आईवीएफ शिशु और गर्भावस्था ज्योतिष गाइड।

IVF Baby

अगर आप एक संतान-विहीन दम्पति हैं और इस पृष्ठ पर आईवीएफ़ प्रक्रिया/ IVF process के लिए एक शुभ समय की तलाश में आये हैं, तो आपने आज तक का सबसे बेहतरीन गूगल सर्च की है।

मेरे पास साझा करने के लिए अनुभव है। वह संतान-विहीन दम्पति जो की संतान उत्पत्ति की बहुत सी प्रक्रियाओं से गुज़र चुके हैं। वह अंतत: कृत्रिम गर्ब्धारण प्रक्रिया से संतान उतपत्ति को प्राथमिकता देते हैं। परन्तु इसके असफल होने पर क्या होगा, क्या आपको इसका थोड़ा सा भी आभास है की यह मानसिक तनाव का कारण हो सकता है। आपको किन परिस्थियों का सामना करना पड़ सकता है, वह सब यहाँ बताई गयी हैं :

  1. आपको इस हेतु एक से अधिक बार प्रयास करना पड़ सकता है।

  2. यह एक मानसिक थकान देने वाली चुनौती है। संतान उत्पन्न ना कर पाने का विचार कभी-कभी अत्यंत कष्टकारी होता है।

  3. यह काफी हद तक एक महंगी प्रक्रिया है।

  4. एक असफल आईवीएफ़ प्रक्रिया गर्भ गिराने के ही सामान है। यह एक स्त्री को कमज़ोर कर सकती है।

  5. एक असफल आईवीएफ़ प्रक्रिया एक युगल को यह मानने पर मजबूर कर देती है कि अब उनके लिए कुछ भी संभव नहीं है, और वह सारी आशाएं छोड़ देते हैं।

  6. जो युगल आईवीएफ़ प्रक्रिया से गर्भधारण के लिए जाते हैं और अंतत: असफल हो जाते हैं, उन्होंने ज्योतिष के अनुसार इस प्रक्रिया के लिए सही समय जानने के अलावा सबकुछ किया है, जो की उनकी इच्छा पूर्ण करेगी।

 

यहाँ, आगे बढ़ने से पहले मैं चाहूंगा की आप आईवीएफ़ प्रक्रिया के द्वारा गर्भधारण करने की संभावनाओं के विषय में जान लें।

नीचे दिए गए कैलकुलेटर की सहायता से स्वयं ही संभावनाओं का आकलन कर सकते हैं।

बच्चे होने की संभावना को जांचें।

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इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) में जल्दबाजी न करें/ Don't rush at In Vitro Fertilization (IVF)

ज्योतिष/ Astrology के अनुसार बांझपन एवं बांझ अवधि के लिए जन्म कुंडली/Birth Chart में कुछ विशिष्ट संकेत होते हैं। आम तौर पर ज्योतिषशास्त्र  प्रजनन क्षमता और बांझपन के कारणों और उनके लिए ज़िम्मेदार  कुंडली संयोजनों का पता लगाता है, जिससे कई महिलाएं गुज़रती हैं। यह हार्मोन असंतुलन की स्थिति दर्शाता है, इस समस्या का निदान सतर्कता से होना चाहिए, और आपको इसका सम्मान करना चाहिए। बांझ अवधि में गर्भधारण करना जटिल और कभी- कभी असंभव भी होता है। इस समस्या से जूझ रहे लोगों का शरीर शायद अपनी सबसे बेहतरीन अवस्था में नहीं होता।

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) में जल्दबाजी न करें/ Don't rush at In Vitro Fertilization (IVF)

ज्योतिष/ Astrology के अनुसार बांझपन एवं बांझ अवधि के लिए जन्म कुंडली/Birth Chart में कुछ विशिष्ट संकेत होते हैं। आम तौर पर ज्योतिषशास्त्र  प्रजनन क्षमता और बांझपन के कारणों और उनके लिए ज़िम्मेदार  कुंडली संयोजनों का पता लगाता है, जिससे कई महिलाएं गुज़रती हैं। यह हार्मोन असंतुलन की स्थिति दर्शाता है, इस समस्या का निदान सतर्कता से होना चाहिए, और आपको इसका सम्मान करना चाहिए। बांझ अवधि में गर्भधारण करना जटिल और कभी- कभी असंभव भी होता है। इस समस्या से जूझ रहे लोगों का शरीर शायद अपनी सबसे बेहतरीन अवस्था में नहीं होता।

