संतान हेतु ज्योतिषीय भविष्यवाणी

बच्चों के आ जाने से जीवन में एक नई ताजगी और नयापन आता है। विवाह के पश्चात ही परिवार वाले उत्सुक होते हैं कि वह विवाहित जोडा माता पिता कब बनेंगा। हर व्यक्ति अपने बच्चों के बारे में जन्म कुंडली से जान सकता है। आम तौर पर लोग विवाह के कुछ समय बाद ही बच्चों के बारे में सोचते हैं। लेकिन समस्या तब खडी होने लग जाती है जब बच्चे होने में देरी हो जाए, और लोग अपने अपने मन में पहले से ही धारणा बना लें कि ऐसा क्यों हो रहा है? लेकिन आपको इस विषय में घबराने के जरूरत नहीं है क्योंकि एक ज्ञानी ज्योतिषी आपको आपके बच्चे के जन्म का समय आपकी जन्म कुंडली/ child birth from the date of birth से बता सकते हैं। लेकिन आपको समझना होगा कि बाल ज्योतिष/Child Astrology बच्चों के जन्म के समय का पता लगाने से बहुत अलग है। असल में बच्चों के जन्म के समय और अन्य जानकारी प्राप्त करना बच्चों के लिए ज्योतिष/Child Astrology का एक हिस्सा है। मैं इस लेख के जरिए आपको इस विषय में जन्म तिथि के आधार पर जानकारी देने का प्रयास करूंगा।

जन्म की तारीख के आधार पर बाल ज्योतिष/ Child astrology according to date of birth

सबसे पहले आपको समझना होगा कि बाल ज्योतिष में संतान के जन्म के समय का पता लगाने के साथ साथ बहुत कुछ है। यह बाल ज्योतिष का एक उपकरण है जिससे बच्चे के जन्म से पहले ही उस बच्चे के बारे में ज्योतिष से पता किया जा सकता है। संभावित तौर पर विवाह के बाद यह ज्योतिष की सबसे महत्वपूर्ण शाखा होती है। बाल ज्योतिष बच्चों के जन्म से पहले ही उनके बारे में बता सकता है और आपको एक व्यक्ति के जीवन को संतान कैसे प्रभावित करेगा इस प्रश्न का भी उत्तर मिल जाएगा। वैदिक ज्योतिष/Vedic Astrology में कुंडली में कुछ विशिष्ट भाव होते हैं जिनका आकलन करके बाल ज्योतिष के सभी पहलू को जान सकते हैं। जन्मतिथि के आधार पर बाल ज्योतिष/Child Astrology as per birth date बाल कुंडली से बिल्कुल अलग है। जहां एक तरफ बाल ज्योतिष में माता पिता की जन्म कुंडली के आधार पर भविष्यवाणी की जाती है, वहीं दूसरी तरफ बाल कुंडली बच्चों की जन्म कुंडली का प्रयोग होता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, बाल ज्योतिष में बहुत चीजें हैं जिनका मानव जीवन में बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है। लेकिन इस प्रक्रिया में बच्चों की कुंडली का प्रयोग भी नहीं होता है। जब भी कोई व्यक्ति इस प्रक्रिया से गुजरता है, तो उसे अपने बच्चे की कुंडली कभी नहीं दिखानी चाहिए। आप इस लेख को अंत तक पढ़ कर इस विषय को और करीब से जान जाएंगे। यदि आप इस बात को जानने के उत्सुक हैं कि हमें इस प्रक्रिया के दौरान बच्चों की कुंडली/Natal Chart को क्यों नहीं दिखानी चाहिए।

बाल ज्योतिष आपकी सहायता कैसे करती हैं?/ How does astrology for children help you?

