जन्म कुंडली के आधार पर संतान गोद लेना

adopt a baby

आज के समय में बच्चों को गोद लेना बहुत आम हो गया है। खासकर यह प्रक्रिया उन लोगों में आम है जो जैविक रूप से संतान पैदा नहीं कर पाते हैं। संतान गोद लेने के कारण बहुत सारे हो सकते हैं, लेकिन उनको आपकी जन्म कुंडली/ horoscope से देखा जा सकता है। नीचे कुछ कारण दिए हैं जिसकी वजह से संतान को गोद लेने की समस्या हो सकती है।

1.       बांझपन

2.       महिलाओं को कुछ स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ रहा हो।

3.       दंपति आनुवंशिक विकार बचना चाहते हैं।

4.       एकल माता-पिता परिवार शुरू करने में रुचि रखें।

5.       समलैंगिकता।

6.       एक अनाथ को गोद लेने का मन बना लेना।

7.     किसी ऐसे व्यक्ति की मदद करना जो किसी बच्चे के पालन पोषण के लिए वित्तीय स्थिति में ना हो।

कारण कोई भी हो, लेकिन आपकी कुंडली/horoscope में इन सभी का संकेत दिया गया है।चलिए आपकी कुंडली में संतान गोद लेने की संभावना का पता लगाते हैं।

संतान गोद लेने की संभावना की गणना करें!

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 ज्योतिष और संतान गोद लेने में संबंध/ Child Adoption and Astrology

संतान गोद लेने की संभावना के बारे में बात करने से पहले हमें ऊपर दिए गए सात कारकों को आपकी कुंडली में देखना अनिवार्य है, क्योंकि यह सभी संतान गोद लेने में अहम भूमिका निभाते हैं।

 ज्योतिष और संतान गोद लेने में संबंध/ Child Adoption and Astrology

संतान गोद लेने की संभावना के बारे में बात करने से पहले हमें ऊपर दिए गए सात कारकों को आपकी कुंडली में देखना अनिवार्य है, क्योंकि यह सभी संतान गोद लेने में अहम भूमिका निभाते हैं।

एक बार ऊपर दिए गए कारकों को आपकी कुंडली में जांच लिया जाए तो फिर आप अपनी कुंडली में गोद लेने की संभावना का पता लगा सकते हैं। आपकी कुंडली में बच्चे को गोद लेने के विभिन्न पहलू और प्रकार होते हैं। ज्योतिष में हर स्थिति को समझने का अलग तरीका होता है और उन स्पष्टीकरण को ध्यान में रखकर अगर कोई सलाह दी जाती है तो यह जातक के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। कौन से ग्रहों के संयोजन आपको संतान गोद लेने में सहायता करते हैं और कौन से संयोजन आपके लिए समस्या खड़ी करते हैं। ज्योतिष में ग्रहों के संयोजन साफ साफ बता देते हैं कि आपको लड़के या लड़की में से किसे गोद लेना चाहिए या फिर किसी प्रकार से बच्चे को गोद लेना आपके लिए लाभदायक होगा।

संतान को गोद लेने के लिए ग्रहों का संयोजन/ Which are the Planetary combinations for Child Adoption

अब मैं आपको ग्रहों के कुछ संयोजन के बारे में बताने जा रहा हूं जो संतान को गोद लेने की प्रक्रिया का संकेत देते हैं और जातक का सहयोग करते हैं। इन तरह के संयोजन से इस बात का बिल्कुल भी नहीं पता चल सकता कि आपके लिए किस प्रकार संतान को गोद लेना संभव और व्यावहारिक है। इन सभी तरह के संयोजन को नीचे लिखा गया है।

संतान को गोद लेने के लिए ग्रहों का संयोजन/ Which are the Planetary combinations for Child Adoption

अब मैं आपको ग्रहों के कुछ संयोजन के बारे में बताने जा रहा हूं जो संतान को गोद लेने की प्रक्रिया का संकेत देते हैं और जातक का सहयोग करते हैं। इन तरह के संयोजन से इस बात का बिल्कुल भी नहीं पता चल सकता कि आपके लिए किस प्रकार संतान को गोद लेना संभव और व्यावहारिक है। इन सभी तरह के संयोजन को नीचे लिखा गया है।

