पितृ दोष / Pitra Dosha - पूर्वजों के पाप-कर्मों का दोष

पितृ दोष

पितृ दोष/Pitra Dosh को "पूर्वजों के पाप-कर्मों" के रूप में वर्णित किया जा सकता है। किसी भी ज्योतिषी/astrologer के पास जाने पर, संयोगवश कुंडली में पितृ दोष का ही प्रथम प्रकटीकरण प्राप्त होता है जो आंतरिक रुप से अत्यधिक तनाव का कारण बन सकता है। अतः पितृ दोष को समझे बिना ही, पितृ दोष/Pitra Dosha के उपायों या उपचारों की तलाश करना शुरू कर दिया जाता है।

पितृ दोष के बारे में चर्चा करने से पहले, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह इतना गंभीर दोष नहीं होता जितना आमतौर पर निम्नलिखित कारणों से चित्रित किया जाता है:

१. प्रत्येक कुंडली में इसका प्रभाव भिन्न होता है इसलिए इसके प्रभाव को समान रूप से नहीं समझना चाहिए। 

२. यह भी हो सकता है कि पीड़ित व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष न होकर, कोई अन्य कारण हो।

३. संभवत:, कुंडली में यह दोष बिल्कुल भी न हो।

४. या व्यक्ति को उचित उपचारात्मक उपाय निर्धारित नहीं किए गए हों।

इन कारणों को समझने के साथ साथ आपको पितृ ऋण और पितृ दोष के बारे में समझना पड़ेगा। वेदों तथा शास्त्रों के अनुसार एक इंसान के जीवन में मुख्यत: तीन ऋण होते हैं – देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण। प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन काल में इन सभी ऋणों से मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए। इन सब में से पितृ ऋण/ pitra rina से मुक्ति पर सर्वाधिक बल दिया जाता है । यदि मनुष्य इस ऋण से मुक्त होने का प्रयास नहीं करता तो इसके कारण उसे जीवन में तमाम समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि माता-पिता अपनी संतानों के प्रति अपने धर्म का पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करते हैं, तो इससे बच्चों पर पितृ ऋण चढ़ जाता है। इस ऋण से मुक्त होने के लिए उनकी संतानों को प्रयास करना होता है। पितृ ऋण कई प्रकार के होते हैं। स्वयं के कर्म, आत्मा, पिता, भाई, बहन, मां, पत्नी, बेटी और बेटे का ऋण। जब हमारे पितृ अतृप्त होने के कारण हमें सताते हैं या हमारी जन्म-कुंडली में प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, तब पितृ दोष होता है। पितृपक्ष हमें पितृ ऋण और इससे सम्बंधित कुंडली दोष/Kundli dosh के निवारण में सहायता करता है।

कुंडली में पितृ दोष के क्या संकेत होते हैं? / What is Pitra Dosh – Significations in Horoscope

उत्तरकालामृत 20-1 / 2 से 22-1 / 2 श्लोकों में सूर्य के इन महत्वपूर्ण संकेतों का वर्णन किया गया है :

  • आत्मा

  • शक्ति

  • साहस

  • पिता

  • गुरु

  • पूर्वज

  • वीरता

  • राजा

  • सिर संबंधित व्याधियां

  • वंशावली

सूर्य के इन दोषों के कारण, उनसे प्राप्त होने वाले परिणामों का नियंत्रित हो जाना ही, पितृ दोष/Pitra Dosh का कारक होता है।

पितृ दोष के कारण / Reasons of Pitra Dosh

निम्नलिखित ग्रह या उनकी ज्योतिषीय राशियां/astrological Signs  सूर्य को पितृ दोष/Pitra Dosh प्रदान करने के लिए प्रेरित करता है:

  • राहु या कन्या राशि

  • केतु या मीन राशि

  • शनि या मकर और कुंभ राशि

  •  मंगल या वृश्चिक राशि

इनमें से किसी भी एक ग्रह या इन ग्रहों का संयोजन सूर्य को दोष देकर पितृ दोष/Pitra Dosh का कारण हो सकता है जिनकी शक्ति या प्रभाव सूर्य की स्थिति पर निर्भर होने के कारण अलग-अलग होते हैं। सामान्य तौर पर, पितृ दोष/Pitra Dosh तीन प्रकार के होते हैं, जिनमें सर्वप्रथम अत्यधिक हानिकारक पितृ दोष/Pitra Dosh पर चर्चा करते हैं :

