मुख्य पृष्ठ हिंदू अनुष्ठान और इसका महत्व धार्मिक कार्यों में पीताम्बर धारण क्यों?

धार्मिक कार्यों में पीताम्बर धारण क्यों?

यूं तो हिन्दू धर्म में अलग अलग रंगों का अपना महत्व है, परन्तु फिर भी यदि हम ध्यान दे तो, धार्मिक कार्यों में पीला रंग की बहुतायत देखने को मिलती है। जब भी कोई मांगलिक कार्य हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान या पूजा पाठ हो, हम देखते हैं कि पंडित जी पीले रंग को ही प्रधानता देते हैं। क्या कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?  आखिर पीला रंग ही क्यों धार्मिक कार्यो में सर्वोपरि माना गया है? 

चलिए इस लेख के माध्यम से जानने का प्रयास करते हैं। 

पीला रंग या पीताम्बर का महत्व

पीले रंग के कपड़ो को पीताम्बर भी कहा गया है। श्री कृष्ण का दूसरा नाम पीताम्बर ही है। श्री कृष्ण ज्ञान के भण्डार है और उन्ही में ही ब्रह्माण्ड का असीम ज्ञान निहित है। जब पीताम्बर व ज्ञान साथ-साथ होते हैं, तो हमें यह रंग और ज्ञान के सम्बन्ध का आभास करवाते है। यही कारण है कि प्रत्येक धार्मिक कार्य में ज्ञान का साथ पाने के लिए, पीला रंग या पीताम्बर पहना जाता है।

पीताम्बर और ज्योतिष का संबंध

ज्योतिष में गुरु ग्रह को ज्ञान व सौभाग्य का कारक माना गया है। ज्योतिष में प्रत्येक ग्रह का अपना एक विशेष रंग है और गुरु ग्रह का रंग पीला है। गुरु ग्रह/Jupiter planet एक धार्मिक प्रवृत्ति का ग्रह है जो व्यक्ति को धर्म व अध्यात्म की ओर अग्रसर करता है। यह कहा जाता है कि यदि किसी को गुरु ग्रह को मजबूत करना हो तो उसे पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए व साथ ही साथ पीले रंग की वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। गुरु ग्रह जिस भी व्यक्ति पर कृपा बरसाते हैं उस व्यक्ति के जीवन में कभी भी धन-धान्य व मान-सम्मान की कमी नहीं रहती। यहीं से हम पीले रंग की शुभता का अनुमान लगा सकते हैं। यही कारण है कि बृहस्पतिवार को देवगुरु की कृपा पाने के लिए, अधिकतर लोग पीले वस्त्र पहनते है । 

पीताम्बर पहन कर पूजा करने से हम धार्मिक ग्रह बृस्पति की ऊर्जा को संचारित करते है, जो हमें अत्यंत शुभ फल प्रदान करती है। यह हमारे मन को एकाग्रचित करने में भी सर्वोपरि है, पीताम्बर पहनने से हमारा मन एकाग्रचित होकर पूजा में लगा रहता है और हमें पूर्ण शुभ फलों की प्राप्ति होती है। हम सभी कॉस्मिक एनर्जी से घिरे हुए है और हमारा यह प्रयास होना चाहिए की हम इनमे से सकारात्मक एनर्जी को ही चुनें। बृस्पति की एनर्जी जो पीले रंग द्वारा आकर्षित होती है, हमें सबसे अधिक शुभ फलदायी स्थिति प्रदान करती है। यही कारण है कि पूजा व अन्य धार्मिक कृत्यों में हम पीताम्बर धारण करते है।      

पीताम्बर और वैराग्य 

गुरु ग्रह ज्ञान का द्योतक है और जब किसी को सही मायने में ज्ञान प्राप्त होता है, अर्थात जब वह जीवन व मृत्यु के सच को गहराई से समझ लेता है, तो उसमे वैराग्य जन्म लेता है। उस व्यक्ति की सांसारिक सुखों से आसक्ति छूटने लगती है। शास्त्रों में भी कहा गया है की जब हम पूजा या अन्य कोई धार्मिक विधान करने बैठते है तो हमें पूर्ण समर्पण के साथ पूजन में मन लगाना चाहिए। उस समय सांसारिक विषयों में आसक्ति हमें, हमारे मूलभूत लक्ष्य से भटका सकती है। ऐसे में पीताम्बर पहनने से हम अपने मन को एकाग्रचित कर पाते है और सांसारिक विषय वस्तु से ध्यान हटा कर प्रभु की भक्ति में पूर्णतः लीन हो जाते है। पीला रंग पहनने से हम कुछ देर के लिए सांसारिक भोगों से दूर एक सन्यासी के तरह केवल धर्म में मग्न हो जाते है। ऐसा करने से अंततः हम बहुत अधिक पुण्य प्राप्त कर पाते है।

पीताम्बर और मांगलिक कार्य

पीला रंग सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है। सूर्य का प्रकाश भी हमें पीला ही दिखाई देता है जो जीवन का असीम स्रोत है। पीताम्बर पहनने से हम अपने शरीर में एक सकारात्मक ऊर्जा का सञ्चालन करते है जो हमें किसी भी मांगलिक कार्य को सही विधि विधान से सम्पूर्ण करने की प्रेरणा देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पीला रंग हमारी धमनियों व रक्त की प्रतिरोधक क्षमता को भी दर्शाता है। पीले रंग के उपयोग से न केवल हम अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढा सकते है बल्कि स्वयं के लिए उत्तम स्वस्थ्य भी सुनिश्चित कर सकते है। पीला रंग किसी वरदान से कम नहीं है और इसका प्रयोग कार्य के निर्विघ्न पूर्ण होने की गारंटी है।

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