हर व्यक्ति को बाल ज्योतिष की अहमियत पता होना चाहिए और यह भी पता होना चाहिए कि यह आपकी कैसे सहायता कर सकता है? यह आपको आम जीवन में देखने को मिल जाएंगे। सत्य-जीवन की घटना आपको बाल ज्योतिष के बारे में बहुत सारी बातों को समझने में सहायता कर सकता हैं। आपको उस उदाहरण से बच्चे के जन्म में देरी, बच्चे का ना हो पाना, गोद लेने, बच्चे का नाम, अन्य बच्चों की बीमारी, आईवीएफ, गर्भधारण की तारीख और समय, बच्चों को मादक पदार्थ की लत। बच्चों को व्यवहार और उनका माता पिता के साथ संबंध भी जन्मतिथि के आधार पर बाल ज्योतिष/Child Astrology as per birth date से पता चल सकता है।

बाल ज्योतिष आपकी सहायता कैसे करती हैं?/ How does astrology for children help you?

हर व्यक्ति को बाल ज्योतिष की अहमियत पता होना चाहिए और यह भी पता होना चाहिए कि यह आपकी कैसे सहायता कर सकता है? यह आपको आम जीवन में देखने को मिल जाएंगे। सत्य-जीवन की घटना आपको बाल ज्योतिष के बारे में बहुत सारी बातों को समझने में सहायता कर सकता हैं। आपको उस उदाहरण से बच्चे के जन्म में देरी, बच्चे का ना हो पाना, गोद लेने, बच्चे का नाम, अन्य बच्चों की बीमारी, आईवीएफ, गर्भधारण की तारीख और समय, बच्चों को मादक पदार्थ की लत। बच्चों को व्यवहार और उनका माता पिता के साथ संबंध भी जन्मतिथि के आधार पर बाल ज्योतिष/Child Astrology as per birth date से पता चल सकता है।

सत्य जीवन की घटना –

अरुण और वरुण दो सगे भाई थे जिनके बीच में 2 साल का अंतर था। अरुण का विवाह पहले हुआ था। अरुण की पत्नी मानसिक तौर पर तैयार थी लेकिन दोनों ने निर्णय लिया था कि वह बच्चों के बारे में थोड़ी देर बाद सोचेंगे। उन्होने जरूरत पड़ने पर गर्भपात भी करवाया। जब विवाह को कुछ समय हो गया तब उन्होने निर्णय लिया कि अब उन्हें अपने परिवार को आगे बढ़ाना चाहिए, लेकिन उनकी सारी मेहनत फलित नहीं हो रही थी। सुषमा जो अरुण की पत्नी थी, वह मां नहीं बन पा रही थी। इस विषय में उन्होंने चिकित्सक से भी परामर्श लिया, लेकिन फिर भी परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया।

अरुण के छः साल बाद वरुण ने विद्या से विवाह किया। दो साल के अंदर विवाहित जोड़े के जुड़वा बच्चे हुए, एक लड़का और एक लड़की। हालांकि यह उनके परिवार के लिए खुशी का मौका था, लेकिन वरुण और अरुण के माता पिता इस बात से चिंतित थे कि अरुण का परिवार आगे नहीं बढ़ पा रहा था। बहुत चर्चा विमश करने के बाद इस बात का निर्णय लिया गया कि अरुण, वरुण की बेटी को गोद लेगा।

अरुण और सुषमा अपनी नई जिम्मेदारी को निभाने के लिए उत्सुक थे। उन्होने उस बच्ची का नाम अवनी रखा और उसे प्यार और स्नेह से बड़ा किया। पांच साल बाद सुषमा को फिर मां बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ लेकिन इस बार गर्भधारण में कुछ जटिलताएं थी। चिकित्सक की परामर्श पर वह एक सी-सेक्शन नाम की प्रक्रिया से गुजरे जिससे उन्हें एक स्वस्थ लड़का हुआ। बच्चे के जन्म से परिवार में खुशी का संचार हुआ।