पितृ दोष के प्रकार / Types of Pitra Dosh 

अत्यधिक उद्दाम - प्रथम श्रेणी का पितृ दोष- सूर्य के इनमें से किसी भी ग्रह के साथ किसी भी भाव या घर/ house में स्थित होने पर प्रथम श्रेणी का पितृ दोष/ Pitra Dosh बनता है जो अत्यधिक क्रूर होता है।

मध्यम प्रभाव – द्वितीय श्रेणी का पितृ दोष – यदि सूर्य पर उपरोक्त सभी ग्रहों में से किसी एक या सभी ग्रहों की युति हो तो द्वितीय श्रेणी का पितृ दोष बनता है, जो मध्यम प्रभावकारी होने के कारण प्रथम डिग्री जितना हानिकारक नहीं होता है। 

सौम्य रूप और प्रभाव  - सूर्य के, उपरोक्त ग्रहों की राशि या शत्रु राशि में स्थित होने पर हल्के प्रभाव वाला तृतीय श्रेणी का पितृ दोष बनता है। 

आइए, अब जीवन पर पड़ने वाले पितृ दोषों के प्रभावों पर विचार करते हैं:

पितृ दोष के प्रभाव / Effects of Pitra Dosh

कुंडली/Horoscope के सभी सकारात्मक योगों पर पितृ दोषों के प्रभावों की छाया पड़ने से, उचित परिणामों की प्राप्ति में अवरोध उत्पन्न हो सकते हैं। जिसके कारण निम्न में से कोई एक या एक से अधिक का मेल हो सकता है:

= निस्संतानता

= मृत्यु का भय

= परिवार के पुरुष सदस्यों की शीघ्र मृत्यु

= प्रतिष्ठा की हानि

= कारावास होना

= निरंतर अस्पष्ट हानियां

पितृ दोष के कारण इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है तथा इन समाप्त ना होने वाले नुकसानों के लिए किसी ज्योतिषी/astrologer का मार्गदर्शन लिया जा सकता है। अब, कुंडली में इस दोष के होने के कारणों की व्याख्या समझने की कोशिश करते हैं :  

पितृ दोष कहाँ से आता है?/ Where does Pitra dosha come from?

ज्योतिष या भारतीय वैदिक ज्योतिष/Jyotish or the Indian Vedic astrology के अनुसार, वर्तमान जन्म मेे कोई भी दोष या योग व्यक्ति के पूर्व के जन्म से आते हैं। अर्थात यदि आपको इस जन्म में जो भी मिल रहा है, वह सिर्फ आपके पिछले जन्म के कर्मों के कारण होता है।

पूर्व जन्मों में परिवार के वरिष्ठ व्यक्तियों का अनादर करना पितृ दोष/Pitra Dosh को जन्म देता है और वर्तमान जीवन में भी इसके जारी रहने पर, इसके प्रभावों में कई गुना वृद्धि हो सकती है।

कुंडली में पूर्व जन्मों में किए गए बुरे कर्म अंतर्निहित होते हैं जो पूर्व जन्मों में किए गए बुरे कर्मों के बारे में अप्रकट रूप से बताते हैं। नीचे दी गई जानकारी पढ़कर स्वयं जाना जा सकता है : 

कुंडली में, अतीत के कर्म जो वर्तमान जन्म में पितृ दोष के रूप में प्रभावित करते हैं, नीचे दर्शाए गए हैं :

सूर्य का राहु द्वारा दोषयुक्त होना, पारिवारिक परंपराओं को तोड़कर परिवार के अपमान करने को दर्शाता है।

सूर्य का केतु द्वारा दोषयुक्त होना, वरिष्ठ व्यक्तियों से झूठ बोलने और उनकी बुराई करने को दर्शाता है। 