1. सरोगेसी के माध्यम से गोद लेना/ Adoption through Surrogacy

सरावली 34.25 1. यदि पांचवां भाव/Fifth House शनि के संभागों में पड़े (जैसे राशि, नवमांश, द्रेककाना, इतयादी) और यह बृहस्पति, मंगल या सूर्य के बिना बुध में गोचर करे, तो सरोगेसी के जरिए बच्चे के जन्म की संभावना बनती है। सरोगेसी एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें किसी और महिला के जरिए बच्चे को जन्म दिया जाता है। 2. कुछ इसी प्रकार का परिणाम आता है जब बुध राशि पांचवे भाव में नियुक्त हो और शनि के प्रभाव में हो लेकिन वह किसी अन्य ग्रह के प्रभाव में ना आए।

·         गोद लेने और दूसरे व्यक्ति को अपने बच्चे की परवरिश करने देने का संयोजन।

·         जब शनि और बुध पांचवें भाव/Fifth House की राशि पर प्रभाव डाले तो यह बच्चे को गोद लेने का संकेत देता है। आगे के लेख से आपको इस विषय में स्पष्ट जानकारी मिल जाएगी। सारावली ३४.२ ९: यदि पांचवें भाव शनि से संबंध रखता है और वह शनि के द्वारा ही कब्जा किया गया है वह भी बिना चंद्रमा के प्रभाव के तो जातक इस प्रक्रिया के जरिए बच्चे को जन्म देता है। जातक की कुंडली में चंद्रमा का प्रभाव पड़ने के साथ साथ पांचवें भाव में बुध की स्थिति भी इसी प्रकार का प्रभाव डालती है।

·         आगे के लेख में आप देखेंगे कि कैसे पहलू वाला ग्रह (पांचवे भाव पर) बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया का पता लगाने में बहुत सहायता कर सकता है। यहां मुख्य बात यह है कि पांचवे भाव पर बृहस्पति, मंगल या सूर्य की दृष्टि हो।

·         चंद्रमा और शुक्र को भी शामिल करते हैं। चंद्रमा का संयोजन जातक को किसी माता पिता से या फिर किसी गर्भवती महिला से बच्चों को गोद लेने का संकेत देता है। शुक्र दर्शाता है कि आप बच्चे को गोद लेने के लिए विवाह करते हैं।

·         यदि पांचवें भाव पर किसी भी ग्रह का कोई प्रभाव नहीं पड़ता तो जातक के मन में कभी भी बच्चों को पालने की बात नहीं आएगी और वह किसी और को भी ऐसा करने नहीं देगा।

2. कुंडली में बच्चे को गोद लेने का संकेत/ Signs of Baby Adoption in birth chart

सारावली ३४.२ ९ 1. यदि पांचवां भाव शनि के साथ संबंध रखे और चंद्रमा के प्रभाव के साथ शनि इस भाव में काबिज हो तो जातक किसी बच्चे को गोद ले सकता है या फिर किसी खरीद के माध्यम से बच्चे को गोद ले सकते हैं। 2. यह प्रभाव तब भी पड़ेगा जब बुध की स्थिति पांचवे भाव में होगी जिस पर चंद्रमा का प्रभाव का पड़ेगा।

·         कुछ माता-पिता गोद लेने या जन्म देने वाले माता-पिता या फिर अन्य स्रोतों से खरीदकर बच्चों का गोद लेते हैं।

·         माता पिता की कुंडली/Natal Chart में कुछ संयोजन होते हैं जिन्हें देखकर इस विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 

·         बृहस्पति, सूर्य और मंगल बच्चे के जन्म का कारक होते हैं। चंद्रमा जातक के गर्भावस्था को दर्शाता है, सूर्य जातक के नए जीवन को जन्म देने की क्षमता को बताता है, और बृहस्पति विवाह के फल के रूप में संतान प्राप्ति को दर्शाता है।