जैसे जैसे समय बीतता गया, बच्चे बडे होते गए। अवनी पढ़ाई में होशियार थी, वहीं जो लडका था उसका पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था। अवनी ने अपनी पढ़ाई के दम पर पीएचडी के लिए दाखिला दे दिया वहीं आकाश (अरुण का बेटा) को किसी ना किसी तरह से एक विद्यालय में दाखिला दिलाया। विद्यालय में भी आकाश मादक पदार्थ की लत का शिकार हो गया।

अरुण और सुषमा मेरे जमजमान थे, जो अपने बेटे आकाश को मादक पदार्थ की लत से बाहर निकालने के लिए सहायता लेने के लिए आए थे। उनके परिवार ने आकाश को लाड और प्यार से बड़ा किया था, लेकिन अब मादक पदार्थ की लत के कारण आकाश के मन में अपने माता पिता और बहन के लिए कोई इज्जत नहीं है। वह बस अब मादक पदार्थ (Drugs) का आदि हो गया था।

मैंने उनके सामने उनकी कहानी के तथ्य को रखने का पूरा प्रयास किया। लेकिन संयोग से दोनों भाइयों की कहानी में वह बिंदु आ रहे थे जो बाल ज्योतिष/ Child astrology की तरफ इशारा करती है। अब मैं बाल ज्योतिष के उन बिंदुओं के बारे में बताने वाला हूं जो एक माता पिता के जीवन में उनके बच्चे के जन्म के बाद और पहले प्रभावित करती है।

बाल ज्योतिष माता पिता कि कैसे सहायता करती है?/ How does Child astrology help parents?

जैसे की आपने ऊपर के उदाहरण में देखा होगा कि बाल ज्योतिष आपको उस समय से सहायता करता है जब आप माता पिता बनने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह प्रक्रिया जातकों को बच्चों के लिए सही समय का संकेत दे सकते हैं, और साथ में वह यह भी बता सकते हैं कि क्या जातक के पास बच्चों को संभालने की क्षमता है, क्या बच्चों के होने में कोई जटिलता हो सकती है और किसी बच्चे को गोद लेने के लिए क्या प्रक्रिया होती है। यह माता पिता का संकेत दे सकता है कि उनके बच्चे की सेहत कैसी होगी, व्यवहार कैसा होगा, बच्चा अपने जीवन में किस प्रकार आगे बढ़ेगा और बच्चों का अपने माता पिता से कैसे संबंध रहेगा। अब मैं इन सभी को धीरे धीरे करके बताने वाला हूं।

बाल ज्योतिष माता पिता कि कैसे सहायता करती है?/ How does Child astrology help parents?

जैसे की आपने ऊपर के उदाहरण में देखा होगा कि बाल ज्योतिष आपको उस समय से सहायता करता है जब आप माता पिता बनने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह प्रक्रिया जातकों को बच्चों के लिए सही समय का संकेत दे सकते हैं, और साथ में वह यह भी बता सकते हैं कि क्या जातक के पास बच्चों को संभालने की क्षमता है, क्या बच्चों के होने में कोई जटिलता हो सकती है और किसी बच्चे को गोद लेने के लिए क्या प्रक्रिया होती है। यह माता पिता का संकेत दे सकता है कि उनके बच्चे की सेहत कैसी होगी, व्यवहार कैसा होगा, बच्चा अपने जीवन में किस प्रकार आगे बढ़ेगा और बच्चों का अपने माता पिता से कैसे संबंध रहेगा। अब मैं इन सभी को धीरे धीरे करके बताने वाला हूं।

जन्म कुंडली में बच्चों के जन्म में देरी/ Delay in child birth in your birth chart