सूर्य का शनि द्वारा दोषयुक्त होना, बुजुर्गों की देखभाल न करने को दर्शाता है।  

सूर्य का मंगल द्वारा दोष युक्त होना, बड़ों के प्रति किए गए दुर्व्यवहार को दर्शाता है।

इस मार्गदर्शिका द्वारा वर्तमान जन्म के कर्मों को सुधारकर, अगले जन्मों के लिए कुछ सुधार किया जा सकता है।
 

पितृ दोष के उपाय / Pitra Dosh Remedies

कुंडली/Horoscope में पितृ दोष/Pitra Dosh का पता लगाने के बाद भी, यह भी जानते हैं कि इसे हटाया नहीं जा सकता है। इसके लिए, व्यापक रूप से पितृ दोष/Pitra Dosh संबंधित उपचारों पर स्पष्टीकरण को समझना चाहिए। कर्मकांडों पर कम ध्यान केंद्रित करते हुए, स्वयं के कर्मों को सुधारने के लिए, तीन प्रकार के उपायों का वर्णन इस प्रकार है :

प्रथम लोकप्रिय उपाय

भगवान द्वारा पाप-कर्मों के पश्चाताप करने के तरीके बताए गए हैं। पूर्व जन्मों के पाप कर्मों के कारण होने वाले पितृ दोष के उपाय भी कर्मों में ही निहित होते हैं। हमारे तत्वज्ञान के अनुसार, यह उपाय न केवल इसके लिए बल्कि किसी भी अन्य दोषों के लिए भी उचित है।

ब्रह्म पुराण के अनुसार, मृत्यु के देवता-यम द्वारा अश्विन मास के कृष्ण पक्ष के दिन सभी आत्माओं को वापस पृथ्वी पर जाने की अनुमति दी जाती है। अतः इस समय पितृ दोष/Pitra Dosh के प्रभावों के अनुसार, दिवंगत आत्माओं को सम्मानपूर्वक उचित अनुष्ठानों द्वारा प्रसाद अर्पण करना मुख्य कर्तव्य होता है। कुंडली/ Horoscope में पितृ दोष होने पर यह उसके नकारात्मक प्रभावों को दूर कर सकता है। 

अनुसरण करने वाले विभिन्न उपाय इस प्रकार हैं : 

• त्रिपिंडी श्राद्ध

• बहु-पिंडी श्राद्ध

• परिवार के सदस्य की पुण्यतिथि के दिन श्राद्ध करना 

• बरगद के वृक्ष पर जल चढ़ाना

• श्राद्ध पक्ष पर पितरों को जल और प्रसाद चढ़ाना 

• अमावस्या पर ब्राह्मणों को भोजन कराना

• श्राद्ध पक्ष में, पारिवारिक सदस्य की पुण्यतिथि वाली तिथि के दिन श्राद्ध करना

श्राद्ध पक्ष प्रत्येक वर्ष लगभग सितंबर में आता है, इसलिए आपको पंचांग द्वारा सही तिथियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। 

ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह उपाय या कोई अनुष्ठान तब तक काम नहीं करते, जब तक स्वयं के कर्मों को सही नहीं किया जाता है।  

दूसरा महत्वपूर्ण तरीका- स्वयं के कर्मों को सुधारना

कर्म सुधारक होने के कारण, न केवल इसके लिए बल्कि किसी अन्य तथाकथित दोषों के लिए भी कर्म सुधारों की व्याख्या करना, हमारा मुख्य कर्तव्य है।

किए गए कर्मों के अनुसार, कुंडली में अगले जन्मों में आने वाले अच्छे या बुरे योगों के लिए, वर्तमान जीवन में कर्मों में अनिवार्य रूप से सुधार का पालन करना चाहिए।

 फिर भी, अगले जन्मों का ध्यान नहीं करने पर भी, इन सुधारों से वर्तमान जीवन को भी लाभान्वित किया जा सकता है।

इसके लिए किए जाने वाले कार्य :

