निःशुल्क राशिफल – दैनिक, मासिक, साप्ताहिक, और वार्षिक राशिफल

राशिफल एक ऐसा दस्तावेज़ है जो की व्यक्ति को उसके जन्म के समय प्रदान किया जाता है। यह किसी व्यक्ति के जन्म की तिथि , समय और स्थान पर आधारित होता है। इसमें हमारे पिछले जन्मों का लेखा जोखा निहित होता है। राशिफल एक निश्चित दस्तावेज़ है, और इसके निर्माणकर्ता स्वयं ब्रह्मा है और इसे कोई भी परिवर्तित नहीं कर सकता। फ़िर कोइ योग्य ज्योतिषी या ज्योतिष शास्त्र हमें राशिफल के अध्ययन में किस प्रकार सहायता प्राप्त कर सकता है, और एक राशिफल के अध्ययन का सही तरीका क्या है?

राशिफल आपके भूतकाल, वर्तमान और भविष्य को दर्शाता है और यह एक प्रमाणिक दस्तावेज़ है। यह उन चुनौतियों, रूकावटों, अवसरों और उन सभी तथ्यों को पहचानने में आपकी सहायता करता है जो आगे आने वाले जीवन आपके समक्ष दृष्टिगोचर होंगी।

यह आपको वैदिक ज्योतिष/Vedic Astrology की दुनिया को जानने में सहायक होता है, जिससे आपको यह ज्ञात हो सके की यह किस प्रकार आपकी सहायता कर सकता है और इसके विभिन्न पहलु क्या है। डॉ० विनय बजरंगी द्वारा किया गया राशिफल विश्लेषण आपको दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक भविष्यवाणियाँ प्रदान करता है।

राशिफल को जन्मपत्री, कुंडली, जन्मकुंडली जैसे नामों से भी जाना जाता है और इसके अतिरिक्त  क्षेत्रीय भाषाओं में इसके लिए कई अलग-अलग शब्दों का प्रयोग भी हो सकता हैं। इसका नाम जो भी हो, राशिफल / जन्मकुंडली वैदिक ज्योतिष का आधार है। यह किसी व्यक्ति के जन्म के समय  जन्मकुंडली में ग्रहो की स्थिति, और तिथि के नक्षत्र को दर्शाता है।

राशिफल - जन्म कुंडली का महत्व / Importance of Horoscope - Birth chart

राशिफल/Horoscope का महत्व और उद्देश्य क्या है? राशिफल यह दर्शाता है की आपने अपने पिछले जन्मों में क्या-क्या किया था, आपने अपने वर्तमान के जीवन में कौन से अच्छे-बुरे कर्म किए हैं। राशिफल का उचित अध्ययन एक व्यक्ति को उसके पिछले जन्मों के कर्मो के विषय में बताता है और यह भी बताता है की उसको इस जन्म में क्या प्राप्त होगा। राशिफल इस बात पर केंद्रित होता है की व्यक्ति अपने पिछले जन्मों से यह जान ले कि उसे इस जन्म में अपनी "स्वतंत्र इच्छा" का किस प्रकार संचालन करना है। राशिफल किसी व्यक्ति को इस संसार में उनके वर्तमान जन्म उद्देश्य के बारे में बताता है। इसलिए आपने क्या किया है, आपको क्या करना है, और आप उन सभी परिणामों को कैसे प्राप्त करेंगे जो आप चाहते है, यह सब जानकारी प्राप्त करने के लिए राशिफल/ जन्म कुंडली  महत्वपूर्ण है।

आप मानव जीवन में ज्योतिष की भूमिका और वर्तमान समय में राशिफल की प्रासंगिकता पर मेरा नवीनतम साक्षात्कार आउटलुक इंडिया / द वीक / हिंदुस्तान टाइम्स और नीचे दिए गए हमारे समाचार अनुभाग में भी पढ़ सकते हैं।

राशिफल को कैसे पढ़ें? How to read a birth chart / Horoscope?