आपकी कुंडली/Horoscope में आपके बच्चों के बारे में साफ साफ इंगित होता है। यदि आपको अपने बच्चों के विषय में कोई भी सवाल करना है तो आप अपनी जन्म कुंडली किसी अच्छे और ज्ञानी ज्योतिषी/Learned Astrolger से दिखा सकते हैं। यदि आपको अपनी जन्म कुंडली में प्राकृतिक रूप से बच्चे का योग नहीं है तो आप दूसरे तरीकों से भी बच्चों को अपने जीवन में ला सकते हैं। उदाहरण के तौर पर देखें तो अरुण और सुषमा का पहला बच्चा गोद लिया था और दूसरे बच्चे के जन्म में जटिलताएं थी। दोनों की कुंडली में पांचवा भाव/Fifth House (पहले बच्चे का भाव) सुरक्षित था, लेकिन सातवां भाव/Second house (दूसरे बच्चे का भाव) बहुत कमजोर था। संतान गोद लेने के बाद दोनों का नौवां भाव/Ninth House (तीसरा बच्चे के लिए) सक्रिय हो गया, इसलिए वह दोबारा माता पिता बन पाए।

जब किसी भी व्यक्ति के जीवन में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाए तो यह जातक के लिए उपाय की तरह काम करता है। आप अपने बच्चों के लिए संभावनाओं को जरूर तलाशें। आप हमारी वेबसाइट पर मौजूद निःशुल्क कैलकुलेटर का प्रयोग करके बांझपन के बारे में जान सकते हैं। या फिर आप समाचार विभाग में बांझपन के लिए उपाय को पढ़ सकते हैं।

बच्चों के होने में देरी के दो कारण हो सकते हैं। पहला तो वैध और जैविक संतान प्राप्त करने में प्राकृतिक बाधाएं हैं। इस तरह की समस्याओं को ज्योतिष की सहायता से हल किया जा सकता है। ज्योतिष में दोनों माता पिता के की जन्म कुंडली/ Janam Kundli का आकलन करके बच्चों के योग और समय का पता किया जा सकता है। एक अच्छा ज्योतिषी आपको आपकी जन्म कुंडली/Kundali के आधार पर मां बनने का सही समय भी बता सकता है। एक ज्ञानी ज्योतिषी आपकी कुंडली में देखकर और भी बातों का पता लगा सकता है जैसे – सी-सेक्शन (सर्जरी के जरिए बच्चा) और आईवीएफ। यदि बच्चों के होने में देरी का कारण आप खुद हैं तो उस स्थिति में बच्चों को गोद लेना आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है।

यदि आपकी संतान नहीं हो पा रही है तो आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। मैं आपको आपकी जन्म कुंडली/ birth chart से इस विषय में सहायता कर सकता हूं। गर्भावस्था, सी सेक्शन / आईवीएफ और बच्चे को गोद लेने की योजना के लिए सर्वश्रेष्ठ समय के बारे में आपको जानकारी दे सकता हूं। बस आपको एक बात का ख्याल रखना होगा कि आपके पास जन्म की सही जानकारी हो। मैं आपको आपके होने वाली संतान के विषय में बहुत सारी जानकारी दे सकता हूं।

ज्योतिष के अनुसार गर्भधारण का उचित समय/ Best time for pregnancy according to astrology

यह एक ज्योतिषीय कला है। यदि अरुण और सुषमा ने ज्योतिष का सहारा लिया होता तो उनका पुत्र सही राह पर होता। मेरे पास इस विषय के संदर्भ में पूरे बीस साल का अनुभव है। मैं पिछले दो दशक से ऐसे दंपत्ति जोड़ों  की सहायता कर रहा हूं जो संतान सुख से वंचित रह गए थे। यदि आपके पास उपयुक्त जन्म समय है तो आप गर्भधारण के समय का पता हमारे पेज पर मौजूद निःशुल्क वैदिक कैलकुलेटर/Vedic Calculator का प्रयोग करके लगा सकते हैं। यदि आप भी भविष्य में संतान प्राप्ति चाहते हैं तो आप इस लेख को अंत तक पढकर भी इस विषय में बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ज्योतिष के अनुसार गर्भधारण का उचित समय/ Best time for pregnancy according to astrology

