ज्योतिष में दोष/DOSHA IN ASTROLOGY

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, दोष का अर्थ है त्रुटिपूर्ण और प्रतिकूल है, जो किसी के लिए भी अच्छा नहीं होता है। यह शब्द संस्कृत से उत्पन्न हुआ है। यह दोष किसी व्यक्ति की कुंडली के बारहवें भाव/Twelfth house in birthchart में ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति के कारण होते हैं। आपकी जन्म कुंडली उन्हीं तत्वों के आधार पर बनती है, जो आपके जन्म के समय आपके ग्रहों की स्थिति पर प्रकाश डालती हैं या उन ग्रहों के बारे में बताते हैं। मान लेते आपकी कुंडली के कुछ विशेष भावों में पीडित ग्रह जैसे – राहु, शनि, और मंगल विराजमान हो जाए, तो इस संबंध में आपके कुंडली के मजबूत पक्ष पर बुरा प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण आपकी कुंडली में दोष होने की बात कही जा सकती है।

कुंडली में दोष के बारे में कैसे पता चल सकता है?/How do Dosha get formed in Kundli?

कुंडली/Kundali में दोष किसी व्यक्ति के पिछले जीवन में किए गए गलत कार्यों, अधूरे कार्यों, हानिकारक कार्यों के परिणाम हैं, इसलिए आपके लिए यह जानना बेहतर होगा कि क्या आपके जीवन में क्या खामियां थीं और वर्तमान जीवन में उन्हें कैसे सुधारा जा सकता है। यदि आप इस समस्या को सुनकर उपाय के लिए सीधा ज्योतिषी की तरफ अपना रुख कर लेते हैं तो शायद आप यहां गलत है। आपको इस संबंध में सबसे पहले अपने वर्तमान जीवन के कर्मों के सुधार को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो इस दोष का प्रभाव आपके जीवन में भयावह रूप से पड़ सकता है। हो सकता है कि यह आपके भविष्य के जन्मों में भी आपको परेशान करे।

ज्यादातर दोष मंगल ग्रह के कारण होते हैं। हम यह भी कह सकते हैं कि मंगल दोष सभी दोषों से ज्यादा प्रभावी होता है और ज्यादातर लोगों को इस दोष की शिकायत होती है। वैदिक ज्योतिष में इसके अलावा राहु, शनि और सूर्य कुछ दोष होते हैं। जहां राहु 25%, सूर्य 50%, और शनि 75% लोगों को प्रभावित करता है।

आपकी कुंडली के नकारात्मक दोष से कैसे निपटें?/How to deal with negative dosha in Kundli?

चलिए आपको एक बात बताते हैं। आपकी कुंडली में पड़ने वाला कोई भी दोष आपके पिछले जन्मों के कर्मों का परिणाम होता है। यही कारण है कि किसी भी अनुष्ठान या उपाय से ज्यादा आपको अपने वर्तमान जीवन में कर्म के सुधार की आवश्यकता होती है। प्रत्येक कुंडली में नकारात्मक दोष और सकारात्मक योग होते हैं, जिन्हें आप कभी बदल नहीं सकते हैं। हर व्यक्ति की कुंडली में नकारात्मक दोष और सकारात्मक योग होते हैं और आप उन्हें बदल नहीं सकते। इस स्थिति में फिर सवाल उठता है कि इन नकारात्मक दोष से कैसे निपटा जाए या फिर इन दोष को कैसे निष्क्रिय किया जाए। 

यदि आपको किसी के द्वारा अपनी कुंडली में दोष के होने की बात पता चलती है तो आप से अनुरोध है कि आप किसी भी ज्योतिषी के पास इस बात को कभी सोच कर ना जाए कि इन दोषों के लिए आपको किसी उपाय की जरूरत है। इन सभी बातों के अलावा आपको ज्योतिषी से पूछना चाहिए कि आपके कुंडली के किस भाव के कारण आपकी कुंडली में दोष आया है। यदि वह ज्योतिषी आपके इस प्रश्न का उत्तर दे दे तो इसका अर्थ यह है कि उसे इन दोषों का पिछले जन्म से संबंध निकालना आता होगा। और यदि आपका ज्योतिषी इस प्रश्न का उत्तर बेझिझक नहीं दे पाता है तो इसका अर्थ है कि आप उपायों के जाल में फसने जा रहे हैं।

यदि आपकी कुंडली में आपके पिछले जन्म के कर्मों के आधार पर दोष है तो कुछ ग्रहों के गोचर, दशा और उन सभी से ऊपर है आपकी स्वतंत्र इच्छा जिसके जरिए आप ऐसे दोष के प्रभाव से बच सकते हैं। इसलिए ऐसे दोषों से निपटने के लिए आपको उन कर्मों के बारे में पता करना होगा जिनके कारण यह दोष उत्पन्न हुए हैं और किन कर्मों से आप अपने वर्तमान जीवन में सुधार ला सकते हैं। आपकी कुंडली के नकारात्मक दोष को खत्म करने का यह एक आखरी और उत्तम तरीका है।