बांझ अवधि के गुज़र जाने की प्रतीक्षा करना एक बुद्धिमानी भरा कदम होगा।

हम जन्म के समय गैर-आनुवंशिक बांझपन के लिए उत्तरदायी हैं।एक युगल हेतु बांझपन का कारण जानना बेहतर होगा, की क्या यह उन्हें विरासत में मिला है, और अगर हाँ तो यह आस्थाई है या स्थाई। हम यह सुझाव देते हैं कि यदि संभव हो तो बांझपन का समय गुजरने की प्रतीक्षा करें। बहुत सा पैसा खर्च कर प्रकृति के विपरीत जाकर इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया करने का सुझाव नहीं दिया जाता है।

एक ऐसी प्रक्रिया का आह्वान करना जिसे करने में कोई भी मां सहज नहीं होती है, तो वह कर्म विवेकहीन होता है। इससे बेहतर है की हम मां के मन की बात के बदलने की प्रतीक्षा करें, ताकि वह उस प्रक्रिया के लिए तैयार हो सके। ऊर्जा प्रवाह के समय में संतान उत्पत्ति हेतु प्रयास किया जाना बांझपन के समय की तुलना में  अधिक लाभकारी साबित हो सकता है।

एक बांझ दंपति को यह देखना चाहिए की ज्योतिष/ Astrology के अनुसार वह किसी बाँझ अवधि के मध्य में तो नहीं हैं। अगर वह इससे गुज़र रहे हैं और होने वाली माँ की आयु इममें बाधक नहीं है तो इसके बीत जाने का इंतज़ार करना एक बेहतर विकल्प है। बांझपन के कारण का ज्योतिषीय विचार इससे निकलने के कुछ वैकल्पिक मार्ग सुझा सकता है। अकारण हुई बांझपन की समस्या कुछ ज्योतिषीय कारणों के चलते हो सकती है।

वह युगल जो गर्भधारण नहीं कर पाते हैं, कृत्रिम गर्भधारण पर विचार कर सकते हैं। भारत में बांझपन की समस्या विवाहित लोगों की लगभग एक-चौथाई आबादी के साथ है। चिकित्सीय सहायता से इसका पता नहीं लगाया जा सकता, और बांझपन का कारण अज्ञात होता है। इस समस्या को अस्पष्टीकृत बांझपन कहा जाता है। यह समस्या कुछ युगलों को प्रभावित कर सकती है, परन्तु ज्योतिष/Astrology के पास हर राज़ का समाधान है। चिकित्सा ज्योतिष/Medical Astrology गैर -विरासती बांझपन की ताकत और इसके चरम समय का पता लगाने हेतु सक्षम है।

चिकित्सा ज्योतिष अस्पष्टीकृत बांझपन से संबंधित कारकों के सम्बन्ध में जानकारी दे सकते हैं और इसके कारणों का पता भी लगा सकते   हैं। आम तौर पर, अस्पष्टीकृत बांझपन ज्योतिष के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है।नीचे दिए गए हमारे समाचार अनुभाग में,हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित मेरा लेख 'Offering simple remedies for common quandaries’ पढ़ें।

जन्म कुंडली के हिसाब से आईवीएफ़ का सही समय/ Right Timing For IVF- Per Birth Chart

प्रतिकूल समय/ Unhealthy Times

जन्म कुंडली के हिसाब से आईवीएफ़ का सही समय/ Right Timing For IVF- Per Birth Chart

प्रतिकूल समय/ Unhealthy Times

ज्योतिष के अनुसार, बाँझ अवधि सामान्य स्वास्थ्य के लिए श्रेष्ठ नहीं है। इसलिए आएवीएफ़ पक्रिया सामान्य तौर पर इस अस्वस्थ समय में ही होती हैं। इस बात को शायद ही कोइ नकाकार सके कि इस प्ररिया के दौरान समय की कोई विशेष महत्ता नहीं होती। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन अप्राकृतिक परिस्थितियों में संपन्न होता है, जो की मानक चिकित्सा का सार है और जिसकी पहचान संभव नहीं है। इसे ज्योतिष/ Astrology की दृष्टि से भ्रूण के विकास के सम्बन्ध में देखा जा सकता है।

बाँझ अवधि का अवसाद/Barren times depressions

ज्योतिष के अनुसार, बांझपन और भावनात्मक अवसाद के, सामान्य रूप से  कुछ मानक संकेतक हैं।बांझपन के कुछ संकेतक धैर्य और मनोवैज्ञानिक अवसाद को घटाते हैं। बाँझ अवधि के समय, माँ खुद को अकेली और उदास महसूस करती है, एक बच्चे की चाहत में उसकी हताशा और बढ़ सकती है। उन्हें यह एहसास दिलाएं की बच्चा पैदा करने के लिए जल्दी करना, उनके लिए अहंकारी होना होगा। परन्तु वह यह भूल जाती हैं की शिशु के लिए भावात्मक समृद्धि के समय आना अधिक उपयुक्त होगा ना की बुझे हौसलों वाले वक्त में।