·         प्राकृतिक बच्चे का जन्म के समय शनि सभी ३ ग्रहों का विरोधी होता है। शनि बढ़ती उम्र और कम काम उत्तेजना को दर्शाता है और साथ में महिलाओं में भी उत्तेजना की कमी को दर्शाता है। बुध शनि का समूह होता है जो जातक को उस समय उम्र में नियंत्रण करने लगता है, जब उसके अंदर यौन के प्रति झुकाव शुरू भी नहीं हुआ होता है। इसलिए यह दो ग्रह प्राकृतिक रूप से बच्चे ना होने की क्षमता को दर्शाते हैं।

·         प्रभाव प्रमुख हो जैसे शनि या मंगल का पांचवे भाव पर प्रभाव जो गर्भवस्था के कारक से प्रभावित हो सकता है।

·         शनि या बुध का संयोजन, (2) शनि।

·         शनि जो पांचवें भाव में हो, 3. शनि।

·         शनि जो पांचवे भाव के स्वामी के साथ हो, 4. शनि

·         शनि जो पांचवे घर या पांचवें भाव के स्वामी के साथ बंधे हैं।

·         यदि पांचवें भाव पर चंद्रमा का प्रभाव पड़े तो जातक के मन में बच्चा गोद लेने की इच्छा होने के बावजूद भी उनकी परिवार वाले इस क्रिया के लिए मना कर देते हैं। पंचम भाव पर चंद्रमा की दृष्टि या पंचम भाव के स्वामी या उनके साथ संयोजन से यह पता चल सकता है कि जातक किसी अन्य संतान को गोद लेगा या नहीं।

3. बिना इजाजत के बच्चे को गोद लेना/ Adopting a Child without consent

सरावली 34.30। पांचवे भाव/Fifth House में शनि होता है, जो किसी के भी प्रभाव में नहीं आता है और यदि उस भाव पर राज मंगल का हो जो सप्तमेश में आ जाए, तो जातक एक बड़े बच्चे को गोद ले सकता है वह भी उसके असली माता-पिता से आज्ञा लिए बिना।

·         शनि का पांचवे भाव पर प्रभाव बताता है कि जातक को प्राकृतिक रूप से संतान नहीं होगी।

·         यदि चंद्रमा एक साथ पांचवें घर को प्रभावित नहीं करता है, तो जातक अनाथालय से वैध रूप से संतान गोद लेने का इच्छुक नहीं होगा।

·         यदि पांचवां भाव मंगल के सप्तमसा में आ जाए, तो यह संकेत देता है कि जातक हिंसा को संतान प्राप्ति के लिए प्रयोग कर सकता है। जातक बल, सेना, पुलिस, या अपहरण के प्रयोग को दर्शाता है।

·         एक बार जब आप भाव के देशांतर को जान लेते हैं, तो पांचवे भाव के सप्तमसा का निर्धारण करना आवश्यक हो जाता है। लग्न के देशांतर और उसी देशांतर (लगान के रूप में) के साथ पांचवें भाव में एक बिंदु को रखकर उसे जाना जाता है। उस बिंदु को पांचवे भाव का पूछ/Cusp भी कहा जाता है और यह उसी भाव के अनुसार पांचवे भाव के मूल को दर्शाता है जिससे जातक की कुंडली में संतान को गोद लेने के संकेत देता है।

आप हमारे वेबसाइट पर मौजूद निःशुल्क कैलकुलेटर का प्रयोग करके भी इस विषय में बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

4. अपने जन्म चार्ट में एक छोड़ा हुए या अनाथ बच्चे को अपनाना

सारावली 34.33। यदि पांचवें भाव में मंगल शासन कर रहा हो और शनि के अलग अलग हिस्सों में आ जाए जो सूर्य के साथ संबंध में हो, तो जातक को पुत्र की प्राप्ति हो सकती है। वह पुत्र अपने असली माता-पिता से किसी भी कारणवश दूर हुआ होगा, इसलिए इसे दूसरे व्यक्ति गोद ला पाएंगे।

