अनुष्ठान और इसके महत्व | Rituals and its importance

हिंदू धर्म, धार्मिक अनुष्ठान/rituals से परिपूर्ण है, जिनका भारत में अनादि काल से ही पालन किया जाता रहा है। तथा यह  मनुष्य के जन्म से लेकर उसकी मृत्यु के बाद भी लगातार चलते रहते हैं। यह सभी अनुष्ठान धार्मिक महत्व से संबंधित होने के कारण, मनुष्य के जीवन में एक अलग ही भूमिका निभाते हैं। इन सभी को धार्मिक समारोहों के साथ, धूमधाम और भव्य प्रीतिभोज के द्वारा मनाया जाता है।

भारत में मनाए जाने वाले विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान/ Various Rituals Celebrated In India

छठी समारोह/Chhathi Ceremony:

नवजात शिशु के छह दिन का होने पर यह समारोह  मनाया जाता है। इस अवसर पर, पुजारी को आमंत्रित किया जाता है जिसके द्वारा शिशु की शुद्धि के लिए धार्मिक गतिविधियां की जाती हैं। यह भी माना जाता है कि शिशु के पूर्व जन्म के कर्मों के अनुसार, ईश्वर द्वारा उसका भाग्य लिखा जाता है।  

अन्नप्राशन/Annaprashana:

नवजात शिशु के छह से आठ महीने का होने पर, उसे पका हुआ भोजन खिलाने के लिए यह समारोह मनाया जाता है। इस प्रयोजन के लिए, पुजारी को बुलाकर, एक शुभ तिथि का चुनाव करके, शिशु के अच्छे स्वास्थ्य और विकास के लिए उस तिथि पर इसे आयोजित किया जाता है।

मुंडन/Mundan:

शिशु के चार महीने से तीन साल के बीच का होने पर, उसके जन्म के समय के बालों को मुंडवाने के लिए, इस समारोह का आयोजन किया जाता है। इस प्रयोजन के  समारोह को करने के लिए, नाई को बुलाया जाता है तथा माता-पिता द्वारा भोज का आयोजन किया जाता है।

श्राद्ध/Shraddha:

यह दिवंगत आत्मा के लिए मनाई जाने वाली पुण्यतिथि होती है। इस दिन आत्मा की शांति के लिए पुजारी को बुलाकर, धार्मिक अनुष्ठान/rituals कराया जाता है। पुजारी और जरूरतमंदों को दक्षिणा (धन) और दान दिया जाता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक जीवन में आस्था और विश्वास के महत्व को नकारा नहीं जा सकता। इसके साथ ही,  आध्यात्मिक जीवन में जिज्ञासा का भी अत्यधिक महत्व होता है, इसलिए हिंदू शास्त्रों में 'क्यों' और 'कैसे' की चर्चा के साथ ही 'क्या' की चर्चा भी की गई है। इन तीनों पहलुओं में से भक्तों को 'क्या' और 'कैसे' पर कोई आपत्ति नहीं होती है। लेकिन 'क्यों' का प्रश्न उन्हें उत्तेजित करता है, क्योंकि इस प्रश्न से उन्हें संदेह और अविश्वसनीयता का एहसास होता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अलावा, अन्य धर्मों ने इस प्रश्न पर रोक लगा रखी है। लेकिन हिंदू धर्म अपने दर्शन शास्त्र के लेखों द्वारा इस पर विस्तार से चर्चा करता है। इसका कारण यह है कि प्रश्न 'क्यों' का संतोषजनक उत्तर मिलने पर प्रश्नकर्ता का व्यक्तित्व पूरी तरह से बदल जाता है।

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