बांझ अवधि में गर्भधारण जोखिम भरा हो सकता है/Insemination during infertile periods may pose a risk

चिकित्सा ज्योतिष/ Medical Astrology बाँझ अवधि में निषेचन/Fertilization से जुड़ा है। यह शिशु स्वास्थ्य के कारण गर्भपात की संभावना बढ़ा सकता है। इसलिए, इस समय में किसी भी प्रकार के गर्भधारण से बचना चाहिए। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन कई निषेचन विधियों से गर्भपात के बढ़ते जोखिम को कम करता है। हालांकि, यह वैज्ञानिक विधियां इस प्रक्रिया के अंत से जुड़े अन्य जोखिम कम नहीं कर सकती। 

आप नीचे दिए गए लिंक पर जाकर हमारे निःशुल्क कैलकुलेटर का उपयोग कर अपने बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

आईवीएफ प्रक्रिया में समस्या कब आ सकती है/ When Can One Face Problems In IVF

बांझपन की अवधि के लिए अग्रिम जाँच/ Checking for infertility period in advance

आईवीएफ प्रक्रिया में समस्या कब आ सकती है/ When Can One Face Problems In IVF

बांझपन की अवधि के लिए अग्रिम जाँच/ Checking for infertility period in advance

एक शिशु को जन्म देने का फैसला करते समय, जननी की आयु भी बहुत मायने रखती है। यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो चुका है कि यादे एक महिला शिशु को जन्म देना चाहती है, लेकिन उसी किसी कारण इसे टालना पड़ता है, तो इसे इस बात की जांच करनी चाहिए की वह अभी भी गर्भधारण के योग्य है या फिर बाँझ अवधि प्रारम्भ हो चुकी है।

बांझपन अवधि में अंतराल की तलाश/ Looking for gaps in infertility periods

अगर किसी भी कारण से, मां इंतजार नहीं कर सकती है और प्राकृतिक तरीके से गर्भ धारण करना संभव नहीं है तो बांझपन की अवधि में अंतराल खोजा जा सकता है । आईवीएफ प्रक्रिया/IVF process सफलता की गारंटी नहीं है, और  इससे आपकी जेब भी खाली हो सकती है।

प्रजनन क्षमता समय के साथ बदलती है। हर समय एक सा नहीं होता, और बाँझ अवधि की समाप्ति भी होती है। कठिन समय में गर्भधारण या बांझ होने की संभावना है। जब आप प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण करना चाहते हैं तो इसे एक महत्वपूर्ण हथियार के तौर पर प्रयोग कर सकते हैं। तीव्र  पारगमन प्रभाव अस्थायी या स्थायी बाँझ अवधि समाप्त कर सकते हैं। इस समय, अंतराल की दक्षता को आंका जा सकता है। हालांकि, कम्प्यूटर के द्वारा किया गया  अनुसंधान निश्चित तौर पर सटीकता को सुधार सकता है।

आईवीएफ प्रक्रिया की योजना और नक्षत्र/IVF planning and Nakshatras

हर महिला के लिए महीने के कुछ दिन गर्भधारण हेतु अनुकूल  होते हैं। हम ज्योतिष/ Astrology की सहायता से गर्भधारण हेतु सर्वाधिक उपयुक्त दिन का चुनाव कर सकते हैं। हमें नियमों का ध्यान रखना चाहिए और चंद्रमा के गोचर को देखना चाहिए। इसे हम महिला की जन्म कुंडली को देखकर तय कर सकते हैं।

आईवीएफ प्रक्रिया की योजना और नक्षत्र/IVF planning and Nakshatras

हर महिला के लिए महीने के कुछ दिन गर्भधारण हेतु अनुकूल  होते हैं। हम ज्योतिष/ Astrology की सहायता से गर्भधारण हेतु सर्वाधिक उपयुक्त दिन का चुनाव कर सकते हैं। हमें नियमों का ध्यान रखना चाहिए और चंद्रमा के गोचर को देखना चाहिए। इसे हम महिला की जन्म कुंडली को देखकर तय कर सकते हैं।

लग्न के नक्षत्र पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त सातवां/ seventh, चौदहवां/fourteenth Nakshatra और इक्कीसवां/ Twenty First Nakshatra नक्षत्र भी ध्यान देने योग्य है। तो हमने लग्न समूह के कुल चार नक्षत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है।

