि
  4. सप्तम भाव में स्थित ग्रह
  5. जब ग्रह सप्तमेश की युति करें
  6. प्रेम विवाह के मामले में पंचम भाव के स्वामी
  7. उपरोक्त ग्रहों के नक्षत्र स्वामी।

3. दशा – विवाह तभी संपन्न हो सकता है जब दशा ऊपर बताए गए ग्रहों की दशा में हो।

4. गोचर/Transit – प्रथम/First House और सातवें भाव/Seventh House या उनके स्वामी को प्रभावित करने वाला शनि और बृहस्पति का दोहरा गोचर विवाह के समय के बारे में संकेत देता है।

ऊपर दिए गए ग्रहों, ग्रह दशा और गोचर के आकलन से आपको विवाह में देरी/Delayed marriage के लिए एक शक्तिशाली समाधान मिल जाएगा।

ध्यान रहे, विवाह में देरी/Delay in marriage के उपायों को बहुत ही कुशलता से तैयार करना होता है जो एक नौसिखिया ज्योतिषी के बस में नहीं है।

मैंने लोगों को बिना सफलता के विवाह के लिए उपाय करते देखा है। उन उपायों से सिर्फ उनका धन और समय ही बर्बाद होगा।

विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण/ Delay in marriage astrological reasons

कुंडली में विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारणों/Astrological reasons for delay in marriage को जानने के लिए जन्म कुंडली में सातवें भाव को देखा जाता है। यह स्वाभाविक रूप से विवाह में देरी का संकेत दे सकता है। इस बात को नीचे तालिका के जरिए समझाने का प्रयास किया गया है:

विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण/ Delay in marriage astrological reasons

कुंडली में विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारणों/Astrological reasons for delay in marriage को जानने के लिए जन्म कुंडली में सातवें भाव को देखा जाता है। यह स्वाभाविक रूप से विवाह में देरी का संकेत दे सकता है। इस बात को नीचे तालिका के जरिए समझाने का प्रयास किया गया है:

सातवें भाव के स्वामी

पुरुष के लिए संभावित उम्र

स्त्री के लिए संभावित उम्र

चंद्रमा

27

26

बृहस्पति

30

29

सूर्य

32

30

शनि

33

30

यदि कुंडली/Horoscope में सातवें भाव के स्वामी/Seventh House lord किसी शुभ प्रभाव में हो तो ऊपर दी गई उम्र 2 साल तक कम हो जाती है। लेकिन यदि सप्तमेश या सातवें भाव के स्वामी/Seventh House lord नकारात्मक या प्रतिकूल प्रभाव में हो तो उक्त आयु को 2 से 3 वर्ष और बढ़ा सकती है।

यदि विवाह में देरी का ज्योतिषीय कारण उपरोक्त लिखित कोई भी ग्रह है, तो विवाह में देरी के लिए ज्योतिषीय उपाय प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।

लेकिन किसी भी परिणाम पर जाने से पहले मैं आपको सलाह दूंगा कि आप नो मैरिज योग कैलकुलेटर/ ‘No marriage Yoga calculator’ का प्रयोग अवश्य करें। इससे आपको काफी बातें समझ आ जाएगी।

वैदिक ज्योतिष में विवाह में देरी के अन्य संकेत/ Other Indications Of Delay In Marriage Vedic Astrology

वास्तविक जीवन में विवाह में देरी को जन्म कुंडली/Birth chart में देखने के कुछ संकेत निम्नलिखित दिए गए हैं।

वैदिक ज्योतिष में विवाह में देरी के अन्य संकेत/ Other Indications Of Delay In Marriage Vedic Astrology

वास्तविक जीवन में विवाह में देरी को जन्म कुंडली/Birth chart में देखने के कुछ संकेत निम्नलिखित दिए गए हैं।

1. जन्म कुंडली में राहु के साथ सूर्य की युति जातक के विवाह में देरी का संकेत दे सकती है, खासकर जब यह विवाह के घरों से जुड़ी हो।

2. राहु के साथ मंगल की युति या तो सातवें भाव में हो या सातवें भाव के स्वामी पर दृष्टि हो।

3. यदि किसी जन्म कुंडली में सातवें/Seventh house lord और आठवें भाव के स्वामी/Eighth House lord की अदला-बदली हो रही हो। यदि सप्तमेश/Seventh House lord अष्टम भाव/Eighth House में हो और अष्टमेश/Eighth House lord सप्तम भाव में हो तो विवाह में बहुत देर हो सकती है।

4. पुरुष की जन्म कुंडली में यदि शनि और चंद्रमा की युति हो, तो कुंडली/Natal Chart में देर से विवाह के लिए कई बाधाएं जिम्मेदार हो सकती हैं।

5. जन्म कुली में लग्न, सप्तम और सातवें भाव के स्वामी में से किसी एक या एक से अधिक पर शनि या स्वामी की अशुभ दृष्टि जातक के विवाह में देरी के लिए जिम्मेदार साबित हो सकते हैं।

6. कुंडली में मंगल दोष/Mangal dosha की उपस्थिति आमतौर पर किसी के भी विवाह में देरी कर सकती है। यह दोष मंगल के पहले/First House, चौथे/Fourth House, सातवें/Seventh House, आठवें/Eighth House या बारहवें भाव/Twelfth House में होने के कारण बनता है। कुछ ज्योतिष इस सूची में दूसरे भाव/Second House को भी जोड़ते हैं।