यह एक ज्योतिषीय कला है। यदि अरुण और सुषमा ने ज्योतिष का सहारा लिया होता तो उनका पुत्र सही राह पर होता। मेरे पास इस विषय के संदर्भ में पूरे बीस साल का अनुभव है। मैं पिछले दो दशक से ऐसे दंपत्ति जोड़ों  की सहायता कर रहा हूं जो संतान सुख से वंचित रह गए थे। यदि आपके पास उपयुक्त जन्म समय है तो आप गर्भधारण के समय का पता हमारे पेज पर मौजूद निःशुल्क वैदिक कैलकुलेटर/Vedic Calculator का प्रयोग करके लगा सकते हैं। यदि आप भी भविष्य में संतान प्राप्ति चाहते हैं तो आप इस लेख को अंत तक पढकर भी इस विषय में बहुत सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ज्योतिष के अनुसार सीजेरियन सेक्शन की तिथि/ C section dates according to astrology

हालांकि यह एक संवेदनशील मामला है, लेकिन फिर भी भगवान ने ज्योतिषियों को इस प्रक्रिया के समय की भविष्यवाणी के लिए छूट दी है। हम जन्म कुंडली/Birth Chart से सीजेरियन सेक्शन (C-section) के लिए उपयुक्त समय का पता लगा सकते हैं। सिजेरियन जन्म का अर्थ है कि व्यक्ति जन्म के समय का ज्ञात मेडिकल की सहायता से होता है। लेकिन ज्योतिष भी आपको इस प्रक्रिया के लिए उत्तम समय के चुनाव में सहायता करता है।  

चलिए आकाश की बात करते हैं जो अरुण और सुषमा का पुत्र था और सीजेरियन सेक्शन की प्रक्रिया से पैदा हुआ था। चिकित्सक ने उन्हें तिथि दी थी और समय चुनने का छूट दी थी। उनके पास सुबह के 11 बजे से 6 बजे तक का समय चुनने का अवसर था।

इस समय के दौरान, डी-1 का लग्न चार बार बदला और डी-9 का लग्न कम से कम पचास बार बदला। आकाश का जन्म सुबह 11:15 बजे हुआ था। यदि उसका जन्म दो घंटे देरी से होता तो आकाश की कुंडली पूर्ण रूप से बदल जाती। ऐसा होने की स्थिति में वह होशियार छात्र बनता। लेकिन अरुण और सुषमा ने कभी इस विषय में सोचा ही नहीं। यदि आप सीजेरियन सेक्शन के लिए उचित समय की तलाश में हैं तो आप ज्योतिष के अनुसार सीजेरियन सेक्शन की तिथि/ C Section dates according to astrology पर मेरा लेख पढ़ सकते हैं।

ज्योतिष के अनुसार आईविएफ गर्भाधारण/ IVF pregnancy according to astrology

मैंने बहुत सारे मामले देखें हैं जहां पर आईवीएफ कई बार सफल नहीं हो पाता है। इस स्थिति में सिर्फ धन और दंपत्ति की इच्छाएं खत्म हो जाती है। आईवीएफ की प्रक्रिया के लिए वही दंपत्ति जाते हैं जिन्हें बहुत प्रयास करने के लिए बाद भी जैविक रूप से संतान प्राप्ति नहीं हो पाती है। और यदि इस स्थिति में आईवीएफ भी विफल हो जाए तो उस दंपत्ति का आशा खत्म हो जाती है। हो सकता है कि वह लोग बाद में संतान के मिलने की आशा भी खो दें। लेकिन ज्योतिष आपको इस स्थिति में आने ही नहीं देगा। मेरी माने तो आपको आईवीएफ की प्रक्रिया के लिए जाने से पहले किसी अच्छे ज्योतिषी से बात ज़रूर करें। हो सकता है कि आपके मन में कोई नकारात्मक विचार हो जिसको ज्योतिषी एक या दो सत्र में ही खत्म कर सकते हैं। आप ज्योतिष के अनुसार आईवीएफ गर्भावस्था पर मेरे सबसे व्यापक लेख को पढ़ कर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ज्योतिष के अनुसार संतान को गोद लें/ Adopt Child according to astrology

