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मुख्य रूप से कालसर्प दोष/Kal Sarp dosha सर्प से संबंधित होता है और कुंडली/natal chart में यह दोष समय के साथ और बार बार होने के कारण राशिफल में अन्य सभी सकारात्मकताओं के अच्छे परिणामों को प्रभावित कर सकता है। 

कालसर्प दोष क्या है? कालसर्प दोष किस कारण होता है?/ What is Kaal Sarp Dosh? What forms Kaal Sarp Dosh?

वैदिक ज्योतिष/vedic astrology के अनुसार, चंद्रमा के दो मुख्य विषय- केतु और राहु को पूर्ण ग्रह माना जाता है। उनके कार्मिक प्रभावों के कारण ये सबसे खराब ग्रह माने जाते हैं। सभी सातों ग्रहों के केतु और राहु के मध्य स्थित होने पर कालसर्प योग/Kal Sarp Yoga बनता है। ज्यादातर मामलों में कालसर्प दोष का हानिकारक प्रभाव होता है, जबकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार इसके कुछ सकारात्मक प्रभाव भी हो सकते हैं। केतु और राहु अचानक ही सकारात्मक रूप से एक ही रात या कुछ ही दिनों के अंदर प्रभावशाली परिणाम दे सकते हैं।

कुंडली में कालसर्प दोष के संकेत/ Indications of Kaal Sarp Dosh in Kundli

कालसर्प दोष वाले व्यक्ति अपने जीवन में निम्नलिखित बातों से कालसर्प दोष के लक्षणों को महसूस कर सकते हैं-

सपने में सर्प देखना

व्यक्ति को कोशिशों के अनुसार परिणाम प्राप्त नहीं होता

हर समय मानसिक दबाव और तनाव 

व्यक्ति का किसी विशेष कार्य में बार-बार असफल होना 

ध्यान केंद्रित रखने और सही निर्णय लेने में असमर्थ होना

हमेशा घरेलू और पारिवारिक जीवन में अशांति

जीवन में छिपे हुए शत्रुओं द्वारा विघ्न और हानि

अत:, जब किसी भी व्यक्ति को अपने सामान्य जीवन में ऊपर बताए गए इन लक्षणों या समानता का अनुभव होता है तो उस व्यक्ति को अपनी कुंडली/ natal chart में कालसर्प दोष के बारे में जानने के लिए कालसर्प दोष गणना यंत्र का प्रयोग करना चाहिए। 

कालसर्प दोष के प्रकार/ Types of Kaal Sarp Dosh

कुल मिलाकर कालसर्प योग बारह प्रकार के होते हैं। यह है - अनंत कालसर्प दोष/Anant kal Sarp Dosha, कुलिक या वासुकी कालसर्प दोष/Kulik or vasuki kaal sarp dosha, महापद्म या शंखपाल कालसर्प दोष/Shankhpal kalsarp dosha, पद्म या तक्षक कालसर्प योग, शंखचूड़ या कर्कोटक कालसर्प योग, घातक, शेषनाग या विषधर कालसर्प योग। 

कालसर्प दोष के प्रभाव/ Effects of Kaal Sarp Dosh

कालसर्प योग किसी भी प्रकार का हो, वह व्यक्ति के जीवन में दुर्भाग्य और दु:ख ला सकता है जिसके मुख्य संकेत ऊपर बताए गए हैं। हालांकि, यह जीवन के सभी मामलों जैसे- विवाह, प्रेम, व्यवसाय, करियर, धन, स्वास्थ्य, बच्चे और अन्य जीवन से संबंधित घटनाओं में बाधाएं पैदा कर सकते हैं। लेकिन अंत में, आप अपने जीवन की सभी प्रतिकूलताओं से बाहर आ सकते हैं। किसी की भी कुंडली/natal chart में छाया ग्रह- केतु और राहु की उचित स्थिति का पता लगाकर कालसर्प दोष के प्रभाव को जाना जा सकता है। 

उदाहरण के लिए- यदि प्रथम भाव/first house में राहु और सप्तम भाव/seventh house में केतु स्थित हो तो यह स्वयं के लिए बाधा उत्पन्न कर सकता है और आपको धन का संग्रह करा सकता है। यदि दूसरे और आठवें भाव/second and eighth house में समान संयोजन होता है, तो आप धन, पारिवारिक संबंधों और अन्य द्वितीय भाव में से बाधित अन्य चीजों से ग्रसित हो सकते हैं। अतः, इस योग को किसी राशिफल में छाया ग्रहों की स्थिति के द्वारा बारह भावों के अनुसार अच्छी तरह समझा जा सकता है। 

कालसर्प दोष के उपाय/ Kaal Sarp Dosh Remedies

कालसर्प दोष से संबंधित सर्प भगवान शिव का अति प्रिय होने के कारण, कालसर्प दोष का सबसे अच्छा उपाय नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करना होता है। कालसर्प दोष/Kal Sarp dosha से ग्रसित व्यक्ति को सुबह के समय, नाग पंचमी और महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को दूध और शहद के साथ नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करना चाहिए। यह जानना भी जरूरी है कि यह अनुष्ठान एक बार का नहीं होता बल्कि जीवन भर उसको करना चाहिए। जैसा कि पहले ही बताया गया है कि कालसर्प दोष के बार-बार होने के कारण इसे कालसर्प रक्षक पूजा भी कहा जाता है। 

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