कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त / The goodness of the establishment of the Kalash

कलश स्थापना

शास्त्रों में, कलश दर्शन/Kalash Darshan को देव दर्शन के समान माना गया है। कलश स्थापना के समय, लोगों द्वारा उच्चारित भावनात्मक श्लोकों से कलश के शुभ होने का पता चलता है। कलश को स्थापित करने का पूजन करते समय, कलश/Kalash के विभिन्न हिस्सों को स्पर्श करते हुए, पुरोहितों द्वारा इन श्लोकों का पाठ किया जाता है।

कलश क्या है और इसकी पूजन कैसे होती है / What is Kalash and its worship

वरुण के कुंभ का प्रतीक होने के कारण, वरुण और अग्नि, प्रत्येक भाग के वास्तविक देव/Dev माने जाते हैं। कुंभ (घड़ा) को देखकर समुद्र मंथन/samudra manthan की कहानी का स्मरण किया जाता है। श्रीकृष्ण की समुद्र मंथन से जुड़ी बाल-लीला और मोहिनी द्वारा अमृत कलश से देवताओं और राक्षसों के बीच अमृत बांटने की कथा का ध्यान किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कलश दर्शन/Kalash Darshan, देव दर्शन या देवताओं के पूजन के समान माना गया है। कलश स्थापना के समय कहे जाने वाले, श्लोक और भावनाओं द्वारा कलश शुभ हो जाता है।

कलश का महत्व / Importance of Kalash

पूजन के दौरान, कलश को अमृत कलश के समान माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन/samudra manthan से निकले कलश के कारण इसे पूजन में प्रयोग किया जाता है। विभिन्न पूजाओं में, कलश को अलग-अलग तरीके से स्थापित किया जाता है। नवरात्रों के दौरान, कलश को एक अखंड दीपक और नारियल के साथ स्थापित किया जाता है।

पूजा में कलश का कैसे प्रयोग होता है?/ Use of kalash in Pooja

कलश का पूजन करना, देवताओं की पूजा करने के समान होता है। भक्ति भाव और मंत्रों के जाप द्वारा, कलश की स्थापना, कलश की पवित्रता को स्पष्ट करती है।

हिंदू धर्म में, पूजन को अत्यधिक महत्व दिया गया है। पूजन के दौरान, कलश की स्थापना करने की कई मान्यताएं हैं। आजकल, लोगों को कलश के महत्व और स्थापना की अधिक जानकारी नहीं होती। अतः, हमारे द्वारा पूजन के दौरान कलश/Kalash स्थापित करने के महत्व की चर्चा की गई है।

कलश सकारात्मक कामनाओं के लिए होता है; कलश या कुंभ पर नारियल रखने से इसकी सुंदरता दोगुनी हो जाती है। इसके अलावा, कहा जाता है कि जिस तरह किसी भी कार्य को शुरू करने से पूर्व भगवान गणेश का पूजन किया जाता है, उसी तरह किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से पूर्व कलश का भी पूजन किया जाता है।

किसी भी पूजन को करते समय, घरों में कलश स्थापित किया जाता है। यह भारतीय संस्कृति का मौलिक प्रतीक है, इसलिए सभी शुभ अवसरों पर कलश की उपस्थिति में ही पुण्य वाचन किया जाता है।

कलश स्थापना का पौराणिक अर्थ / The mythological implication of putting up a Kalash

नवरात्रि के समय, लोगों द्वारा आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि करने के लिए सभी प्रकार के उपवास, व्रत, भजन, पूजा आदि किए जाते हैं। इससे प्रेरित होकर, मंदिरों में देवी का पूजन आरंभ होने के साथ ही, वैकल्पिक रूप से भक्तों द्वारा घरों में पूर्ण श्रद्धा के साथ, कलश स्थापित करके नौ दिनों तक पूजन किया जाता है। कलश की स्थापना गृह प्रवेश, नए व्यवसाय के शुभारंभ, नए साल, दिवाली पूजा आदि विशेष शुभ अवसरों पर भी की जाती है।

कलश स्थापना का क्या महत्व है?/ What is the importance of Putting up a Kalash?

कलश एक विस्तृत, गोल धड़, और छोटे मुंह वाला वाला एक विशिष्ट प्रकार का बर्तन होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, कलश के मुख में विष्णु, कंठ में महेश, मूल में ब्रह्मा तथा कलश के मध्य में देवी की शक्तियों का वास होता है। अतः, कलश को देवताओं और तीर्थ स्थानों आदि की शक्तियों के प्रतीकात्मक रूप में  स्थापित किया जाता है।

शास्त्रों में, बिना जल के कलश/Kalash रखना अशुभ माना गया है। इस कारण कलश पर जल, पान और आम के पत्ते, केसर, अक्षत, कुमकुम, दूर्वा-कुश, सुपारी, फूल, कपास, नारियल, अनाज आदि पूजन के अनुसार रखे जाते हैं,  जिससे लोगों को सकारात्मकता के साथ ही, सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है।

कलश किसका बना होना चाहिए?/What should the Kalash be made of?