धीरे धीरे लोग बच्चे को गोद लेने की मानसिकता बनते जा रहे हैं। कुछ लोग मजबूरी में बच्चों को गोद लेते हैं और कुछ लोग स्वयं अपनी मर्जी से बच्चे गोद लेते हैं। इसका अर्थ यह है कि वह प्राकृतिक रूप से बच्चे करने में सक्षम हैं लेकिन वह फिर भी संतान को गोद लेना चाहते हैं। इसके अनेक कारण हो सकते हैं जैसे – करियर, समय की कमी, शारीरिक सौंदर्य और बहुत कुछ। दोनों ही कारणों में अलग ज्योतिषीय संयोजन होते हैं।

ज्योतिष के अनुसार संतान को गोद लें/ Adopt Child according to astrology

धीरे धीरे लोग बच्चे को गोद लेने की मानसिकता बनते जा रहे हैं। कुछ लोग मजबूरी में बच्चों को गोद लेते हैं और कुछ लोग स्वयं अपनी मर्जी से बच्चे गोद लेते हैं। इसका अर्थ यह है कि वह प्राकृतिक रूप से बच्चे करने में सक्षम हैं लेकिन वह फिर भी संतान को गोद लेना चाहते हैं। इसके अनेक कारण हो सकते हैं जैसे – करियर, समय की कमी, शारीरिक सौंदर्य और बहुत कुछ। दोनों ही कारणों में अलग ज्योतिषीय संयोजन होते हैं।

अरुण और सुषमा ने संतान गोद ली और वह उसके साथ सुखी सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जन्म कुंडली में गोद लिए संतान या दत्तक पुत्र का संकेत साफ तौर पर दिया जाता है। संतान को गोद लेने के कारण अलग अलग होते हैं और उसी प्रकार इनके अलग अलक नफा और नुकसान होते हैं। आप हमारी वेबसाइट से ज्योतिष के अनुसार बच्चे को गोद लेने/ adopt child according to astrology के बारे में सारी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ज्योतिष के अनुसार बच्चो में मादक पदार्थ की लत/Child with drug abuse according to astrology

अरुण और सुषमा मेरे पास तब आए थे, जब उनका पुत्र आकाश माकद पदार्थ का आदी हो गया था। मैंने उन्हें सलाह दी कि वह उसे तुरंत किसी नशा सुधारक केंद्र में ले जाए क्योंकि उसकी दशा उसके खिलाफ थी। वह नशे की लत के साथ एक बच्चा था, जिसे केंद्र में रखना मजबूरी बन गई थी। वह अभी भी वहीं पर है, जो 2022 में रिहा होगा। इस समय के बाद उस बच्चे की कुंडली में सकारात्मक ग्रह दशा वापस आ जाएगी।

मैंने अरुण को सलाह दी थी कि आकाश को मादक पदार्थ से जूझ रहे बच्चों को ठीक करने में लगा दे। जिसके कारण वह आज सफलता के शिखर पर है। आप ज्योतिष के अनुसार बच्चों का नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर मेरा व्यापक लेख पढ़ सकते हैं यदि आप, एक माता-पिता के रूप में, आपके बच्चे नशीली दवाओं की आदतों के साथ उत्पीड़ित हैं, तो यह लेख आपको बहुत सहायता दे सकता है।

ज्योतिष के अनुसार माता पिता और बच्चों में संबंध/ Parent-child relationship according to astrology