7. मंगल दोष को लग्न के अनुसार ही देखना चाहिए, चंद्र चार्ट (जन्म कुंडली को पुन: प्रस्तुत करके और जिस घर में चंद्रमा को लग्न के रूप में रखा गया है) और शुक्र चार्ट (जन्म कुंडली को पुन: बना कर और जिस घर में शुक्र का लग्न के रूप में रखा गया है) । इन तीनों में से एक से अधिक चार्ट में उपस्थित होने पर यह दोष मजबूत हो जाता है। साथ ही, कुंडली दोष के रद्द होने की संभावना के लिए जन्म कुंडली/Birth Chart का पर्याप्त विश्लेषण करवाएं।

यह ज्योतिष में विवाह में देरी के कुछ संकेत हैं, जिन्हें कुछ उपाय से खत्म किया जा सकता है।

मेरी सलाह है कि विवाह आप स्वयं ऐसा कुछ ना करें जिससे विवाह में देरी हो। बल्कि विवाह में देरी के कारणों के समाधान पाने के लिए लिए आप अपनी कुंडली का विश्लेषण शीघ्र ही करवाएं।

डॉ. विनय बजरंगी का अनोखा तरीका (विवाह में देरी के कारण का समाधान)/ Dr.Vinay Bajrangi’s Unique Method (Delay in marriage reasons solutions)

मैं, ज्योतिषीय गणना करते समय, निम्नलिखित बातों पर अवश्य विचार करता हूँ:

1. पिछले जीवन का प्रभाव या वर्तमान जीवन का अतीत कहीं बाधा तो नहीं बन रहा है।

2. कुंडली में मंगल या मांगलिक दोष।

3. परिवार के सदस्यों के भीतर से रुकावट।

4. बच्चे की शिक्षा और स्थिति का स्तर, विशेष रूप से महिलाओं के लिए।

5. विपरीत लिंग मित्र के प्रति छिपा झुकाव।

6. दूसरी तरफ से बहुत ज्यादा उम्मीदें।

7. किसी व्यक्ति में छिपी कमजोरियां।

ऊपर दिए गए सभी कारकों को अलग अलग चार्ट के जरिए (डी-1, डी-9 से डी-60 तक) किया जा सकता है। इसके जरिए विवाह में देरी के मूल कारणों का पता लगाया जा सकता है।

मुझे आशा है कि मैंने आपको ज्योतिष में विवाह में देरी के कारणों के बारे में पूर्ण जानकारी दे दी है।

विवाह में देरी के लिए उपाय के लिए मेरे अन्य लेखों को पढ़ें।

आप यह भी पढ़ सकते हैं कि प्रेम विवाह और कुंडली दोषों में ज्योतिष आपकी कैसे मदद करता है?

विवाह में देरी पर किसी विशेष मार्गदर्शन के लिए, आप निम्नलिखित तरीकों से सहायता ले सकते हैं।

पूछे जाने वाले प्रश्न

  • आखिर क्यों हो रही मेरी शादी में इतनी देरी

    कई बार जन्म कुंडली में सप्तम भाव पर शनि,मंगल या राहु-केतु का असर होने के कारण जातक को अपनी शादी होने को लेकर एक लम्बा इंतजार करना पड़ जाता है. ऐसे में जरूरी होता है अपनी कुंडली का सही से विश्लेषण और अगर सही उपाय कर लिए जाएं तो शादी का सुख मिलने में नही होती है देरी. यदि आप अपने विवाह के कारणों को जानना चाहते हैं तो आखिर क्यों हो रही मेरी शादी में इतनी देरी पर क्लिक करें.

     
  • किस ग्रह बाधा के कारण नहीं हो पा रहा है विवाह

    कई बार जन्म कुंडली में कुछ ग्रहों की बाधा सप्तम भाव को बांधने का कार्य करती है और इस कारण विवाह में देरी होती ही जाती है. इसलिए जरुरी है की आप ये जानें आखिर कौन से ग्रह आपके सातवें भाव को बाधा दे रहे हैं, क्योंकि कई बार कुंडली के बाधक ग्रह शादी में बनते हैं ग्रह बाधा का कारण . 

     
  • क्या मंगल दोष के कारण तो नहीं हो रही विवाह में देरी

    कुंडली में मंगल दोष तो नही है आपके विवाह में देरी का कारण? क्योंकि कई बार कुंडली में मौजूद मंगल की स्थिति जातक या जातिका के विवाह में देरी होने का मुख्य कारण बन जाती है और किसी न किसी कारण से रिश्ता आगे तक नहीं बढ़ पाता है

  • कुंडली के किस दोष के कारण हो रही है विवाह में?

    ज्योतिष शास्त्र अनुसार कुंडली में मौजूद, मांगलिक दोष, पितृ दोष, सर्प दोष इत्यादि कुंडली दोषों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में वैवाहिक सुख प्राप्ति के लिए विलम्ब का मुख्य कारण बन जाता है. ऐसे में जरूरी है कि समय रहते इन दोषों की शांति की जाए और विवाह सुख को प्राप्त किया जा सके।

  • कब होगी मेरी शादी और क्यों रिश्ते मिलने पर भी नहीं बन पा रही है बात?

    जन्म कुंडली में दशा और गोचर विवाह का समय और विवाह होने से संबंधित कई संकेत देता है लेकिन रिश्तों के आने के बावजूद भी रिश्ता होते होते रह जाता है, या किसी कारण से सगाई तक हो जाने पर सगाई ही टूट जाती है ऐसे में इसका कारण जन्म कुंडली के सप्तम दूसरे और पंचम भाव पर शनि, मंगल, सूर्य इत्यादि पाप प्रभाव एवं क्रूर ग्रहों के चलते शादी में लगातार देरी होती चली जाती है।