- परिवार के बुजुर्ग सदस्यों का सम्मान करना चाहिए।

-उन्हें जरूरी चीजों से वंचित नहीं करना चाहिए। 

-उनके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताना चाहिए। 

-उनके लिए भी अपने समान जीवनशैली की गुणवत्ता बनाए रखनी चाहिए।

-उन्हें कड़वे या कठोर शब्द नहीं बोलने चाहिए।

-उनसे कोई दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए।

कर्म सुधारों का पालन नहीं करने पर, पितृ दोषों/Pitra Dosh में वृद्धि होने से, इसका कोई अन्य समाधान नहीं हो सकता है।  

ज्योतिषीय मार्गदर्शन द्वारा पितृ दोष उपचार/ Astrological Guidance for Pitra Dosh Remedies

कुंडली में पितृ दोष/Pitra Dosh होने पर, उस कुण्डली/Horoscope में नकारात्मक ग्रहों की छाया पडने से, अनजाने में ही सूर्य कमजोर हो जाता है। मुख्य उपायों द्वारा दोषयुक्त करने वाले ग्रहों को कमजोर करके, सूर्य को प्रबल किया जाता है। यहां हमारे द्वारा कुछ ज्योतिषीय अनुष्ठानों/astrological rituals के बारे बताया जा रहा है जो इस दोष के प्रभावों को कम कर सकते हैं; अतः आपको चिंतित नहीं होना चाहिए। इसके लिए यही एक सावधानी रखनी आवश्यक है कि इन अनुष्ठानों से तब तक उचित परिणाम प्राप्त नहीं होंगे जब तक स्वयं के कर्मों में सुधार नहीं किया जाएगा।   

जिन लोगों की कुंडली/Horoscope में पितृ दोष/  होता है, उन्हें सूर्योदय से पहले सुबह जल्दी उठकर उगते सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए जिसे अर्ध्य कहा जाता है। इस अनुष्ठान को करने की उचित प्रक्रिया के अनुसार, बाजार से एक अर्ध्य बर्तन लाकर उसमें स्वच्छ जल भरकर लाल चंदन, लाल पुष्प, चावल के कुछ दाने और थोड़ा-सा दूध मिला लें और उगते सूर्य के सामने खड़े होकर इस मिश्रण को सूर्य देव को अर्पित करते समय निम्नलिखित मंत्र का जाप करना चाहिए:

•"ऊँ घृणि: सूर्य आदित्य"

•पितृ दोष/Pitra Dosh से छुटकारा पाने के लिए रत्न अभिषेकम् कर सकते हैं।

• बिहार (भारत) में पितृनगरी गयाजी की यात्रा करके  पितृ दोष/Pitra Dosh अनुष्ठान किया जा सकता है।

•पितृ दोष/Pitra Dosh के लिए अस्त होते सूर्य को भोजन दान करना भी एक बहुत ही शक्तिशाली उपाय है।

•प्रतिदिन सूर्य गायत्री मंत्र का जाप करने से भी पितृ दोष/Pitra Dosh का प्रभाव कम होता है।

•पितृ दोष/Pitra Dosh के कष्टों को दूर करने के लिए 'सूर्य तांत्रिक मंत्र', 'दशाक्षर सूर्य मंत्र', 'आदित्य हृदय स्तोत्र' या 'सूर्य अष्टोत्तरशत नामावली' का पाठ भी किया जा सकता है।

•इस दोष से राहत पाने के लिए 'श्री सूर्य वज्र पंजर कवचम्' द्वारा प्रार्थना की जा सकती है। 

पितृ दोष/Pitra Dosh के कई उपायों में से सभी को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता और न ही किया जाना चाहिए। एक और तथ्य यह है कि ऐसी कोई पूर्वनिर्धारित विधि नहीं है जो सभी पर सार्वभौमिक रूप से लागू होती हो। यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि कुंडली में सूर्य कितना दोषपूर्ण है। अतः, किसी अच्छे कुंडली ज्ञाता/Horoscope reader or astrologer की सलाह द्वारा अच्छी तरह समझने के बाद ही, दोषों को शांत करने के लिए किसी विशेष अनुष्ठान या विधि का पालन किया जाना चाहिए।