यब बाल ज्योतिष का आखिरी विषय है। माता पिता संतान प्राप्ति के लिए ना जाने कितने प्रयत्न करते हैं। लेकिन साथ साथ उन्हें यह भी चिंता होती है कि उनका उनके बच्चे के साथ कैसा संबंध होगा। यह आखिरी विषय है और इस विषय से कोई भी माता पिता ज्योतिष की सहायता से अपने और अपने संतान के बीच कैसा संबंध रहेगा। ज्योतिष में इस बात का पता लगाने के लिए कुछ रास्ते हैं। इन सभी तरीकों में जन्म तिथि की अहम भूमिका होती है। यदि जैविक बच्चे होने में समस्या आ रही है तो ज्योतिष से अन्य प्रक्रिया जैसे आईवीएफ और सीजेरियन सेक्शन जैसी प्रक्रिया के लिए भी जा सकते हैं।

ज्योतिष के अनुसार माता पिता और बच्चों में संबंध/ Parent-child relationship according to astrology

यब बाल ज्योतिष का आखिरी विषय है। माता पिता संतान प्राप्ति के लिए ना जाने कितने प्रयत्न करते हैं। लेकिन साथ साथ उन्हें यह भी चिंता होती है कि उनका उनके बच्चे के साथ कैसा संबंध होगा। यह आखिरी विषय है और इस विषय से कोई भी माता पिता ज्योतिष की सहायता से अपने और अपने संतान के बीच कैसा संबंध रहेगा। ज्योतिष में इस बात का पता लगाने के लिए कुछ रास्ते हैं। इन सभी तरीकों में जन्म तिथि की अहम भूमिका होती है। यदि जैविक बच्चे होने में समस्या आ रही है तो ज्योतिष से अन्य प्रक्रिया जैसे आईवीएफ और सीजेरियन सेक्शन जैसी प्रक्रिया के लिए भी जा सकते हैं।

यदि कुछ भी आपके पत्र में नहीं जा रहा है तो ज्योतिष के अनुसार वह व्यक्ति संतान गोद/ adopt a child according to astrology ले सकता है।

बच्चे और माता-पिता के बीच का रिश्ता बहुत लंबा होता है। इसलिए, यह समझना कि माता-पिता का बच्चे के साथ किस प्रकार का संबंध होगा, यह दोनों में से किसी का जीवन बदल सकता है। यहां फिर से आपको ज्योतिष की शक्ति का अंदाजा मिल जाएगा। माता-पिता और बच्चे के संबंध का मामला बच्चों के जन्म के साथ साथ उनके बड़े हो जाने के बाद भी जातक को मदद करता है। यदि आप यहां तक पढ़ चुके हैं तो आप समझ गए होंगे कि ज्योतिष आपकी मदद कैसे करता है। यदि आपको इस विषय में और जानकारी चाहिए तो आप ज्योतिष के अनुसार बच्चे और माता-पिता के संबंध पर मेरा विस्तृत वर्णन पढ़ सकते हैं। इससे माता-पिता को बच्चे के साथ रिश्ते के मामले में सहायता मिलेगी।

इसलिए, यदि आपकी संतान होने में देरी हो रही है तो बाल ज्योतिष/ astrology for child उन कारणों को इंगित करता है जिसके कारण किसी महिला को गर्भधारण करने में समस्या होती है। बाल ज्योतिष/ Child Astrology आईवीएफ और सीजेरियन सेक्शन जैसे प्रक्रिया के समय का भी पता लगा सकता है और साथ साथ यह भी बता सकता है कि क्या आप संतान को गोद ले सकते हैं या नहीं। ज्योतिष एक और तरीके से इस विषय में आपको सहायता दे सकता है। वह है संतान और माता पिता के संबंध के बारे में बता सकता है। मैंने इस लेख के जरिए इन सभी के बारे में विस्तार से बताने का प्रयास किया है। मेरे ख्याल से कोई भी इसे सरल तरीके से इस विषय को समझा सकता है। मैं फिर से बता रहा हूं कि बाल ज्योतिष और बच्चों की कुंडली/Natal Chart अलग अलग है। कृपा करके दोनों को अलग अलग रखें।

इस विषय में विशिष्ट मार्गदर्शन के लिए आप नीचे दिए गए तरीकों से मुझसे संपर्क कर सकते हैं।

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