हमें लग्न के नक्षत्र, और सातवें, चौदहवें और इक्कीसवें नक्षत्र पर ध्यान देना चाहिए। यह वह चार नक्षत्र हैं  जिन्हें हमने लगन समूह में से इंगित किया है।

चंद्रमा के नक्षत्र पर ध्यान दें, चंद्रमा नक्षत्र से चौदहवें नक्षत्र पर भी ध्यान रखने की आवश्यकता है। कुल-मिलाकर चंद्र समूह में यह दो नक्षत्र हैं।

सूर्य की डिग्री के अनुसार सूर्य के नक्षत्र का ध्यान रखें। इससे चौदहवां नक्षत्र नहीं है। सूर्य समूह में यह कुल दो नक्षत्र हैं।

कुल-मिलाकर आठ नक्षत्र एक महिला को गर्भवती बना सकते हैं। आम तौर पर ऐसा होता है कि कुछ नक्षत्र तीनों समूहों में होते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में केवल छह या सात नक्षत्र ही हो सकते हैं. सामान्य नक्षत्र के साथ, यदि दो या तीन समूहों में कोई हो, तो वह नक्षत्र गर्भधारण हेतु महिला के लिए सबसे बेहतर होता है।

मासिक धर्म चक्र के चलते , आपको इसकी तारीखों का ध्यान रखना चाहिए। हम मासिक धर्म चक्र की तिथि से छह दिन बाद जा रहे थे। सातवें दिन से तेईसवें दिन तक, हमें सूची से नक्षत्र खोजना चाहिए। जिस दिन ऊपर के नक्षत्रों में से कोई एक नक्षत्र मिले, तो हमें आईवीएफ के लिए उस तिथि का चयन करना चाहिए।

कुछ जरूरी बातें जो हमें  नक्षत्र का चयन करते समय याद रखनी चाहिए/ Some of the essential points which we must remember while choosing the Nakshatra

आएवीएफ़ प्रक्रिया के दौरान केतु नक्षत्र में नहीं होना चाहिए,क्योंकि बह कभी- कभी गर्भपात की संभावना बढाता है ।

यदी आएवीएफ़ प्रक्रिया के दौरान राहू/ rahu उस नक्षत्र में विद्यमान है तो, संभावना है की किसी मृत परिवारजन की जीवात्मा गर्भ के विकास के समय उसमें प्रवेश कर सकती है।

राहू उन जीवात्माओं के लिए गर्भ में प्रवेश करने की संभावना बढ़ा देता है, जो की उसी परिवार में जन्म लेने की प्रबल इच्छा रखती हैं।

शनी/ satrun के उस नक्षत्र में होने पर बचाना चाहिए। क्योंकि जब चंद्रमा उन नक्सत्रों को स्पर्श करता है तब विष योग या पुनार्फू दोष के कारण गर्भ के विकास की गति धीमी हो जायेगी, और इसके चलते शिशु कमज़ोर होगा।

अगर आएवीएफ़ प्रक्रिया के दिन बृहस्पति/ Jupiter, चंद्रमा/ Moon के साथ है तो यह माना जाना चाहिए कि यह प्रक्रिया सफल होगी और एक स्वस्थ शिशु का जन्म होगा।

आएवीएफ़ प्रक्रिया के लिए माह का चुनाव करने से पहले पति और पत्नी दोनों की कुंडली में नौ महीने बाद की ग्रह स्थिति देखी जानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए की उन्ही ग्रहों की पुनरावृति शिशु की कुंडली में हो रही है अथवा नहीं। एक शिशु का जन्म माता-पिता दोनों की कुंडली के समर्थन से होता है, इसलिए ग्रहों का एक विशेष संयोजन शिशु द्वारा भी साझा किया जाएगा।

कुछ तरीके हैं जिनके द्वारा आएवीएफ़ प्रक्रिया के लिए सर्वोत्तम अवधि का चुनाव किया जा सकता है।

इन विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया पर किसी विशेष मार्गदर्शन हेतु:

आईवीएफ गर्भावस्था पर ऑनलाइन रिपोर्ट लें या

ज्योतिषीय सत्र में मुझसे परामर्श करें।

आप यह भी पढ़ सकते हैं कि ज्योतिष आपको बच्चे को गोद लेने में कैसे मदद करता है, माता-पिता और बालक  का सम्बन्ध, शिशु को  गर्भ धारण करने का सर्वोत्तम समय और बच्चे का नामकरण:  बालक का सही सही नाम चुनने के लिए एक मार्गदर्शक। 

नवीन ज्योतिष समाचार: डॉ० विनय बजरंगी

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