·         बच्चों के गोद लेने के लिए ग्रहों का संयोजन आपने पिछली पंक्ति में पढ़ लिया होगा (सारावली 34.31-32) । सूर्य के सिवा, जो पांचवे भाव में नियुक्त है, जो शनि द्वारा शासित है, मंगल विराजमान हो, जो सूर्य से प्रभावित होते है।

·         बच्चे को गोद लेना, संक्षेप में, पंचम भाव में शनि (राशि, नवांश या द्रेकाण में), मंगल का शासन होना चाहिए, जिसे पंचम भाव (उल्लेखित भाग में) में रखा जाना चाहिए और साथ ही साथ उस पर सूर्य की दृष्टि भी प्राप्त होनी चाहिए।

·         यह ग्रहों का संयोजन बताता है कि जो बच्चे अपने माता पिता द्वारा त्यागा हुआ है, उसे जातक दया भावना के कारण गोद ले लेता है।

·         आज के समय में ऐसी घटनाएं बहुत कम होती है।

·         निम्नलिखित परिस्थितियों में उपदेश प्राप्त करना चाहिए।

·         शनि द्वारा पांचवा भाव मंगल ग्रह से जुड़ा या आकांक्षी है।

·         मंगल द्वारा पांचवां भाव/Fifth House शनि ग्रह से जुड़ा या आकांक्षी है।

·         इसके साथ ही, यदि शनि पांचवें भाव पर शासन करें, सूर्य कि नियुक्ती असामान्य परिस्थितियां की तरफ संकेत देती है। पांचवे भाव में चंद्रमा की नियुक्ति पर मंगल का शासन उतना ही प्रभाव डालती है।

·         यदि इसी सिद्धांत को मूल बना कर काम किया जाए, जो किसी के पांचवे भाव के राशी, नवमेश या द्रेष्काण में शनि, मंगल-सूर्य या शनि-मंगल-चंद्रमा की स्वामित्व, नियुक्ति या युति बच्चे के जन्म की कुछ असामान्य परिस्थितियों को दर्शाती है।

5. विधवा से बच्चा गोद लेना

सारावली 34.34।  पांचवे भाव का शनि के वर्ग में विराजमान होना और इस भाव में चंद्रमा और शनि का होना, जो सूर्य और शुक्र के साथ युति में हो, तो जातक को एक विधवा से दोबारा विवाह से करके संतान मिल सकता है।

कभी कभी व्यक्ति उस महिला से विवाह करता है जिसकी पहले से ही कोई संतान होती है। उस महिला के पति की मृत्यु बच्चे के जन्म के बाद होती है।

·         इसी तरह की घटना तब भी हो सकती है यदि कोई महिला ऐसे पुरुष से विवाह करे जिसका पहले से ही कोई संतान हो।

·         पुरुष जातक की पत्नी का पिछले विवाह से संतान हो सकता है।

·         हर व्यक्ति को इस संयोजन की महत्वता समझनी होगी क्योंकि यह हर व्यक्ति के कुंडली में मौजूद नहीं होता।

·         शनि पांचवें भाव में शासन करे। चंद्रमा और शनि पांचवें भाव में नियुक्त हो। शुक्र और सूर्य पांचवे भाव पर पहलू करे।

·         बदलाव निम्नलिखित तरीकों से हो सकते हैं: 1. चंद्रमा पांचवे भाव के शनि के साथ किसी भी स्थान पर हो, लेकिन वह स्थान पांचवे भाव से अलग होना चाहिए। 2. शुक्र या सूर्य पांचवे भाव के साथ पहलु करें। शुक्र या सूर्य में से एक पांचवे भाव पर प्रभाव डाले और दूसरा ग्रह पांचवे भाव के स्वामी/Fifth House Lord पर। 4. शुक्र या सूर्य में से एक पांचवे भाव/Fifth House के साथ हो और दूसरा पांचवा भाव के स्वामी के साथ। 5. शुक्र या सूर्य में से एक पांचवे भाव के साथ जुड़े और दूसरा पांचवे भाव के साथ पहलू में हो।