ज्योतिष ग्रहों की स्थिति और संयोजन के बारे बताने वाला खगोलीय विज्ञान है जो एक जातक पर नक्षत्रों और ग्रहों के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों को दर्शाता है। कुंडली पढ़ने का अर्थ है सभी ग्रहों की स्थिति को जातक के पिछले जन्म से जोड़ना और फिर यह समझना कि उसे यह  नकारात्मक और सकारात्मक ग्रह और ग्रह संयोजन क्यों मिले हैं। इस प्रकार की भविष्यवाणियाँ करने के लिए राशिफल का गहन अध्ययन किया जाता है।

नक्षत्र/Nakshatra में बारह राशियां है और सभी मनुष्य इनमे से किसी न किसी राशि के अंतर्गत आते है। इन बारह राशियों को लक्षण और विशेषताओं के आधार पर चार तत्वों में बांटा जाता है। यह तत्व है - अग्नि, जल, पृथ्वी और वायु। इन बारह राशियों की ही तरह एक राशिफल/Horoscope में 12 भाव विद्यमान होते है। कुंडली का अध्ययन करने से इन तीनों कारकों के आंतरिक संबंध, प्रभाव और जातक के जीवन पर उनके प्रभाव का भान होता है।

एक राशिफल में मौजूद यह बारह भाव क्या है? / What are the twelve houses present in a horoscope?

प्रथम भाव/First house - इसे लग्न भाव के नाम से भी जाना जाता है। इसका कारक सूर्य है और यह जातक के (स्त्रीलिंग / पुल्लिंग), शरीर, सिर और अहंकार का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अतिरिक्त यह आत्म अभिव्यक्ति, व्यक्तित्व, और शारीरिक विशेषताओं का प्रतिनिधित्व करता है?

द्वीतीय भाव/Second House - इसे धन भाव भी कहा जाता है। इसका कारक गुरु है जो वित्तीय स्थिति, भाषण, अभिव्यक्ति शक्ति, आजीविका और प्राथमिकताओं का प्रतिनिधित्व करता है।

तृतीय भाव/Third house – इस भाव को ब्रात्रु भाव के नाम से भी जाना जाता है। इसके कारक मंगल ग्रह है जो रुचि, शक्ति, प्रेरणा, भाईचारा , इच्छा शक्ति, मित्रो का प्रतिनिधित्व करता है। यह उत्साह, आवेग, शौक, महत्वाकांक्षा और जीवन ऊर्जा का भी प्रतिनिधित्व करता है।

चतुर्थ भाव/Fourth house - इसे सुख भाव भी कहा जाता है। इसका  कारक चंन्द्रमा है जो  मन, भावनाओं और खुशियों का प्रतिनिधित्व करता है। यह शिक्षा, संपत्ति, भूमि अधिग्रहण, मान्यता और आराम का भी प्रतिनिधित्व करता है।

पांचवा भाव/Fifth House - इसे पुत्र भाव के नाम से भी जाना जाता है। बृहस्पति के इसका कारक होने की वज़ह से यह बुद्धि, शिक्षा, रचनात्मक क्षमता और संतान का प्रतिनिधित्व करता है। यह पिछले जन्म के प्रभाव, रोमांस, खेल, अंदाजा लगाना और आध्यात्मिक क्रियाकलापों का भी प्रतिनिधित्व करता है।

छठा भाव/Sixth House - इसे शत्रु भाव भी कहा जाता है। इसके कारक है मंगल और शनि ग्रह हैं । यह स्वास्थ्य सम्बंधित मुद्दों, स्वास्थ्य और रोग और प्रतिरक्षा प्रणाली का प्रतिनिधित्व करता है। यह कठिन परिश्रम, बाधाओं से लड़ने और शत्रुओं पर विजय पाने की क्षमता का भी प्रतिनिधित्व करता है।

सांतवा भाव/Seventh House - यह कालात्र भाव के नाम से भी जाना जाता है। सांतवे भाव का कारक है शुक्र ग्रह है । यह भाव प्रियजनों, व्यापार भागीदारों और सहयोगियों के साथ दीर्घकालिक संबंध, सामान्य संबंध और लोगों के साथ संबंधों को दर्शाता है।