कोई भी योग और दोष स्वयं कार्य नहीं करता है और ना ही हमेशा के लिए रहता है।

ना ही ऋण योग (गरीबी के लिए योग) किसी व्यक्ति को जीवन भर गरीब रखता है और ना ही धन योग वाले व्यक्ति सारी उम्र धनी रहते हैं। यदि आपके पिछले जन्म के कर्म सही नहीं है और आपने इस जन्म में फिर से मानव जन्म लिया है तो इसका अर्थ यह है कि आपको परमेश्वर ने एक और मौका दिया है कि आप अपने सभी कर्मों को सुधारें और अपने बुरे कर्मों को ठीक कर अपने आगे का जीवन सुखी से बिताएं। अब सवाल यह उठता है कि आप इसे कैसे ठीक किया जाए। इसके लिए आपको एक ऐसे ज्योतिषी से बात करनी चाहिए जो कर्म के सुधार पर विश्वास करता हो ना कि अपने पास आए लोगों को किसी उपाय या अनुष्ठान की तरफ जाए।

कुंडली दोष के लिए उपाय/ Remedies for Kundli Dosha

मैं क्षमा मांगना चाहता हूं कि मैं उन लोगों का कभी सहायता नहीं कर सकता जो पिछले कर्मों के लिए किसी पूजा, अनुष्ठान या हवन की तरफ भागते हैं। जैसा कि मैं पहले ही आपको बता चुका हूं कि दोष आपके पिछले कर्मों के कारण आपके वर्तमान जीवन में आपको प्रभावित करते हैं और इसके लिए सबसे सटीक उपाय है कि आपको परमेश्वर के सामने बैठना होगा और संकल्प लेना होगा कि आप इन सभी दोषों से बाहर निकलना चाहते हैं। इस संकल्प के दौरान आपको कुछ मंत्रों का उच्चारण भी करना होता है। आपको अपने कर्मों को सुधारने के लिए अपने मन, मस्तिष्क और शरीर से प्रभु की साधना करनी चाहिए ना कि धन से।

चलिए एक उदाहरण की तरफ देखते हैं – जब कुंडली में पितृ दोष आपकी कुंडली में होता है तो हम दान पुण्य करते हैं, बहुत सारे उपायों पर कार्य करते हैं लेकिन पितृपक्ष के समय हम अपने माता पिता का आदर नहीं करते हैं। आपको क्या लगता है कि ऐसा करने से पितृ दोष खत्म हो जाएगा। मेरा जवाब है नहीं। चलिए मान लेते हैं कि यह पूजा और दान पुण्य करना आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है लेकिन जब तक आप अपने माता-पिता का आदर नहीं करते, तब तक कोई भी अनुष्ठान या कोई भी उपाय आपकी सहायता नहीं कर सकता।

इस संबंध में दोष को निष्क्रिय करने का इकलौता तरीका आपके कर्म में सुधार है। इसके साथ साथ मैं आपको एक बात और बताना चाहता हूं कि हर व्यक्ति की कुंडली में सकारात्मक योग और नकारात्मक दोष दोनों होते हैं, लेकिन दोनों में से कोई भी तत्व आपको ना तो आशीर्वाद देते हैं और ना ही आपको कोई श्राप देते हैं। हम सभी को समझना होगा कि कैसे पिछले जन्म के नकारात्मक दोषों को खत्म किया जाए और सकारात्मक योग से कैसे अच्छे फल प्राप्त हो। यही भारतीय ज्योतिष का मूल सिद्धांत है।

कुंडली में अलग अलग दोष/ Different Doshas in Kundli

कुंडली के कुछ ऐसे दोष है जैसे – काल सर्प दोष, पितृ दोष, मंगल दोष, नाड़ी दोष, गुरु चांडाल दोष, और अंगारक दोष जिनके बारे में लगभग सभी को पता होता है। इसके साथ साथ कुछ अन्य दोष भी होते हैं जैसे – पुत्र दोष, ग्रहण दोष, बंधन योग, गंडमूल दोष, शनि दोष, शापित दोष, और केमद्रुम दोष। इसके अलावा और भी दोष होते हैं। मैं प्रयास करूंगा कि आप इनमें से जो सबसे ज्यादा प्रभावी है आप उसके बारे में हमारी वेबसाइट से पढ़ लें।

Mangal Dosha in Hindi

Pitra Dosha in Hindi

कुंडली में दोषों के बारे में आउटलुक इंडिया में मेरा नवीनतम साक्षात्कार पढ़ें।

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