·         किसी भी तरह की गोद लेने की प्रक्रिया को शनि के पांचवे भाव के शासन के जरिए देखा जा सकता है। चंद्रमा और शनि की नियुक्ति अलगाव या मृत्यु जैसी घटनाओं को दर्शाते हैं। वहीं शुक्र और सूर्य का प्रभाव पुनर्विवाह का संकेत देता है। शुक्र विवाह का कारक होता है, वही सूर्य धर्म का स्वामी होता है।

·         आम तौर पर, पांचवे भाव में जो भी ग्रह होता है वही बच्चों को गोद लेने का कारण बताता है (शनि बच्चे को जन्म देने की क्षमता के ना होने का संकेत देता है)। पांचवें भाव में मौजूद ग्रह गोद लेने की प्रक्रिया को दर्शाती है (मंगल हिंसा या त्याग को दर्शाता है और शनि मृत्यु की संकेत देता है।)। कुछ ग्रह के संयोजन जातक को बच्चे गोद लेने से रोक सकती है। (सूर्य उदारता को दर्शाता है, शुक्र विवाह का संकेत देता है।)

6. अविवाहित महिला से संतान (बिना विवाह के मां बनना)

यदि सातवें भाव में सूर्य चंद्रमा के साथ हो, या चंद्रमा पांचवे भाव/Fifth House में संयोजन में हो, या फिर सूर्य की संगत में हो, तो ज्योतिष के अनुसार इस बात की संभावना बनती है कि जातक किसी अविवाहित महिला से बच्चा गोद लेगा/ child adoption through an unmarried girl as per astrology

·         उपर्युक्त संयोजन का एक और रूपांतरण यह है कि विवाह के माध्यम से बच्चे को गोद लिया जा सकता है, जिसमें विवाह से पहले ही महिला की संतान होती है।

·         सूर्य रचनात्मक संतान का सत्तारूढ़ संकेतक होता है। भगवान सूर्य के हाथ में दो कमल सृजन का संकेत देता है। कमल, भगवान ब्रह्मा का संकेत होता है, जो सृजन के स्वामी है। भगवान ब्रह्म कमल के फूल पर विराजमान होते हैं जो भगवान विष्णु की नाभि से निकलता है। चंद्रमा गर्भावस्था का कारक होता है, वह मां को दर्शाता है।

·         सूर्य और चंद्रमा अनौपचारिक रूप से गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ा हुआ है। बृहस्पति ग्रह अधिकृत धर्म के माध्यम से संतान के जन्म का अधिकार प्रदान करता है।

·         जब चंद्रमा और सूर्य विवाह के भाव (जो सातवां भाव/Seventh House होता है) या फिर प्रसव के भाव (जो पांचवें भाव होता है) पर प्रभाव डाले तो ग्रहों का संयोजन अविवाहित लड़की से विवाह का संकेत देता है।

·         हर व्यक्ति को इन संयोजन के परिणाम को नहीं भूलना चाहिए। क्योंकि यह संयोजन तभी पक्के हो पाते हैं जब स्थिति उनके पक्ष में होती है। ऐसा कई बार देखा गया है कि जब भी कोई जातक किसी अविवाहित लड़की से बच्चे को गोद लेते हैं, तो उस जातक की कुंडली/Horoscope में ऊपर दिए गए संयोजन बनते हैं। लेकिन इनके विपरीत होने की संभावना बहुत कम होती है। यह भी देखा गया है कि जिनकी कुंडली/Birth Chart में यह संयोजन बनता है वह अकेली महिला से बच्चे को अधिग्रहण कर लेते हैं। यह भी हो सकता है कि वह महिला विवाह के पूर्व ही गर्भवती हो जाए।

·         सारावली 34.36 – यदि पांचवें भाव गणमान्य व्यक्तियों का वितरण की स्थिति में हो और चंद्रमा इस भाव में विराजमान हो, और सूर्य शुक्र के साथ संयोजन में हो, तो इस बात की संभावना बढ़ जाएगी कि जातक उस महिला से बच्चा गोद लेगा जो विवाह के समय गर्भ से होगी।