पूजन में सोने, चांदी, मिट्टी और तांबे के कलश रख सकते हैं, लेकिन लोहे से बना कलश पूजन में नहीं रखना चाहिए।

कलश स्थापना के लिए सामग्री / Materials for setting up the Kalash

मिट्टी का घड़ा, लाल आसन, जौ, कलश के नीचे रखने के लिए बालू, कलश, मौली, लौंग, कपूर, सिंदूर, साबुत सुपारी, चावल, अशोक या आम के पांच पत्ते, नारियल, चुनरी, सिंदूर, फल-फूल, देवी का श्रृंगार और फूलों की माला।

कलश में जल / Water in the Kalash

कलश में, शुद्धता के प्रतीक जल, अनाज आदि रखे जाते हैं। पवित्र जल इस बात का प्रतीक माना जाता है कि हमारा मन जल की तरह शुद्ध और शीतल तथा मन विश्वास, तरलता, करुणा और सरलता से परिपूर्ण रहे और क्रोध, लोलुपता, सांसारिक सुखों, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा आदि का कोई स्थान न रहे। 

स्वस्तिक चिन्ह / Swastika symbol

कलश पर बना स्वास्तिक चिन्ह बाल्यावस्था, युवावस्था, व्यस्कता और वृद्धावस्था के चारों चरणों का प्रतीक माना जाता है। 

नारियल / Coconut

शास्त्रों के अनुसार, कलश की स्थापना करते समय, कलश के ऊपर नारियल रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। कलश के ऊपर स्थित नारियल, भगवान गणेश के प्रतीकात्मक रूप में भी माना जाता है।

नारियल को हमेशा इस तरह रखना चाहिए कि उसका मुख भक्तों की ओर रहे। नारियल का मुख अंत में होता है जहां से यह वृक्ष की शाखा से जुड़ा होता है।

दूर्वा-कुश, सुपारी, पुष्प / Durva-kush, betel nut, flower

कलश में दूर्वा-कुश, सुपारी, पुष्प रखना दूर्वा (दूब) के समान शक्ति, कुश के समान प्रतिभा, सुपारी के समान स्थिरता, पुष्प के समान आनंद और जल के समान सर्वज्ञ क्षमता को दर्शाता है।

परंपरानुसार, हिंदू धर्म में, किसी भी शुभ अवसर पर कलश की स्थापना क्यों की जाती है?/ Tradition: Why is Kalash established on any auspicious occasion in Hinduism?

किसी भी शुभ या धार्मिक कार्य की शुरुआत में जल से भरे कलश की स्थापना की जाती है, जो परंपरानुसार अलग-अलग चीजों से संबंधित होता है।

• धार्मिक अवसरों पर कलश की स्थापना इसलिए की जाती है क्योंकि पौराणिक कथाओं के अनुसार, कलश में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा देवी की शक्तियां वास करती हैं।

• समुद्र मंथन द्वारा प्राप्त कलश में भी अमृत था तथा प्राचीन मंदिरों या चित्रों में भी, लक्ष्मी जी को दो गजराजों द्वारा कलश के जल से स्नान कराते हुए चित्रित किया गया है।

 • इन कारणों द्वारा हिंदू धर्म में, कलश/Kalash को पवित्र और मंगल का प्रतीक माना जाता है। कलश को पूजन में स्थापित करने का अर्थ, कलश के रूप में त्रिदेव और माता शक्ति को माना गया है।

• अतः गृह प्रवेश, गृह निर्माण, विवाह संस्कार जैसे शुभ अवसरों आदि पर कलश की स्थापना  की जाती है।

• मान्यताओं के अनुसार, कलश को लाल कपड़े, नारियल, आम के पत्तों, कुशा आदि से विभूषित किया जाता है।

कलश स्थापना के लाभ / These are the benefits of keeping the Kalash

- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश में नारियल लगाने से घर रोग मुक्त होता है। ऐसा माना जाता है कि कलश पर नारियल के मुख को, राहु के कारण ऊपर की ओर रखा जाता है। कलश में नारियल नवरात्रों में रखा जाता है।

- कलश को पूजन में स्थापित करने से, पूजन के उद्देश्य  में सफलता प्राप्त होती है।

- कलश स्थापना के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। इसके अलावा, यह कर्जों से मुक्ति दिलाने में भी मदद करता है।

- लक्ष्मी कलश/Laxmi Kalash की स्थापना, धन की सार्वकालिक प्राप्ति के लिए की जाती है।

- नवरात्रों में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। मां दुर्गा की असीम कृपा भक्तों पर बनी रहती है जो उन्हें शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में मदद करती है।

कलश की गृह स्थापना के ज्योतिषीय लाभ/ There are many astrological benefits of keeping a Kalash in the house.

• शास्त्रों के अनुसार, घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए कलश की स्थापना की जाती है। कलश  कई चिंताओं से भी बचाता है। यह आस-पास की सारी नकारात्मक ऊर्जा को भी सोख लेता है, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। माना जाता है कि नारियल लोगों को शुभ परिणाम देता है। इसे घर के मंदिर में रखने से वातावरण पवित्र होता है, तथा पूजन के दौरान, ध्यान केंद्रित करने में भी मदद करता है।

• कलश/Kalash पर स्थापित नारियल व्याधियों को घर से दूर रखने में मदद करता है। कलश को भगवान गणेश के प्रतिनिधित्व के रूप में भी देखा जाता है जो मार्ग की सभी बाधाओं को दूर करता है। कलश की मदद से घर में उपस्थित हानिकारक ऊर्जाओं से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख, शांति और सद्भाव बना रहता है।

• कलश को पूजन में स्थापित करने से माना जाता है कि कलश में त्रिदेव और देवी शक्ति विराजमान हैं।  साथ ही, सभी तीर्थों और सभी पवित्र नदियों की उपस्थिति भी कलश में मानी जाती है। सभी शुभ अवसरों पर कलश स्थापित करने की परंपरा होती है, जिससे घर और पारिवारिक सदस्यों को समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।