अष्टम भाव/Eighth House - हम आंठवे भाव/Eighth House को अयूर भाव के नाम से भी जानते है। इसके कारक शनि ग्रह है  जो एक रहस्यमय ग्रह माना जाता है। यह रहस्य , जीवन के नकारात्मक पहलू , दीर्घायु, मृत्यु, सुस्ती, विनाश और अनुसंधान को दर्शाता है।

नवम  भाव/Ninth House - इसे भाग्य भाव के नाम से भी जाना जाता है। इसे सबसे भाग्यशाली भाव माना जाता है। नौवे भाव के कारक बृहस्पति है , जो की जीवन का उद्देश्य (धर्म), धार्मिक लक्षण और जीवनदर्शन, नैतिकता और जीवन के सिद्धांत को दर्शाता है।

दशम भाव/Tenth House - हम इसे कर्म भाव के नाम से भी जानते है। इसके दो कारक है, मंगल और बृहस्पति ग्रह। यह करियर, करियर में सफलता, कौशल, सार्वजनिक स्थिति, राजनीति का प्रतिनिधित्व करता है।

ग्यारहवां भाव/Eleventh house - यह भाव लाभ भाव के नाम से भी जाना जाता है। इसका कारक है बृहस्पति। यह व्यक्ति के दुनिया में अपनी योग्यता और प्रतिभा को दिखाने की क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है। ग्यारहवां भाव आकांक्षाओं, लक्ष्यों, वित्तीय और भौतिकवादी लाभ, दोस्ती, धन की बहुतायत और अधिकता दर्शाता है।

बारहवां भाव/Twelfth House – यह व्यय भाव के नाम से भी जाना जाता है। बारहवे भाव के कारक हैं  शनि और केतु। यह मन, मुक्ति, हानि, ऊर्जा और संसाधनों की बर्बादी को इंगित करता है। यह अवचेतन मन, विदेश यात्राओं, दुखों और कठिनाइयों का भी प्रतिनिधित्व करता है।

इन बारह भावों को किसी व्यक्ति के जीवन पर उनके संघात और प्रभावों के आधार पर बांटा जा सकता है। / These 12 houses can be categories as below in terms of their impact & influences on a person's life.

चतुर्थांश (केंद्र) – पहला, चौथा, सातवां, और दसवां भाव अत्यधिक महत्वपूर्ण भाव होते हैं।

सफल (पनाफरस) - सफलता के लिए भाव दूसरा, पांचवा, आठवां, और ग्यारहवां भाव उत्तरदायी हैं।

केंडेंट भाव (अपोक्लिमास) – यह तीसरा, छठा, नौंवा, और बारहवां भाव है। इस भाव का प्रयोग वैदिक ज्योतिष में ना होकर पश्चिमी ज्योतिष में किया जाता है ।

त्रिकोण भाव/Trikona Houses – पहला, पांचवां और नौंवा भाव अत्यधिक शुभ होता है। त्रिकोण भाव और चतुर्थांश भाव व्यक्ति के धन, स्वास्थ्य, प्रतिष्ठा, सार्वजनिक और आर्थिक स्थिति का निर्धारण करते हैं, इसलिए ज्योतिषी को उस दृष्टिकोण से राशिफल पढ़ने और विश्लेषण करने में सतर्क रहना चाहिए। यहां लग्न भाव/Lagna House सभी भावों में सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यह चतुर्थांश और त्रिकोण दोनों है।

उपाच्य भाव - यह भाव संघर्ष, प्रतिस्पर्धा और अंत में उपलब्धियों को दर्शाता हैं। तीसरा, छठा, और ग्यारहवां भाव उपाच्य  भाव हैं।

त्रिक भाव – यह भाव दुहस्थान भावों के नाम में भी जाने जाते हैं और यह  छठा, आठवाँ और बारहवां भाव हैं। यह भाव नुकसान, दुख, ऋण और मृत्यु के  संकेतक  हैं।

दीर्घायु भाव (आयु-स्थान) - जैसा कि श्रेणी के नाम से ही स्पष्ट है, यह भाव दीर्घायु, व्यक्ति के जीवन और मृत्यु का भी प्रतिनिधित्व करता हैं। तृतीय और अष्टम भाव इस श्रेणी में आते हैं।

मारक स्थान या हत्या भाव – द्वितीय और सप्तम भाव इस श्रेणी में आते हैं।

राशिफल - जन्म कुंडली का सही अध्ययन क्या है? / What is a correct reading of horoscope – Birth chart?