·         यही पिछली पंक्ति में ऊपर कहा गया है। स्थिति अंतिम पंक्ति के समान है, अर्थात्, सातवें भाव या पांचवें भाव में सूर्य-चंद्रमा का संयोजन।

·         पांचवे भाव के शासक संकेत देते हैं कि जातक उन गर्भवती महिलाओं से संतान गोद ले सकता है। मुझे शनि द्वारा पंचम भाव के स्वामी की याद आती है जो संतान पैदा करने की क्षमता की कमी के कारण गोद लेने का संकेत देता है। पांचवे भाव के स्वामी गोद लेने के पीछे का मुख्य कारण बन सकते हैं।

·         शुक्र पांचवें भाव पर प्रभाव डाले, तो यह दर्शाता है कि जातक विवाह के समय संतान को गोद ले सकता है। यही बात सारावली 34.34 में भी कही गई है कि शुक्र विवाह के समय संतान को गोद लेने की संभावना को दर्शाता है।

7. आपकी कुंडली में एक महिला दास से बच्चे का संकेत

सारावली 34.34। यदि पांचवें भाव नवमांश में हो और शुक्र से प्रभावित हो, तो जातक अपने नौकर के बच्चे को गोद ले सकता है। कुछ विद्वानों द्वारा सलाह दी जाती है कि जब चंद्रमा का नवमांश और चंद्रमा एक साथ आ जाए तो भी जातक की कुंडली में यह योग बनता है।

·         यह प्रतिकूल संयोजन होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दुनिया के बहुत सारे देशों में गुलामी और महिलाओं के खिलाफ बदसलूकी कम होती जा रही है।

·         लेकिन आज भी, बहुत सारे बच्चे जबरन यौन संपर्क की वजह से जन्म लेते हैं। ऐसे मामलों में सहमति के बिना यौन संपर्क से ऐसी समस्या उत्पन्न होती है। कभी कभी महिला इस विषय में खुल कर नहीं बोल पाती क्योंकि वह सामाजिक दबाव में आ जाती है या फिर उसे भावनात्मक रूप से कमजोर कर दिया जाता है।

·         शुक्र संभोग का संकेतक होता है, जो खुशी और आराम देता है। पांचवें भाव को शुक्र के नवमांश द्वारा शासन करे तो यह संतान के गोद लेने का कारण बन सकता है। मंगल की भागीदारी होने पर बिना सहमति के संभोग या शक्ति के उपयोग की संभावना को दर्शाता है। साथ ही, बृहस्पति और सूर्य की भागीदारी एक अधिकृत संबंध में सहमति के माध्यम से संभोग का संकेत देता है (धर्म के अनुसार)।

·         पांचवे भाव/Fifth House पर शुक्र का पहलू विवाह का संकेत देता है जिसे किसी महिला के साथ संबंध के बाद किया जाता है।

·         चंद्रमा की भागीदारी उच्च भावनात्मक लगाव का संकेत देता है और इसलिए यह विवाह से पूर्व गर्भवती होने का संकेत देता है, जो विवाह के योग में बदल सकता है।

निष्कर्ष – ऊपर दिए गए लेख से आप सरलता से समझ जाएंगे कि किस स्थिति में हर व्यक्ति को बच्चों को गोद लेना चाहिए। सबसे पहले आपको यह जानना होगा कि क्या आपकी कुंडली संतान को गोद लेने के योग को समर्थन देती है कि नहीं। दूसरा, संतान गोद लेने के बहुत सारे तरीके हैं, तो आपकी कुंडली के अनुसार आपके लिए कौन सा रास्ता आपके लिए उचित रहेगा। उसके बाद आप किसी अच्छे ज्योतिषी से अपनी जन्म कुंडली का आकलन करवा सकते हैं।

किसी भी विशिष्ट मार्गदर्शन के लिए नीचे किसी भी तरीके से हमारी सहायता कर सकते हैं।

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