राशिफल / जन्म कुंडली को कैसे पढ़ा जाए। मेरे अनुसार एक राशिफल को पढ़ने का सही तरीका यह है कि सर्वप्रथम सभी ग्रहों की स्थिति को किसी व्यक्ति के पिछले जीवन से जोड़ा जाए। ज्योतिषीयों को इसका मुलायंकन अवश्य करना चाहिए की किस प्रकार एक व्यक्ति के पिछले जन्म के कर्मों को जन्म कुंडली में विभिन्न ग्रह स्थितियां को देख सकें।

दूसरी ओर, एक राशिफल में ग्रहों के नकरात्मक और सकारात्मक दोनों ही स्थितियां होती है। मगर इन में कोई भी एक व्यक्ति को तात्कालिक वरदान या शाप नहीं देता। यहाँ एक व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा की भूमिका जीवंत हो उठती है। स्वतंत्र इच्छा वर्तमान जीवन में कर्म (कार्य , कृत्य) करने की स्वतंत्रता को दर्शाता है। किसी व्यक्ति को यह स्वतंत्रता ग्रहों के गोचर से लाभ लेने के लिए मिलती है। ध्यान रहे, किसी राशिफल में ग्रहों की स्थिति "निश्चित" होती है, लेकिन सभी ग्रह गोचर करते रहते हैं, जिसे "ग्रहों के पारगमन/गोचर" के नाम से जाना जाता है। एक ज्योतिषी को इस तरह से एक व्यक्ति का मार्गदर्शन करने का प्रयास करना चाहिए जिससे की वह हानिकारक ग्रहों की स्थिति को "निष्क्रिय" रखकर इनके बुरे प्रभाव को कम कर सके। ताकि वह इसके द्वारा इन गोचरों का लाभ उठा सके और यह भी कि जान सके की कैसे राशिफल के सकरात्मक प्रभावों को सक्रिय कर उनका लाभ लिया जा सकता है। सिर्फ़ राशिफल की नकरात्मकताओं को ध्यान में रख एक व्यक्ति को समाधानों की ओर ले जाना किसी राशिफल के अध्ययन का सही तरीका नहीं है। राशिफल को पढ़ने का सही तरीका व्यक्ति को कर्मकांड की बजाय कर्म सुधार के सिद्धांत पर आधारित मार्गदर्शन कर यह बताना है कि कैसे नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है और राशिफल के सकारात्मक लाभ लेने के लिए स्वतंत्र इच्छा पर बल देना महत्वपूर्ण हो जाता है।

दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, वार्षिक राशिफल / Daily, weekly, monthly, yearly horoscope

एक व्यक्ति अपने जीवन और अपने दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, और वार्षिक आयोजनों के लिए दैनिक/Daily Predictions, साप्ताहिक/Predictions, मासिक/Monthly Predictions, और वार्षिक भविष्यवाणियों /Yearly Predictions के अनुसार योजनाएं बना सकता है। असल में, वार्षिक राशिफल/Yearly horoscope आपके वार्षिक कार्यों की योजना बनाने के लिए एक व्यापक दिशानिर्देश देता है। यहां ग्रहों की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मासिक राशिफल, साप्ताहिक राशिफल और दैनिक राशिफलों को इस प्रकार विभाजित किया जाता है कि यह आपको मासिक, साप्ताहिक और दैनिक कार्यों और इस अवधि के दौरान, आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, के क्षेत्र में मार्गदर्शन करेगा। दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक राशिफल भविष्यवाणियों का विस्तृत विवरण और महत्व प्रासंगिक पृष्ठों पर उपलब्ध है।

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